साहित्य और संस्कृति की घड़ी
दिल्ली की चूना भट्टी की दुपहरी में मेरा दिन अक्सर कहीं और बीतता था। कभी शाहदरा, कभी नारायणा, कभी राजौरी गार्डन और कभी दिल्ली के किसी दूसरे इलाक़े में—दिन भर काम की तलाश में भटकता रहता और शाम होते-होते
हादसा और हदस में अंतर है, लेकिन केवल ‘आ’ की मात्रा का। जब हम कोई हादसा होते हुए देखते हैं तो ‘हदस’ जाते हैं। हम भोजपुरिया लोगों के यहाँ इसी शब्द का इस्तेमाल होता है। लेकिन तब क्या हो, जब आपके साथ ही
काशी हर दिन एक अप्रत्याशित अनुभव है। जैसे गत 23 अक्टूबर को 12 बजे दिन में हिंदी भवन का अनुभव! तीन सेवानिवृत्त शिक्षक दिखे एक झुंड के बीच। तीनों की पोशाक किसी महफ़िल के चीफ़ गेस्ट की तरह। अहा! देखत ब
कल्पना कीजिए कि आप 15वीं शताब्दी में जी रहे हों, साल हो 1453… वहाँ उस समय अभी कुस्तुन्तुनिया [Constantinople] में तुर्कों का क़ब्ज़ा हो गया हो, माने लगभग 1000 सालों बाद आज के इस्तांबुल में पूर्वी रोमन
“तुम्हारा Review कर दिया है हाल ही में। इसके अलावा एक Manifesto भी खड़ा कर दिया है, Hungry Generation... बांग्ला में ‘क्षुत्कातर सम्प्रदाय’। हर तरह की भूख की बात कही गई है।” हंगरी जेनरेशन की शुरुआ
03 नवम्बर 2026
दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के नॉर्थ कैंपस की लाल ईंटों वाली इमारतें, कला संकाय (Arts Faculty) की सीढ़ियाँ और पटेल चेस्ट की नुक्कड़ वाली चाय की टपरियाँ—बाहर से देखने पर यह पूरी दुनिया प्रगतिशीलता, क्रा
जब ख़लील और मैरी मिले, तब ख़लील इक्कीस वर्ष के थे—एक संघर्षरत युवा कलाकार। मैरी उनसे दस वर्ष बड़ी थीं और बोस्टन के एक प्रतिष्ठित बालिका विद्यालय की प्रधानाध्यापिका थीं। ख़लील ने उनसे विवाह का प्रस्ता
01 नवम्बर 2026
प्रिय जामिया, कितनी पवित्र तारीख़ थी वह, जब हम पहली बार मिले थे। 6 जनवरी की शाम। उस शाम के एक-एक पल, एक-एक घटनाएँ मुझे याद हैं। तुम मुख़ातिब भी हो क़रीब भी हो तुम को देखें कि तुम से बात करें
‘हिन्दवी’ की शुरुआत से ही हमारी कोशिश रही है कि हिंदी भाषा, साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों को एक जीवंत और नियमित मंच दिया जाए। इसी प्रयत्न का एक विस्तार है ‘हिन्दवी बेला’—एक ऐसा अदबी ठि
करवा चौथ की रील के इंतिज़ार में यह सप्ताह पिछले सालों के करवा चौथ के कुछ ऐतिहासिक वीडियोज़ से दो-चार होते हुए गुज़रा। किसी वीडियो में एक पुरुष 30 सेकंड की रील में उतना निरीह लग रहा है, जितनी निरीह इस