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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

17 जून 2026

‘राप्ती से गंगा तक, गंगा से राप्ती तक’

‘राप्ती से गंगा तक, गंगा से राप्ती तक’

राप्ती से गंगा तक राप्ती एक सदाबहार नदी है जो मेरे गाँव से लगकर बहती है। मेरे घर के छत से उसकी विशालता को देखा जा सकता है। मेरा बचपन इसकी धाराओं के साथ खेलने में बीता है। इसकी नन्हीं-नन्हीं मछलियों

17 जून 2026

मैं वापस आऊँगा : हमन हैं इश्क़ मस्ताना, हमन को होशियारी क्या

मैं वापस आऊँगा : हमन हैं इश्क़ मस्ताना, हमन को होशियारी क्या

इम्तियाज़ अली की फ़िल्मों के लाखों दीवानों में एक दीवानी मैं भी हूँ। क्या वजह है इस दीवानगी की... इसका जवाब है कनेक्ट या जुड़ाव। आप उनकी फ़िल्मों के किरदारों से जुड़ पाते हो और फ़िल्म ख़त्म होते-होते प

16 जून 2026

जीते चले जाने को पीछे मुड़कर देखना

जीते चले जाने को पीछे मुड़कर देखना

पेड़ों को अपने पुराने वसंत और पतझड़ याद नहीं रहते। हम अपने मौसम जीने से ज़्यादा याद रखते हैं। मौसम बाहर से ज़्यादा भीतर बीतते हैं। पतझड़ एक लेखक का आदिम आवास है। जहाँ निर्विकार रूप से पत्ते झड़ रहे ह

16 जून 2026

केवल ताली ही तो है : प्रयागराज के NCZCC में ‘ओथेलो’ और रवींद्रालय में ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ देखते दर्शकों का स्त्री-द्वेष

केवल ताली ही तो है : प्रयागराज के NCZCC में ‘ओथेलो’ और रवींद्रालय में ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ देखते दर्शकों का स्त्री-द्वेष

बीते दिनों इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में दो महत्त्वपूर्ण नाटकों का मंचन हुआ—19 मार्च 2026 को एनसीज़ेडसीसी (NCZCC) में शेक्सपीयर के ‘ओथेलो’ का, जिसका निर्देशन आलोक नैयर ने किया और 26 मार्च 2026 को रवींद

15 जून 2026

चे ग्वेरा : एक समर्पित क्रांतिकारी का एक पूँजीवादी चीज़ में बदलना

चे ग्वेरा : एक समर्पित क्रांतिकारी का एक पूँजीवादी चीज़ में बदलना

रजिस देब्रे ने बोलिविया की जेल में चे ग्वेरा का साक्षात्कार लिया था। बाद में उन्होंने लिखा, “चे आधुनिक युग के ईसा मसीह हैं, बल्कि मुझे लगता है कि उन्हें उससे भी अधिक यातना सहनी पड़ी। दो हज़ार वर्ष पहल

15 जून 2026

हम ‘लगान’ देख रहे थे

हम ‘लगान’ देख रहे थे

साल 2001, जून का महीना। तारीख़ याद नहीं... गूगल बता सकता है, लेकिन क्या पूछना... मैं  नया-ताज़ा पटना पहुँचा था, दूसरी बार—इस बार स्थायी रूप से रहने के लिए, क्योंकि मैं आयरन गेट तोड़ चुका था... जी

14 जून 2026

होर्खे लुइस बोर्खेस का साक्षात्कार : ‘मैं दूसरी दुनिया में रहूँगा’

होर्खे लुइस बोर्खेस का साक्षात्कार : ‘मैं दूसरी दुनिया में रहूँगा’

होर्खे लुइस बोर्खेस (Jorge Luis Borges) बीसवीं शताब्दी के उन विरल साहित्यकारों में हैं जिन्होंने कविता, कहानी, निबंध और दर्शन के बीच की सीमाओं को लगभग समाप्त कर दिया। वह केवल अर्जेंटीना के लेखक नहीं

14 जून 2026

रविवासरीय 4.0 : यात्रा जितनी रही, वृत्तांत उतना कहाँ!

रविवासरीय 4.0 : यात्रा जितनी रही, वृत्तांत उतना कहाँ!

• यात्रा जितनी रही, वृत्तांत उतना कहाँ!—इस शीर्षक के साथ—‘रविवासरीय’ की यह चौथी ऋतु ‘बेला’ पर आज समाप्त हो रही है। गई तीन ऋतुओं की भाँति ही इस स्तंभ को इस ऋतु में भी पर्याप्त प्रेम प्राप्त हुआ। इस स्

14 जून 2026

कहानी : बेबल की लाइब्रेरी

कहानी : बेबल की लाइब्रेरी

पिछली सदी के अर्जेंटीना के सुविख्यात लेखक-कवि बोर्खेस हिंदी पाठकों के लिए अनजान नहीं हैं। उनकी कहानियों में ‘कल्पना’, ‘अनंत’, समय, स्मृति, भूलभुलैया और ‘किताबों की दुनिया’ जैसी अवधारणाएँ मिलती हैं। व

13 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

सबसे पहले तुम, शशि! इसलिए नहीं कि तुम जीवन में सबसे पहले आईं या कि तुम सबसे ताज़ा स्मृति हो। इसलिए कि मेरा होना अनिवार्य रूप से तुम्हारे होने को लेकर है... [शेखर : एक जीवनी, शेखर : उत्थान—प्रवेश