समय पर बेला
समय अनुभव का सातत्य
है, जिसमें घटनाएँ भविष्य से वर्तमान में गुज़रती हुई भूत की ओर गमन करती हैं। धर्म, दर्शन और विज्ञान में समय प्रमुख अध्ययन का विषय रहा है। भारतीय दर्शन में ब्रह्मांड के लगातार सृजन, विनाश और पुनर्सृजन के कालचक्र से गुज़रते रहने की परिकल्पना की गई है। प्रस्तुत चयन में समय विषयक कविताओं का संकलन किया गया है।
अनफ़्रेम्ड : 5G की स्पीड में 60 के दशक की ‘तड़प’
ऐसा मेरे साथ कभी पहले नहीं हुआ था, तो यह बात मेरे मन में बैठ गई। ऑफ़िस से घर लौटते समय स्पॉटिफ़ाई पर अचानक लता मंगेशकर का
आख़िरी सवाल : ब्रह्मांड का अंतिम अंत
ज़रा सोचिए, एक ऐसी मशीन हो जो आपकी लगभग हर समस्या सुलझा सके। वह ऊर्जा के नए स्रोत खोज ले, इंसानों को लंबी उम्र जीने सकने
12 सितम्बर 2026
शनिवारेर चिट्ठी : दोष लगे सितंबर को!
प्रस्थान कुछ बादल अधिक, कुछ धूल कम। सितंबर। कोई गली ठीक उसी छत पर नहीं रुकती। अकेली नमी कोई त्योहार नहीं है। घाणी है
‘धूप कोठरी के आइने में खड़ी’ : शमशेर की कविता पढ़ते हुए एक स्मृति-चित्र
बचपन से बड़े होने के स्कूली क्रम में कुछ नौ-दस साल की उम्र में बाजी (दादी) के घर में ऐसे अनुभवों से भरी गर्मियों की न जा
16 मई 2026
शनिवारेर चिट्ठी : क्रिस्टोफ़र नोलन, अमृता शेर-गिल, मंगलेश डबराल और अन्य मुलाक़ातें
समय वह किसी सीधी बहती हुई नदी की तरह नहीं। वह लौटता हुआ और मुड़ता हुआ। समय अपनी ही दिशा पर संदेह करता हुआ। समय बंद वृत
पास्ट लाइव्स : जो था, जो है और जो रह जाएगा
साल 2023 में आई हुई एक दक्षिण कोरियाई फ़िल्म है—पास्ट लाइव्स। कोरियाई मूल की कनाडाई निर्देशक सेलीन सॉंग की इस फ़िल्म का बह
एक लाख अस्सी हज़ार चार सौ बावन मिनट का इंतज़ार
जानते हो तीन हज़ार घंटे कितनी देर में बीतते हैं? नहीं जानते। चार महीने, ग्यारह दिन में। दिन-रात, सुबह-शाम सब जोड़ दें
आज भी सबसे बड़ी शक्ति हैं प्रेमचंद की कहानियाँ
उनासीवें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर प्रयागराज शहर आज़ादी का उत्सव मनाने की तैयारी कर रहा था। इसी उल्लास के बीच स
भाषा, लोग और ‘बहुरूपिये’ वाया 2014
आज़ादी के बाद के, हमारे देश का इतिहास जब भी लिखा जाएगा तो उसमें दो खंड लाज़िमी होंगे। पहला—आज़ादी से लेकर 2014 तक और दूस
हमारे समय का आर्तनाद है ‘शान्ति पर्व’ की कविताएँ
आशीष त्रिपाठी का अद्यतन काव्य संग्रह ‘शान्ति पर्व’ विवेकशील मानस की भाव-यात्रा है। भाव के साथ चेतना भी जागृत है। इस यात्
महाप्राण निराला की आख़िरी तस्वीरें
महाप्राण! आज 15 अक्टूबर है। महाप्राण निराला की पुण्यतिथि। 1961 की इसी तारीख़ को उनका निधन हुआ था। लेकिन निराला अमर
इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रावास के दिन
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ने आना एक मुश्किल भरा सफ़र रहा। इलाहाबाद आने के बाद, रहने के लिए कमरा मिलना एक बड़ी समस्या
संवेदना न बची, इच्छा न बची, तो मनुष्य बचकर क्या करेगा?
24 जुलाई 2024 भतृहरि ने भी क्या ख़ूब कहा है— सर्वे गुणाः काञ्चनमाश्रयन्ति।। अर्थात् : जिसके पास धन है, वही गुणी
कविता की कहानी सुनता कवि
कविता आती है और कवि को आत्मा से शब्द की अपनी यात्रा की दिलचस्प दास्ताँ सुनाने लगती है। कवि के पूछने पर कविता यह भी बताती
एक रोज़ हम लौट आना चाहते हैं
मई 2024 तुमने कहा—जाती हूँ और तुमने सोचा कवि केदार की तरह मैं कहूँगा—जाओ लेकिन मेरी लोकभाषा के पास अप