साहित्य और संस्कृति की घड़ी
मैं बेदार बैठी हूँ। पर्दानशीं खिड़की से बहुत धीमी रोशनी भीतर आ रही है। उस मद्धिम रोशनी में मैं सामने की दीवार घड़ी पर वक़्त का अंदाज़ लेना चाहती हूँ। मगर ठीक से कुछ सुझाई नहीं देता। मेरी धड़कन बढ़ी हुई है।
26 सितम्बर 2026
अह, शनिवार-शनिवार तुम्हें चिट्ठी भेजने का यह हाल का सिलसिला अब यहीं शेष हुआ चाहता है, मंज! यह चीज़ों को उसकी सुंदरता में रखने और सुंदरता में ही विश्राम सौंप देने की युक्ति न हुई तो और क्या, कहो! अधिक
प्रस्तुत आलेख शाइर और अनुवादक रियाज़ लतीफ़ की किताब ‘नज़्म की पूँछ’ पर एकाग्र है। आलेख में अपनी बात रखने के लिए उनकी अन्य रचनाओं के भी कुछ हवाले दिए गए हैं। ‘नज़्म की पूँछ’ 2024 में सुख़नकदा, अहमद
दिल्ली साहित्यिक घटनाओं का एक सतही समुच्चय है। हालाँकि दिल्ली के बाहर भी ऐसी तमाम घटनाएँ होती ही रहती हैं; जिनसे साहित्य से सर्वथा जुदा लोग भी, जुदा न होने के भ्रम में जुड़े रहते हैं। हिंदी साहित्य मे
ऐसा मेरे साथ कभी पहले नहीं हुआ था, तो यह बात मेरे मन में बैठ गई। ऑफ़िस से घर लौटते समय स्पॉटिफ़ाई पर अचानक लता मंगेशकर का एक गीत लूप में बज उठा, जिसे पहले कभी नहीं सुना था। गीत था, ‘हम तेरे प्यार में स
‘स्मृति ही दूसरा समय है’—मंगलेश डबराल की यह काव्यपंक्ति मन में कौंध रही थी, हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक परमानंद श्रीवास्तव की याद में हो रहे गोरखपुर के आयोजन में जाते हुए। प्रेमचंद साहित्य संस्थान और 'सा
23 सितम्बर 2026
मैं नाम्चे बाज़ार में हूँ... क्यों हूँ! यह बताने के मायने कुछ नहीं निकलेंगे। बस इतना ही कहना काफ़ी होगा कि मैं नाम्चे बाज़ार में हूँ... क्योंकि मुझे यहाँ होना होगा। ठीक वैसे ही जैसे ‘Yesterday’ फ़िल्
इस विषय पर बहुत समय से कुछ लिखना चाह रही थी। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद अभिनेत्री कटरीना कैफ़ को लेकर आई भद्दी टिप्पणियों ने जैसे कोई पुराना ज़ख्म कुरेद दिया। कटरीना कुछ ही समय पहले
22 सितम्बर 2026
केतकी कुशारी डायसन [26 जून 1940 –11 सितंबर 2026] चली गईं। प्रस्थान विधिनिर्धारित है। इसे स्वीकार करने के अतिरिक्त हमारे पास कोई दूसरा उपाय नहीं। लेकिन एक बंगाली के रूप में हमें केतकी कुशारी डायसन जैस
ज़रा सोचिए, एक ऐसी मशीन हो जो आपकी लगभग हर समस्या सुलझा सके। वह ऊर्जा के नए स्रोत खोज ले, इंसानों को लंबी उम्र जीने सकने में मदद करे और हमें दूसरे तारों तक पहुँचा दे। लेकिन इतनी तरक़्क़ी के बाद भी एक