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संबंध पर उद्धरण

स्त्री और पुरुष में मैं वही प्रेम चाहता हूँ, जो दो स्वाधीन व्यक्तियों में होता है। वह प्रेम नहीं, जिसका आधार पराधीनता है।

प्रेमचंद

मैं जीवन के बाद के जीवन की कल्पना नहीं कर पाता : जैसे ईसाई या अन्य धर्मों के लोग विश्वास रखते हैं और मानते हैं जैसे कि सगे-संबंधियों और दोस्तों के साथ हुई बातचीत जिसे मौत आकर बाधित कर देती है, और जो आगे भी जारी रहती है।

एडवर्ड मुंक

यदि कठोर शब्दों या अपशब्दों का प्रयोग करने के बावजूद भी; नायिका नायक से प्रेम संबंध जोड़ना चाहती है, तो उसे पुनः वश में करने का प्रयत्न करना चाहिए।

वात्स्यायन

जहाँ तक सामाजिक प्राणी का संबंध है; स्त्री उतनी ही अधिक अधिकार-संपन्न है, जितना पुरुष—चाहे वह अपने अधिकारों का उपयोग करे या करे।

महादेवी वर्मा

प्रत्येक व्यक्ति को स्वतंत्रता और बंधन दोनों चाहिए; स्वार्थ तथा परार्थ दोनों की आवश्यकता है, अन्यथा वह जीवन-मुक्त होकर भी किसी को कुछ नहीं दे पाता।

महादेवी वर्मा

पुरुष समाज का न्याय है, स्त्री दया, पुरुष प्रतिशोधमय क्रोध है, स्त्री क्षमा, पुरुष शुष्क कर्तव्य है, स्त्री सरस सहानुभूति और पुरुष बल है, स्त्री हृदय की प्रेरणा।

महादेवी वर्मा

मैं ख़ुद इस बात का घोर समर्थक हूँ कि विवाह के बाद सभी हितों का मिलन ही एक आदर्श स्थिति है, लेकिन हितों के मिलन का अर्थ यह नहीं हुआ कि जो मेरा है, वह तुम्हारा है; पर जो तुम्हारा है, वह सिर्फ़ तुम्हारा है।

जॉन स्टुअर्ट मिल

समाज की दो आधार शिलाएँ हैं—अर्थ का विभाजन और स्त्री-पुरुष का संबंध। इनमें से यदि एक की भी स्थिति में विषमता उत्पत्र होने लगती है, तो समाज का संपूर्ण प्रासाद हिले बिना नहीं रह सकता।

महादेवी वर्मा

छाया का कार्य आधार में अपने आपको इस प्रकार मिला देना है, जिसमें वह उसी के समान जान पड़े और संगिनी का अपने सहयोगी की प्रत्येक त्रुटि को पूर्ण कर, उसके जीवन को अधिक से अधिक पूर्ण बनाना।

महादेवी वर्मा

सभी विफल व्यक्ति—विक्षिप्त व्यक्ति, मनोरोगी, अपराधी, शराबी, समस्याग्रस्त बच्चे, आत्महत्या करने वाले, विकृत और वेश्याएँ—इसलिए विफल हैं, क्योंकि उनमें सामाजिक संबंध की कमी है।

अल्फ़्रेड एडलर

अपने पूर्ण से पूर्ण गौरव से गौरवांवित स्त्री भी इतनी पूर्ण होगी कि पुरुषोचित स्वभाव को भी अपनी प्रकृति में समाहित कर ले, अतएव मानव-समाज में साम्य रखने के लिए, उसके अपनी प्रकृति से भिन्न स्वभाव वाले का सहयोग श्रेय रहेगा—इस दशा में प्रतिद्वंद्विता संभव नहीं।

महादेवी वर्मा

यह सब संसार असार क्षणिक है। पक्षी आँगन में दाना चुगने के लिए आते हैं और चुग कर उड़ जाते हैं।लड़कियाँ घरौंदे बनाती हैं, गुड्डों-गुड़ियों के विवाह करती हैं और फिर सब खिलौनों को तोड़ डालती हैं। यात्री आकर किसी वृक्ष के नीचे रात को विश्राम लेते हैं और प्रातःकाल होते ही उठकर चले जाते हैं। मार्ग में बहुत से लोगों से भेंट होती है परंतु इन लोगों से कोई मोह या संबंध नहीं जोड़ता। इसी प्रकार जब तक इस संसार में प्रारब्धानुसार जीवित रहता है तब तक उदासीन अलिप्त रहना चाहिए।

संत एकनाथ

हमारे समाज में अपने स्वार्थ के कारण, पुरुष मनुष्यता का कलंक हैं और स्त्री अपनी अज्ञानमय निस्पंद सहिष्णुता के कारण पाषाण-सी उपेक्षणीय। दोनों के मनुष्यत्व-युक्त मनुष्य हो जाने से ही जीवन की कला विकास पा सकेगी, जिसका ध्येय मनुष्य की सहानुभूति, सक्रियता, स्नेह आदि गुणों को अधिक-से-अधिक व्यापक बना देना है।

महादेवी वर्मा

चुम्बन की बाज़ी में नायक के विश्वास के साथ असावधान हो जाने पर, मौक़ा पाकर नायिका नायक के अधर को पकड़कर, अपने दाँतों के अंदर दबोच कर अपनी जीत पर हँसे, ज़ोर से चिल्लाए, धमकाए, ताना मारे, व्यंग्य कसे और नाचने लगे तथा भौहों को नचाती, चंचल नेत्रों से हँसती हुई, मुख से बार-बार, तरह-तरह के व्यंग्य वचन बोले। इस प्रकार के प्रणय-कलह से कामेच्छा जागृत होती है और अनुराग में वृद्धि होती है।

वात्स्यायन

पुरुष और स्त्री का संबंध केवल आध्यात्मिक होकर व्यावहारिक भी है, इस प्रत्यक्ष सत्य को समाज जाने कैसे अनदेखा करता रहा है।

महादेवी वर्मा

रिश्ता आत्म-रहस्योद्घाटन की एक प्रक्रिया है।

ब्रूस ली

मैंने कितनी ही बार सोचा है कि क्या व्यक्तियों से संबंध बनाना संभव है, जब किसी के मन में किसी के लिए भी कोई भावना रही हो; अपने माता पिता के लिए भी नहीं। अगर किसी को कभी भी गहराई से प्यार नहीं किया गया, तो क्या उसके लिए सामूहिकता में रहना संभव है? क्या इन सबका मेरे जैसे युद्धप्रिय के ऊपर कोई प्रभाव नहीं रहा? क्या इस सबसे मैं और बंध्य नहीं हुआ? क्या इन सबसे एक क्रांतिकारी के रूप में मेरी गुणवत्ता कम नहीं हुई? मैं जिसने हर चीज़ को बौद्धिकता और शुद्ध गणित के पैमाने पर रख दिया।

अंतोनियो ग्राम्शी

स्मरण का संबंध अंधकार से अधिक है।

रघुवीर चौधरी

जब हम रिश्तों में दर्द का सामना करते हैं तो हमारी पहली प्रतिक्रिया अक्सर प्रतिबद्धता बनाए रखने के बजाय बंधनों को तोड़ देने की होती है।

बेल हुक्स

अच्छी तरह से प्यार करना केवल रोमांटिक रिश्ते में ही नहीं, सभी सार्थक रिश्तों में ज़रूरी है।

बेल हुक्स

प्रॉपगैंडा आमतौर पर अभिजात्य हितों से बहुत नज़दीक से जुड़े रहते हैं। 1919-20 के ‘लाल डर’ ने दुनिया भर में पहले विश्वयुद्ध के बाद सेल और दूसरे कारख़ानों में चल रहे संघ-निर्माणों को रोकने का काम बहुत अच्छे तरीक़े से किया। इसी तरह ट्रूमन-मैककार्थी के पैदा किए गए ‘लाल डर’ (वामपंथ को अतिवादी बताते हुए लोगों को चेतावनी देना) ने शीतयुद्ध का उद्घाटन करने और युद्ध से जुड़ी एक स्थायी अर्थ-व्यवस्था को खड़ा करने में भारी मदद की… उन्होंने सोवियत संघ से असहमत होने वालों की हालत पर लगातार अपना ध्यान बनाए रखा। यही उन्होंने कम्बोडिया में हो रही दुश्मनों की हत्या और बुल्गारिया से संबंधों के संदर्भ में किया। इससे वियतनाम सिंड्रोम तोड़ने में मदद मिली, सुरक्षा के नाम पर हथियारों की जमाख़ोरी को सही ठहराया जा सका और एक आक्रामक विदेश नीति लागू की जा सकी। और यह सब करके उच्च वर्ग में हो रहे आय के पुनर्वितरण से सबका ध्यान बँटाया जा सका—रीगन की घरेलू आर्थिक नीति की जड़ में यही था।

नोम चोम्स्की

स्त्री की कोमलतामई सदाशयता और सहानुभूति, समाज के संतप्त जीवन के लिए शीतल अनुलेप का कार्य करती है—इसमें संदेह नहीं।

महादेवी वर्मा

मनुष्य यदि मनुष्य को सहयोग देना स्वीकार करता, तो मानवता की ऐसी अद्भुत कहानी लिखी जाती और मनुष्य अपनी आदिम अवस्था से आगे बढ़ सकता।

महादेवी वर्मा

मनुष्य जाति की चित्तवृत्तियाँ अनित्य होती हैं, एक बार टूटने पर भी फिर संबंध जुड़ सकता है।

वात्स्यायन

जिसके साथ हमारा सामान्य परिचय मात्र होता है, वह हमारे पास भले बैठा रहे; किंतु उसके और हमारे बीच समुद्र जैसा व्यवधान बना रहता है, वह होता है अचैतन्य का समुद्र, उदासीनता का समुद्र।

रवींद्रनाथ टैगोर

जिस संबंध से पति-पत्नी दोनों को समान सुख की अनुभूति हो; परस्पर खेल, हँसी-विनोद करे, एक-दूसरे को बराबर समझें—वह संबंध विवाह करने योग्य होता है।

वात्स्यायन

जिस प्रकार युक्ति से काटे हुए; काष्ठ के छोटे-बड़े विभिन्न आकार वाले खँड़ों को जोड़कर हम अखंड चतुष्कोण या वृत्त बना सकते हैं, परंतु उनकी विभिन्नता नष्ट करके तथा सबको समान आकृति देकर हम उन्हें किसी पूर्ण वस्तु का आकार नहीं दे सकते, उसी प्रकार स्त्री-पुरुष के प्राकृतिक-मानसिक वैपरीत्य द्वारा ही हमारा समाज सामंजस्यपूर्ण और अखंड हो सकता है, उनके बिंब प्रतिबिंब भाव से नहीं।

महादेवी वर्मा

प्रेम किसी व्यक्ति के साथ संबंधों का नाम नहीं है; यह एक ‘दृष्टिकोण’ है, एक ‘चारित्रिक रुझान’ है—जो व्यक्ति और दुनिया के संबंधों को अभिव्यक्त करता है; कि प्रेम के सिर्फ़ एक ‘लक्ष्य’ के साथ उसके संबंधों को।

एरिक फ़्रॉम

मेरा अपनी हस्तलिपि से इकतरफ़ा संबंध है। यह संबंध मुझे अपनी लिपि को दूसरों के बराबर रखने से रोकता है और मुझे उसकी दूसरों की लिपि से तुलना भी नहीं करने देता।

लुडविग विट्गेन्स्टाइन

स्त्री और पुरुष यदि अपने सुखों के लिए एक-दूसरे पर समान रूप से निर्भर रहते, तो उनके संबंध में विषमता आने की संभावना ही रहती, परंतु वास्तविकता यह है कि भारतीय स्त्री की सापेक्षता सीमातीत हो गई।

महादेवी वर्मा

मनुष्य उसी के प्रति सबसे ज़्यादा श्रद्धालु और कृतज्ञ महसूस करता है, जो उस पर ज़िंदगी-मौत का अधिकार रखता हो, पर अपने इस अधिकार का इस्तेमाल करता हो।

जॉन स्टुअर्ट मिल

देखते हुए हम सिर्फ़ किसी एक चीज़ को नहीं देखते; बल्कि हम चीज़ों के पारस्परिक और उस संबंध को भी देखते हैं, जो उन चीज़ों का हमारे साथ है।

जॉन बर्जर

जब आप किसी अच्छे व्यक्ति से संबंध बनाना चाहते हों, तो यह सुनिश्चित करें कि आपके विचार, शब्द, कर्म और परिवेश—आपकी इच्छाओं का विरोध नहीं कर रहे हों।

रॉन्डा बर्न

जाति का धर्म से कोई संबंध नहीं है।

महात्मा गांधी

कुछ स्त्रियाँ कई बार प्रेमी से मिलने के बाद भी उसका तिरस्कार कर देती हैं, उससे मिलना छोड़ देती हैं, संभोग नहीं करतीं और इनकार करती हैं, ऐसा करने से ही अपना गौरव समझती है। उससे अधिक परिचय बढ़ाकर उसे सिद्ध करें अथवा उसके मर्म को समझने वाली चतुर दूती द्वारा सिद्ध करे।

वात्स्यायन

जिन लोगों के शब्दों की आप सराहना करते हैं और प्यार करते हैं; उन्हें आप निगल नहीं सकते, बिना प्रश्नचिह्न लगाए उन्हें ग्रहण नहीं कर सकते।

पॉलो फ़्रेरा

जिस स्त्री का चरित्र पहली बार खंडित हुआ हो और जिससे बातचीत करने में कोई रुकावट हो, उसे प्राप्त करने में स्वयं प्रयत्न करना चाहिए, किंतु जिसका चरित्र पहले ही खंडित हो चुका हो, उसे दूती के माध्यम से सिद्ध करना चाहिए।

वात्स्यायन

मनुष्य जिस तरह से जगत् के संबंध में भयानक स्वार्थपरक मीमांसा करता है, उसे ग्रहण करना एक भीषण भूल होगी।

स्वामी विवेकानन्द

किसी संबंध को सफल बनाने के लिए सामने वाले के अवगुणों पर नहीं, गुणों पर ध्यान केंद्रित करें। जब आप शक्तियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो आपको वे ज़्यादा मिलेंगी।

रॉन्डा बर्न

आज तो अगर कोई इस युग का 'कन्हैया' किसी लावण्यमयी राधे से यही कह दे 'खेलन चलहु संग मिलि जोरी' तो यक़ीन मानिए, कन्हैयाजी का लंबे अरसे तक 'हेयर कटिंग' का ख़र्च बच जाए।

हरिशंकर परसाई

स्त्री और पुरुष के बीच सभी बाहरी मामलों में पूरी साझेदारी और एकात्मकता होने के बाद भी, ऐसा मुमकिन है कि भीतर से वे एक-दूसरे को बहुत कम जानते हों।

जॉन स्टुअर्ट मिल

अंधकार का आलोक से, असत् का सत् से जड़ का चेतन से और बाह्य जगत का अंतर्जगत से संबंध कौन कराती है? कविता ही न।

जयशंकर प्रसाद

काल का किसी के साथ बंधुत्व, मित्रता अथवा जाति-बिरादरी का संबंध नहीं है। उसे वश में करने का कोई उपाय नहीं है और उस पर किसी का पराक्रम नहीं चल सकता। कारणस्वरूप काल जीव के भी वश में नहीं है।

वाल्मीकि

सवर्णा, अनन्यपूर्वा कन्या से शास्त्र-विधि के अनुसार विवाह करने पर धर्म, अर्थ, संबंध (प्रीति), वंश की वृद्धि और अकृत्रिम (स्वाभाविक) रति की प्राप्ति होती है।

वात्स्यायन

फ़ोटोग्राफ़ के साथ फ़ोटो खींचने वाले का संबंध पूरा-पूरा नहीं होता है—पहाड़ देखा, कैमरा खोला, फ़ोटो खिंच गया; किंतु फ़ोटोग्राफ़र के हृदय के साथ पहाड़ का कोई संबंध ही नहीं बना।

अवनींद्रनाथ ठाकुर

क्रोध-भाव की चेतना के भीतर ही, विशेष मानव-संबंध अपने सामान्य तथा विशिष्ट रूप में देखे जा सकते हैं।

गजानन माधव मुक्तिबोध

जब ज्ञान से आलोकित तथा कर्म के द्वारा नियंत्रित और भीमशक्ति प्राप्त प्रबल स्वभाव परमात्मा के प्रति प्रेम एवं आराधना-भाव में उन्नत होता है, तब वही भक्ति टिक पाती है तथा आत्मा को परमात्मा से सतत संबद्ध बनाए रखती है।

श्री अरविंद

काव्य की उक्ति का लक्ष्य किसी वस्तु या विषय का कोई भाव या रागात्मक स्थिति उत्पन्न करना होता है। बोध कराना नहीं, बल्कि उस वस्तु या विषय के संबंध में कोई भाव या रागात्मक स्थिति उत्पन्न करना होता है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

व्यंग्य और क्रोध में आग और तेल का संबंध है।

प्रेमचंद

जिनका धन समान है, जिनकी विद्या एक सी है, उन्हीं में विवाह और मंत्री का संबंध हो सकता है। धनवान और निर्धन में कभी मित्रता नहीं हो सकती।

वेदव्यास