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स्मृति पर बेला

स्मृति एक मानसिक क्रिया

है, जो अर्जित अनुभव को आधार बनाती है और आवश्यकतानुसार इसका पुनरुत्पादन करती है। इसे एक आदर्श पुनरावृत्ति कहा गया है। स्मृतियाँ मानव अस्मिता का आधार कही जाती हैं और नैसर्गिक रूप से हमारी अभिव्यक्तियों का अंग बनती हैं। प्रस्तुत चयन में स्मृति को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

22 सितम्बर 2026

C/O बंगाल : केतकी कुशारी डायसन के रवींद्रनाथ

C/O बंगाल : केतकी कुशारी डायसन के रवींद्रनाथ

केतकी कुशारी डायसन [26 जून 1940 –11 सितंबर 2026] चली गईं। प्रस्थान विधिनिर्धारित है। इसे स्वीकार करने के अतिरिक्त हमारे पास कोई दूसरा उपाय नहीं। लेकिन एक बंगाली के रूप में हमें केतकी कुशारी डायसन जैस

12 सितम्बर 2026

शनिवारेर चिट्ठी : दोष लगे सितंबर को!

शनिवारेर चिट्ठी : दोष लगे सितंबर को!

प्रस्थान  कुछ बादल अधिक, कुछ धूल कम। सितंबर। कोई गली ठीक उसी छत पर नहीं रुकती। अकेली नमी कोई त्योहार नहीं है। घाणी है सुनहरी। बचने का संकेत कभी बताया नहीं जाता। सितंबर कोई ठहराव नहीं है। कीचड़ से

12 सितम्बर 2026

80 के दशक के रेट्रो लुक से स्मृति और नॉस्टेल्जिया तक

80 के दशक के रेट्रो लुक से स्मृति और नॉस्टेल्जिया तक

यह बात मान लेनी चाहिए कि हम अपने अतीत से कितना स्नेह रखते हैं। हम वहाँ सुखद अनुभूति करते हैं, सुरक्षित महसूस करते हैं। अतीत हमारे वर्तमान की ख़ाली जगहों को भरता है। वह बार-बार याद आता है, बावजूद इसके

10 सितम्बर 2026

घाटों पर बदलता बनारस

घाटों पर बदलता बनारस

चइत की एक शाम अस्सी घाट पर चइत [चैत] चल रहा है। गुलमोहर में लाल-लाल फूल आ गए हैं। महुए रस से भर गए हैं। दिन-रात टप-टप-टप चू रहे हैं। आम के मंज़र अब टिकोरे में बदल गए हैं। गेहूँ की बालियाँ पक गई है

29 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : हिन्दवी उत्सव : मेरी दुनिया कविता की दुनिया है

शनिवारेर चिट्ठी : हिन्दवी उत्सव : मेरी दुनिया कविता की दुनिया है

आगमन 15:17 : तुम सरस जानती हो, मुझे ख़ास संधी पर नए कपड़े पहनना अच्छा लगता है। कारणमूल यही कि मॉल जा पहुँचा। नज़रें उड़ाने भर से ही उभर कर आया दरिद्राभास… सोचने लग पड़ा कि भारतीय मिडिल क्लास में दर्ज

10 अगस्त 2026

‘दिल चाहता है’ के पच्चीस साल

‘दिल चाहता है’ के पच्चीस साल

तीन दोस्त हैं। एक को हर दूसरी लड़की से प्यार हो जाता है, लेकिन अंततः शादी किसी और से कर रहा है। एक को अपने से बड़ी उम्र की औरत से प्यार हो जाता है और तीसरे के लिए प्यार एक बेकार की चीज़ है। तीनों का

03 अगस्त 2026

निम्स दाई! हिमाल आपको बुला रहे हैं...

निम्स दाई! हिमाल आपको बुला रहे हैं...

Giving up is not in the blood, Sir! Not in the blood. — Nirmal ‘Nimsdai’ Purja 30 जुलाई 2026 | दिल्ली/काराकोरम उस दिन दिल्ली मेट्रो से दफ़्तर जाते हुए, मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था कि इस समय निर्म

31 जुलाई 2026

ईदगाह की सरज़मीं : प्रेमचंद और गोरखपुर

ईदगाह की सरज़मीं : प्रेमचंद और गोरखपुर

जब कभी ईद आती है या ईद का ज़िक्र छिड़ता है, एक कहानी और उसके किरदार अपने-आप ज़ेहन में उतर आते हैं—प्रेमचंद की ‘ईदगाह’, हामिद और दादी अमीना। हामिद का चिमटा, उसकी क़ुर्बानी और दादी के प्रति उसका बेपनाह

28 जुलाई 2026

नामवर सिंह की आलोचना-यात्रा : वैचारिक विकास और सैद्धांतिक हस्तक्षेप

नामवर सिंह की आलोचना-यात्रा : वैचारिक विकास और सैद्धांतिक हस्तक्षेप

हिंदी आलोचना के वृहत् परिदृश्य में नामवर सिंह की उपस्थिति एक ऐसे मील के पत्थर की तरह है, जिनका व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों ही गहन बौद्धिक ऊर्जा और उतने ही गहरे विवादों से निर्मित और विकसित हुए। वह के

28 जुलाई 2026

मारांग दाई महाश्वेता

मारांग दाई महाश्वेता

“यक़ीनन आप यही जानना चाहेंगे कि मैंने कितनी बार विवाह किया है? या फिर मैं दिन में कितनी बीड़ियाँ पीती हूँ? क्या मैं व्हिस्की के एक गिलास के बिना रह सकती हूँ?” जब जीवन के उत्तरार्ध में किसी बड़ी ले

26 जुलाई 2026

शशिभूषण द्विवेदी के नाम : बारह कथाकारों, दो कवियों और एक आलोचक के पत्र

शशिभूषण द्विवेदी के नाम : बारह कथाकारों, दो कवियों और एक आलोचक के पत्र

आज शशिभूषण द्विवेदी [26 जुलाई 1975—7 मई 2020] की जन्मतिथि है। वह आज सदेह होते, तब आज उनका बावनवाँ वर्ष लग जाता। एक रचनाकार रचना के लिए एक कंदरा का निर्माण करता है। इस कंदरा में वह संसार से थक-भागकर छ

23 जुलाई 2026

रज़ा स्मृति : सतपुड़ा, नर्मदा, बेमज़ा वक्ता

रज़ा स्मृति : सतपुड़ा, नर्मदा, बेमज़ा वक्ता

नर्मदा के किनारे, सतपुड़ा की तलहटी में बसे मंडला में हमारे पहुँचने के दिन से शायद ही कोई ऐसा दिन गुज़रा हो जब बारिश न हुई हो। लौटते-लौटते मुख्य पुल के बग़ल का ‘रपटा’, जिस पर कुछ दिन पहले तक स्थानीय लो

18 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : झरना बड़ी हँसमुख लड़की है...

शनिवारेर चिट्ठी : झरना बड़ी हँसमुख लड़की है...

दीपालिका क्या कहोगी जो कहूँ कि मुझे असुंदरता कुछ असहज करती है। यह राय मैंने किसी एक अनुभव के बिना पर तय की। मैंने उन्हें सुंदर स्त्रियाँ और कुछ कम सुंदर स्त्रियाँ कह साहचर्य निभाया। वह एक भली स्त्

17 जुलाई 2026

मुकुल शि‍वपुत्र : समदरसी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो

मुकुल शि‍वपुत्र : समदरसी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो

समदरसी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो ठुमरी सुनी। ख़याल भी। इंदौर और देवास में स्टेज के सामने दरी पर बैठकर घंटों सुना और जी भर के देखा भी उन्हें। लेकिन इन आयोजनों के दीगर कभी पकड़ में नहीं आए। बहु

14 जुलाई 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : विश्वविद्यालयों में जुलाई-अगस्त का महीना प्रेम के फूलों के खिलने का महीना होता है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : विश्वविद्यालयों में जुलाई-अगस्त का महीना प्रेम के फूलों के खिलने का महीना होता है

गताध्याय से आगे... तीन यह रात बहुत काली रात थी। फिर एक बहुत से बहुत काली रात। ऐसी रातें क्यों आती हैं, जीवन में, समाज में, साहित्य में और साहित्य और समाज में उजाले के लिए ख़ून-पसीना बहाते रहने

13 जुलाई 2026

‘धूप कोठरी के आइने में खड़ी’ : शमशेर की कविता पढ़ते हुए एक स्मृति-चित्र

‘धूप कोठरी के आइने में खड़ी’ : शमशेर की कविता पढ़ते हुए एक स्मृति-चित्र

बचपन से बड़े होने के स्कूली क्रम में कुछ नौ-दस साल की उम्र में बाजी (दादी) के घर में ऐसे अनुभवों से भरी गर्मियों की न जाने कितनी दुपहरें आती थीं। पुराना घर था। आगे के हिस्से में चार कमरे और एक बरामदे

07 जुलाई 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : हिंदी की दुनिया के सबसे पतित, निष्ठुर, क्रूर राक्षस

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : हिंदी की दुनिया के सबसे पतित, निष्ठुर, क्रूर राक्षस

गताध्याय से आगे... दो गंज गोबरहवा के दो पैर, दो आँखें, दो हाथ, दो दिल हैं, एक इस तरफ़ धड़कता है, दूसरा उस तरफ़। असल में जमुआर पुल के एक तरफ़ पुराना गंज गोबरहवा है, बहुत से भी बहुत पहले से गोबरहवा म

07 जुलाई 2026

तीजनबाई और पंडवानी

तीजनबाई और पंडवानी

आज से बहुत साल पहले की बात है। एक छोटी-सी लड़की थी, सात-आठ बरस की। बारिश का मौसम उसको पसंद नहीं था, इसलिए बारिश के दिनों में वह पाठशाला नहीं जाने के लिए रोती थी। बारिश वाली सुबहों में वह नींद खुल जान

06 जुलाई 2026

तीजनबाई : इकतारे पर महाभारत

तीजनबाई : इकतारे पर महाभारत

अवसर था दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज के वार्षिकोत्सव पल्लव की सांस्कृतिक संध्या का। वहाँ उपस्थित थीं कलाकार पद्मभूषण—तीजनबाई। दर्शकों की संख्या लगभग इतनी ही थी कि उँगली पर गिनी जा सके। मंच

03 जुलाई 2026

फूलचंद : जो लौटकर कभी नहीं आया

फूलचंद : जो लौटकर कभी नहीं आया

वह हमारी उम्र का था, मगर हट्टा-कट्टा बालक था। मुझे आज भी याद है—उसका बोलना, उसकी चमक से भरी आँखें! जो अनायास अपनी तरफ़ खींच लेती थीं। बिना कहे सुने उसे देखा जा सकता था। न जाने क्या था उसमें! आज सोचती

01 जुलाई 2026

एक रात जो अब भी मेरे भीतर उजाला करती है

एक रात जो अब भी मेरे भीतर उजाला करती है

स्मृतियाँ सचमुच कभी नहीं मरतीं। वे हमारे भीतर किसी गहरे, अदृश्य तह में चुपचाप बैठी रहती हैं—कभी धुँध की तरह, कभी उजाले की तरह और कभी किसी ऐसे सपने की तरह जो जागने के बाद भी पूरी तरह टूटता नहीं। कु

30 जून 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : आषाढ़ का पहला दिन और...

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : आषाढ़ का पहला दिन और...

आज आषाढ़ का पहला दिन है। इस अवसर पर हम ‘हिन्दवी बेला’ पर वह कर रहे हैं, जो इससे पूर्व हमने कभी नहीं किया—एक उपन्यास का धारावाहिक प्रकाशन। यह हमारे लिए बहुत हर्ष और उल्लास का प्रसंग है कि इस काम की शु

26 जून 2026

दोस्तों को कभी न भेजी गई एक चिट्ठी

दोस्तों को कभी न भेजी गई एक चिट्ठी

क़रीब-क़रीब सात बजे शाम का समय रहा होगा। मैं यूँ ही फ़ोन हाथ में लिए घर की छत पर बैठा था। अचानक से फ़ोन बजा, वीडियो कॉल वह भी। ‘स्कूल फ़्रेंड’ के नाम से एक व्हाट्सएप्प ग्रुप। मैंने कॉल रिसीव किया तो दे

25 जून 2026

रागदर्पण : मैं ढूँढ़ती हूँ शहतूत का वह दरख़्त

रागदर्पण : मैं ढूँढ़ती हूँ शहतूत का वह दरख़्त

स्कूल ने रुक्का भेजा—‘अबकी सालाना जलसे में आपको सम्मानित करते हमें गर्व होगा।’ जहाँ जीवन का सबसे बेफ़्रिक समय जिया, शऊर-सलीक़ा सीखा, बात व्यवहार करना आया, सदा के संगी मिले; जहाँ पढ़कर आज लिख सकने क़ाबिल

21 जून 2026

‘कल्पना’ जैसा भोजपुरी में होना अब कल्पना ही है

‘कल्पना’ जैसा भोजपुरी में होना अब कल्पना ही है

वह इक्कीसवीं सदी की शुरुआत थी और वह बहुत उदास होकर गा रही थी—घरे छुट्टी लेके अउरी कुछ दिन रही ए बलम जी... और ठीक उसी वक़्त सैलून में बैठे लड़के यह तय कर रहे थे कि उन्हें बंबई नहीं, राजकोट भागकर जाना है

15 जून 2026

हम ‘लगान’ देख रहे थे

हम ‘लगान’ देख रहे थे

साल 2001, जून का महीना। तारीख़ याद नहीं... गूगल बता सकता है, लेकिन क्या पूछना... मैं  नया-ताज़ा पटना पहुँचा था, दूसरी बार—इस बार स्थायी रूप से रहने के लिए, क्योंकि मैं आयरन गेट तोड़ चुका था... जी

13 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

सबसे पहले तुम, शशि! इसलिए नहीं कि तुम जीवन में सबसे पहले आईं या कि तुम सबसे ताज़ा स्मृति हो। इसलिए कि मेरा होना अनिवार्य रूप से तुम्हारे होने को लेकर है... [शेखर : एक जीवनी, शेखर : उत्थान—प्रवेश

12 जून 2026

जगह-जगह 2.0 : क्या कर रही होगी जबलपुर में तुम

जगह-जगह 2.0 : क्या कर रही होगी जबलपुर में तुम

शहरज़ादे का शहरआशोब जबलपुर को खोजता हूँ तो पहले उन सूचियों से उलझता हूँ जिनमें 12 सड़कों और 13 जनों की, 5 मोहल्लों और 3 उद्यानों की, 2 पुलों और 52 तालाबों की, एक कल्चुरी काल के तेवर की, एक विलियम स्

04 जून 2026

कहानी : स्वस्थित

कहानी : स्वस्थित

Every word is like an unnecessary stain on silence and nothingness.  ~ Samuel Beckett  एक लगातार अशांत रह रही आत्‍मा विचित्र भाषाऍं सीख लेती हैं।  ~ स्‍वदेश दीपक  किचन में नंगे खड

02 जून 2026

सुमन कल्याणपुर : स्वर और स्वर-भ्रम

सुमन कल्याणपुर : स्वर और स्वर-भ्रम

अँग्रेज़ी में एक कहन है : people who show you new music are important. मैं अक्सर अपने मित्रों और परिचितों को नए गीत भेजता रहता हूँ, कभी रेयर तो कभी कोई अनरिलीज़्ड गाना—इस गुमान के साथ कि मैं संगीत के

22 मई 2026

फ़ीफ़ा, मैकडॉनल्ड्स और बीस साल पहले का इलाहाबाद

फ़ीफ़ा, मैकडॉनल्ड्स और बीस साल पहले का इलाहाबाद

इस दफ़ा फ़ुटबॉल विश्वकप की मेज़बानी अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको संयुक्त रूप से कर रहे हैं और दबी-दबी-सी चर्चा है कि भारत में कोई भी ब्रॉडकास्टर इसके प्रसारण अधिकार ख़रीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा ह

20 मई 2026

रूपक-कथाएँ : स्वल्प-वासी

रूपक-कथाएँ : स्वल्प-वासी

मुज़म्मिल के लिए एक बग़ीची के पास पानी का नहीं, प्रतिध्वनियों का एक कुआँ था। जब स्वल्प-वासी उसमें झाँकता, तो उसे अपना चेहरा नहीं, अपनी आवाज़ दिखाई देती—धीरे-धीरे उतरती हुई, गहराई में। वह सुनता

19 मई 2026

The Last Tenant : इरफ़ान की क़ब्र पर 25 साल पुराना फूल

The Last Tenant : इरफ़ान की क़ब्र पर 25 साल पुराना फूल

अब शादियों के एल्बम नहीं दिखते। आजकल नीले-नीले लिंक होते हैं जो सीधे हम-आपको तस्वीरों के समंदर में पटक देते हैं। लगाइए गोता। दो-तीन स्क्रॉल में अपनी तस्वीर तक पहुँच जाइए। बेहतर क्वालिटी में डाउनलोड क

16 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : क्रिस्टोफ़र नोलन, अमृता शेर-गिल, मंगलेश डबराल और अन्य मुलाक़ातें

शनिवारेर चिट्ठी : क्रिस्टोफ़र नोलन, अमृता शेर-गिल, मंगलेश डबराल और अन्य मुलाक़ातें

समय वह किसी सीधी बहती हुई नदी की तरह नहीं। वह लौटता हुआ और मुड़ता हुआ। समय अपनी ही दिशा पर संदेह करता हुआ। समय बंद वृत्त है और ‘इन्वर्ज़न’ समय की स्मृति के विखंडन के रूप में। भविष्य और अतीत एक-दूसर

09 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : वहाँ नहीं है अब कोई घर सुफ़ेद

शनिवारेर चिट्ठी : वहाँ नहीं है अब कोई घर सुफ़ेद

स्मृति के घर अँधेरा स्मृति के घर अँधेरा बहुत है। सिर्फ़ आँखें काम नहीं करतीं। नाक भी लगता है काज पर। शून्य को सुनना पड़ता है कानों को। हाथों को हवा को टटोलना पड़ता है। विस्मृति ने कोई शोर भी तो नहीं

08 मई 2026

कहानी : एक मर्मांतक चाहना

कहानी : एक मर्मांतक चाहना

बर्फ़ धीरे-धीरे गिर रही थी, जैसे नींद किसी उदास आदमी की पलकों से सरक जाती है; और बर्फ़ केवल बर्फ़ नहीं थी, यह रौशनी से ख़ाली स्मृतियों का एक साया था जो शहर पर मंडरा रहा था। शहर, जो वक़्त की क़ब्र का एक

05 मई 2026

स्मृतियों के सिवा कुछ भी नहीं

स्मृतियों के सिवा कुछ भी नहीं

यदि तुम बरसों बाद घर लौटकर आओ—तो वे एकदम पहचान लेते हैं, पर वे यह नहीं जानते, तुम कहाँ से लौटकर आए हो। वे कभी सोच नहीं सकते कि इतनी यातना सहकर उन्होंने जिसे जन्म दिया है, वह बड़ा होकर इतनी यातना बर्द

26 अप्रैल 2026

रविवासरीय 4.0 : मेरी बहन की कविताएँ, एक प्लेलिस्ट की याद और थोड़ा-सा कानपुर

रविवासरीय 4.0 : मेरी बहन की कविताएँ, एक प्लेलिस्ट की याद और थोड़ा-सा कानपुर

• एक बंद घर में प्रतीक्षा भरी होती है। एक प्रतीक्षा जिसमें इच्छा नहीं होती। डोरबेल बजती और बजती और बजती ही रहती है। इस पर वस्तुएँ कैसे प्रतिक्रिया करती हैं, इस पर गंध कहाँ तक जा सकती है, इस पर मनुष्य

25 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

स्फुलिंग कमरा-तर, कमरा-कम या अ-कमरा जैसे शब्द भी कहीं होते हैं, कहो तो! तो फिर बहुत से कमरों के बारे में अंतर की कुछ-कुछ बातें कहने के लिए यो-वो शब्द न हो तो किस कार्य में लगेगा वह कवि के? अंतर की

24 अप्रैल 2026

जगह-जगह 2.0 : पुणे के बहाने

जगह-जगह 2.0 : पुणे के बहाने

जाऊ नका कोणी तिथे जाऊ नका कोणी जे गेले, नाही आले परतोनी तुका पंढरीसी गेला पुन्हा जन्मा नाही आला पंढरीचे भूत मोठे — संत तुकाराम (1608-1650) संत तुकाराम इस अभंग में पंढरपुर के अलौकिक आकर्ष

15 अप्रैल 2026

आशा भोसले : स्वर, छवि और स्वर्णिम दौर की आख़िरी चमक

आशा भोसले : स्वर, छवि और स्वर्णिम दौर की आख़िरी चमक

आशा भोसले में एक चार्म है। वह छवि जो उनको सोचने से बनती है। वह जीवन के उस स्वरूप के अधिक निकट है जो इंसानी सुख-दुख, प्रेम-सौहार्द, ईर्ष्या-द्वेष जैसे मानवीय गुणों से मिलकर बनता है। यह उनकी बड़ी बहन [

08 अप्रैल 2026

राहुल सांकृत्यायन की विरासत और ज्ञान संरक्षण की चुनौतियाँ

राहुल सांकृत्यायन की विरासत और ज्ञान संरक्षण की चुनौतियाँ

ज्ञान केवल पुस्तकों, पांडुलिपियों और अभिलेखों में सीमित नहीं होता, बल्कि वह एक जीवंत परंपरा है। वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी विचार, अनुभव और संवेदनाओं के माध्यम से प्रवाहित होता है। इसी ज्ञान-परंपरा को सहेजने औ

07 अप्रैल 2026

रागदर्पण : वे कैसी मासूमियत के दिन थे...

रागदर्पण : वे कैसी मासूमियत के दिन थे...

वो कौन हैं जिन्हें तौबा की मिल गई फ़ुर्सत हमें  गुनाह भी  करने को  ज़िंदगी  कम  है — आनंद नारायण मुल्ला कल रात यह शेर कहने वाले को दिल से सलाम कहा कि इसे पढ़ते हुए मैं बहुत पीछे तक झाँक आई।

06 अप्रैल 2026

शिवेन्द्र से 10 सवाल : मुंबई मुझे मज़दूरों का शहर लगता है

शिवेन्द्र से 10 सवाल : मुंबई मुझे मज़दूरों का शहर लगता है

शिवेन्द्र हिंदी की नई पीढ़ी के कथाकार हैं। वह मुंबई में रहते हैं। उनका एक उपन्यास (चंचला चोर) और दो कहानी-संग्रह (‘चॉकलेट फ़्रेंड्स और अन्य कहानियाँ’ और ‘सतरूपा’) प्रकाशित हो चुके हैं। आज प्रस्तुत है

31 मार्च 2026

हिंदुस्तानी ज़ुबानों के मरकज़, भारतीय भाषा केंद्र जेएनयू के 50 साल

हिंदुस्तानी ज़ुबानों के मरकज़, भारतीय भाषा केंद्र जेएनयू के 50 साल

जश्न के बाद का सन्नाटा बहुत खलता है... वाऽऽह! किसका है? आपका?... ‘अरे महाराज, आप भी!’ ‘कितना मशहूर है...!!!’ चढ़ते दिन के साथ पछुआ का बढ़ता आवेग, झड़ते पत्ते, झूमते पेड़, डोलती पत्तिया

30 मार्च 2026

हमारे राम कहाँ गए!

हमारे राम कहाँ गए!

ये वे दिन थे जब अँधेरा आकर हमारे आँगन के बीचोबीच बैठ जाता था और हम पाँचों भाई-बहन काँपते हुए संध्या-तारे से धूप की कहानियाँ माँगने लगते थे। लाल बिंदी लगाए हुए दादी एक-एक कर हर कमरे में रोशनी दिखातीं

17 मार्च 2026

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

“अब भी क्या गले न मिलोगी? अभी तक वही हिचक... मिल लो यार, क्या पता अगली मुलाक़ात हो न हो।” उसकी पसीजी हुई हथेलियाँ छूट रही थीं मुझसे। वो गले लगने या लगाने को बेताब था। विदा की बेला में ये बातें मेर

13 मार्च 2026

जो घुला नहीं

जो घुला नहीं

बचपन में जब मेरी माँ दुपहर के वक़्त आराम करते हुए सो जाया करती थी, तब मेरी बड़ी बहन और मैं किचन में जाकर खाना बनाने का खेल खेला करते थे। मैं इतनी छोटी थी कि मुझे चूल्हा जलाना तक नहीं आता था और घर में आ

11 मार्च 2026

रागदर्पण : क़िस्सागो अम्मा

रागदर्पण : क़िस्सागो अम्मा

एक उबाऊ शाम मोबाइल फ़ोन में उलझे हुए मैंने देखा कि फ़ोन इधर-उधर की तस्वीरों, बधाइयों और अनर्गल संदेशों से अटा पड़ा है। उन्हें डिलीट करते हुए मैंने ख़ुद को एक ज़ब्त न होने वाली झल्लाहट की गिरह में पाया।

10 मार्च 2026

पिंजड़े में क़ैद ज़िंदगी

पिंजड़े में क़ैद ज़िंदगी

इस साल सारी आपदाएँ एक साथ आने को व्याकुल हों जैसे। अभी तो मानसून की आहट भी नहीं और बादल हैं कि रोज़ सावन-भादो हुए जाते हैं। सुबह से शुरू हुई बारिश बंद होने का नाम ही नहीं ले रही है। बाबू कहने को दस स