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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

26 जनवरी 2026

‘असहमति की परंपरा और भारत का विचार’

‘असहमति की परंपरा और भारत का विचार’

सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के ‘फ़िराक़’ क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ का यह शेर वर्षों से पढ़ा जा रहा है। शायद इससे बेहतर भारत होने की यात्रा इतने कम शब्दों में

25 जनवरी 2026

Humans In The Loop : ग़लतफ़हमी है कि CAPTCHA भरकर आप रोबोट होने से बच जा रहे हैं

Humans In The Loop : ग़लतफ़हमी है कि CAPTCHA भरकर आप रोबोट होने से बच जा रहे हैं

दुनियाभर में आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस का हल्ला है। जहाँ एआई (AI) शब्द जुड़ जाता है, वह चीज़ एलीट लगने लगती है। यूट्यूब वीडियोज़ के समंदर में अगर पत्थर उछालो तो वो कोई न कोई एआई टूल सिखाने वाले पर ही ग

25 जनवरी 2026

पंडित छन्नूलाल मिश्र : तकलीफ़ में गाने से ही सिद्धि मिलती है

पंडित छन्नूलाल मिश्र : तकलीफ़ में गाने से ही सिद्धि मिलती है

अगर हम गा पाते तो गाकर आपका बखान करते महाराज! लेकिन हमारी ज़िंदगी में लय नहीं है उतनी, इसमें खरज ज़्यादा है, ज़िंदगी का रियाज़ नहीं है, यह बेसुरी हो जाती है—बार-बार। इसलिए हम सिर्फ़ लिख पाएँगे। हम कोशिश क

24 जनवरी 2026

किम की डुक का सिनेमा : हिंसा और बर्बरता के आवरण में प्रेम और सौंदर्य की कल्पना

किम की डुक का सिनेमा : हिंसा और बर्बरता के आवरण में प्रेम और सौंदर्य की कल्पना

जापान से आधिपत्य ख़त्म होने के बाद 50 के दशक में उत्तर और दक्षिण कोरिया के गठन और अलग-अलग सिनेमा उद्योग बनने के बाद आज दक्षिण कोरियाई सिनेमा उद्योग को सिनेमा के जानकार ‘हैल्युवुड’ के नाम से पुकारते है

24 जनवरी 2026

पहले मेरी कामुकता क्षैतिज थी, अब वह ऊर्ध्वाधर है

पहले मेरी कामुकता क्षैतिज थी, अब वह ऊर्ध्वाधर है

सूज़न सॉन्‍टैग की दिनांकित प्रविष्टियाँ जीवन का लेखा नहीं, एक सजग मन की अविराम पकड़ हैं—सूचियों, संकेतों, मनन के रूप में। बाहर जो व्यक्तित्व सुसंगत और स्थिर दीखता है, भीतर वह निरंतर स्वयं को गढ़ता है

23 जनवरी 2026

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

नौ दशक का एक सुदीर्घ और शानदार जीवन जीकर ज्ञानरंजन हमें छोड़ कर चले गए। वह मनोहर की तरह प्रस्थान करते हुए रुमाल हिला रहे हैं। अपना रुमाल उमस में सोये उस ‘पिता’ को देना चाहते हैं, जो खटिया के दाएँ पाटी

22 जनवरी 2026

नॉस्टेल्जिक दौर में माँ (स्त्री) की भूमिका

नॉस्टेल्जिक दौर में माँ (स्त्री) की भूमिका

प्रस्तुत लेख ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित ‘बेला’—‘सदी की आख़िरी माँएँ’, प्रणव मिश्र तेजस के लेख की प्रतिक्रिया में लिखा गया है। ‘सदी की आख़िरी माँएँ’ (मूल लेख) प्रथम—23 नवंबर को ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित हुआ। इसे

22 जनवरी 2026

फिर भी : कमलेश्वर की लिखी एक दुर्लभ फ़िल्म

फिर भी : कमलेश्वर की लिखी एक दुर्लभ फ़िल्म

पापा, क्यों सब लोग मिलकर; मुझे तुमसे अलग करना चाहते हैं? मुझे और पुरुषों से कुछ भी लेना-देना नहीं है। अगर तुम मेरे साथ नहीं रह सकते तो मुझे यहाँ से इन सब लोगों से दूर कहीं और ले चलो। अब तो मम्मी अकेल

21 जनवरी 2026

कहानी : बावर की वनकन्या

कहानी : बावर की वनकन्या

प्रणाम दीदी कैसी हो आप? आज बहुत दिनों बाद फ़ोन आया आपका। सब ख़ैरियत से तो है! तू जानती ही है सुधा तेरे जीजाजी के गुज़र जाने के बाद ज़िंदगी काली चाय-सी हो गई है। अब जीवन में ना कोई स्वाद है और ना ह

21 जनवरी 2026

अहमदाबाद : एक प्रवासी स्त्री की आँखों से

अहमदाबाद : एक प्रवासी स्त्री की आँखों से

तीन वर्ष पहले जब मैं अहमदाबाद आई, तो लगा जैसे किसी अपरिचित भूमि पर क़दम रख रही हूँ। पर धीरे-धीरे यह शहर मेरे भीतर उतरने लगा। या शायद यूँ कहूँ कि यह कभी पराया लगा ही नहीं। अहमदाबाद में एक अद्भुत सहजता