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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

सावन-गात खँची कजरी की अल्पना

 

आषाढ़ की साँझें हमेशा किसी के लौटने की आहट लेकर आती हैं। दिन भर की धूप से तपे हुए आकाश के किसी कोने में जब पहली कारी रेखा दिखाई देती है, तो लगता है जैसे बहुत दूर गया हुआ कोई अपना, स्मृति की देहरी पर आ

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28 अगस्त 2026

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