साहित्य और संस्कृति की घड़ी
प्रस्तुत आलेख शाइर और अनुवादक रियाज़ लतीफ़ की किताब ‘नज़्म की पूँछ’ पर एकाग्र है। आलेख में अपनी बात रखने के लिए उनकी अन्य रचनाओं के भी कुछ हवाले दिए गए हैं। ‘नज़्म की पूँछ’ 2024 में सुख़नकदा, अहमदा
ऐसा मेरे साथ कभी पहले नहीं हुआ था, तो यह बात मेरे मन में बैठ गई। ऑफ़िस से घर लौटते समय स्पॉटिफ़ाई पर अचानक लता मंगेशकर का एक गीत लूप में बज उठा, जिसे पहले कभी नहीं सुना था। गीत था, ‘हम तेरे प्यार में स
‘स्मृति ही दूसरा समय है’—मंगलेश डबराल की यह काव्यपंक्ति मन में कौंध रही थी, हिंदी के प्रसिद्ध आलोचक परमानंद श्रीवास्तव की याद में हो रहे गोरखपुर के आयोजन में जाते हुए। प्रेमचंद साहित्य संस्थान और 'सा
23 सितम्बर 2026
मैं नाम्चे बाज़ार में हूँ... क्यों हूँ! यह बताने के मायने कुछ नहीं निकलेंगे। बस इतना ही कहना काफ़ी होगा कि मैं नाम्चे बाज़ार में हूँ... क्योंकि मुझे यहाँ होना होगा। ठीक वैसे ही जैसे ‘Yesterday’ फ़िल्
इस विषय पर बहुत समय से कुछ लिखना चाह रही थी। हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के बाद अभिनेत्री कटरीना कैफ़ को लेकर आई भद्दी टिप्पणियों ने जैसे कोई पुराना ज़ख्म कुरेद दिया। कटरीना कुछ ही समय पहले
22 सितम्बर 2026
केतकी कुशारी डायसन [26 जून 1940 –11 सितंबर 2026] चली गईं। प्रस्थान विधिनिर्धारित है। इसे स्वीकार करने के अतिरिक्त हमारे पास कोई दूसरा उपाय नहीं। लेकिन एक बंगाली के रूप में हमें केतकी कुशारी डायसन जैस
ज़रा सोचिए, एक ऐसी मशीन हो जो आपकी लगभग हर समस्या सुलझा सके। वह ऊर्जा के नए स्रोत खोज ले, इंसानों को लंबी उम्र जीने सकने में मदद करे और हमें दूसरे तारों तक पहुँचा दे। लेकिन इतनी तरक़्क़ी के बाद भी एक
सूरज की पहली किरण उसके कमरे में दाख़िल हुई। दीवार से टकराकर वह उसके चेहरे पर ठहर गई। ठंडी हवा का एक झोंका उसकी पलकों को हल्के से छू गया, मानो रात भर उसे दर्द में लिपटा देख यह सुबह अपना सारा स्नेह उस
20 सितम्बर 2026
रील का क्या है! ‘हिन्दवी’ ने एक कॉलम घोषित किया था : ‘रीलमरील’। इसे जिन्हें लिखना था, वह लिख नहीं पाए। इसके बावजूद समय-समय पर इस कॉलम के अंतर्गत तीन लेख आए, जिनमें से एक मैंने भी लिखा। फिर यह कॉलम स्
19 सितम्बर 2026
चीज़ें पीतल फ़्रेम का पुराना आईना। लकड़ी की चरमराती कुर्सी। स्ट्राइप्ड कुशंस। रंग उड़ा हुआ फ़ारसी रग। हाथ से बुना मैक्रमे। दीवार पर टँगा पुराना नक़्शा। कुछ मोनोक्रोम फ़ोटोग्राफ़। कवि तादेऊष रूज़ेविच