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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

20 अगस्त 2026

‘ज्ञानेंद्रपति को पढ़ना : चीज़ों की बनी-बनाई शक्ल पर संदेह करना’

‘ज्ञानेंद्रपति को पढ़ना : चीज़ों की बनी-बनाई शक्ल पर संदेह करना’

मुझे चेतना पारीक याद रहती हैं। कैसी सहज उभरी शिष्टता में उनके लिए आदरसूचक ‘हैं’ लिख रहा हूँ। वह अलहदा और उतने ही मख़्सूस कवि ज्ञानेंद्रपति की चेतना पारीक हैं। जितना उन्हें जान पाता हूँ, वह कोई दूर खड़

20 अगस्त 2026

गगन गिल से संवाद : स्त्री होने से कोई स्त्री लेखक थोड़े ही हो जाता है

गगन गिल से संवाद : स्त्री होने से कोई स्त्री लेखक थोड़े ही हो जाता है

गगन गिल हिंदी कविता का वह स्वर हैं, जिन्हें किसी एक वाद या विमर्श के दायरे में रखकर समझना संभव नहीं। अपनी ही सीमाओं को लगातार लाँघती उनकी कविता प्रचलित आलोचनात्मक मानकों से बाहर जाकर अपने लिए अर्थ और

19 अगस्त 2026

प्रियंवद का रचनालोक : जहाँ मनुष्य नैतिक नहीं, मनुष्य है

प्रियंवद का रचनालोक : जहाँ मनुष्य नैतिक नहीं, मनुष्य है

अधिमूल्यन से उत्पन्न बहुप्रशंसा और अतिव्याप्ति से उत्पन्न रुचिशीलता के इस समय में किसी के टेक्स्ट भर से आत्मीय होना, रचना और रचनाकार—दोनों के लिए—किसी पाठक को उदात्तता से भर देता है। देखने-सुनने-जानन

19 अगस्त 2026

‘बेला’ की 1000वीं पोस्ट : कुछ बात, कुछ बकवास

‘बेला’ की 1000वीं पोस्ट : कुछ बात, कुछ बकवास

यह ‘बेला’ की 1000वीं पोस्ट है। हमने गत वर्ष ‘हिन्दवी उत्सव’ से पूर्व संगत-शतक पूर्ण किया था। इस वर्ष ‘हिन्दवी उत्सव’ से पूर्व हमने बेला-सहस्र पूर्ण किया है। यह संख्या हमारे लिए केवल एक आँकड़ा न

18 अगस्त 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : अब पद नहीं, कुपद चलता है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : अब पद नहीं, कुपद चलता है

गताध्याय से आगे... आठ  उदय के बड़े-बुज़ुर्गों ने उदय से कभी पूछा ही नहीं कि तुम्हें हुआ क्या है, तुम क्यों दुखी रहते हो, आओ मेरे पास बैठो, मुझे बताओ, क्यों तुम ज़माने से ख़फ़ा हो? साहित्य की दुनिया

18 अगस्त 2026

गद्य की स्वरलिपि का संधान

गद्य की स्वरलिपि का संधान

हिंदी के काव्य-पाठ को लेकर आम राय शायद यह है कि वह काफ़ी लद्धड़ होता है जो वह है; वह निष्प्रभ होता है, जो वह है, और वह किसी काव्य-परंपरा की आख़िरी साँस गोया दम-ए-रुख़सत की निरुपायता होता है। आख़िरी ब

17 अगस्त 2026

हम आधा-आधा जीने के आदी हैं

हम आधा-आधा जीने के आदी हैं

~•~ हमारी अनुभूतियाँ विकृत हैं। हम सही से कुछ महसूस नहीं कर पाते। हमारी स्मृतियाँ क्षत-विक्षत हैं। हम ठीक-ठीक कुछ याद नहीं कर पाते, हम पूरी तरह कुछ विस्मृत नहीं कर पाते और अपनी इस असमर्थता को ‘सब समय

16 अगस्त 2026

बिंदुघाटी 2.0 : वोटिंग, विवेकाधिकार और आज़ादी का विचार

बिंदुघाटी 2.0 : वोटिंग, विवेकाधिकार और आज़ादी का विचार

• अधिक बूढ़े लोग कहते हैं कि अँग्रेज़ ही अच्छे थे। यह बात वे देश-विरोध के चलते नहीं कहते। वे शासन-प्रशासन में बाबुओं से लेकर उच्चपदस्थों को देखकर ऐसा कहते हैं। दोग़लेपन में लिभड़ा हुआ वर्तमान अतीतप्रेम क

15 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : ये जो देस है तेरा

शनिवारेर चिट्ठी : ये जो देस है तेरा

जन  क्या तुम विस्मय करोगी अगर कहूँ कि 15 अगस्त के दिन-विशेष के बारे में सोचूँ तो उल्लास से मेरे लौटने की अकेली मुकम्मल जगह मेरे बचपन में मिलती है! माँ सामने आती हैं। उन्होंने सुफ़ेद-सी सूती साड़ी पह

15 अगस्त 2026

इश्क़, इंक़लाब और इलाहाबाद

इश्क़, इंक़लाब और इलाहाबाद

पुराने शहर के पुराने इलाहाबादियों के पास थोक के भाव में नेहरू-गांधी ख़ानदान के क़िस्से हैं—जैसे-जैसे गंगा खिसककर यमुना के पास जाती रही, ठीक वैसे ही इलाहाबादियों ने इन गुज़रे क़िस्सों में स्वादानुसार

हिन्दवी उत्सव 2026

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