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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

04 अगस्त 2026

‘धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : बहादुरी सीखने की चीज़ नहीं है’

‘धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : बहादुरी सीखने की चीज़ नहीं है’

गताध्याय से आगे... छह  गंज गोबरहवा में मोनालिसा की मुस्कान को कोई नहीं जानता था। लेखक भी इस शहर में इन्हीं कोई का हिस्सा थे, उनका कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं था। वे गंज गोबरहवा विश्वविद्यालय के

03 अगस्त 2026

निम्स दाई! हिमाल आपको बुला रहे हैं...

निम्स दाई! हिमाल आपको बुला रहे हैं...

Giving up is not in the blood, Sir! Not in the blood. — Nirmal ‘Nimsdai’ Purja 30 जुलाई 2026 | दिल्ली/काराकोरम उस दिन दिल्ली मेट्रो से दफ़्तर जाते हुए, मुझे कोई अंदाज़ा नहीं था कि इस समय निर्म

03 अगस्त 2026

जेन ज़ी : इंस्टाग्राम से जंतर-मंतर तक

जेन ज़ी : इंस्टाग्राम से जंतर-मंतर तक

किसी लोकतांत्रिक देश में विरोध-प्रदर्शन वहाँ की जनता का मूलभूत अधिकार होता है। इसी अधिकार के सहारे वह लोकतांत्रिक देश फल-फूल रहा होता है, अन्यथा सरकार सर्वाधिकारवादी व्यवस्था के रूप में बदलने लगती है

02 अगस्त 2026

बिंदुघाटी 2.0 : ‘देख अपने लीडरों को शोक मत कर... देश ये लीडर नहीं’

बिंदुघाटी 2.0 : ‘देख अपने लीडरों को शोक मत कर... देश ये लीडर नहीं’

• ‘बिंदुघाटीकार’ बहुत-सी बातों के समाधान के लिए पुराने कवियों, शास्त्र-रचयिताओं और विचारकों के पास लौटता है। ये लोग और इनकी रचनाएँ अपने-अपने समय और उसके प्रसंगों से गहरे संबद्ध हैं। फिर भी इनकी कालजय

01 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : गाली बयान नहीं चीख़ है

शनिवारेर चिट्ठी : गाली बयान नहीं चीख़ है

सिनेमा  शासकों को यह भ्रम प्रिय होता है कि वे इतिहास लिखते हैं। वे यह नहीं समझते कि एक पोस्टर, एक भंगिमा, एक नारे, एक मीम से उनके इस कथित इतिहास को चुनौती दी जा सकती है। इन दिनों मुझे एक फ़िल्म याद

01 अगस्त 2026

जेन ज़ी को ग़लत मत समझियो

जेन ज़ी को ग़लत मत समझियो

काफ़ी समय से कॉकरोच जनता पार्टी के हालिया आंदोलन की चर्चा है। इस आंदोलन के कारण शिक्षा मंत्री को इस्तीफ़ा देना पड़ा। कई लोग इसका श्रेय जेन ज़ी को दे रहे हैं, क्योंकि इस आंदोलन में इस पीढ़ी की भागीदार

31 जुलाई 2026

अपने-अपने झोले : अपने-अपने प्रेमचंद

अपने-अपने झोले : अपने-अपने प्रेमचंद

फिर इलाहाबाद। तारीख़ें 22, 23, 24 और 25 फ़रवरी। चुनी हुई जगह—हिंदुस्तानी अकादेमी का सभागार, सन् 1981 वे अपनी बलिष्ठ भुजाओं पर बल्ले उभारते, मूँछें मरोरते, ताल ठोंकते, शक्ति-प्रदर्शन के तमाशबीनों क

31 जुलाई 2026

मास्टर की अरथी नहीं थी, आशिक़ का जनाज़ा था

मास्टर की अरथी नहीं थी, आशिक़ का जनाज़ा था

जीवन मुश्किल चीज़ है—तिस पर हिंदी-लेखक की ज़िंदगी—जिसके माथे पर रचना की राह चलकर शहीद हुए पुरखे लेखक की चिता की राख लगी हुई है। यों, आने वाले लेखक का मस्तक राख से साँवला है। पानी, पसीने या ख़ून से धुलकर

31 जुलाई 2026

ईदगाह की सरज़मीं : प्रेमचंद और गोरखपुर

ईदगाह की सरज़मीं : प्रेमचंद और गोरखपुर

जब कभी ईद आती है या ईद का ज़िक्र छिड़ता है, एक कहानी और उसके किरदार अपने-आप ज़ेहन में उतर आते हैं—प्रेमचंद की ‘ईदगाह’, हामिद और दादी अमीना। हामिद का चिमटा, उसकी क़ुर्बानी और दादी के प्रति उसका बेपनाह

30 जुलाई 2026

द ओडिसी : हर मनुष्य अंततः घर लौटना चाहता है

द ओडिसी : हर मनुष्य अंततः घर लौटना चाहता है

जीवन में कुछ चीज़ें अकल्पनीय ही नहीं, अनिश्चित भी हैं। जैसे अंतरिक्ष में आकाशगंगाएँ लगातार एक-दूसरे से दूर जा रही हैं, फिर भी हम ब्रह्मांड के विस्तार के बारे में सब कुछ ठीक-ठीक नहीं बता सकते। हम ज्वा

हिन्दवी उत्सव 2026

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