साहित्य और संस्कृति की घड़ी
03 मई 2026
• प्रवेश आसान होता है, अगर परिचय प्रगाढ़ हो। इस राह में परिचय की स्मृति और संदर्भ भी सहायक हो सकते हैं। यों भी न हो, तब भूमिकाएँ काम आती हैं। वे बताती हैं कि व्यक्ति जिसमें प्रवेश करने जा रहा है, वह व्
छायालीन यह दृश्य है या एक ठहरा हुआ उच्चारण! जैसे समय ने अपनी जीभ बाहर निकाल शब्द को अधूरा छोड़ दिया हो। क्षितिज पर शहर कोई ठोस आकृति नहीं, धुंध का अभ्यास है। वह अपने होने को सिद्ध नहीं करता, संकेत
01 मई 2026
कितनी तीखी ठंड है, एंगेल्स! कैसी गहरी निस्तब्धता की ओर बढ़ती जा रही है यह पृथ्वी! फिर भी देखो, दिसंबर की मृत्यु को भुलाकर, जनवरी की जड़ता को पीछे छोड़कर, लंदन की सड़कों पर एक नई चेतना जन्म ले रही है।
‘हिन्दवी’ द्वारा आयोजित यह विशेष कार्यक्रम ‘हिंदियाँ’ साहित्य और सिनेमा में लोक-भाषा की भूमिका और उसके विस्तार को केंद्र में रखेगा। इस आयोजन का आने वाले समय में भाषा, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति
कबीर आज इतने समय बाद भी प्रासंगिक हैं। उनकी मौजूदगी के माध्यम बदल गए हैं, लेकिन वह आज भी किसी न किसी रूप में अन्य कवियों की तुलना में अधिक प्रभावी और जीवंत महसूस होते हैं। स्कूल की किताबों में दोहों
हिंदी सिनेमा में अभिनय की जो परंपरा नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, पंकज कपूर और रघुवीर यादव जैसे कलाकारों के माध्यम से तथाकथित मुख्यधारा में विकसित होती है, उसे इरफ़ान ख़ान ने नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। इरफ़
28 अप्रैल 2026
पिछले दिनों गाँव में परफैरा हुआ, कुछ लोग मच्छी मार्केट लगाए बतिया रहे थे। वे क्या बात कर रहे थे और उसका अर्थ क्या था? कुछ नहीं सूझ रहा था! वे या तो गाली-गलौज कर रहे थे या फिर अर्थ पर ध्यान दिए बग़ैर
‘चेख़व के कथा-साहित्य का सौंदर्यशास्त्र’ पर केंद्रित रही ‘अर्थात्’ की चौथी कड़ी के बाद इस बार विवेचना का विषय रहा—‘हिंदी की लंबी कविताएँ और उनका पुनर्पाठ’। इस पाँचवें आयोजन में बतौर वक्ता कवि-द्वय—देव
• एक बंद घर में प्रतीक्षा भरी होती है। एक प्रतीक्षा जिसमें इच्छा नहीं होती। डोरबेल बजती और बजती और बजती ही रहती है। इस पर वस्तुएँ कैसे प्रतिक्रिया करती हैं, इस पर गंध कहाँ तक जा सकती है, इस पर मनुष्य
25 अप्रैल 2026
स्फुलिंग कमरा-तर, कमरा-कम या अ-कमरा जैसे शब्द भी कहीं होते हैं, कहो तो! तो फिर बहुत से कमरों के बारे में अंतर की कुछ-कुछ बातें कहने के लिए यो-वो शब्द न हो तो किस कार्य में लगेगा वह कवि के? अंतर की