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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

02 अक्तूबर 2026

‘स्कूली निबंधों में महात्मा गांधी’

‘स्कूली निबंधों में महात्मा गांधी’

गांधी-जयंती आ रही है। बचपन में हमारे पाठ्यक्रम का बड़ा अहम हिस्सा रहे हैं बापू। स्कूल में गाय-भैंस, सहेला-सहेली, माता-पिता, नानी-दादी के घर पर बिताई छुट्टियाँ, रेलगाड़ी का सफ़र, बसंत-बरसात आदि की तरह

01 अक्तूबर 2026

अनफ़्रेम्ड : लाइफ़ में जब ‘स्किप इंट्रो’ नहीं था

अनफ़्रेम्ड : लाइफ़ में जब ‘स्किप इंट्रो’ नहीं था

मुझे प्रतीक्षा की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति ‘रजनीगंधा’ फ़िल्म में दिखती है, बासु चटर्जी इंतज़ार और दूरियों के बीच सिमटे छोटे-छोटे पलों को सहेजते चलते हैं। “रजनीगंधा फूल तुम्हारे...” गीत देखते हुए स्क्रीन

29 सितम्बर 2026

C/O बंगाल : नक्सल आंदोलन : बांग्ला-कविता जब सड़क पर उतर आई

C/O बंगाल : नक्सल आंदोलन : बांग्ला-कविता जब सड़क पर उतर आई

सन् 1971, 5 अगस्त... भोर की रोशनी अभी पूरी तरह फूटी नहीं थी। वह रात और सुबह के बीच का एक धुँधला समय था। इस आधे अँधेरे में ही बंगाल के महानायक उत्तम कुमार सुबह की सैर कर रहे थे। यह उनकी रोज़ की आदत

28 सितम्बर 2026

शंखनाद : नौवीं फ़ेल डॉ. साहब

शंखनाद : नौवीं फ़ेल डॉ. साहब

भगवत् कृपा से, कुछ अपने करम और कुछ दूसरों की मेहरबानी से, जीवन में किसी और चीज़ की भले ही कमी हो, बदनाम होने और बेइज़्ज़त होने के मौक़ों की कोई कमी नहीं रही। मज़े की बात यह है कि अभी भी इसमें कोई कमी

27 सितम्बर 2026

रील रसाचार्य : फ़ाइव रील-एक्सपेरिमेंट

रील रसाचार्य : फ़ाइव रील-एक्सपेरिमेंट

एक दोस्त के साथ फ़िल्म देख रहा था। हर महत्त्वपूर्ण दृश्य से पहले; आगे क्या होने वाला है, उसे पहले से पता था। जब ऐसा दो बार हो गया तो मैंने कहा कि जब फ़िल्म पहले से ही देख रखी है तो क्या ज़रूरत थी दुब

26 सितम्बर 2026

रागदर्पण : सपनों का डर

रागदर्पण : सपनों का डर

मैं बेदार बैठी हूँ। पर्दानशीं खिड़की से बहुत धीमी रोशनी भीतर आ रही है। उस मद्धिम रोशनी में मैं सामने की दीवार घड़ी पर वक़्त का अंदाज़ लेना चाहती हूँ। मगर ठीक से कुछ सुझाई नहीं देता। मेरी धड़कन बढ़ी हुई है।

26 सितम्बर 2026

शनिवारेर चिट्ठी : ए बछरेर एटाइ शेष चिठि, मंजरी!

शनिवारेर चिट्ठी : ए बछरेर एटाइ शेष चिठि, मंजरी!

अह, शनिवार-शनिवार तुम्हें चिट्ठी भेजने का यह हाल का सिलसिला अब यहीं शेष हुआ चाहता है, मंज! यह चीज़ों को उसकी सुंदरता में रखने और सुंदरता में ही विश्राम सौंप देने की युक्ति न हुई तो और क्या, कहो! अधिक

25 सितम्बर 2026

सरसरी : जाना था जापान, पहुँच गए चीन... उर्फ़ प्रतिनिधित्व का प्रश्न

सरसरी : जाना था जापान, पहुँच गए चीन... उर्फ़ प्रतिनिधित्व का प्रश्न

दिल्ली साहित्यिक घटनाओं का एक सतही समुच्चय है। हालाँकि दिल्ली के बाहर भी ऐसी तमाम घटनाएँ होती ही रहती हैं; जिनसे साहित्य से सर्वथा जुदा लोग भी, जुदा न होने के भ्रम में जुड़े रहते हैं। हिंदी साहित्य मे

25 सितम्बर 2026

जगह-जगह 2.0 : नज़्म की पूँछ

जगह-जगह 2.0 : नज़्म की पूँछ

प्रस्तुत आलेख शाइर और अनुवादक रियाज़ लतीफ़ की किताब ‘नज़्म की पूँछ’ पर एकाग्र है। आलेख में अपनी बात रखने के लिए उनकी अन्य रचनाओं के भी कुछ हवाले दिए गए हैं। ‘नज़्म की पूँछ’ 2024 में सुख़नकदा, अहमद

24 सितम्बर 2026

अनफ़्रेम्ड : 5G की स्पीड में 60 के दशक की ‘तड़प’

अनफ़्रेम्ड : 5G की स्पीड में 60 के दशक की ‘तड़प’

ऐसा मेरे साथ कभी पहले नहीं हुआ था, तो यह बात मेरे मन में बैठ गई। ऑफ़िस से घर लौटते समय स्पॉटिफ़ाई पर अचानक लता मंगेशकर का एक गीत लूप में बज उठा, जिसे पहले कभी नहीं सुना था। गीत था, ‘हम तेरे प्यार में स