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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

08 नवम्बर 2026

‘दीपावली की रोशनी में ओढ़नी का भूगोल’

‘दीपावली की रोशनी में ओढ़नी का भूगोल’

अक्टूबर 2025 दीपावली से एक दिन पहले की रात... रात के साढ़े ग्यारह बजे हैं। मैं और मेरा वैवाहिक सहयात्री विक्रम, जो घर का स्वयंभू बावर्ची और घोषित रसोई-प्रेमी है, अगले दिन बनने वाले व्यंजनों की तैय

07 नवम्बर 2026

रामायण : महाकाव्य और सिनेमा के बीच

रामायण : महाकाव्य और सिनेमा के बीच

सियाराममय सब जग जानी।  करउँ प्रणाम जोरि जुग पानी॥ यह बीते महीने की ही बात होगी... हिंदी विभाग, बीएचयू से पीएचडी कर रहे एक भावी डॉक्टर से जब पूछा गया कि इस पंक्ति में ‘पानी’ का क्या अर्थ है, तो उन

07 नवम्बर 2026

मन का उजियारा

मन का उजियारा

हर महीने किसी न किसी उत्सव के रंग में रँगी हमारी इस संस्कृति में अनगिनत पर्व हैं, पर उन सबमें मुझे सबसे अधिक प्रिय है—दीपावली। कारण अत्यंत सहज है, यह प्रकाश का पर्व है। अमावस की घनी स्याह रात को धता

07 नवम्बर 2026

जेएनयू के आख़िरी रोज़ को आख़िरी रोज़-सा न बिताने की हर आख़िरी कोशिश

जेएनयू के आख़िरी रोज़ को आख़िरी रोज़-सा न बिताने की हर आख़िरी कोशिश

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का परिसर है, नीले आसमान के कैनवास में ऊबे इम्प्रेशनिस्ट आर्टिस्ट द्वारा उल्टे स्ट्रोक में खींची कुछ लाल-पीली रेखाओं के तले हाथ पकड़ साथ चलते प्रेमी जोड़ियों के प्रेम से प

06 नवम्बर 2026

लीला रामनगर की भारी

लीला रामनगर की भारी

इन दिनों रामलीलाएँ हो रही हैं। क्योंकि यह लीलाभूमि है, राष्ट्र के दो बड़े नायकों की लीलाभूमि। ब्रज और अवध जिनकी जन्मभूमि रही है। अतः बहुत स्वाभाविक है ‘रामलीला’ और ‘रास’ दोनों की, लोक और शास्त्र दोनो

06 नवम्बर 2026

मेरी पहली जेल-यात्रा-3

मेरी पहली जेल-यात्रा-3

यहाँ से आगे... पिछले दो दिनों के अनुभवों के बाद आज जागना कुछ अलग-सा था। दिमाग़ का एक हिस्सा काफ़ी ठोस महसूस हो रहा था, तो दूसरा कुछ पिघलता हुआ जान पड़ता था। सोचा, घर पर सबको बताकर जाऊँ कि क्या कर

06 नवम्बर 2026

दिल्ली, तूती-ए-हिन्द और एक उस्ताद-शागिर्द की कहानी

दिल्ली, तूती-ए-हिन्द और एक उस्ताद-शागिर्द की कहानी

तेरहवीं सदी में जब मंगोल हमलों ने मध्य एशिया के कई शहरों और सभ्यताओं को तबाही के कगार पर पहुँचा दिया था, जब बुख़ारा, समरकंद और बग़दाद जैसे शहरों पर क़हर बरपा था, तब दिल्ली उन चंद जगहों में से एक थी ज

05 नवम्बर 2026

पत्थरदिल

पत्थरदिल

दिल्ली की चूना भट्टी की दुपहरी में मेरा दिन अक्सर कहीं और बीतता था। कभी शाहदरा, कभी नारायणा, कभी राजौरी गार्डन और कभी दिल्ली के किसी दूसरे इलाक़े में—दिन भर काम की तलाश में भटकता रहता और शाम होते-होत

05 नवम्बर 2026

जहाँ खड़ी पाई नहीं लगती

जहाँ खड़ी पाई नहीं लगती

कभी-कभी अकारण ही कुछ लिखने के लिए मन बेचैन होने लगता है। मन में क्या चल रहा होता है, पता नहीं। बस लगता है कि उसे किसी तरह बाहर निकालना है। किसी न किसी रूप में लिखने की आदत रही है, इसलिए घर, परिवार, स

05 नवम्बर 2026

अनफ़्रेम्ड : लेखक, तुम्हारे शब्द तुम्हारे ख़िलाफ़ हैं

अनफ़्रेम्ड : लेखक, तुम्हारे शब्द तुम्हारे ख़िलाफ़ हैं

वे कहते हैं कि लेखक के जीवन और उसकी रचनात्मकता को अलग-अलग करके देखो। वे कहते हैं कि लेखक भी मनुष्य है, उसे उसकी मानवीय कमज़ोरियों के लिए माफ़ कर दो। मस्तिष्क इसे स्वीकार करने को कहता है, मगर एक पाठक का