कविता पर उद्धरण

भाषा के पर्यावरण में कविता की मौजूदगी का तर्क जीवन-सापेक्ष है : उसके प्रेमी और प्रशंसक हमेशा रहेंगे—बहुत ज़्यादा नहीं, लेकिन बहुत समर्पित!

कुँवर नारायण

कविता का एक मतलब यह भी है कि आप आज तक और अब तक कितना आदमी हो सके।

धूमिल

कविता आदमी को मार देती है। और जिसमें आदमी बच गया है, वह अच्छा कवि नहीं है।

धूमिल
  • संबंधित विषय : कवि

अगर कविता होती तो राम और कृष्ण भी यथार्थ होते।

अशोक वाजपेयी

कविता की असली शर्त आदमी होना है।

धूमिल

कविता परम सत्य और चरम असत्य के बीच गोधूलि की तरह विचरती है।

अशोक वाजपेयी

अपनी एक मूर्ति बनाता हूँ और ढहाता हूँ और आप कहते है कि कविता की है।

रघुवीर सहाय

कवि को लिखने के लिए कोरी स्लेट कभी नहीं मिलती है। जो स्लेट उसे मिलती है, उस पर पहले से बहुत कुछ लिखा होता है। वह सिर्फ़ बीच की ख़ाली जगह को भरता है। इस भरने की प्रक्रिया में ही रचना की संभावना छिपी हुई है।

केदारनाथ सिंह

कविता क्रांति ले आएगी, ऐसी ख़ुशफ़हमी मैंने कभी नहीं पाली, क्योंकि क्रांति एक संगठित प्रयास का परिणाम होती है, जो कविता के दायरे के बाहर की चीज़ है।

केदारनाथ सिंह

कविता भाषा का शिल्पित रूप है, कच्चा रूप नहीं।

अशोक वाजपेयी

कितना अच्छा होता कि जिस संख्या में कवियों के संग्रह छपे बताए जाते हैं, लगभग उतनी ही संख्या में उन्होंने कविताएँ भी लिखी होतीं।

सिद्धेश्वर सिंह

कविता और प्रेम—दो ऐसी चीज़ें हैं, जहाँ मनुष्य होने का मुझे बोध होता है।

गोरख पांडेय

कविता आत्म और पर के द्वैत को ध्वस्त करती है।

अशोक वाजपेयी

मैं ऐसा नहीं मानता कि विश्व-बाज़ार कविता को निगल जाएगा और कविता हमेशा के लिए अपना प्रभाव खो देगी।

केदारनाथ सिंह

कविता के क्षेत्र में केवल एक आर्य-सत्य है : दुःख है। शेष तीन राजनीति के भीतर आते हैं।

विजय देव नारायण साही

कविता सरलीकरण और सामान्यीकरण के विरुद्ध अथक सत्याग्रह है।

अशोक वाजपेयी

मनुष्य मात्र को इतिहास और राजनीति नहीं एक कविता चाहिए।

श्रीनरेश मेहता

कविता का काम संसार के बिना नहीं चलता। वह उसका सत्यापन भी करती है और गुणगान भी।

अशोक वाजपेयी

कविता व्यक्ति को दूसरा बनाए जाने के क्रूर अमानवीय उपक्रम के विरुद्ध सविनय अवज्ञा है।

अशोक वाजपेयी

विश्व-बाज़ार विश्व-समाज की नई गतिविधि है और उसमें बहुत कुछ ऐसा हो सकता है जिससे नए ढंग की कविता जन्म ले।

केदारनाथ सिंह

कविता की कोई नैतिकता नहीं होती।

धूमिल

काव्य-रचना का एक अर्थ मनुष्य की कल्पनाशील चेतना का उद्दीपन है।

कुँवर नारायण

कविता में कभी अच्छा मनुष्य दिख जाता है या कभी अच्छे मनुष्य में कविता दिख जाती है। कभी-कभी एक के भीतर दोनों ही दिख जाते हैं।

मंगलेश डबराल

कविता भाषा का भाषा में स्वराज है।

अशोक वाजपेयी

सूरज नहीं चाँद तारे संगीत चित्र भी नहीं कविता से भी सुंदर लगता है मनुष्य।

नवीन सागर

कवि को कविता के बाहर और भीतर दोनों जगह एक साथ रहने का जोखिम उठाना होता है।

मंगलेश डबराल
  • संबंधित विषय : कवि

कविता एकांत देती है।

अशोक वाजपेयी

जिस किताब में अच्छी कविता होती है, उसके पास दीमकें नहीं फटकतीं।

सिद्धेश्वर सिंह

मुझे अपनी कविताओं से भय होता है, जैसे मुझे घर जाते हुए भय होता है।

मंगलेश डबराल
  • संबंधित विषय : डर

अच्छा कवि बहुत ज़िद्दी होता है और कविता लिखते समय अपने विवेक और शक्ति के अलावा किसी और को नहीं मानता।

विष्णु खरे
  • संबंधित विषय : कवि

जिस प्रकार अनेक रंगों में हँसती हुई फूलों की वाटिका को देखकर दृष्टि सहसा आनंद-चकित रह जाती है, उसी प्रकार जब काव्य-चेतना का सौंदर्य हृदय में प्रस्फुटित होने लगता है, तो मन उल्लास से भर जाता है।

सुमित्रानंदन पंत

मेरी कविता की इच्छा और मेरी कविता की शब्दावली, मेरी अपनी इच्छा और मेरी अपनी शब्दावली है।

राजकमल चौधरी

कविता के रंग चित्रकला के प्रकृति-रंग नहीं होते।

राजकमल चौधरी

कविता में ‘मैं’ की व्याख्या केवल आत्मकेंद्रण या व्यक्तिवाद के अर्थ में करना

उसके बृहतर आशयों और संभावनाओं दोनों को संकुचित करना है।

कुँवर नारायण

विचार कविता का एक अंश है।

वेणु गोपाल

मैं कविता से ही सब कुछ क्यों चाहता हूँ, ख़ुद से क्यों नहीं?

मलयज
  • संबंधित विषय : कवि

कविता तो एक जीवन को तोड़कर सकल जीवन बनाती है। और जीवन टूटता है, वह कवि का है।

त्रिलोचन
  • संबंधित विषय : कवि

कविता को राजनीति में नहीं घुसना चाहिए। क्योंकि इससे कविता का तो कुछ नहीं बिगड़ेगा, राजनीति के अनिष्ट की संभावना है।

विजय देव नारायण साही

कविता समाज नहीं, व्यक्ति लिखता है, फिर भी कविता एक सामाजिक कर्म है।

अशोक वाजपेयी

विचार, अनुभूति और संवेदना—सबका संबंध शब्द से होता है और कविता शब्द है। शब्द—जो कवि के लिए सबसे रहस्यमय वस्तु है।

केदारनाथ सिंह

कविता लिखना कोई बड़ा काम नहीं, मगर बटन लगाना भी बड़ा काम नहीं। हाँ, उसके बिना पैंट-क़मीज़ बेकार होते हैं।

गोरख पांडेय

कविता अगर बनती जाएगी तो कवि नष्ट होता जाएगा।

त्रिलोचन
  • संबंधित विषय : कवि

कविता राग है। राग माया है। माया और अध्यात्म में वैर है। अतः आध्यात्मिक कविता असंभव है।

विजय देव नारायण साही

कविता केवल उसी दिन निरस्त हो सकती है, जिस दिन किसी विस्फोटक से मानव-मन से भाषा को उड़ा दिया जाएगा।

केदारनाथ सिंह

कविता के लिए मनुष्य की पक्षधरता के अतिरिक्त मैं किसी अन्य पक्षधरता को आवश्यक नहीं मानता।

केदारनाथ सिंह

कविता अपने सच पर ईमानदार शक करती है।

अशोक वाजपेयी

कविता अपने समय के संकटों को पूरी सचाई से कभी व्यक्त नहीं कर पाती, इसलिए उसमें हमेशा ही संकट बना रहता है।

मंगलेश डबराल

श्रेष्ठ कविता रिवाज़ी क़िस्म की समीक्षा को बिल्कुल सह नहीं पाती है, उसे तत्काल ख़ारिज कर देती है!

कुँवर नारायण

जो लोग कविता से निरी कलात्मकता की अपेक्षा करते हैं, वे कविता के वस्तु-सत्य को गौण रखना चाहते हैं।

ऋतुराज
  • संबंधित विषय : सच

अगर कविता एक ‘सामाजिक कार्य’ है (जो कि वह है) तो फिर उसका राजनीतिक-सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ना अनिवार्य ही है।

वेणु गोपाल
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