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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

19 जून 2026

‘दो फ़ुटिया जीभ का चरित्र’

‘दो फ़ुटिया जीभ का चरित्र’

एक दिन सोच रहा था दोमुँहा क्या होता है? बहुत सोचने के बाद मैंने जवाब पाया कि होता होगा कोई ऐसा जीव जिसके दो मुँह होते होंगे। किंतु क्या ऐसा संभव है? एक पेट के लिए दो मुँह! दरअस्ल में ग़लत राह में सोच

19 जून 2026

केवल इम्तियाज़ हँस रहा है और सब रो रहे हैं

केवल इम्तियाज़ हँस रहा है और सब रो रहे हैं

किसे चाहिए  मन का सोना  आँख का मोती  किसे पड़ी है  अंदर क्या है  होती रेत है  लगता पानी  [वर्ष 2015 में आई इम्तियाज़ अली निर्देशित फ़िल्म ‘तमाशा’ से।] मैं गए बुधवार इम्तियाज़ अली का इं

18 जून 2026

भौकाली ज़लज़ले से लैस मास्टर, मास्टरी और कोचिंग्स की दुनिया

भौकाली ज़लज़ले से लैस मास्टर, मास्टरी और कोचिंग्स की दुनिया

भौतिक प्रदर्शन का दबाव इतना बढ़ता जा रहा है कि शिक्षक समुदाय भी उसके चपेट में है। माना जाता है कि समाज में शिक्षक समुदाय के सात्त्विक व्यवहार, वस्त्र-विन्यास और जीवन-मूल्यों का बड़ा असर होता है; लेकि

18 जून 2026

मैं वापस आऊँगा : 78 घंटे बनाम 78 साल का प्रेम

मैं वापस आऊँगा : 78 घंटे बनाम 78 साल का प्रेम

जीवन में पहली बार अकेले फ़िल्म देखने आई हूँ। अकेले घूमी हूँ, शॉपिंग पर गई हूँ, पर अकेले थिएटर में बैठकर फ़िल्म देखना कभी नहीं हुआ था। शायद इसलिए क्योंकि मुझे लगता था कि मैं दुनिया में इस क़दर अकेली क

17 जून 2026

मैं वापस आऊँगा : हमन हैं इश्क़ मस्ताना, हमन को होशियारी क्या

मैं वापस आऊँगा : हमन हैं इश्क़ मस्ताना, हमन को होशियारी क्या

इम्तियाज़ अली की फ़िल्मों के लाखों दीवानों में एक दीवानी मैं भी हूँ। क्या वजह है इस दीवानगी की... इसका जवाब है कनेक्ट या जुड़ाव। आप उनकी फ़िल्मों के किरदारों से जुड़ पाते हो और फ़िल्म ख़त्म होते-होते प

17 जून 2026

राप्ती से गंगा तक, गंगा से राप्ती तक

राप्ती से गंगा तक, गंगा से राप्ती तक

राप्ती से गंगा तक राप्ती एक सदाबहार नदी है जो मेरे गाँव से लगकर बहती है। मेरे घर के छत से उसकी विशालता को देखा जा सकता है। मेरा बचपन इसकी धाराओं के साथ खेलने में बीता है। इसकी नन्हीं-नन्हीं मछलियो

16 जून 2026

जीते चले जाने को पीछे मुड़कर देखना

जीते चले जाने को पीछे मुड़कर देखना

पेड़ों को अपने पुराने वसंत और पतझड़ याद नहीं रहते। हम अपने मौसम जीने से ज़्यादा याद रखते हैं। मौसम बाहर से ज़्यादा भीतर बीतते हैं। पतझड़ एक लेखक का आदिम आवास है। जहाँ निर्विकार रूप से पत्ते झड़ रहे ह

16 जून 2026

केवल ताली ही तो है : प्रयागराज के NCZCC में ‘ओथेलो’ और रवींद्रालय में ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ देखते दर्शकों का स्त्री-द्वेष

केवल ताली ही तो है : प्रयागराज के NCZCC में ‘ओथेलो’ और रवींद्रालय में ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ देखते दर्शकों का स्त्री-द्वेष

बीते दिनों इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में दो महत्त्वपूर्ण नाटकों का मंचन हुआ—19 मार्च 2026 को एनसीज़ेडसीसी (NCZCC) में शेक्सपीयर के ‘ओथेलो’ का, जिसका निर्देशन आलोक नैयर ने किया और 26 मार्च 2026 को रवींद

15 जून 2026

हम ‘लगान’ देख रहे थे

हम ‘लगान’ देख रहे थे

साल 2001, जून का महीना। तारीख़ याद नहीं... गूगल बता सकता है, लेकिन क्या पूछना... मैं  नया-ताज़ा पटना पहुँचा था, दूसरी बार—इस बार स्थायी रूप से रहने के लिए, क्योंकि मैं आयरन गेट तोड़ चुका था... जी

15 जून 2026

चे ग्वेरा : एक समर्पित क्रांतिकारी का एक पूँजीवादी चीज़ में बदलना

चे ग्वेरा : एक समर्पित क्रांतिकारी का एक पूँजीवादी चीज़ में बदलना

रजिस देब्रे ने बोलिविया की जेल में चे ग्वेरा का साक्षात्कार लिया था। बाद में उन्होंने लिखा, “चे आधुनिक युग के ईसा मसीह हैं, बल्कि मुझे लगता है कि उन्हें उससे भी अधिक यातना सहनी पड़ी। दो हज़ार वर्ष पहल