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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

कहानी : क्या सच, क्या झूठ

 

“फूल क्यों तोड़ रही हो?”  पीछे से आई गार्डनर की कड़क आवाज़ पर हव्वा सकपका गई... “मालकिन रोज़ तुड़वाती है” कह ज़ब्ह के लिए तैयार मेमने सी तेज़-तेज पलकें झपकाने लगी। भ्रांति में पड़कर वह हमेशा ऐसा

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18 सितम्बर 2026

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

विष्णु खरे

समादृत कवि-आलोचक और अनुवादक। कविता का एक अलग मुहावरा गढ़ने और काव्य-विषय-वैविध्य के लिए उल्लेखनीय।

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