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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

10 अप्रैल 2026

‘ईरान में भारत का ख़्वाब : शाहनामा में पंचतंत्र और शतरंज’

‘ईरान में भारत का ख़्वाब : शाहनामा में पंचतंत्र और शतरंज’

فیلش یاد هندوستان کرده फ़ीलश याद-ए-हिन्दोस्तान करद : [उसके हाथी को हिंदुस्तान याद आ गया—एक फ़ारसी कहावत, जिसका आशय है किसी प्रिय जगह या अपने अतीत में लौटने की कसक या हूक उठना।] ~ ईरान को सार

10 अप्रैल 2026

वसंत का प्रताप

वसंत का प्रताप

वसंत। अहा! शब्द कान के पर्दों पर पड़ते ही हृदय को आह्लादित कर देता है। शरद की तीक्ष्ण शीतलहर प्रस्थान कर चुकी है। ग्रीष्म के आगमन की आहट भी अभी निकट नहीं है। न ठिठुरन है, न पसीने से भीगता बदन ही। अलाव

09 अप्रैल 2026

आज ‘बेला’ का दूसरा जन्मदिन है

आज ‘बेला’ का दूसरा जन्मदिन है

आज से दो वर्ष पूर्व वे देवियों के दिन थे, जब हिन्दी और ‘हिन्दवी’ के व्यापक संसार में ‘बेला’ का प्राकट्य हुआ था। देवियों की उपस्थिति और कला—रूप और कथ्य दोनों ही स्तरों पर—अत्यंत समृद्ध होती है। यह समृ

08 अप्रैल 2026

मिलन टॉकीज : एक झलक का इंतज़ार

मिलन टॉकीज : एक झलक का इंतज़ार

पूर्वी उत्तर प्रदेश में गौना उर्फ़ द्विरागमन प्रथा तब तक विद्यमान थी, जिसके तहत शादी के बाद वर अकेले कुछ स्मृतियों और तमाम ‘अनजाने’ स्पर्शों कंपकंपाहटों, कपड़ों की सरसराहटों, हाथों के मेहंदी की गहन गंध

08 अप्रैल 2026

राहुल सांकृत्यायन की विरासत और ज्ञान संरक्षण की चुनौतियाँ

राहुल सांकृत्यायन की विरासत और ज्ञान संरक्षण की चुनौतियाँ

ज्ञान केवल पुस्तकों, पांडुलिपियों और अभिलेखों में सीमित नहीं होता, बल्कि वह एक जीवंत परंपरा है। वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी विचार, अनुभव और संवेदनाओं के माध्यम से प्रवाहित होता है। इसी ज्ञान-परंपरा को सहेजने औ

07 अप्रैल 2026

रागदर्पण : वे कैसी मासूमियत के दिन थे...

रागदर्पण : वे कैसी मासूमियत के दिन थे...

वो कौन हैं जिन्हें तौबा की मिल गई फ़ुर्सत हमें  गुनाह भी  करने को  ज़िंदगी  कम  है — आनंद नारायण मुल्ला कल रात यह शेर कहने वाले को दिल से सलाम कहा कि इसे पढ़ते हुए मैं बहुत पीछे तक झाँक आई।

06 अप्रैल 2026

शिवेन्द्र से 10 सवाल : मुंबई मुझे मज़दूरों का शहर लगता है

शिवेन्द्र से 10 सवाल : मुंबई मुझे मज़दूरों का शहर लगता है

शिवेन्द्र हिंदी की नई पीढ़ी के कथाकार हैं। वह मुंबई में रहते हैं। उनका एक उपन्यास (चंचला चोर) और दो कहानी-संग्रह (‘चॉकलेट फ़्रेंड्स और अन्य कहानियाँ’ और ‘सतरूपा’) प्रकाशित हो चुके हैं। आज प्रस्तुत है

06 अप्रैल 2026

मेरे रचनात्मक द्वंद्व

मेरे रचनात्मक द्वंद्व

मैं एक लेखक हूँ, यह कहने के लिए कितने उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा है। बतौर लेखक यहाँ या कहीं भी, खड़े होने के लिए मैंने लंबी यात्रा तय की है। प्रथमतः आत्म-स्वीकृति। इस आत्म-स्वीकृति तक पहुँचना जट

05 अप्रैल 2026

रचनात्मकता और द्वंद्व

रचनात्मकता और द्वंद्व

पेड़-पौधों की ही तरह हर रचनाकार अपनी मिट्टी, अपने परिवेश की उत्पत्ति होता है । मेरा यह कहना बेहद सामान्य कथन है । यह तो कहा जाता ही रहा है । फिर मैं नया क्या कह रहा हूँ? मैं नया बिल्कुल नहीं कह रहा। 

04 अप्रैल 2026

आधुनिकतावाद से सामना : मेरी सृजनात्मकता और उसके समक्ष चुनौतियाँ

आधुनिकतावाद से सामना : मेरी सृजनात्मकता और उसके समक्ष चुनौतियाँ

एक ‘सृजनात्मकता’ शब्द से मेरे मन में प्राथमिक तौर पर दो चित्र उभरते हैं—एक, रोपाई के लिए बीज से पौध तैयार करने की अपनी क्यारी को सुबह की धुंध में निरखता हुआ एक अकेला किसान; और दूसरी, लालटेन की रोश