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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

पत्र : कल्पना शास्त्री के लिए : मुझसे नहीं होगा समीक्षा का काम

 

स्वस्ति श्री सर्वोपमायोग्य कल्पना शास्त्री जी, यहाँ से मनीष का राम-राम। चकित होऊ नका; मैं भी जानता हूँ कि चिट्ठी-पत्री की परंपरा तो अब बहुत पुरानी हो चुकी है। सो भी, मैं आपको चिट्ठी लिखने बैठ गया।

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30 अक्तूबर 2026

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