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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

C/O बंगाल : नक्सल आंदोलन : बांग्ला-कविता जब सड़क पर उतर आई

 

सन् 1971, 5 अगस्त... भोर की रोशनी अभी पूरी तरह फूटी नहीं थी। वह रात और सुबह के बीच का एक धुँधला समय था। इस आधे अँधेरे में ही बंगाल के महानायक उत्तम कुमार सुबह की सैर कर रहे थे। यह उनकी रोज़ की आदत

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29 सितम्बर 2026

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

मलखान सिंह

नवें दशक में उभरे कवि। दलित-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

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