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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

20 सितम्बर 2026

‘रील रसाचार्य : माटी को पुतरा कैसे नचत है’

‘रील रसाचार्य : माटी को पुतरा कैसे नचत है’

रील का क्या है! ‘हिन्दवी’ ने एक कॉलम घोषित किया था : ‘रीलमरील’। इसे जिन्हें लिखना था, वह लिख नहीं पाए। इसके बावजूद समय-समय पर इस कॉलम के अंतर्गत तीन लेख आए, जिनमें से एक मैंने भी लिखा। फिर यह कॉलम स्थ

19 सितम्बर 2026

शनिवारेर चिट्ठी : चीज़ें और चीज़ें

शनिवारेर चिट्ठी : चीज़ें और चीज़ें

चीज़ें  पीतल फ़्रेम का पुराना आईना। लकड़ी की चरमराती कुर्सी। स्ट्राइप्ड कुशंस। रंग उड़ा हुआ फ़ारसी रग। हाथ से बुना मैक्रमे। दीवार पर टँगा पुराना नक़्शा। कुछ मोनोक्रोम फ़ोटोग्राफ़। कवि तादेऊष रूज़ेविच

18 सितम्बर 2026

सरसरी : ‘हिंदी का उत्सव’ और अंधकार

सरसरी : ‘हिंदी का उत्सव’ और अंधकार

विवादों, विनोदों, गर्वोक्तियों, सूक्तियों और सहकारिताओं से फ़ेसबुक ऊब चुका था। आम का टिकोरा वैशाख तक बीनने के बाद आलोचकों ने दीर्घ प्रवास ले लिया था और बक़ौल अष्टभुजा शुक्ल कविजन फिर से अमराई ढूँढ़ने म

17 सितम्बर 2026

अनफ़्रेम्ड : AI से परे हाँफता वो असल ‘अस्सी’

अनफ़्रेम्ड : AI से परे हाँफता वो असल ‘अस्सी’

अस्सी का दशक रस्सियों से बँधा हिलता हुआ एक पुल था। इसके एक छोर पर पीली टिमटिमाती हुई रोशनियाँ थीं और दूसरे छोर पर नीली डेनिम पहने हाथ में गिटार लिए कोई युवा। शुरुआत जर्जर और थकी हुई थी और अंत ओस की ब

15 सितम्बर 2026

C/O बंगाल : शरतचंद्र के दिन

C/O बंगाल : शरतचंद्र के दिन

“मेरी विद्या-बुद्धि कुछ भी नहीं थी। बहुत दरिद्रता में दिन कटे हैं। बीस रुपये के अभाव में मैं परीक्षा में बैठने तक से वंचित रह गया था। ऐसे दिन भी आए, जब भगवान् से प्रार्थना करता था—‘हे भगवान्, कुछ दिन

12 सितम्बर 2026

शनिवारेर चिट्ठी : दोष लगे सितंबर को!

शनिवारेर चिट्ठी : दोष लगे सितंबर को!

प्रस्थान  कुछ बादल अधिक, कुछ धूल कम। सितंबर। कोई गली ठीक उसी छत पर नहीं रुकती। अकेली नमी कोई त्योहार नहीं है। घाणी है सुनहरी। बचने का संकेत कभी बताया नहीं जाता। सितंबर कोई ठहराव नहीं है। कीचड़ से

11 सितम्बर 2026

जगह-जगह 2.0 : उत्तर-पूर्व दिशा नहीं है!

जगह-जगह 2.0 : उत्तर-पूर्व दिशा नहीं है!

प्रस्थान-पूर्व नीचे लिखी बातों का उत्स यात्रा में है, लेकिन यह यात्रा-वृत्तांत नहीं है। यह न तो क्रमिक और तथ्यपूर्ण विवरण है, न शहर घूमने की कुंजी। इसे लेख की सीमा या मेरे द्वारा खींची हुयी सीमा स

06 सितम्बर 2026

बिंदुघाटी 2.0 : मेहनत बहुत करनी है

बिंदुघाटी 2.0 : मेहनत बहुत करनी है

• भादों-विहार  भादों दूभर महीना माना गया है। सावन की झँकोर जवानी उसमें नहीं होती। भादों की बरखा से धरती के कोश भर जाते हैं।  सावन में धरती गल जाती है; ताल भरने लगते हैं, धान जड़ पकड़ लेते हैं, उन

05 सितम्बर 2026

शनिवारेर चिट्ठी : सिनेमा पर कैसे न लिखें

शनिवारेर चिट्ठी : सिनेमा पर कैसे न लिखें

देखना यह बड़ी फ़िल्म है। यह मेरा विचार नहीं; वह अवगतता है, जिसके साथ मैं इसे देखने बैठा हूँ। यहीं से देखने की एक बाधा शुरू हो गई है। अभी कुछ घटा भी नहीं कि उसके चारों ओर अर्थ जमा हो चुके हैं—आग्र

04 सितम्बर 2026

‘कनुप्रिया’ की भूमिका

‘कनुप्रिया’ की भूमिका

धर्मवीर भारती रचित ‘कनुप्रिया’ नई कविता की विशिष्ट रचना है। इस रचना में ‘राधा’ की वेदना को नए रूप में प्रस्तुत किया गया है। ‘कनुप्रिया’ दो शब्दों—‘कनु’ और ‘प्रिया’ से मिलकर बना है। धर्मवीर भारती ने इ