साहित्य और संस्कृति की घड़ी
आज से बहुत साल पहले की बात है। एक छोटी-सी लड़की थी, सात-आठ बरस की। बारिश का मौसम उसको पसंद नहीं था, इसलिए बारिश के दिनों में वह पाठशाला नहीं जाने के लिए रोती थी। बारिश वाली सुबहों में वह नींद खुल जाने
अवसर था दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज के वार्षिकोत्सव पल्लव की सांस्कृतिक संध्या का। वहाँ उपस्थित थीं कलाकार पद्मभूषण—तीजनबाई। दर्शकों की संख्या लगभग इतनी ही थी कि उँगली पर गिनी जा सके। मंच
• व्लादिमीर : शुरुआत मुश्किल शय है। एस्त्रागान : तुम किसी भी चीज़ से शुरू कर सकते हो। व्लादिमीर : हाँ, लेकिन इसका निर्णय लेना होता है। एस्त्रागान : सही बात। — सैमुअल बेकेट | वेटिंग फ़ॉर गोदो
04 जुलाई 2026
पहली सीटिंग अह, यह कैसी आपद-कथा रही! वहाँ जाना आसान था तो मैं गया। पड़ोस में ज़रूरी चीज़ों की उपस्थिति को हम एक क़िस्म का सामाजिक सौभाग्य ही कहें। पड़ोस था मन में तो मिलते ही उससे कह भी दिया, “पड़ोसी ह
मेरे पास एक ही धन है—निकम्मापन। मैं बाय चॉइस निकम्मा नहीं हूँ। यह आलस्य और काहिली के संयुक्त उद्यम से उपजा है। ऐसा नहीं है कि मैं डेड वुड हूँ जो किसी काम के लिए प्रेरित नहीं होता; प्रेरित होता हूँ—जब
पूर्वग्रह मुहल्ले में ‘मौग’ होना उपहास की बात थी। बसों-ट्रामों में हाथ बजाकर अपनी पहचान जताना किसी हीनता की निशानी। और मैदान के अँधेरे कोनों में खींच लिया जाता अथवा स्वेच्छा से ‘व्यभिचार’ में
When did the future switch from being a promise to being a threat? — Chuck Palahniuk इतिहास की पूँछ और भविष्य गुरंदी बाज़ार की एक दुकान में मुझे एल्विन टॉफ़्लर की ‘फ़्यूचर शॉक’ की एक प्रति म
25 जून 2026
स्कूल ने रुक्का भेजा—‘अबकी सालाना जलसे में आपको सम्मानित करते हमें गर्व होगा।’ जहाँ जीवन का सबसे बेफ़्रिक समय जिया, शऊर-सलीक़ा सीखा, बात व्यवहार करना आया, सदा के संगी मिले; जहाँ पढ़कर आज लिख सकने क़ाबिल
वह इक्कीसवीं सदी की शुरुआत थी और वह बहुत उदास होकर गा रही थी—घरे छुट्टी लेके अउरी कुछ दिन रही ए बलम जी... और ठीक उसी वक़्त सैलून में बैठे लड़के यह तय कर रहे थे कि उन्हें बंबई नहीं, राजकोट भागकर जाना है
ये यह छत की ओर खुलती खिड़की से तेज़ हवा के आने और रसोई की खिड़की से तेज़ क़दम बाहर निकल जाने की आज की बेला है। बाहर अँधेरा है तो यह रात है। लिखने की इच्छा और लिखने से बचने की इच्छा मेरे भीतर हमेशा एक