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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

एक थकी हुई तितली

 

मैंने इतने क़रीब से कभी मोर नहीं देखा था। यहाँ शुरुआत कुछ और कहकर भी हो सकती है, लेकिन मोर ही क्यों, यह नहीं मालूम। शायद उस दुपहर का सबसे गहरा रंग, मुझे उस मोर में दिखाई दिया था। मोर अपनी गहरे नीले रंग

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10 जून 2026

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

प्रदीप सैनी

सुपरिचित कवि। 'दुनिया के होने की आवाज़' शीर्षक से एक कविता-संग्रह प्रकाशित।

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