Font by Mehr Nastaliq Web

बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

05 जून 2026

‘‘बाघ का भाग्यफल और अन्य कहानियाँ’ : धर्म-सत्ता-प्रेम का त्रिकोण’

‘‘बाघ का भाग्यफल और अन्य कहानियाँ’ : धर्म-सत्ता-प्रेम का त्रिकोण’

लिखने की मोहलत के लिए मृत्यु को ही अपनी किताब सादर समर्पित करता लेखक मृत्यु से तो भिड़ ही रहा है, साथ ही उसकी वैचारिक मुठभेड़ अपने समय के अजीब, अप्रिय, भ्रामक, भ्रष्ट, कुव्यवस्था के सामाजिक, राजनीतिक, प

04 जून 2026

कहानी : स्वस्थित

कहानी : स्वस्थित

Every word is like an unnecessary stain on silence and nothingness.  ~ Samuel Beckett  एक लगातार अशांत रह रही आत्‍मा विचित्र भाषाऍं सीख लेती हैं।  ~ स्‍वदेश दीपक  किचन में नंगे खड

02 जून 2026

सुमन कल्याणपुर : स्वर और स्वर-भ्रम

सुमन कल्याणपुर : स्वर और स्वर-भ्रम

अँग्रेज़ी में एक कहन है : people who show you new music are important. मैं अक्सर अपने मित्रों और परिचितों को नए गीत भेजता रहता हूँ, कभी रेयर तो कभी कोई अनरिलीज़्ड गाना—इस गुमान के साथ कि मैं संगीत के

01 जून 2026

प्रीति-प्रतीति की ध्यानावस्था में रची गई कविताएँ

प्रीति-प्रतीति की ध्यानावस्था में रची गई कविताएँ

रुस्तम के कविता-संग्रह ‘एक ख़ुशबू वहाँ फैली थी’ की कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि यह प्रीति-प्रतीति की ध्यानावस्था में रची गई रचनाएँ हैं। यहाँ आदि से अनंत तक प्रेम की ख़ुशबू बिखरी हुई है। जड़ हो या च

01 जून 2026

नवोदित रचनाकारों के लिए सलाह

नवोदित रचनाकारों के लिए सलाह

1. आपको जिस विषय पर लिखने की अपनी इच्छा हो, उसी पर लिखें। यह देखकर न लिखें कि फ़लाँ पत्रिका आजकल किस विषय पर लेख छाप रही है। केवल इसलिए किसी विषय को न पकड़ें कि वह ‘चलन’ में है। 2. कहानी लिखनी है

31 मई 2026

रविवासरीय 4.0 : कृष्णबलदेववैदविषयक

रविवासरीय 4.0 : कृष्णबलदेववैदविषयक

• नये काम करना मुश्किल नहीं, मुश्किल है पुराने काम नये ढंग से करना। • काम करने के लिए, काम न कर सकने वाली परिस्थितियाँ चाहिए। • रोना अकेले की चीज़ है। • वे जिनकी रचनाएँ ‘राजनीतिक’ नहीं, ऐसे अ

30 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : अजाने देशों में

शनिवारेर चिट्ठी : अजाने देशों में

यात्रा-कल्पना-स्मृति तीन घंटे की एक बस-यात्रा किसी मनुष्य को क्या दे सकती है? वह कवि है तो अधैर्य। वह प्रेम में है तो प्रत्याशा। वह पुरानी होती स्त्री है तो पीठ की पीड़ा और वह ऊब रहा आदमी है तो...

29 मई 2026

जगह-जगह 2.0 : न मैं हिंदी शहर नगौरी

जगह-जगह 2.0 : न मैं हिंदी शहर नगौरी

भाषा-विज्ञान में व्युत्पत्ति-भ्रांति का अर्थ है कि किसी शब्द के प्राचीनतम अर्थ को ही उसका ‘सही’ अर्थ मानने पर ज़ोर दिया जाए और उसके वर्तमान इस्तेमाल को रद्द करके उसे उसके मूल प्रयोग, प्राचीन अर्थ और स

28 मई 2026

रागदर्पण : उस जादुई शाम के नाम

रागदर्पण : उस जादुई शाम के नाम

अपने हालिया सफ़र के बाद, मैं पूरे यक़ीन के साथ कह सकती हूँ कि मैंने अपने अब तक के जीवन की सबसे करामाती शाम को देखा है। बुलंद बर्फ़-पोश पहाड़ियों के पीछे पश्चिम में दहककर बुझता हुआ लाल अलाव। वह दृश्य मेरे

27 मई 2026

शंखनाद : मूर्खताएँ प्रेम में होने की अनन्य कसौटी हैं

शंखनाद : मूर्खताएँ प्रेम में होने की अनन्य कसौटी हैं

कभी-कभी मैं विधाता की मनुष्य के रूप में कल्पना करता हूँ तो लगता है कि विधाता भी कोई परम मसख़रा ही होगा और यह भी कि विधाता ने यह दुनिया सिर्फ़ मसख़री और खेल-खेल में ही बना दी है। और प्रेम? प्रेम