Font by Mehr Nastaliq Web

बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

18 जुलाई 2026

‘शनिवारेर चिट्ठी : झरना बड़ी हँसमुख लड़की है...’

‘शनिवारेर चिट्ठी : झरना बड़ी हँसमुख लड़की है...’

दीपालिका क्या कहोगी जो कहूँ कि मुझे असुंदरता कुछ असहज करती है। यह राय मैंने किसी एक अनुभव के बिना पर तय की। मैंने उन्हें सुंदर स्त्रियाँ और कुछ कम सुंदर स्त्रियाँ कह साहचर्य निभाया। वह एक भली स्त्र

12 जुलाई 2026

बिंदुघाटी 2.0 : मुझे पता है कि इस पोस्ट में आपकी दिलचस्पी है

बिंदुघाटी 2.0 : मुझे पता है कि इस पोस्ट में आपकी दिलचस्पी है

• कोई भी आंदोलन हर क़ीमत पर एक सामजिक-सांस्कृतिक अभिव्यक्ति भी है। इसमें बहुत से प्रशिक्षित या अनुभवी जन भी होते हैं और बहुत से नए-नए उत्साही जन भी। आंदोलन ब्रिटिश राज़ की ग़ुलामी से निकले एक देश के लिए

11 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी  : एक दुनिया, दूसरी दुनिया

शनिवारेर चिट्ठी : एक दुनिया, दूसरी दुनिया

हेडर इतिहास यह आदत रखता है कि वह अपने आरंभों को पीछे मुड़कर पहचानता है। जब कोई युग वास्तव में जन्म ले रहा होता है, तब वह किसी उद्घोषणा के साथ नहीं आता। वह एक साधारण दिन की तरह आता है, इतना साधारण

10 जुलाई 2026

जगह-जगह 2.0 : कूड़े के पहाड़, ट्रैफ़िक जाम, मेट्रो से आगे की देल्ही

जगह-जगह 2.0 : कूड़े के पहाड़, ट्रैफ़िक जाम, मेट्रो से आगे की देल्ही

दिल्ली की तारीफ़, पिछली तारीफ़ों की याद है। इसका रोमांस, रोमांस का दोहराव है। आगे चलो तो पीछे पहुँचते हो, पीछे चलो तो कहीं नहीं। दिल्ली को बहुतों ने याद किया है, जो यहाँ रहते हैं वे भी इसे याद करते ह

07 जुलाई 2026

तीजनबाई और पंडवानी

तीजनबाई और पंडवानी

आज से बहुत साल पहले की बात है। एक छोटी-सी लड़की थी, सात-आठ बरस की। बारिश का मौसम उसको पसंद नहीं था, इसलिए बारिश के दिनों में वह पाठशाला नहीं जाने के लिए रोती थी। बारिश वाली सुबहों में वह नींद खुल जान

06 जुलाई 2026

तीजनबाई : इकतारे पर महाभारत

तीजनबाई : इकतारे पर महाभारत

अवसर था दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज के वार्षिकोत्सव पल्लव की सांस्कृतिक संध्या का। वहाँ उपस्थित थीं कलाकार पद्मभूषण—तीजनबाई। दर्शकों की संख्या लगभग इतनी ही थी कि उँगली पर गिनी जा सके। मंच

05 जुलाई 2026

बिंदुघाटी 2.0 : लौट आया हूँ, कोई कुछ भी कह सकता है

बिंदुघाटी 2.0 : लौट आया हूँ, कोई कुछ भी कह सकता है

• व्लादिमीर : शुरुआत  मुश्किल शय है।  एस्त्रागान : तुम किसी भी चीज़ से शुरू कर सकते हो। व्लादिमीर : हाँ, लेकिन इसका निर्णय लेना होता है। एस्त्रागान : सही बात। — सैमुअल बेकेट | वेटिंग फ़ॉर गोदो

04 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : डेंटिस्ट का पति और अन्य प्रकरण

शनिवारेर चिट्ठी : डेंटिस्ट का पति और अन्य प्रकरण

पहली सीटिंग अह, यह कैसी आपद-कथा रही! वहाँ जाना आसान था तो मैं गया। पड़ोस में ज़रूरी चीज़ों की उपस्थिति को हम एक क़िस्म का सामाजिक सौभाग्य ही कहें। पड़ोस था मन में तो मिलते ही उससे कह भी दिया, “पड़ोसी ह

30 जून 2026

शंखनाद : सोच-समझवाले को थोड़ी नादानी दे मौला...

शंखनाद : सोच-समझवाले को थोड़ी नादानी दे मौला...

मेरे पास एक ही धन है—निकम्मापन। मैं बाय चॉइस निकम्मा नहीं हूँ। यह आलस्य और काहिली के संयुक्त उद्यम से उपजा है। ऐसा नहीं है कि मैं डेड वुड हूँ जो किसी काम के लिए प्रेरित नहीं होता; प्रेरित होता हूँ—जब

27 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : पुलिसवाली है या लेस्बियन, उधर जो औरत है? कहाँ?

शनिवारेर चिट्ठी : पुलिसवाली है या लेस्बियन, उधर जो औरत है? कहाँ?

पूर्वग्रह मुहल्ले में ‘मौग’ होना उपहास की बात थी। बसों-ट्रामों में हाथ बजाकर अपनी पहचान जताना किसी हीनता की निशानी। और मैदान के अँधेरे कोनों में खींच लिया जाता अथवा स्वेच्छा से ‘व्यभिचार’ में