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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

05 मई 2026

‘स्मृतियों के सिवा कुछ भी नहीं’

‘स्मृतियों के सिवा कुछ भी नहीं’

यदि तुम बरसों बाद घर लौटकर आओ—तो वे एकदम पहचान लेते हैं, पर वे यह नहीं जानते, तुम कहाँ से लौटकर आए हो। वे कभी सोच नहीं सकते कि इतनी यातना सहकर उन्होंने जिसे जन्म दिया है, वह बड़ा होकर इतनी यातना बर्दा

04 मई 2026

वे बंगाली लड़कियाँ आततायी नहीं थीं!

वे बंगाली लड़कियाँ आततायी नहीं थीं!

वे अनपेक्षित बाढ़ की तरह आती रहीं। उनका पानी मैला नहीं था, न ही उतना साफ़। वे मेरे भीतर बने घर को—जो पहले से खंडहर था और खंडहर करती चली गईं। वे खुला मैदान चाहती थीं, जिसमें वे अपने मुताबिक़ खेलना और

03 मई 2026

रविवासरीय 4.0 : नवीन सागर : एक बेसँभाल असमाप्त

रविवासरीय 4.0 : नवीन सागर : एक बेसँभाल असमाप्त

• प्रवेश आसान होता है, अगर परिचय प्रगाढ़ हो। इस राह में परिचय की स्मृति और संदर्भ भी सहायक हो सकते हैं। यों भी न हो, तब भूमिकाएँ काम आती हैं। वे बताती हैं कि व्यक्ति जिसमें प्रवेश करने जा रहा है, वह व

02 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : छाया और छायेच्छाएँ

शनिवारेर चिट्ठी : छाया और छायेच्छाएँ

छायालीन यह दृश्य है या एक ठहरा हुआ उच्चारण! जैसे समय ने अपनी जीभ बाहर निकाल शब्द को अधूरा छोड़ दिया हो। क्षितिज पर शहर कोई ठोस आकृति नहीं, धुंध का अभ्यास है। वह अपने होने को सिद्ध नहीं करता, संकेत

01 मई 2026

कार्ल मार्क्स की मृत्यु : एक गुप्त इश्तिहार

कार्ल मार्क्स की मृत्यु : एक गुप्त इश्तिहार

कितनी तीखी ठंड है, एंगेल्स! कैसी गहरी निस्तब्धता की ओर बढ़ती जा रही है यह पृथ्वी! फिर भी देखो, दिसंबर की मृत्यु को भुलाकर, जनवरी की जड़ता को पीछे छोड़कर, लंदन की सड़कों पर एक नई चेतना जन्म ले रही है।

01 मई 2026

हिंदियाँ : लोक-भाषा के विस्तार का आयोजन

हिंदियाँ : लोक-भाषा के विस्तार का आयोजन

‘हिन्दवी’ द्वारा आयोजित यह विशेष कार्यक्रम ‘हिंदियाँ’ साहित्य और सिनेमा में लोक-भाषा की भूमिका और उसके विस्तार को केंद्र में रखेगा। इस आयोजन का आने वाले समय में भाषा, संस्कृति और रचनात्मक अभिव्यक्ति

30 अप्रैल 2026

अपने-अपने कबीर

अपने-अपने कबीर

कबीर आज इतने समय बाद भी प्रासंगिक हैं। उनकी मौजूदगी के माध्यम बदल गए हैं, लेकिन वह आज भी किसी न किसी रूप में अन्य कवियों की तुलना में अधिक प्रभावी और जीवंत महसूस होते हैं। स्कूल की किताबों में दोहों

29 अप्रैल 2026

इरफ़ान ख़ान : एक अभिनेता नहीं, एक संभावना

इरफ़ान ख़ान : एक अभिनेता नहीं, एक संभावना

हिंदी सिनेमा में अभिनय की जो परंपरा नसीरुद्दीन शाह, ओम पुरी, पंकज कपूर और रघुवीर यादव जैसे कलाकारों के माध्यम से तथाकथित मुख्यधारा में विकसित होती है, उसे इरफ़ान ख़ान ने नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। इरफ़

28 अप्रैल 2026

दो ग्रह, दो भाषाएँ : पृथ्वी और मंगल के साहित्य का अनुवाद-विमर्श

दो ग्रह, दो भाषाएँ : पृथ्वी और मंगल के साहित्य का अनुवाद-विमर्श

पिछले दिनों गाँव में परफैरा हुआ, कुछ लोग मच्छी मार्केट लगाए बतिया रहे थे। वे क्या बात कर रहे थे और उसका अर्थ क्या था? कुछ नहीं सूझ रहा था! वे या तो गाली-गलौज कर रहे थे या फिर अर्थ पर ध्यान दिए बग़ैर

27 अप्रैल 2026

लंबी कविताओं पर खुलकर हुई बहस : ‘अर्थात्’ की पाँचवीं कड़ी रही ख़ास

लंबी कविताओं पर खुलकर हुई बहस : ‘अर्थात्’ की पाँचवीं कड़ी रही ख़ास

‘चेख़व के कथा-साहित्य का सौंदर्यशास्त्र’ पर केंद्रित रही ‘अर्थात्’ की चौथी कड़ी के बाद इस बार विवेचना का विषय रहा—‘हिंदी की लंबी कविताएँ और उनका पुनर्पाठ’। इस पाँचवें आयोजन में बतौर वक्ता कवि-द्वय—देव