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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

20 जुलाई 2026

‘इंडियन रेलवे : एक चलता-फिरता समाज’

‘इंडियन रेलवे : एक चलता-फिरता समाज’

दुनिया और ज़िंदगी को ठहरकर नहीं, घर से निकलकर ही देखा जा सकता है। ज़िंदगी को जानने और समझने के लिए ठहराव ज़रूरी है, लेकिन उम्मीद और नाउम्मीदी से भरी तमाम यात्राओं के बाद। हमारी ज़िंदगी ट्रेन जैसी रफ़्

20 जुलाई 2026

क्रिस्टोफ़र नोलन की ‘द ओडिसी’ : होमर के महाकाव्य की उदास सिनेमाई पुनर्रचना

क्रिस्टोफ़र नोलन की ‘द ओडिसी’ : होमर के महाकाव्य की उदास सिनेमाई पुनर्रचना

एक राजा और महानायक होते हुए भी ओडिसस की ज़िंदगी कोई जश्न नहीं है, बल्कि एक लंबा इंतज़ार, एक बेबसी और ज़िंदगी के आख़िर में पसरा हुआ एक अंतहीन सन्नाटा है। यह एक ऐसे दुख की किरच के साथ घर लौटने की कहानी

19 जुलाई 2026

बिंदुघाटी 2.0 : बहुत फूँक-फूँककर सिर्फ़ साँप चलते हैं

बिंदुघाटी 2.0 : बहुत फूँक-फूँककर सिर्फ़ साँप चलते हैं

• इन दिनों पॉपुलर स्पेस में कहीं-कहीं और बहुत सारी बातों के साथ-साथ लोग यह भी कह रहे हैं कि भूख-हड़ताल भारतीय संस्कृति नहीं है। ये कमाल के लोग हैं और कमाल की ही हैं इनकी सांस्कृतिक व्याख्याएँ! इनके इस

18 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : झरना बड़ी हँसमुख लड़की है...

शनिवारेर चिट्ठी : झरना बड़ी हँसमुख लड़की है...

दीपालिका क्या कहोगी जो कहूँ कि मुझे असुंदरता कुछ असहज करती है। यह राय मैंने किसी एक अनुभव के बिना पर तय की। मैंने उन्हें सुंदर स्त्रियाँ और कुछ कम सुंदर स्त्रियाँ कह साहचर्य निभाया। वह एक भली स्त्

18 जुलाई 2026

‘चिरई के जान जाई औ’ लइकन के खिलौना’

‘चिरई के जान जाई औ’ लइकन के खिलौना’

लगभग दो दिन बीत चुके हैं किसी किताब को उठाए या ध्यान से कुछ पढ़े हुए। कहीं मन ही नहीं लग रहा। वह तो बार-बार भावुक हुआ जाता है। कई बार रोने का मन करता है। संवेदना की कितनी ही लहरें शरीर के पूरे हिस्से

17 जुलाई 2026

मुकुल शि‍वपुत्र : समदरसी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो

मुकुल शि‍वपुत्र : समदरसी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो

समदरसी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो ठुमरी सुनी। ख़याल भी। इंदौर और देवास में स्टेज के सामने दरी पर बैठकर घंटों सुना और जी भर के देखा भी उन्हें। लेकिन इन आयोजनों के दीगर कभी पकड़ में नहीं आए। बहु

16 जुलाई 2026

लोकदूत देवेंद्र सत्यार्थी : बेला फूले आधी रात

लोकदूत देवेंद्र सत्यार्थी : बेला फूले आधी रात

न थका न रुका न हटा न झुका किसी फक्कड़ बाबा का मैं चेला हुआ हजारीप्रसाद द्विवेदी की उपर्युक्त काव्य-पंक्ति के प्रेरणा पुंजों में कबीर, बनारसीदास चतुर्वेदी आदि का नाम आता है, पर ‘एक युग : एक प्रतीक’

16 जुलाई 2026

पार्टनर, तुम्हारी प्राथमिकता क्या है?

पार्टनर, तुम्हारी प्राथमिकता क्या है?

प्राथमिकताएँ न तय कर पाने का संकट जीवन में निरंतर बना रहा है। इससे जूझना मानव की नियति ही रही है। यूँ कहें कि मनुष्य की विवशता ही उसकी नियति है। इधर बीच का जीवन, जो आधा पक चुका है—उसे किस शीतगृह में

15 जुलाई 2026

ये कोई अच्छी बातें हैं भला... ज़बान के हवाले से

ये कोई अच्छी बातें हैं भला... ज़बान के हवाले से

कुछ-एक रोज़ पहले एक लौंडे को फ़ेसबुक पर ज़बान के हवाले से एक तहरीर लिखकर लोगों को लताड़ते हुए देखा। जी बेचैन हो गया देखकर। सोचने लगा कि ऐसी फ़िक्र तो ज़बान की शायद उन्हें भी न हुई होगी जो संस्कृत के

15 जुलाई 2026

फ़ीफ़ा, रोनाल्डो, अश्वेत और हज़ारों साल पुराने सांस्कृतिक टकराव की पुनरावृत्ति

फ़ीफ़ा, रोनाल्डो, अश्वेत और हज़ारों साल पुराने सांस्कृतिक टकराव की पुनरावृत्ति

पता नहीं, यह बात कहना कितनी तर्कसंगत होगा और इसमें कितनी ही बौद्धिक या साहित्यिक संभावना होगी कि यूरोप का वर्चस्ववाद बार-बार इस्लामिक एवं अफ़्रीकी संप्रभुता को सीमित करने की कोशिश करता है और हर दफ़ा ख