साहित्य और संस्कृति की घड़ी
एक समय था जब मैं केवल एक फूल था किसी सरोवर का। मैं उस दिन सबसे अधिक प्रसन्न था, जिस दिन मेरा कोई नाम नहीं था। सूरज का प्रकाश मेरे ऊपर उतरता था, जल मुझे अपनी गोद में थामे रहता था और ओस की बूँदें आसमान
15 अक्तूबर 2026
क़रीब सात साल पहले इन्हीं दिनों क्वेंटिन टैरेंटीनो की फ़िल्म ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन हॉलीवुड’ देखी थी। अक्सर बदलता मौसम आपको पुरानी पढ़ी किताबों, देखी गई फ़िल्मों और ज़माने पहले सुने गए संगीत की याद दिला
14 अक्तूबर 2026
नए साल का पहला महीना जब आधा बीतने को था, मैं गए बरस की यादावरी में रही। तमाम लोग अपनी दीवारों पर बीते बरस के नफ़े-नुक़सान का हिसाब-किताब लगाकर, क्या खोया-क्या पाया लिख चुके थे। साल-ए-नौ की आमद का जश्
थिएटर की बत्ती बुझती है। स्क्रीन पर किसी गंभीर दृश्य की नींव रखी जा रही होती है। नायक का दिल टूटने वाला होता है या सस्पेंस अपनी पराकाष्ठा पर होता है। और ठीक उसी पल आपके दाहिने या बाएँ कान के पास से आ
11 अक्टूबर 2026, रविवार दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस की लाइब्रेरी में बैठा हूँ। दिल्ली में आज सीजेपी का तमाम युवा संगठनों के साथ प्रोटेस्ट है। कई साथियों की तरह बनारस से भी एक साथी का फ़ोन
6 अक्टूबर 2026 की शाम इलाहाबाद विश्वविद्यालय के महिला छात्रावास के आस-पास कुछ अलग हो रहा था। शाम लगभग पाँच बजे छात्रावास के सामने लोग जमा होने लगे। थोड़ी ही देर में इस प्रदर्शन में करीब 300-350 लोग श
प्यारेलाल जी पधारे। प्रसन्नता नहीं हुई, कोफ़्त हुई। तंगदिल नहीं हूँ, संगदिल भी नहीं। आगंतुक को समय-कुसमय का ख़याल रखना चाहिए। उनके जैसा कुँवारा तो नहीं हूँ; बाल-बच्चेदार हूँ, नागरिक ज़िम्मेदार हूँ। स
शेरू हमारे परिवार का, मेरे जानने में, पहला और आख़िरी पालतू कुत्ता था। बड़े भाई साहब उस समय 14-15 साल के रहे होंगे, जब वह उसके दूध-से सफ़ेद रंग और नई दुल्हन-सी अधखुली आँखों की मासूमियत पर फ़िदा हो गए।
गिरि, इस बार मेरी उमा आए तो अब उमा को नहीं भेजूँगी, मुझे कहकर लोग चाहे बुरा कहें, किसी की बात नहीं सुनूँगी। यदि आकर भोला [शिव] उमा को ले जाने की बात कहे, इस बार माँ-बेटी मिलकर करूँगी झगड़ा,
12 अक्तूबर 2026
मेरी निजी कविता एक विफलता है मैं कोई व्यक्ति नहीं होना चाहती मैं असह्य होना चाहती हूँ [Stanzas, Sexes, Seduction] जीवन अपने मूल रूप में असहनीय है। मनुष्य की जटिलताएँ, उसके तमाम अनुभव और निर्