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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

शंखनाद : जिसे फ़रवरी मयस्सर नहीं

 

हर आदमी को फ़रवरी मयस्सर नहीं होती। कितना भी झींख लो, रो लो, कलप लो—एहसास-ए-फ़रवरी नहीं बदा तो कहाँ से मिलेगा। टापते रहिए इधर से उधर, फ़रवरी नहीं आएगी, बदनामी ज़रूर हो जाएगी। फ़रवरी महीना नहीं, मनोदशा

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07 फरवरी 2026

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