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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

04 अप्रैल 2026

‘चुप्पी में सारे उत्तर छुपे होते हैं’

‘चुप्पी में सारे उत्तर छुपे होते हैं’

20 जुलाई 2022 अदीब अचानक नींद से उठ बैठा। किसी ऊबड़-खाबड़ सपने की वजह से शायद। कुछ क्षण बाद ठीक से उसकी चेतना लौटी तो उसको लगा कि वह अकेला नहीं सो रहा है, कमरे में चैतन्या की यादें भी सो रही हैं। इस

04 अप्रैल 2026

आधुनिकतावाद से सामना : मेरी सृजनात्मकता और उसके समक्ष चुनौतियाँ

आधुनिकतावाद से सामना : मेरी सृजनात्मकता और उसके समक्ष चुनौतियाँ

एक ‘सृजनात्मकता’ शब्द से मेरे मन में प्राथमिक तौर पर दो चित्र उभरते हैं—एक, रोपाई के लिए बीज से पौध तैयार करने की अपनी क्यारी को सुबह की धुंध में निरखता हुआ एक अकेला किसान; और दूसरी, लालटेन की रोश

03 अप्रैल 2026

मेरी रचनात्मकता और मेरे द्वंद्व

मेरी रचनात्मकता और मेरे द्वंद्व

बरसों पहले मैंने एक लेख लिखा था, लगभग इसी मामले में कुछ सोचा था कि रचनाकार की अनुभूति और जो  जीवन वह जीता है और जो कुछ भी वह लिखता है या लिख पाता है उसमें कितना अंतर्विरोध होता है। किसी भी रचनाकार के

03 अप्रैल 2026

कथा अनिल गुरव और सचिन तेंदुलकर की

कथा अनिल गुरव और सचिन तेंदुलकर की

दुनिया के नायक जितना मनोरंजन करते हैं, उतने बड़े होते हैं। बाक़ी सब जो अस्ल में दुनिया बनाते हैं और इसमें रहते हैं—वे मज़दूर हैं और मज़दूरों की ज़िंदगी को भुला दिया जाता है। उनकी मौत को हम याद करते ह

02 अप्रैल 2026

शांतिनिकेतन डायरी : ‘संगमन’ के दौरान

शांतिनिकेतन डायरी : ‘संगमन’ के दौरान

22 नवंबर 2025, मुंबई एयरपोर्ट पर हूँ। सुबह का समय है। सूर्योदय देख रहा हूँ। सुबह का शीतल सूर्य। जीवन की आपाधापी में रोज़ एक दृश्य ऐसा दिखता है जो सुंदर है। हर किसी को अपने हिस्से का सौंदर्य मिल

02 अप्रैल 2026

गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि

गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि

जिस दौरान नवंबर बीत रहा था, उसी दौरान घर में एक नया जीवन उतर रहा था। मेरा मन हर घड़ी लगभग बैठा जाता था। लगभग घंटे दो घंटे बाद लगता—अब निकले प्राण कि तब निकले, लेकिन निकले अभी तक नहीं। अब यह कहने की को

01 अप्रैल 2026

फाँसी : दंड की कठोरता या सुधार का सोपान

फाँसी : दंड की कठोरता या सुधार का सोपान

हिंदी साहित्य जगत में हाल ही में प्रकाशित हिंदी उपन्यास ‘फाँसी’ काफ़ी चर्चा में रहा है। इस उपन्यास की एक ख़ास बात यह है कि इसे दो उपन्यासकारों—उद्भ्रांत और शैलेश पंडित ने संयुक्त रूप से लिखा है। ऐसा

31 मार्च 2026

मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’

मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’

हिन्दवी कैंपस कविता—‘हिन्दवी’ का एक विशेष आयोजन है। इस आयोजन के माध्यम से देश के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर वहाँ के छात्रों को साहित्य-सृजन के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।

31 मार्च 2026

हिंदुस्तानी ज़ुबानों के मरकज़, भारतीय भाषा केंद्र जेएनयू के 50 साल

हिंदुस्तानी ज़ुबानों के मरकज़, भारतीय भाषा केंद्र जेएनयू के 50 साल

जश्न के बाद का सन्नाटा बहुत खलता है... वाऽऽह! किसका है? आपका?... ‘अरे महाराज, आप भी!’ ‘कितना मशहूर है...!!!’ चढ़ते दिन के साथ पछुआ का बढ़ता आवेग, झड़ते पत्ते, झूमते पेड़, डोलती पत्तिया

30 मार्च 2026

‘अर्थात्’ की चौथी कड़ी में जमकर हुई चेख़व-चर्चा

‘अर्थात्’ की चौथी कड़ी में जमकर हुई चेख़व-चर्चा

यौवन भोगते वसंत के बीच जब बोगनवेलिया के फूलों का रंग गाढ़ा हो रहा था और अलसायी हवा धूप के तीखेपन को सरकाकर लास्य बिखराने की कोशिश में थी—जब 29 मार्च को दोपहर दो बजे से शुरू हुई ‘अर्थात्’ की चौथी गोष्