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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

26 जून 2026

‘जगह-जगह 2.0 : हमारा फ़्यूचर शॉक कहाँ है?’

‘जगह-जगह 2.0 : हमारा फ़्यूचर शॉक कहाँ है?’

When did the future switch from being a promise to being a threat? — Chuck Palahniuk इतिहास की पूँछ और भविष्य गुरंदी बाज़ार की एक दुकान में मुझे एल्विन टॉफ़्लर की ‘फ़्यूचर शॉक’ की एक प्रति मि

25 जून 2026

रागदर्पण : मैं ढूँढ़ती हूँ शहतूत का वह दरख़्त

रागदर्पण : मैं ढूँढ़ती हूँ शहतूत का वह दरख़्त

स्कूल ने रुक्का भेजा—‘अबकी सालाना जलसे में आपको सम्मानित करते हमें गर्व होगा।’ जहाँ जीवन का सबसे बेफ़्रिक समय जिया, शऊर-सलीक़ा सीखा, बात व्यवहार करना आया, सदा के संगी मिले; जहाँ पढ़कर आज लिख सकने क़ाबिल

21 जून 2026

‘कल्पना’ जैसा भोजपुरी में होना अब कल्पना ही है

‘कल्पना’ जैसा भोजपुरी में होना अब कल्पना ही है

वह इक्कीसवीं सदी की शुरुआत थी और वह बहुत उदास होकर गा रही थी—घरे छुट्टी लेके अउरी कुछ दिन रही ए बलम जी... और ठीक उसी वक़्त सैलून में बैठे लड़के यह तय कर रहे थे कि उन्हें बंबई नहीं, राजकोट भागकर जाना है

20 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : मैं आशाओं से नहीं, पुनरावृत्तियों से बना मनुष्य हूँ

शनिवारेर चिट्ठी : मैं आशाओं से नहीं, पुनरावृत्तियों से बना मनुष्य हूँ

ये  यह छत की ओर खुलती खिड़की से तेज़ हवा के आने और रसोई की खिड़की से तेज़ क़दम बाहर निकल जाने की आज की बेला है। बाहर अँधेरा है तो यह रात है। लिखने की इच्छा और लिखने से बचने की इच्छा मेरे भीतर हमेशा एक

15 जून 2026

चे ग्वेरा : एक समर्पित क्रांतिकारी का एक पूँजीवादी चीज़ में बदलना

चे ग्वेरा : एक समर्पित क्रांतिकारी का एक पूँजीवादी चीज़ में बदलना

रजिस देब्रे ने बोलिविया की जेल में चे ग्वेरा का साक्षात्कार लिया था। बाद में उन्होंने लिखा, “चे आधुनिक युग के ईसा मसीह हैं, बल्कि मुझे लगता है कि उन्हें उससे भी अधिक यातना सहनी पड़ी। दो हज़ार वर्ष पहल

14 जून 2026

होर्खे लुइस बोर्खेस का साक्षात्कार : ‘मैं दूसरी दुनिया में रहूँगा’

होर्खे लुइस बोर्खेस का साक्षात्कार : ‘मैं दूसरी दुनिया में रहूँगा’

होर्खे लुइस बोर्खेस (Jorge Luis Borges) बीसवीं शताब्दी के उन विरल साहित्यकारों में हैं जिन्होंने कविता, कहानी, निबंध और दर्शन के बीच की सीमाओं को लगभग समाप्त कर दिया। वह केवल अर्जेंटीना के लेखक नहीं

14 जून 2026

रविवासरीय 4.0 : यात्रा जितनी रही, वृत्तांत उतना कहाँ!

रविवासरीय 4.0 : यात्रा जितनी रही, वृत्तांत उतना कहाँ!

• यात्रा जितनी रही, वृत्तांत उतना कहाँ!—इस शीर्षक के साथ—‘रविवासरीय’ की यह चौथी ऋतु ‘बेला’ पर आज समाप्त हो रही है। गई तीन ऋतुओं की भाँति ही इस स्तंभ को इस ऋतु में भी पर्याप्त प्रेम प्राप्त हुआ। इस स्

13 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

शनिवारेर चिट्ठी : सबसे पहले तुम, शशि!

सबसे पहले तुम, शशि! इसलिए नहीं कि तुम जीवन में सबसे पहले आईं या कि तुम सबसे ताज़ा स्मृति हो। इसलिए कि मेरा होना अनिवार्य रूप से तुम्हारे होने को लेकर है... [शेखर : एक जीवनी, शेखर : उत्थान—प्रवेश

12 जून 2026

जगह-जगह 2.0 : क्या कर रही होगी जबलपुर में तुम

जगह-जगह 2.0 : क्या कर रही होगी जबलपुर में तुम

शहरज़ादे का शहरआशोब जबलपुर को खोजता हूँ तो पहले उन सूचियों से उलझता हूँ जिनमें 12 सड़कों और 13 जनों की, 5 मोहल्लों और 3 उद्यानों की, 2 पुलों और 52 तालाबों की, एक कल्चुरी काल के तेवर की, एक विलियम स्

12 जून 2026

जब नाव नदी को पहली बार स्पर्श करती है

जब नाव नदी को पहली बार स्पर्श करती है

सुना और पढ़ा था कि जिस दिन नदी में नाव उतारी जाती है; वह दिन नाविक के जीवन में एक महत्त्वपूर्ण दिन होता है, लेकिन इस घटना को अपनी आँखों से मैंने देखा नहीं था। साल 2012 से मैं इसकी तलाश में था। मैं जब