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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

02 अगस्त 2026

‘बिंदुघाटी 2.0 : ‘देख अपने लीडरों को शोक मत कर... देश ये लीडर नहीं’’

‘बिंदुघाटी 2.0 : ‘देख अपने लीडरों को शोक मत कर... देश ये लीडर नहीं’’

• ‘बिंदुघाटीकार’ बहुत-सी बातों के समाधान के लिए पुराने कवियों, शास्त्र-रचयिताओं और विचारकों के पास लौटता है। ये लोग और इनकी रचनाएँ अपने-अपने समय और उसके प्रसंगों से गहरे संबद्ध हैं। फिर भी इनकी कालजयि

01 अगस्त 2026

शनिवारेर चिट्ठी : गाली बयान नहीं चीख़ है

शनिवारेर चिट्ठी : गाली बयान नहीं चीख़ है

सिनेमा  शासकों को यह भ्रम प्रिय होता है कि वे इतिहास लिखते हैं। वे यह नहीं समझते कि एक पोस्टर, एक भंगिमा, एक नारे, एक मीम से उनके इस कथित इतिहास को चुनौती दी जा सकती है। इन दिनों मुझे एक फ़िल्म याद

29 जुलाई 2026

रागदर्पण : कंधे आख़िर किसलिए होते हैं

रागदर्पण : कंधे आख़िर किसलिए होते हैं

उसका संग छूटते ही मेरे चौखूँट एक अजब निस्संगता आकर बैठ जाती थी कि फिर कई घंटों तक किसी की भी मौजूदगी मुझे उकताऊ और नागवार लगती। उसके साथ कोई आशनाई न थी; मगर हो सकने का भारी इमकान था, अगर मैं अपनी सन्

27 जुलाई 2026

शंखनाद : बनियान, बुल दुबे और बाक़ी असफलताएँ

शंखनाद : बनियान, बुल दुबे और बाक़ी असफलताएँ

पढ़ाई-लिखाई में डबल-बिलो औसत प्रदर्शन के बाद हमने यह स्वीकार कर लिया कि संप्रति यह हमारा क्षेत्र नहीं है और अपनी पहचान किसी दूसरे क्षेत्र में तलाशनी चाहिए। कुलदीप की राय थी कि हमें डॉक्टर बनने की

26 जुलाई 2026

बिंदुघाटी 2.0 : शिक्षा मंत्री चला जाएगा, शिक्षा रह जाएगी

बिंदुघाटी 2.0 : शिक्षा मंत्री चला जाएगा, शिक्षा रह जाएगी

• धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफ़ा लिखने में काफ़ी समय लगाया। हालाँकि इस बीच जिस रचनात्मकता की सृष्टि हुई, उसे देखते हुए उनका इतना वक़्त लेना कम अखर रहा है। उनका दो पन्नों का इस्तीफ़ा क्या कॉकरोचों की स

25 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : मुझे मुआफ़ करना प्रिय!

शनिवारेर चिट्ठी : मुझे मुआफ़ करना प्रिय!

मुझे मुआफ़ करना प्रिय! इतना भर कह देने से क्या होता है कि मन इस पूरे हफ़्ते खिन्न रहा। यह कहने से कि चीज़ें देखता-सुनता रहा और आँखें भीगती रहीं। कभी निराशा से तो कभी बिजली की तरह कौंध आती आशा से। यह

19 जुलाई 2026

बिंदुघाटी 2.0 : बहुत फूँक-फूँककर सिर्फ़ साँप चलते हैं

बिंदुघाटी 2.0 : बहुत फूँक-फूँककर सिर्फ़ साँप चलते हैं

• इन दिनों पॉपुलर स्पेस में कहीं-कहीं और बहुत सारी बातों के साथ-साथ लोग यह भी कह रहे हैं कि भूख-हड़ताल भारतीय संस्कृति नहीं है। ये कमाल के लोग हैं और कमाल की ही हैं इनकी सांस्कृतिक व्याख्याएँ! इनके इस

18 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : झरना बड़ी हँसमुख लड़की है...

शनिवारेर चिट्ठी : झरना बड़ी हँसमुख लड़की है...

दीपालिका क्या कहोगी जो कहूँ कि मुझे असुंदरता कुछ असहज करती है। यह राय मैंने किसी एक अनुभव के बिना पर तय की। मैंने उन्हें सुंदर स्त्रियाँ और कुछ कम सुंदर स्त्रियाँ कह साहचर्य निभाया। वह एक भली स्त्

12 जुलाई 2026

बिंदुघाटी 2.0 : मुझे पता है कि इस पोस्ट में आपकी दिलचस्पी है

बिंदुघाटी 2.0 : मुझे पता है कि इस पोस्ट में आपकी दिलचस्पी है

• कोई भी आंदोलन हर क़ीमत पर एक सामजिक-सांस्कृतिक अभिव्यक्ति भी है। इसमें बहुत से प्रशिक्षित या अनुभवी जन भी होते हैं और बहुत से नए-नए उत्साही जन भी। आंदोलन ब्रिटिश राज़ की ग़ुलामी से निकले एक देश के लिए

11 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी  : एक दुनिया, दूसरी दुनिया

शनिवारेर चिट्ठी : एक दुनिया, दूसरी दुनिया

हेडर इतिहास यह आदत रखता है कि वह अपने आरंभों को पीछे मुड़कर पहचानता है। जब कोई युग वास्तव में जन्म ले रहा होता है, तब वह किसी उद्घोषणा के साथ नहीं आता। वह एक साधारण दिन की तरह आता है, इतना साधारण