बिंदुघाटी 2.0 : टेक्स्ट-विरोधियों से बना टेक्स्ट-टाइम
• यह सारा ख़राब दौर एक अच्छे टेक्स्ट में बदलता जा रहा है। एक ऐसा अच्छा टेक्स्ट जिसके सारे पात्र साहित्यिक टेक्स्ट से मुँहफ़ेर कर चल रहे हैं। पूरा का पूरा टेक्स्ट उदास पड़ा होता है कि कोई पात्र तो उसको स
29 अगस्त 2026
शनिवारेर चिट्ठी : हिन्दवी उत्सव : मेरी दुनिया कविता की दुनिया है
आगमन 15:17 : तुम सरस जानती हो, मुझे ख़ास संधी पर नए कपड़े पहनना अच्छा लगता है। कारणमूल यही कि मॉल जा पहुँचा। नज़रें उड़ाने भर से ही उभर कर आया दरिद्राभास… सोचने लग पड़ा कि भारतीय मिडिल क्लास में दर्ज
25 अगस्त 2026
फ़ैसला तो आ गया, फ़र्क़ जानते हैं!
‘हिन्दवी’ ने अपने प्रयोगधर्मी साहित्यिक प्रयत्नों के अंतर्गत वर्ष 2022 के सितंबर में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ की शुरुआत की थी। इस पहल का पहला आयोजन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा
22 अगस्त 2026
हिन्दवी उत्सव : 23 अगस्त को इलाहाबाद के पथ पर
प्रिय हिंदी-प्रेमियो, हम आपको सहर्ष यह सूचित कर रहे हैं कि ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ का उपक्रम ‘हिन्दवी’—हिंदी-साहित्य-संस्कृति-कला-संसार को समर्पित अपने वार्षिकोत्सव—‘हिन्दवी उत्सव’ के छठे संस्करण का आय
संतोष झा और साथी कलाकार : कविता का संगीत-आवास
कविता और संगीत का संबंध केवल कविता को धुन में बाँध देने तक सीमित नहीं है। कविता में शब्दों की ध्वनि, लय, आरोह-अवरोह, विराम और गति पहले से ही एक तरह की संगीतात्मक संरचना बनाते हैं। शोध भी कविता के पाठ
18 अगस्त 2026
गद्य की स्वरलिपि का संधान
हिंदी के काव्य-पाठ को लेकर आम राय शायद यह है कि वह काफ़ी लद्धड़ होता है जो वह है; वह निष्प्रभ होता है, जो वह है, और वह किसी काव्य-परंपरा की आख़िरी साँस गोया दम-ए-रुख़सत की निरुपायता होता है। आख़िरी ब
14 अगस्त 2026
जगह-जगह 2.0 : रूमी और उनकी सात नसीहतें
बाज़, चिड़िया और अनुवाद एक प्रसिद्ध तुर्की नाटक लैला व मजनूँ में ख़य्याम की एक रुबाई यूँ आती है : Her sabah yeni bir gün doğarken, Bir gün de eksilir ömürden; Her şafak bir hırsız gibidir Elin
11 अगस्त 2026
‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2026 के निर्णायक
‘हिन्दवी उत्सव’ के अंतर्गत रविवार, 23 अगस्त 2026 को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र [NCZCC], प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में आयोजित होने जा रही ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’ प्रतियोगिता अब अपने निर्णायक प
10 अगस्त 2026
‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2026 के टॉप 20
‘हिन्दवी उत्सव’-2026 के अंतर्गत रविवार, 23 अगस्त 2026 को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र [NCZCC], प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में अन्य साहित्यिक सत्रों के साथ ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’ के दूसरे संस्कर
10 अगस्त 2026
‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2026 के टॉप 10 : ‘इलाहाबाद के पथ पर...’
हिंदी साहित्य की परंपरा में इलाहाबाद—अब प्रयागराज—का उल्लेख केवल एक शहर के रूप में करना उसके सांस्कृतिक महत्त्व को कम करना होगा। इलाहाबाद आधुनिक हिंदी साहित्य की उन निर्णायक जगहों में रहा है; जहाँ सा
09 अगस्त 2026
‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2026 के टॉप 40
हिन्दवी उत्सव-2026 के अंतर्गत होने वाले ऑल इंडिया कैंपस कविता के दूसरे संस्करण के लिए हमें 1739 प्रविष्टियाँ प्राप्त हुईं। इनमें ख़ाली, नमूना और दोहरी प्रविष्टियाँ हटाकर शेष 1681 प्रविष्टियों को भेजन
08 अगस्त 2026
‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2026 के टॉप 100
मनुष्य ने अनिर्वचनीय प्रकृति से मिलते तमाम उद्दीपनों के प्रभाव में अपने चारों ओर जो और जितनी दुनिया बनाई है, वह बहुत जटिल होती चली गई है। काम-आराम, बाज़ार-तकनीक, उत्पादन-उपभोग, सूचनाएँ-व्यवस्थाएँ—मनु
07 अगस्त 2026
हिन्दवी : ‘ऑल इंडिया कैंपस कविता’-2026 की लॉन्ग-लिस्ट
‘हिन्दवी’ ने अपने प्रयोगधर्मी साहित्यिक प्रयासों के अंतर्गत वर्ष 2022 के सितंबर में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ की शुरुआत की थी। इस पहल का पहला आयोजन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा
24 जुलाई 2026
इस बार ऑल इंडिया कैंपस कविता ‘इलाहाबाद के पथ पर’
‘हिन्दवी’ ने अपने प्रयोगधर्मी साहित्यिक प्रयासों के अंतर्गत वर्ष 2022 के सितंबर में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ की शुरुआत की थी। इस पहल का पहला आयोजन इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा
‘धूप कोठरी के आइने में खड़ी’ : शमशेर की कविता पढ़ते हुए एक स्मृति-चित्र
बचपन से बड़े होने के स्कूली क्रम में कुछ नौ-दस साल की उम्र में बाजी (दादी) के घर में ऐसे अनुभवों से भरी गर्मियों की न जाने कितनी दुपहरें आती थीं। पुराना घर था। आगे के हिस्से में चार कमरे और एक बरामदे
शनिवारेर चिट्ठी : मैं आशाओं से नहीं, पुनरावृत्तियों से बना मनुष्य हूँ
ये यह छत की ओर खुलती खिड़की से तेज़ हवा के आने और रसोई की खिड़की से तेज़ क़दम बाहर निकल जाने की आज की बेला है। बाहर अँधेरा है तो यह रात है। लिखने की इच्छा और लिखने से बचने की इच्छा मेरे भीतर हमेशा एक
प्रीति-प्रतीति की ध्यानावस्था में रची गई कविताएँ
रुस्तम के कविता-संग्रह ‘एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी’ की कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि यह प्रीति-प्रतीति की ध्यानावस्था में रची गई रचनाएँ हैं। यहाँ आदि से अनंत तक प्रेम की ख़ुशबू बिखरी हुई है। जड़ हो या च
रविवासरीय 4.0 : कविता और उसके संपादक
• एक बार की बात है : ‘कथानक’ नामधारी एक पत्रिका ने अपना कविता-विशेषांक घोषित किया। कविता-विशेषांक निकालना संसार की सारी भाषाओं में एक दुष्कर कार्य है, क्योंकि इसके लिए कवियों से संपर्क करना पड़ता
06 मई 2026
‘अर्थात्’ की छठी कड़ी : प्रगतिवाद पर बात
चैत्र में बसंत के उनींदे से जागा ग्रीष्म वैशाख में अपना वैभव खोजता है। दुपहरें अपनी दीर्घता से ऊबकर अलसाती हैं और निस्पंद हो जाती हैं। अगर उमस न हो तो ऐसी दुपहर पढ़ने-लिखने को अनुकूल है। इसी समय में
03 मई 2026
रविवासरीय 4.0 : नवीन सागर : एक बेसँभाल असमाप्त
• प्रवेश आसान होता है, अगर परिचय प्रगाढ़ हो। इस राह में परिचय की स्मृति और संदर्भ भी सहायक हो सकते हैं। यों भी न हो, तब भूमिकाएँ काम आती हैं। वे बताती हैं कि व्यक्ति जिसमें प्रवेश करने जा रहा है, वह व
अपने-अपने कबीर
कबीर आज इतने समय बाद भी प्रासंगिक हैं। उनकी मौजूदगी के माध्यम बदल गए हैं, लेकिन वह आज भी किसी न किसी रूप में अन्य कवियों की तुलना में अधिक प्रभावी और जीवंत महसूस होते हैं। स्कूल की किताबों में दोहों
लंबी कविताओं पर खुलकर हुई बहस : ‘अर्थात्’ की पाँचवीं कड़ी रही ख़ास
‘चेख़व के कथा-साहित्य का सौंदर्यशास्त्र’ पर केंद्रित रही ‘अर्थात्’ की चौथी कड़ी के बाद इस बार विवेचना का विषय रहा—‘हिंदी की लंबी कविताएँ और उनका पुनर्पाठ’। इस पाँचवें आयोजन में बतौर वक्ता कवि-द्वय—देव
नई पदचापों की पहचान : ‘तीन कवि तीन किताबें’
11 अप्रैल को दिल्ली के सुरजीत भवन में आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी ‘तीन कवि तीन किताबें’ केवल एक सामान्य पुस्तक-परिचर्चा नहीं थी, बल्कि समकालीन हिंदी कविता की नई आवाज़ों, उनके सरोकारों और समय की बेचैनिय
02 अप्रैल 2026
गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि
जिस दौरान नवंबर बीत रहा था, उसी दौरान घर में एक नया जीवन उतर रहा था। मेरा मन हर घड़ी लगभग बैठा जाता था। लगभग घंटे दो घंटे बाद लगता—अब निकले प्राण कि तब निकले, लेकिन निकले अभी तक नहीं। अब यह कहने की को
31 मार्च 2026
मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’
हिन्दवी कैंपस कविता—‘हिन्दवी’ का एक विशेष आयोजन है। इस आयोजन के माध्यम से देश के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर वहाँ के छात्रों को साहित्य-सृजन के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।
18 मार्च 2026
कविता का स्वप्न और स्वप्न में कविता
दो औंस लंदन ड्राई जिन, एक औंस फ़्रेंच वर्माउथ, आधा चम्मच बेनेडिक्टिन, दो डैश ऑरेंज बिटर्स और एक सुंदर गिलास हो। इस गिलास को पहले से बहुत ठंडा कर लिया जाए और सब सामग्रियों को डालते ही तुरंत इसमें बर्फ़
मेरे एकांत के प्रवेश द्वार
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शाम हम सब ‘मेरे एकांत के प्रवेश द्वार’ के माध्यम से एक ऐसे साझा स्पेस में एकत्र हुए, जहाँ लोग अपने-अपने जीवन की व्यस्तताओं और बहुत कम मिलने वाले अवकाश से थोड़ा समय निकालकर
07 मार्च 2026
‘नई सृष्टि नई स्त्री’ की छठी सूची
वर्ष 2021 में हमने हिन्दवी पर नई सृष्टि नई स्त्री के अंतर्गत ऐसी 21 नई स्त्री-कवियों की कविताएँ प्रस्तुत कीं, जिन्होंने अपनी काव्यात्मक आभा से इस सदी की हिंदी-कविता-सृष्टि को एक नई चमक दी। यह सिलसिला
03 मार्च 2026
दैनिक भास्कर लेकर आया है कविता-प्रतियोगिता
आगामी 21 मार्च को विश्व कविता दिवस के उपलक्ष्य में ‘दैनिक भास्कर’ एक विशेष पहल के रूप में ‘कविता उत्सव’ का आयोजन कर रहा है। यह काव्य-प्रतियोगिता देश भर के रचनात्मक मनों को एक मंच प्रदान करने का प्रया
भाड़े के श्रोता और दाद का कारोबार
मैं उन दिनों बरेली में पढ़ रहा था। एक मुशायरा होने वाला था, जिसकी बड़ी धूम थी। हिंदी-उर्दू की मंचीय कविता के सारे बड़े नाम आमंत्रित थे। आयोजक पैसेवाले लोग थे, मुशायरे को शहर के इतिहास का सबसे बड़ा और
‘अर्थात्’ की तीसरी गोष्ठी में खुले छायावाद के बंध
प्रसाद-निराला-महादेवी-पंत के चतुष्टय पर आधारित छायावाद की कविताओं, उसकी भाषा, प्रवृत्तियों, संवेदना और सहमतियों-असहमतियों पर संवाद के उद्देश्य से 22 फ़रवरी की बीती दुपहर ‘छायावाद : खुल गए छंद के बंध’
अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10
नवीं कड़ी से आगे... दस अरुण कमल सत्तर साल से अधिक का जीवन देख चुके हैं और वरिष्ठ कवियों की सूची में भी आ चुके हैं। अरुण कमल हिंदी में प्रसिद्ध और लोकप्रिय कवि भी हैं। कभी रामचंद्र शुक्ल ने लिखा
अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9
आठवीं कड़ी से आगे... नौ ‘अपनी केवल धार’ जो देखने में छोटी पर अरुण कमल की कीर्ति का आधार-स्तंभ है कि तरह मेरी एक और प्रिय छोटी-सी कविता है जिसका शीर्षक है—‘थूक’ : “जब वह ग़ुंडा प्राचार्य मान बहाद
22 फरवरी 2026
अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-8
सातवीं कड़ी से आगे... आठ अरुण कमल ‘मैं’ अर्थात् अपनी आँखों से दुनिया को देखते हैं। इसलिए विस्तार उनके यहाँ कम है। इसलिए कभी राजेश जोशी ने अरुण कमल की कविता के लिए कहा था, ‘‘उनके यहाँ कल्पनाशीलत
21 फरवरी 2026
अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7
छठी कड़ी से आगे... सात अरुण कमल ‘कविता की राजनीति’ को उसी रिपोर्टर के निगाह से तौलते और फिर बोलते हैं जिसमें उन्हें फ़ायदा ज़्यादा दिखता है। काफ़ी गंभीरता से दिया गया वक़्तव्य है, जहाँ अपने को
20 फरवरी 2026
अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-6
पाँचवीं कड़ी से आगे... छह कविता में निजी स्पेस का या घर-परिवार का कम होना, लगता है जानबूझकर है या फिर विचारधारा या किसी ख़ास मानसिकता का परिचायक। अरुण कमल के पास एक ख़ास तरह की काव्य-भाषा है जो
19 फरवरी 2026
अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-5
चौथी कड़ी से आगे... पाँच अरुण कमल क़स्बे की मानसिकता वाले पटने के कवि हैं। एक ख़ास पटनिया आग्रह है उनकी कविता में। अरुण कमल की कविता में एक पटना-टोन लगातार उपस्थित है, जैसे राजेश जोशी में भोपाल
18 फरवरी 2026
अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-4
तीसरी कड़ी से आगे... चार 2019 में प्रकाशित अरुण कमल की एक कविता है—‘एक वृद्ध की रात’। एक बूढ़ा है जो जानता है कि ‘कुछ तो है जो मुझे खड़ा कर रहा इस उम्र में’। जिस उम्र में लोग तीर्थ पर निकल जाते ह
17 फरवरी 2026
अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-3
दूसरी कड़ी से आगे... तीन मेरे लिए वे कविता का ककहरा सीखने के दिन थे। कवि-मित्र प्रकाश के सहारे यह संग्रह ‘अपनी केवल धार’ पढ़ गया। यह ‘धार’ कविता दिमाग़ में बैठ गई थी। मैंने उन दिनों अपने मित्रों
16 फरवरी 2026
अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-2
पहली कड़ी से आगे... दो कभी-कभी एक कहानी, एक उपन्यास और एक कविता भी आपको अमर कर सकती है। अरुण कमल की यह रोमांटिक, उधार वाली कविता इस श्रेणी की कविता है। कभी तुलसीदास ने लिखा था, “नहिं दरिद्र सम
15 फरवरी 2026
अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’
एक मुक्तिबोध मेरे प्रिय कवि हैं। उनकी कविता-पंक्तियाँ मुझे बूस्ट करती हैं, मतलब प्रेरणा प्रदान करती हैं। यहाँ प्रस्तुत आलेख का शीर्षक उनकी एक कविता का शीर्षक है। मुक्तिबोध की ‘अँधेरे में’ शीर्षक स
डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय [सागर] में अगला ‘हिन्दवी कैंपस कविता’ आयोजन, कविता भेजने की अंतिम तिथि आज
हिन्दवी कैंपस कविता—‘हिन्दवी’ का एक विशेष आयोजन है। इस आयोजन के माध्यम से देश के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर वहाँ के छात्रों को साहित्य-सृजन के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।
13 फरवरी 2026
Valentine's Day पर ‘हिन्दवी’ लेकर आया है ‘प्रेमयोग’
प्रेम जिसे परिभाषित करना जितना कठिन है, उतना ही सहज है उसे महसूस करना। इसी अनकही, अनंत और अदृश्य अनुभूति को शब्दों में सँजोने का प्रयास है—प्रेमयोग। वैलेंटाइंस डे के अवसर पर प्रस्तुत यह विशिष्ट संकलन
09 फरवरी 2026
शिरीष कुमार मौर्य के बहाने : बनारस से निकला हुआ आदमी
मैं पहली बार शहर आए किसी गँवई किसान-सा निहारता था चीज़ों को अलबत्ता देखे थे कई शहर जीवन के धूप-छाँव में यात्राएँ कहीं पीछे छूट जाती हैं। जीवन में आने वाली समानांतर समस्याएँ समझौते करने को वि
तेग़ अली : भोजपुरी ग़ज़ल के प्रथम पुरुष
साहित्य ‘में’, या साहित्य ‘से’ किसी क़िस्म की कोई बदमाशी होती नहीं, या हो नहीं सकती—ऐसी कोई बात अगर कही जाती है, तो मैं तो कम से कम ठीक-ठीक नहीं ही कह सकता कि इस बात में किसकी तौहीन ज़्यादा है, बदमाश
29 जनवरी 2026
चेतना के दस द्वीप : प्रयागराज की साहित्यिक विरासत और प्रतिरोध की गूँज
वरिष्ठ कवि हरिशचंद्र पांडे की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 जनवरी को चौधरी महादेव प्रसाद महाविद्यालय (सीएमपी डिग्री कॉलेज), प्रयागराज के सभागार में कथाकार रणविजय सिंह ‘सत्यकेतु’ द्वारा संपादित काव्य-संकल
अंचित से दस सवाल : मुझे दिल्ली बिल्कुल पसंद नहीं है
अंचित (जन्म: 1990) नई पीढ़ी के चर्चित कवि, अनुवादक और संपादक हैं। वर्ष 2021 में उन्हें ‘कवि केदारनाथ सिंह कविता सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वे इसक-2023 के कवि भी हैं। हाल ही में उनका नया कविता-संग्
16 जनवरी 2026
छंद-छंद पर कुमकुम : समकालीन छंदबद्ध कविता का विशेष आयोजन
समकालीन कविता के परिदृश्य में जहाँ मुक्तछंद की उपस्थिति व्यापक है; वहीं छंदबद्ध कविता आज भी अपनी लय, अनुशासन और संगीतात्मकता के कारण पाठकों और श्रोताओं के बीच एक विशिष्ट स्थान बनाए हुए है। इसी परंपरा
वर्ष 2026 की ‘इसक’-सूची
सूचियाँ सर्वत्र व्याप्त अव्यवस्था में एक व्यवस्था गढ़ती हैं। पर यह उनकी नियति है कि वे प्राय: संदिग्ध होती हैं। इस दृश्य में यह सजगता का दायित्व है कि वह सदा दे दिए गए से बाहर देखे और यह स्वीकार करे क
कविता के शब्द सत्य का पीछा करते रहते हैं
[एक] कवि हृदय का वकील होता है। उसकी वकालत तर्क की झूठी बैसाखियों के सहारे नहीं वरन् सच्चे मनुष्यत्व की नैतिकता और निष्ठा की अदृश्य बहनेवाली अंत:सलिला पर चलती है जिसके होंठों पर सदा इंसानपरस्ती का