अपना नोबेल चाँद से भी दूर क्यों लगता है?
हर साल अक्टूबर आते ही एक अलग बयार चलने लगती है। शिउली के फूल खिलते हैं। रावण जलते हैं। नोबेल मिलते हैं। नवंबर में दिसंबर आने की भड़भड़ भरी रहती है। अक्टूबर चौदहवीं का चाँद है। यानी तनिक गुंजाइश है—गत
आख़िरी सवाल : ब्रह्मांड का अंतिम अंत
ज़रा सोचिए, एक ऐसी मशीन हो जो आपकी लगभग हर समस्या सुलझा सके। वह ऊर्जा के नए स्रोत खोज ले, इंसानों को लंबी उम्र जीने सकने में मदद करे और हमें दूसरे तारों तक पहुँचा दे। लेकिन इतनी तरक़्क़ी के बाद भी एक
ब्लैक होल्स की द्विअर्थी दुनिया
स्टीफ़न हॉकिंग के ब्लैक होल पर दिए इस लेक्चर (2016 BBC Reith Lectures on black holes) को पढ़ते-पढ़ते एक शहर से दूसरी सहर में आ गए। ‘नव भारत’ की ट्रेनों में मिलने वाले रोटीनुमा या परांठानुमा या रोटी औ
विज्ञान कथा : दंभ
अप्रैल, सन् 2101 यूँ धरती के सीने पर उगी आधुनिकतम संरचनाओं ने उसे एक विशिष्ट सौंदर्य प्रदान किया है, लेकिन कुछ ज़ख़्म ऐसे हैं जो छिप नहीं पाते। ये ज़ख़्म जलवायु परिवर्तन ने दिए हैं। अप्रैल-मई माह
मुझे यूट्यूबर नहीं बनना, पर एक यूट्यूब-चैनल बनाया है : AmoebAI
जिस वक़्त मुझे सबसे ज़्यादा जॉब सिक्योरिटी की ज़रूरत थी, सबसे ज़्यादा फ़ाइनेंशियल सिक्योरिटी की ज़रूरत थी, उस वक़्त मैंने सबसे ज़्यादा बचकाना काम किया। मैंने जॉब छोड़ दी, पर क्यों? और यह बात मैं आप लोगो
भारतीय विज्ञान संस्थान : एक यात्रा, एक दृष्टि
दिल्ली की भाग-दौड़ भरी ज़िंदगी के बीच देश-काल परिवर्तन की तीव्र इच्छा मुझे बेंगलुरु की ओर खींच लाई। राजधानी की ठंडी सुबह में, जब मैंने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से यात्रा शुरू की, तब मन क
ख़ुशियों का एरोडायनामिक्स : काग़ज़ के हवाई जहाज़
हर साल 26 मई को पार्कों, खेत-खलिहानों और कक्षाओं में एक अजीब-ओ-ग़रीब लेकिन बेहद रोमांचक दृश्य देखने को मिलता है : आसमान रंग-बिरंगे और सफ़ेद रंग के काग़ज़ के हवाई जहाज़ों से भर जाता है। नेशनल पेपर एयरप्लेन