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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

शनिवारेर चिट्ठी : कल से रवैया फ़र्क़ होगा

 

अथ कोई अलसकथा नहीं! रविवार के उस दुपहर-उष्ण में ऊँघने के स्वाँग में तुम्हारी पीठ पर श्वासों की सुदीर्घ कविताओं का पाठ नहीं कर सका, खमा करो। मुझे एक नए आरंभ की पहली सीढ़ी पर पाँव धरने थे। अभी कितना क

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11 अप्रैल 2026

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