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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

पत्थरदिल

 

दिल्ली की चूना भट्टी की दुपहरी में मेरा दिन अक्सर कहीं और बीतता था। कभी शाहदरा, कभी नारायणा, कभी राजौरी गार्डन और कभी दिल्ली के किसी दूसरे इलाक़े में—दिन भर काम की तलाश में भटकता रहता और शाम होते-होते

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05 नवम्बर 2026

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