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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

25 अक्तूबर 2026

‘रील रसाचार्य : मेट्रो में रील’

‘रील रसाचार्य : मेट्रो में रील’

“अगला स्टेशन न्यू अशोक नगर है। दरवाज़े...” “ये लड़की बहुत बोलती है, ज़रा चुप रहोगी?” पहली आवाज़ मेट्रो के अनाउसमेंट की है, दूसरी आवाज़ किसी रील की। दोनों आवाज़ें इस तरह गुत्थमगुत्था हुईं कि मैं

22 अक्तूबर 2026

अनफ़्रेम्ड : हिंदी साहित्य और सिनेमा की इन गुमनाम कड़ियों को जानते हैं आप?

अनफ़्रेम्ड : हिंदी साहित्य और सिनेमा की इन गुमनाम कड़ियों को जानते हैं आप?

सत्तर के दशक के आरंभिक वर्ष हिंदी साहित्य और सिनेमा के बीच संबंधों के लिहाज़ से सबसे उल्लेखनीय साल माने जा सकते हैं। भारतीय सिनेमा में नए प्रयोग हो रहे थे। प्रयोग करने वाले ज़्यादातर निर्देशक पूना फ़िल्

21 अक्तूबर 2026

लखनऊ : वो शहर जो लाहौर और दिल्ली के बीच में कहीं फँसा हुआ है

लखनऊ : वो शहर जो लाहौर और दिल्ली के बीच में कहीं फँसा हुआ है

जब भी हम किसी नए शहर में क़दम रखते हैं, तो सबसे पहले उसे बाँहों में भरने की कोशिश करते हैं। फिर हथेलियों में समेटने का प्रयास करते हैं और आख़िर में अपने स्वादानुसार उस पूरे शहर को उँगलियों से छूकर लौट

21 अक्तूबर 2026

घाम-पानी : ‘ग्रीन बूट्स’ का मिथक : पालजोर और दोरजे मोरुप

घाम-पानी : ‘ग्रीन बूट्स’ का मिथक : पालजोर और दोरजे मोरुप

यात्राओं के दौरान किसी स्थान-विशेष तक पहुँचने के लिए लैंडमार्क काफ़ी काम आते हैं। अपने पते पर पहुँचने से पहले आप उसके लैंडमार्क तक पहुँचते हैं। शहरों और बस्तियों में यह कोई पीढ़ियों पुराना पीपल, पाकड

20 अक्तूबर 2026

C/O बंगाल : विजय का उत्सव, पराजय की स्मृति

C/O बंगाल : विजय का उत्सव, पराजय की स्मृति

कुछ ही देर में नीलकंठ पक्षी नीले पंख फैलाकर उड़ जाएगा। वह कैलाश में महादेव के पास जाएगा और संदेश पहुँचा देगा, “देवी दुर्गा लौट रही हैं।” ढाक की थाप तीव्र हो उठी है। हवा में सिंदूर उड़ रहा है। कहीं

18 अक्तूबर 2026

रील रसाचार्य : रील में भागते लोग

रील रसाचार्य : रील में भागते लोग

यह देश एक महामेला है। वैसे तो पूरी दुनिया ही मेलों से बनी-बढ़ी है। यह मेले और बाज़ार ही थे जिन्होंने इस उपमहाद्वीप को हमेशा के लिए बदल दिया। पुर्तगाली, यूनानी, डच, फ़्रांसीसी, अँग्रेज़ यह सब यहाँ की

16 अक्तूबर 2026

जगह-जगह 2.0 : अलिफ़ शफ़क़ के दो उपन्यास : सभ्यताओं का नमक और इतिहास की चुप्पियाँ

जगह-जगह 2.0 : अलिफ़ शफ़क़ के दो उपन्यास : सभ्यताओं का नमक और इतिहास की चुप्पियाँ

तुर्की उपन्यासों का नमक सभ्यताओं के बीच संवाद और उनका अंतर्विरोध है। 20वीं सदी के बड़े तुर्की उपन्यासकार गाहे-बगाहे अपनी सही जगह तलाशते रहे हैं। उनके यहाँ आधुनिकता और इस्लाम के बीच फाँक है, यूरोपीय औ

15 अक्तूबर 2026

अनफ़्रेम्ड : टैरेंटीनो के बहाने, हॉलीवुड से इलाहाबाद तक

अनफ़्रेम्ड : टैरेंटीनो के बहाने, हॉलीवुड से इलाहाबाद तक

क़रीब सात साल पहले इन्हीं दिनों क्वेंटिन टैरेंटीनो की फ़िल्म ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन हॉलीवुड’ देखी थी। अक्सर बदलता मौसम आपको पुरानी पढ़ी किताबों, देखी गई फ़िल्मों और ज़माने पहले सुने गए संगीत की याद दिला

14 अक्तूबर 2026

रागदर्पण : नियति को मुझसे प्रेम है

रागदर्पण : नियति को मुझसे प्रेम है

नए साल का पहला महीना जब आधा बीतने को था, मैं गए बरस की यादावरी में रही। तमाम लोग अपनी दीवारों पर बीते बरस के नफ़े-नुक़सान का हिसाब-किताब लगाकर, क्या खोया-क्या पाया लिख चुके थे। साल-ए-नौ की आमद का जश्

14 अक्तूबर 2026

कचर-कचर : एक सिनेमाई आतंकवाद

कचर-कचर : एक सिनेमाई आतंकवाद

थिएटर की बत्ती बुझती है। स्क्रीन पर किसी गंभीर दृश्य की नींव रखी जा रही होती है। नायक का दिल टूटने वाला होता है या सस्पेंस अपनी पराकाष्ठा पर होता है। और ठीक उसी पल आपके दाहिने या बाएँ कान के पास से आ