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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

28 अप्रैल 2026

‘दो ग्रह, दो भाषाएँ : पृथ्वी और मंगल के साहित्य का अनुवाद-विमर्श’

‘दो ग्रह, दो भाषाएँ : पृथ्वी और मंगल के साहित्य का अनुवाद-विमर्श’

पिछले दिनों गाँव में परफैरा हुआ, कुछ लोग मच्छी मार्केट लगाए बतिया रहे थे। वे क्या बात कर रहे थे और उसका अर्थ क्या था? कुछ नहीं सूझ रहा था! वे या तो गाली-गलौज कर रहे थे या फिर अर्थ पर ध्यान दिए बग़ैर व

27 अप्रैल 2026

लंबी कविताओं पर खुलकर हुई बहस : ‘अर्थात्’ की पाँचवीं कड़ी रही ख़ास

लंबी कविताओं पर खुलकर हुई बहस : ‘अर्थात्’ की पाँचवीं कड़ी रही ख़ास

‘चेख़व के कथा-साहित्य का सौंदर्यशास्त्र’ पर केंद्रित रही ‘अर्थात्’ की चौथी कड़ी के बाद इस बार विवेचना का विषय रहा—‘हिंदी की लंबी कविताएँ और उनका पुनर्पाठ’। इस पाँचवें आयोजन में बतौर वक्ता कवि-द्वय—देव

26 अप्रैल 2026

रविवासरीय 4.0 : मेरी बहन की कविताएँ, एक प्लेलिस्ट की याद और थोड़ा-सा कानपुर

रविवासरीय 4.0 : मेरी बहन की कविताएँ, एक प्लेलिस्ट की याद और थोड़ा-सा कानपुर

• एक बंद घर में प्रतीक्षा भरी होती है। एक प्रतीक्षा जिसमें इच्छा नहीं होती। डोरबेल बजती और बजती और बजती ही रहती है। इस पर वस्तुएँ कैसे प्रतिक्रिया करती हैं, इस पर गंध कहाँ तक जा सकती है, इस पर मनुष्य

25 अप्रैल 2026

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

शनिवारेर चिट्ठी : अनुशोचना और बाक़ी गल्प

स्फुलिंग कमरा-तर, कमरा-कम या अ-कमरा जैसे शब्द भी कहीं होते हैं, कहो तो! तो फिर बहुत से कमरों के बारे में अंतर की कुछ-कुछ बातें कहने के लिए यो-वो शब्द न हो तो किस कार्य में लगेगा वह कवि के? अंतर की

24 अप्रैल 2026

जगह-जगह 2.0 : पुणे के बहाने

जगह-जगह 2.0 : पुणे के बहाने

जाऊ नका कोणी तिथे जाऊ नका कोणी जे गेले, नाही आले परतोनी तुका पंढरीसी गेला पुन्हा जन्मा नाही आला पंढरीचे भूत मोठे — संत तुकाराम (1608-1650) संत तुकाराम इस अभंग में पंढरपुर के अलौकिक आकर्ष

24 अप्रैल 2026

शपथ पर ग्रहण

शपथ पर ग्रहण

वह श्वेतवस्त्रधारिणी अचानक मेरे सामने उपस्थित हो गई। उस म्लानमुख, नतशीश नायिका ने आते ही आग्रह किया—“मुझे ग्रहण करें कवि!” मैंने अपरिचय की दीवार को ढाहने के उद्देश्य से प्रश्न किया—“पहले अपना नाम

23 अप्रैल 2026

विराम-चिह्नों की क्रांति और एम डैश की सत्ता का अंत

विराम-चिह्नों की क्रांति और एम डैश की सत्ता का अंत

हाल ही में मेरी मुलाक़ात एम डैश से हुई। बेहद परेशान, दुखी, चिंतित और बेचैन अवस्था में बैठा था। चेहरा भावप्रवण, अश्रु-भरे नयन, जगत के उलाहनों से क्षुब्ध। ख़ुद को भाषा और लेखन के प्रिय साथी से सिर्फ़ स

23 अप्रैल 2026

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र सिर्फ़ दूरी का नहीं होता; यह एक ऐसे अँधेरे से गुज़रने जैसा होता है, जहाँ हर क़दम पर आदमी ख़ुद से थोड़ा-थोड़ा टूटता है... और मैं अब इस झूठ के साथ नहीं जीना चाहता कि

22 अप्रैल 2026

‘मालिक’ का मलबा

‘मालिक’ का मलबा

ख़ून कम कर अब कि कुश्तों के तो पुश्ते लग गए क़त्ल  करते  करते   तेरे  तीं   जुनूँ   हो   जाएगा [अब ख़ून करना रोक, लाशों की लकीरें लग चुकी है। (वरना) क़त्ल करते-करते तू पागल हो जाएगा।] — मीर

22 अप्रैल 2026

नई पदचापों की पहचान : ‘तीन कवि तीन किताबें’

नई पदचापों की पहचान : ‘तीन कवि तीन किताबें’

11 अप्रैल को दिल्ली के सुरजीत भवन में आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी ‘तीन कवि तीन किताबें’ केवल एक सामान्य पुस्तक-परिचर्चा नहीं थी, बल्कि समकालीन हिंदी कविता की नई आवाज़ों, उनके सरोकारों और समय की बेचैनिय