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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

‘रेत की मछली’ : यथार्थ का विकृत चेहरा

 

कुछ दिनों पहले मलिका अमर शेख की आत्मकथा ‘मैं बर्बाद होना चाहती हूँ’ पढ़ी थी। उसमें मलिका ने अपने विवाहित जीवन की पीड़ा को बिना किसी लाग-लपेट के उघाड़कर रख दिया था। हाल ही में ‘रेत की मछली’ उपन्यास पढ़

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09 सितम्बर 2026

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