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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

08 अप्रैल 2026

‘मिलन टॉकीज : एक झलक का इंतज़ार’

‘मिलन टॉकीज : एक झलक का इंतज़ार’

पूर्वी उत्तर प्रदेश में गौना उर्फ़ द्विरागमन प्रथा तब तक विद्यमान थी, जिसके तहत शादी के बाद वर अकेले कुछ स्मृतियों और तमाम ‘अनजाने’ स्पर्शों कंपकंपाहटों, कपड़ों की सरसराहटों, हाथों के मेहंदी की गहन गंध

07 अप्रैल 2026

रागदर्पण : वे कैसी मासूमियत के दिन थे...

रागदर्पण : वे कैसी मासूमियत के दिन थे...

वो कौन हैं जिन्हें तौबा की मिल गई फ़ुर्सत हमें  गुनाह भी  करने को  ज़िंदगी  कम  है — आनंद नारायण मुल्ला कल रात यह शेर कहने वाले को दिल से सलाम कहा कि इसे पढ़ते हुए मैं बहुत पीछे तक झाँक आई।

06 अप्रैल 2026

शिवेन्द्र से 10 सवाल : मुंबई मुझे मज़दूरों का शहर लगता है

शिवेन्द्र से 10 सवाल : मुंबई मुझे मज़दूरों का शहर लगता है

शिवेन्द्र हिंदी की नई पीढ़ी के कथाकार हैं। वह मुंबई में रहते हैं। उनका एक उपन्यास (चंचला चोर) और दो कहानी-संग्रह (‘चॉकलेट फ़्रेंड्स और अन्य कहानियाँ’ और ‘सतरूपा’) प्रकाशित हो चुके हैं। आज प्रस्तुत है

06 अप्रैल 2026

मेरे रचनात्मक द्वंद्व

मेरे रचनात्मक द्वंद्व

मैं एक लेखक हूँ, यह कहने के लिए कितने उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा है। बतौर लेखक यहाँ या कहीं भी, खड़े होने के लिए मैंने लंबी यात्रा तय की है। प्रथमतः आत्म-स्वीकृति। इस आत्म-स्वीकृति तक पहुँचना जट

05 अप्रैल 2026

रचनात्मकता और द्वंद्व

रचनात्मकता और द्वंद्व

पेड़-पौधों की ही तरह हर रचनाकार अपनी मिट्टी, अपने परिवेश की उत्पत्ति होता है । मेरा यह कहना बेहद सामान्य कथन है । यह तो कहा जाता ही रहा है । फिर मैं नया क्या कह रहा हूँ? मैं नया बिल्कुल नहीं कह रहा। 

04 अप्रैल 2026

आधुनिकतावाद से सामना : मेरी सृजनात्मकता और उसके समक्ष चुनौतियाँ

आधुनिकतावाद से सामना : मेरी सृजनात्मकता और उसके समक्ष चुनौतियाँ

एक ‘सृजनात्मकता’ शब्द से मेरे मन में प्राथमिक तौर पर दो चित्र उभरते हैं—एक, रोपाई के लिए बीज से पौध तैयार करने की अपनी क्यारी को सुबह की धुंध में निरखता हुआ एक अकेला किसान; और दूसरी, लालटेन की रोश

04 अप्रैल 2026

चुप्पी में सारे उत्तर छुपे होते हैं

चुप्पी में सारे उत्तर छुपे होते हैं

20 जुलाई 2022 अदीब अचानक नींद से उठ बैठा। किसी ऊबड़-खाबड़ सपने की वजह से शायद। कुछ क्षण बाद ठीक से उसकी चेतना लौटी तो उसको लगा कि वह अकेला नहीं सो रहा है, कमरे में चैतन्या की यादें भी सो रही हैं। इस

03 अप्रैल 2026

मेरी रचनात्मकता और मेरे द्वंद्व

मेरी रचनात्मकता और मेरे द्वंद्व

बरसों पहले मैंने एक लेख लिखा था, लगभग इसी मामले में कुछ सोचा था कि रचनाकार की अनुभूति और जो  जीवन वह जीता है और जो कुछ भी वह लिखता है या लिख पाता है उसमें कितना अंतर्विरोध होता है। किसी भी रचनाकार के

03 अप्रैल 2026

कथा अनिल गुरव और सचिन तेंदुलकर की

कथा अनिल गुरव और सचिन तेंदुलकर की

दुनिया के नायक जितना मनोरंजन करते हैं, उतने बड़े होते हैं। बाक़ी सब जो अस्ल में दुनिया बनाते हैं और इसमें रहते हैं—वे मज़दूर हैं और मज़दूरों की ज़िंदगी को भुला दिया जाता है। उनकी मौत को हम याद करते ह

02 अप्रैल 2026

शांतिनिकेतन डायरी : ‘संगमन’ के दौरान

शांतिनिकेतन डायरी : ‘संगमन’ के दौरान

22 नवंबर 2025, मुंबई एयरपोर्ट पर हूँ। सुबह का समय है। सूर्योदय देख रहा हूँ। सुबह का शीतल सूर्य। जीवन की आपाधापी में रोज़ एक दृश्य ऐसा दिखता है जो सुंदर है। हर किसी को अपने हिस्से का सौंदर्य मिल