साहित्य और संस्कृति की घड़ी
क़रीब-क़रीब सात बजे शाम का समय रहा होगा। मैं यूँ ही फ़ोन हाथ में लिए घर की छत पर बैठा था। अचानक से फ़ोन बजा, वीडियो कॉल वह भी। ‘स्कूल फ़्रेंड’ के नाम से एक व्हाट्सएप्प ग्रुप। मैंने कॉल रिसीव किया तो देख
When did the future switch from being a promise to being a threat? — Chuck Palahniuk इतिहास की पूँछ और भविष्य गुरंदी बाज़ार की एक दुकान में मुझे एल्विन टॉफ़्लर की ‘फ़्यूचर शॉक’ की एक प्रति म
25 जून 2026
स्कूल ने रुक्का भेजा—‘अबकी सालाना जलसे में आपको सम्मानित करते हमें गर्व होगा।’ जहाँ जीवन का सबसे बेफ़्रिक समय जिया, शऊर-सलीक़ा सीखा, बात व्यवहार करना आया, सदा के संगी मिले; जहाँ पढ़कर आज लिख सकने क़ाबिल
डायनासोर के जाने के बाद, इस नीले ग्रह पर लगभग सब कुछ नए सिरे से हुआ। स्तनधारियों के विकास का रास्ता साफ़ हुआ। क्रमिक विकास (evolution) चलता रहा। लाखों वर्ष पूर्व होमो-सेपियंस आए। दो सौ साल पहले उनमें
हम जब आज से लगभग एक दशक पूर्व कोरिया के बारे में सोचते थे, तो शायद अधिकांश लोगों के लिए उसका उत्तर अज्ञात ही रहता था। जिनकी समझ या रुचि थोड़ी अधिक विकसित थी, उनके मन में शायद किम जोंग उन का नाम आता र
दो गिलहरियाँ इमारत के कोने पर आकर मिलती हैं। एक कहीं से मूँगफली ले आई है, दूसरी हाथ बढ़ाकर उसे ले लेना चाहती है। अचानक बम का धमाका होता है और इमारत ढह जाती है। सब मलबे के हवाले। इस इतनी बड़ी दुनिया म
23 जून 2026
नीट की परीक्षा देने गए मेरे एक भाई के बाल बड़े थे। बाहर खड़े ज़िम्मेदारों ने उसके बालों में हाथ डालकर यह जाँच की कि कहीं उसमें कोई पुर्ज़ी तो नहीं है। मुझे इस सख़्ती पर ऐतबार भी आया और ग़ुस्सा भी। भरो
प्रिय रचित, मैंने आपकी इम्तियाज़ अली की फ़िल्म ‘मैं वापस आऊँगा’ पर लिखी दर्शक-समीक्षा पढ़ी। वह वीडियो भी देखा जिसमें एक लड़की रोते हुए अपना वीडियो रिकॉर्ड कर रही थी, जिसे बाद में उसने फ़ेसबुक पर सा
घरेलू हिंसा पर केंद्रित फ़िल्मों की भीड़ में ‘सहन’ अपनी संयमित अभिव्यक्ति, सौंदर्यबोध और गहन संवेदनात्मक परतों के कारण, एक विशिष्ट स्थान अर्जित करती है। यह फ़िल्म अपने कथ्य को किसी ऊँचे स्वर में नहीं क
इस पुस्तक का शीर्षक उसकी अंतर्वस्तु का कोई सिरा हाथ नहीं लगने देता, लेकिन उसके प्रति जिज्ञासा को लाकर एक जगह संकेंद्रित ज़रूर कर देता है। इस कहानी में प्रेम है, बंद कमरों की सुराख़ों से नज़र रखने