एक रात जो अब भी मेरे भीतर उजाला करती है
स्मृतियाँ सचमुच कभी नहीं मरतीं। वे हमारे भीतर किसी गहरे, अदृश्य तह में चुपचाप बैठी रहती हैं—कभी धुँध की तरह, कभी उजाले की तरह और कभी किसी ऐसे सपने की तरह जो जागने के बाद भी पूरी तरह टूटता नहीं। कु
मैं शहरों को देखकर कभी मुस्कुरा नहीं सका!
आज से क़रीब दस महीने पहले मैं दूसरी बार दिल्ली की ओर आया। दिल्ली के किनारे, नोएडा को ठिकाना बनाया। जब मैं आया तब मेरे पास शब्दों का एक बड़ा-सा गोदाम था। इस गोदाम से मैं शब्द निकालता, उसे वाक्य बनाता
मैं वापस आऊँगा : 78 घंटे बनाम 78 साल का प्रेम
जीवन में पहली बार अकेले फ़िल्म देखने आई हूँ। अकेले घूमी हूँ, शॉपिंग पर गई हूँ, पर अकेले थिएटर में बैठकर फ़िल्म देखना कभी नहीं हुआ था। शायद इसलिए क्योंकि मुझे लगता था कि मैं दुनिया में इस क़दर अकेली क
कहानी : स्वस्थित
Every word is like an unnecessary stain on silence and nothingness. ~ Samuel Beckett एक लगातार अशांत रह रही आत्मा विचित्र भाषाऍं सीख लेती हैं। ~ स्वदेश दीपक किचन में नंगे खड
16 मई 2026
शनिवारेर चिट्ठी : क्रिस्टोफ़र नोलन, अमृता शेर-गिल, मंगलेश डबराल और अन्य मुलाक़ातें
समय वह किसी सीधी बहती हुई नदी की तरह नहीं। वह लौटता हुआ और मुड़ता हुआ। समय अपनी ही दिशा पर संदेह करता हुआ। समय बंद वृत्त है और ‘इन्वर्ज़न’ समय की स्मृति के विखंडन के रूप में। भविष्य और अतीत एक-दूसर
नवोदय विद्यालय के पच्चीस साल : स्मृतियों की यात्रा
इस साल हमारे नवोदय विद्यालय [जवाहर नवोदय विद्यालय छिंदपाली, महासमुंद (छत्तीसगढ़)] को पच्चीस बरस पूरे हो रहे हैं। 1 नवंबर 2000 को दो बड़ी घटनाएँ इतिहास में घटी थीं। पहला यह कि इस दिन हिंदुस्तान का दिल
कमल जीत चौधरी की दस कथाएँ
कहानी उसने प्यार किया था। उसे अपने पुराने प्रेमी की याद सताती थी। पति की ग़ैरमौजूदगी में एक रात उसने अपने प्रेमी को घर बुलाया। घर के सभी बल्ब बंद करके, वह उसे पिछले दरवाज़े से अंदर ले आई। अंदर पहु
कथाएँ : चोर की माँ और आलू जी से मुलाक़ात
चोर की माँ पटना में ग़रीबों के एक मसीहा चिकित्सक थे। उनके पास प्रदेश के सुदूर इलाक़े के बहुत सारे ग़रीब रोग-व्याधि, दुख-संताप लेकर आते थे। ग़रीबी को सबसे बड़ी बीमारी मानने वाले मसीहा डॉक्टर के पास
अस्सी वाया भाँग रोड बनारस
कितना अजीब है किसी घटना को काग़ज़ पर उकेरना। वर्तमान में रहते हुए अतीत की गुफाओं में उतरकर किसी पल को क़ैद कर लेना। उसे अपने हिसाब से जीने पर मजबूर कर देना। मैं कितनी बार कोशिश करता हूँ कि जो घटना बार-ब
दुख की नई भाषा
दुख के अथाह सागर में डूबा हुआ हूँ। जब भी पीड़ा में होता हूँ, अपनी व्यथा को व्यक्त करने के लिए नए बिंब तलाशने की बजाय परिचित भाषा में कहता हूँ। अभी मैं इस उद्देश्य से लिख रहा हूँ कि मुझे दुखों की अभिव्
दिन के सारे काम रात में गठरी की तरह दिखते हैं
रात की बारिश रात के चौथे पहर से बारिश का आख़िरी टुकड़ा लटक रहा है लैम्पपोस्ट पर क़ायम हुई थकन पत्तियों पर चमकती गीली रौशनी एक गुज़रती गाड़ी सड़क पर जमा पानी के चिरते चले जाने की आवाज़ रात की बारिश
भारतीय विज्ञान संस्थान : एक यात्रा, एक दृष्टि
दिल्ली की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी के बीच देश-काल परिवर्तन की तीव्र इच्छा मुझे बेंगलुरु की ओर खींच लाई। राजधानी की ठंडी सुबह में, जब मैंने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से यात्रा शुरू की, तब मन क