साहित्य और संस्कृति की घड़ी
11 जून 2026
आए दिन साहित्यिक रचनाओं की चोरी की घटनाओं की ख़बरें पढ़ने को मिल रही है। जिनकी रचनाएँ चोरी होंगी, वे हाय-तौबा मचाएँगे ही। और कुछ कर भी क्या सकते हैं? फ़ेसबुक पर एफ़आईआर दर्ज कर सकते हैं। साक्ष्य के रूप
मैंने इतने क़रीब से कभी मोर नहीं देखा था। यहाँ शुरुआत कुछ और कहकर भी हो सकती है, लेकिन मोर ही क्यों, यह नहीं मालूम। शायद उस दुपहर का सबसे गहरा रंग, मुझे उस मोर में दिखाई दिया था। मोर अपनी गहरे नीले रं
स्टीफ़न हॉकिंग के ब्लैक होल पर दिए इस लेक्चर (2016 BBC Reith Lectures on black holes) को पढ़ते-पढ़ते एक शहर से दूसरी सहर में आ गए। ‘नव भारत’ की ट्रेनों में मिलने वाले रोटीनुमा या परांठानुमा या रोटी औ
09 जून 2026
भारत एक अपवाद है और भारतीयता स्वयं अनेक अपवादों का समुच्चय है। जब भी आपको यह आभास होगा कि आपने भारत को समझ लिया है—इसके लोग, इसकी संस्कृति और इसकी राजनीति आपको पुनः चौंका देगी। भारत का लोकतांत्रिक, आ
अप्रैल, सन् 2101 यूँ धरती के सीने पर उगी आधुनिकतम संरचनाओं ने उसे एक विशिष्ट सौंदर्य प्रदान किया है, लेकिन कुछ ज़ख़्म ऐसे हैं जो छिप नहीं पाते। ये ज़ख़्म जलवायु परिवर्तन ने दिए हैं। अप्रैल-मई माह
तक़रीबन पाँच साल पहले मैंने पहली बार ख़ालिद जावेद का उपन्यास ‘मौत की किताब’ पढ़ा था। पाँच बरस बाद जब उसे दुबारा पढ़ा तो साथ में उनका उपन्यास ‘नेमतख़ाना’ और ‘आख़िरी दावत और अन्य कहानियाँ’ भी पढ़ीं। इस
07 जून 2026
• एक हिंदी लेखक के जीवन की सुबह सूचनाओं से और रात उपन्यास से होती है। वह दुपहर से शाम तक ख़राब सिनेमा के असर में रहता है। इस असर में बाहर धूल और भीतर पन्ने उड़ते रहते हैं। यह उड़ान ही है कि महानगर जीवन
06 जून 2026
मं., यह सप्ताह अनुवाद का सप्ताह था। अभी यह बात जब तुम्हें लिख रहा हूँ तो लगता है कि मैंने इस सप्ताह के बारे में सबसे कम महत्त्वपूर्ण बात पहले ही वाक्य में कह दी है। यह श्लील नहीं है। यह ग्लानि, बे
05 जून 2026
आज के दौर में साम्यवाद-समाजवाद का झंडा उठाने वाले लोग जो ख़ुद को सबसे बड़ा समतावादी दिखाने पर उतारू हैं; उन्हें देखकर कुछ सीख पाएँ या न सीखें, लेकिन उन्हें क़रीब से देखने पर यह ज़रूर पता चलता है कि वे
लिखने की मोहलत के लिए मृत्यु को ही अपनी किताब सादर समर्पित करता लेखक मृत्यु से तो भिड़ ही रहा है, साथ ही उसकी वैचारिक मुठभेड़ अपने समय के अजीब, अप्रिय, भ्रामक, भ्रष्ट, कुव्यवस्था के सामाजिक, राजनीतिक,