साहित्य और संस्कृति की घड़ी
~•~ हमारी अनुभूतियाँ विकृत हैं। हम सही से कुछ महसूस नहीं कर पाते। हमारी स्मृतियाँ क्षत-विक्षत हैं। हम ठीक-ठीक कुछ याद नहीं कर पाते, हम पूरी तरह कुछ विस्मृत नहीं कर पाते और अपनी इस असमर्थता को ‘सब समय
17 अगस्त 2026
एक ‘टके सेर भाजी टके सेर खाजा’ एक लोक कहावत है जिससे हिंदी साहित्य के पाठक संभवतः भारतेंदु के नाटक ‘अंधेर नगरी’ के माध्यम से परिचित हुए (कुछ पहले भी रहे होंगे)। भारतेंदु के नाटक ‘अंधेर नगरी’ का यह
16 अगस्त 2026
• अधिक बूढ़े लोग कहते हैं कि अँग्रेज़ ही अच्छे थे। यह बात वे देश-विरोध के चलते नहीं कहते। वे शासन-प्रशासन में बाबुओं से लेकर उच्चपदस्थों को देखकर ऐसा कहते हैं। दोग़लेपन में लिभड़ा हुआ वर्तमान अतीतप्रेम क
15 अगस्त 2026
जन क्या तुम विस्मय करोगी अगर कहूँ कि 15 अगस्त के दिन-विशेष के बारे में सोचूँ तो उल्लास से मेरे लौटने की अकेली मुकम्मल जगह मेरे बचपन में मिलती है! माँ सामने आती हैं। उन्होंने सुफ़ेद-सी सूती साड़ी पह
पुराने शहर के पुराने इलाहाबादियों के पास थोक के भाव में नेहरू-गांधी ख़ानदान के क़िस्से हैं—जैसे-जैसे गंगा खिसककर यमुना के पास जाती रही, ठीक वैसे ही इलाहाबादियों ने इन गुज़रे क़िस्सों में स्वादानुसार
14 अगस्त 2026
बाज़, चिड़िया और अनुवाद एक प्रसिद्ध तुर्की नाटक लैला व मजनूँ में ख़य्याम की एक रुबाई यूँ आती है : Her sabah yeni bir gün doğarken, Bir gün de eksilir ömürden; Her şafak bir hırsız gibidir Elin
13 अगस्त 2026
28, 29 और 30 जुलाई 2026 को काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में एक अलहदा संगोष्ठी हुई—‘नयी चाल की हिन्दी’। यह संगोष्ठी हिन्दी विभाग की जानी-पहचानी और अधिकांशतः उबाऊ संगोष्ठियों से अलग और काफ़
शराबियों को एक ‘अस्मितामूलक’ इकाई/क़ौम (आइडेंटिटी) के रूप में देखना चाहिए कि नहीं? सुनने में यह अतिरंजित लग सकता है, लेकिन क्रूर सच्चाइयाँ अक्सर ही अतिरंजित लगती हैं। शराबियों को आइडेंटिटी नहीं मा
12 अगस्त 2026
आज 12 अगस्त है। छह साल पहले कांग्रेस के प्रवक्ता राजीव त्यागी ने न्यूज़ डिबेट के दौरान आए हार्ट अटैक में अपनी जान गँवा दी थी। कम से कम उनके डॉक्टर ने तो यही कहा था। हर साल उनकी याद आती है। इस बार याद
11 अगस्त 2026
गताध्याय से आगे... सात भावुकता दुर्गण नहीं है, मनुष्य होने की उच्च अवस्था है। भावुक व्यक्तियों ने ही सच्चा प्रेम किया है। समाज में करुणा का प्रसार किया है। मनुष्यता की रक्षा की है। देश के लिए
हिन्दवी उत्सव 2026
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