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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

घाटों पर बदलता बनारस

 

चइत की एक शाम अस्सी घाट पर चइत [चैत] चल रहा है। गुलमोहर में लाल-लाल फूल आ गए हैं। महुए रस से भर गए हैं। दिन-रात टप-टप-टप चू रहे हैं। आम के मंज़र अब टिकोरे में बदल गए हैं। गेहूँ की बालियाँ पक गई हैं

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10 सितम्बर 2026

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