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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

22 फरवरी 2026

‘प्रेम के पाँच पत्र और प्रलोभन की एक कथा’

‘प्रेम के पाँच पत्र और प्रलोभन की एक कथा’

मेरानो, 15 जून 1920 मंगलवार इस अलस्सुबह मैंने फिर तुम्हें स्वप्न में देखा। हम साथ बैठे थे और तुम मुझे दूर कर रही थीं—ग़ुस्से से नहीं, सहज आत्मीयता से। मैं बेहद दुखी था। इसलिए नहीं कि तुम मुझे दूर क

21 फरवरी 2026

ओ रोमियो : क्राइम-रोमांस का थका हुआ प्रयोग

ओ रोमियो : क्राइम-रोमांस का थका हुआ प्रयोग

O Romeo, Romeo! wherefore art thou Romeo?—ओ रोमियो, रोमियो! तुम रोमियो क्यों हो? शुरुआत के पाँच मिनट उलझन में नहीं बीते। बहुत सीधा-सादा कथानक आदित्य धर या सिद्धार्थ आनंद सरीखे डायरेक्टरों की फ़िल्म

18 फरवरी 2026

नवोदय विद्यालय के पच्चीस साल : स्मृतियों की यात्रा

नवोदय विद्यालय के पच्चीस साल : स्मृतियों की यात्रा

इस साल हमारे नवोदय विद्यालय [जवाहर नवोदय विद्यालय छिंदपाली, महासमुंद (छत्तीसगढ़)] को पच्चीस बरस पूरे हो रहे हैं। 1 नवंबर 2000 को दो बड़ी घटनाएँ इतिहास में घटी थीं। पहला यह कि इस दिन हिंदुस्तान का दिल

17 फरवरी 2026

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

पत्र : प्रकाश के साक्षी सेबास्टिओं सालगाडो के नाम

प्रिय सेबास्टिओं, प्रेरणा के अमिट स्रोत शांति और सामंजस्य के दूत विविधता के उपासक, प्रकृति के अद्भुत सहचर आज से 12 साल पहले मेरे एक फ़ोटोग्राफ़र मित्र अमन ने मुझे तुम्हारे बारे में बताया था।

16 फरवरी 2026

छोटी नदियों का बड़ा शोक

छोटी नदियों का बड़ा शोक

यदि कविता, साहित्य की प्राचीनतम विधा है तो यह भी सही है कि शायद ही ऐसा कोई कवि होगा जो अपने साहित्यिक जीवन में नदी पर कविता न लिखे। ऋग्वेद तो कविता की सबसे प्राचीनतम किताब है और उसमें नदियों के विवरण

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-3

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-3

दूसरी कड़ी से आगे... तीन मेरे लिए वे कविता का ककहरा सीखने के दिन थे। कवि-मित्र प्रकाश के सहारे यह संग्रह ‘अपनी केवल धार’ पढ़ गया। यह ‘धार’ कविता दिमाग़ में बैठ गई थी। मैंने उन दिनों अपने मित्रों

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-2

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-2

पहली कड़ी से आगे... दो  कभी-कभी एक कहानी, एक उपन्यास और एक कविता भी आपको अमर कर सकती है। अरुण कमल की यह रोमांटिक, उधार वाली कविता इस श्रेणी की कविता है। कभी तुलसीदास ने लिखा था, “नहिं दरिद्र सम

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

नवीं कड़ी से आगे... दस अरुण कमल सत्तर साल से अधिक का जीवन देख चुके हैं और वरिष्ठ कवियों की सूची में भी आ चुके हैं। अरुण कमल हिंदी में प्रसिद्ध और लोकप्रिय कवि भी हैं। कभी रामचंद्र शुक्ल ने लिखा

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-5

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-5

चौथी कड़ी से आगे... पाँच अरुण कमल क़स्बे की मानसिकता वाले पटने के कवि हैं। एक ख़ास पटनिया आग्रह है उनकी कविता में। अरुण कमल की कविता में एक पटना-टोन लगातार उपस्थित है, जैसे राजेश जोशी में भोपाल

15 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-7

छठी कड़ी से आगे... सात अरुण कमल ‘कविता की राजनीति’ को उसी रिपोर्टर के निगाह से तौलते और फिर बोलते हैं जिसमें उन्हें फ़ायदा ज़्यादा दिखता है। काफ़ी गंभीरता से दिया गया वक़्तव्य है, जहाँ अपने को