Font by Mehr Nastaliq Web

बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

10 जनवरी 2026

‘विश्व पुस्तक मेला आज से...’

‘विश्व पुस्तक मेला आज से...’

विश्व का सबसे बड़ा पुस्तक आयोजन—नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला (NDWBF)—अपने 53वें संस्करण के साथ आज से शुरू हो रहा है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (एनबीटी), भारत, शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित नई दि

09 जनवरी 2026

‘घंटा’ फ़र्क़ नहीं पड़ता किसी कहानीकार के रहने या जाने से!

‘घंटा’ फ़र्क़ नहीं पड़ता किसी कहानीकार के रहने या जाने से!

कल के दिन की शुरुआत हुई कथाकार एवं ‘पहल’ पत्रिका के संपादक के रूप में समादृत ज्ञानरंजन के जाने की ख़बर से। 7 जनवरी की रात, जबलपुर में उनका निधन हो गया था। फिर पता चला कि गुरु घासीदास विश्वविद्यालय और

07 जनवरी 2026

प्रेम की घर वापसी

प्रेम की घर वापसी

आज, अभी, इस दिन, इस क्षण की लंबान कितनी हो सकती है? इसका एक वाजिब जवाब है—विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यास, ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ जितनी! इस उपन्यास को पढ़ते हुए पहली ही बात जो ध्यान खींचती है, वह

06 जनवरी 2026

कहानी : पिस्तौल

कहानी : पिस्तौल

और इस तरह पिस्तौल का मेरे जीवन में पदार्पण हुआ... लगा कि आँगन के उस सिरे से धड़ाम से कोई कूदा। देखा तो अपना नरेन था। यानी अपना नरेंद्र यानी नरेनिया। मेरा ‘जिगरी दोस्त’! उन दिनों जब भी कोई उसे मेरा

05 जनवरी 2026

शंखनाद : बुक फ़ेयर के लिए मुखौटे...

शंखनाद : बुक फ़ेयर के लिए मुखौटे...

जनवरी में होने वाली बुक फ़ेयर की आहट के बीच कई-कई यूनीसेक्स सैलूनों, ब्यूटीपार्लरों और स्पाओं में बुक फ़ेयर के लिए स्पेशल ऑफ़र देख, पढ़ और सुनकर चकित रह गया। साथ ही अपने मानसिक पिछड़ेपन पर रोना आया।

04 जनवरी 2026

स्त्री और माँ

स्त्री और माँ

प्रस्तुत लेख ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित ‘बेला’—‘सदी की आख़िरी माँएँ’, प्रणव मिश्र तेजस के लेख की प्रतिक्रिया में लिखा गया है। ‘सदी की आख़िरी माँएँ’ (मूल लेख) प्रथम—23 नवंबर को ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित हुआ। इसे

03 जनवरी 2026

बिछिया, बिछोह और वह आख़िरी ख़ाली पन्ना

बिछिया, बिछोह और वह आख़िरी ख़ाली पन्ना

ठहरे हुए हैं, याद आ रही है यात्राओं की। अलग-अलग जगहों की, अलग-अलग समय पर की गई यात्रा की। अलग-अलग सामान पर लटके विभिन्न देशों के स्टीकर दृश्य में हैं, कि अचानक इन दृश्यों को परे धकेलता हुए सामने आ जा

02 जनवरी 2026

सुधांशु फ़िरदौस से दस सवाल : जीवन एक घर है, जिसमें बेघर हूँ मैं

सुधांशु फ़िरदौस से दस सवाल : जीवन एक घर है, जिसमें बेघर हूँ मैं

सुधांशु फ़िरदौस (जन्म : 1985) इस सदी में सामने आई हिंदी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर हैं। वर्ष 2020 में उनकी कविताओं की पहली किताब ‘अधूरे स्वाँगों के दरमियान’ शीर्षक से प्रकाशित हुई। इस पुस्तक के लिए उन

01 जनवरी 2026

एक साधक रचनाकार

एक साधक रचनाकार

मैं विनोद कुमार शुक्ल के उपन्यासों का बहुत बड़ा प्रशंसक हूँ। उनके उपन्यासों ने जीवन को नए ढंग से देखना सिखाया है। यथार्थ को अलग-अलग तरीक़े से कैसे व्यक्त किया जा सकता है, यह बताया है। उनके सारे उपन्य

31 दिसम्बर 2025

आज वर्षांत और कल होने वाले वर्षारंभ के बीच कोई विच्छेद नहीं है

आज वर्षांत और कल होने वाले वर्षारंभ के बीच कोई विच्छेद नहीं है

आने-जाने से ही मिलकर यह संसार बना है। इन दोनों के बीच कोई विच्छेद नहीं है। विच्छेद की कल्पना हम अपने मन में ही करते रहते हैं। सृष्टि, स्थिति और प्रलय ये तीनों एकमेव होकर रह रहे हैं। सदा एक साथ बने हु