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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

रविवासरीय 4.0 : सेवासूक्त

 

• ‘महर्षि’ पूर्व में अपने कार्यालय को महर्षि-आवास कहते थे। इधर वह कुछ रोज़ से उसे ‘सेवा तीर्थ’ कहने लगे हैं।  महर्षि को नाम बदलने की व्याधि है। पर नाम अगर बदल दिया जाए तब भी युगों तक बदले हुए नाम को

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29 मार्च 2026

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