Font by Mehr Nastaliq Web

बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

29 जुलाई 2026

‘जेन-ज़ी : एक माफ़ीनामा’

‘जेन-ज़ी : एक माफ़ीनामा’

इसे कोई सामान्य लेख नहीं, बल्कि एक माफ़ीनामा समझिए। यह माफ़ीनामा मेरी ही नहीं, मेरी पूरी पीढ़ी की ओर से उस पीढ़ी के नाम है, जिसे आज हम ‘जेन-ज़ी’ [Gen Z] कहते हैं। इधर कुछ दिनों में इस पीढ़ी ने अपने

27 जुलाई 2026

मैं जेन-ज़ी के बारे में ग़लत थी

मैं जेन-ज़ी के बारे में ग़लत थी

मुझे अपनी पीढ़ी से बहुत उम्मीद नहीं बची थी और जेन-ज़ी से तो शायद उससे भी कम। मुझे लगता था कि इंस्टाग्राम, रील्स और अपने छोटे-से डिजिटल संसार में मस्त इस पीढ़ी की ज़िंदगी में सार्वजनिक सवालों के लिए बह

24 जुलाई 2026

अनशन की नैतिक शक्ति

अनशन की नैतिक शक्ति

आख़िरकार, इस देश की जनता कुछ जागी हुई-सी महसूस होती है। वह अराजनीतिकता का चोला उतारकर मूक से मुखर होती प्रतीत होती है। लेकिन जब हम कहते हैं कि इस देश की सरकार गूँगी, बहरी और अपने उत्तरदायित्व से भागन

15 जुलाई 2026

फ़ीफ़ा, रोनाल्डो, अश्वेत और हज़ारों साल पुराने सांस्कृतिक टकराव की पुनरावृत्ति

फ़ीफ़ा, रोनाल्डो, अश्वेत और हज़ारों साल पुराने सांस्कृतिक टकराव की पुनरावृत्ति

पता नहीं, यह बात कहना कितनी तर्कसंगत होगा और इसमें कितनी ही बौद्धिक या साहित्यिक संभावना होगी कि यूरोप का वर्चस्ववाद बार-बार इस्लामिक एवं अफ़्रीकी संप्रभुता को सीमित करने की कोशिश करता है और हर दफ़ा ख

10 जुलाई 2026

अलंकार मिश्रा का क्या है!?

अलंकार मिश्रा का क्या है!?

एक दुबला-पतला आदमी अलंकार मिश्रा! बीड़ी (या...) पीते हुए रील्स में दिखता है। गाँव-क़स्बे जैसा बैकग्राउंड, बिना माइक की आवाज़, मुँह से धुँआ निकल रहा है। वीडियो इंटरेस्टिंग लगता है। हम उस पर रुकते हैं।

08 जुलाई 2026

सौरव गांगुली सिर्फ़ नॉस्टेल्जिया का नाम नहीं

सौरव गांगुली सिर्फ़ नॉस्टेल्जिया का नाम नहीं

स्टार गोल्ड पर ‘मोहब्बतें’, सेट मैक्स पर ‘करण-अर्जुन’ और ज़ी सिनेमा पर ‘मैं हूँ ना’ शाहरुख़ ख़ान का दीवाना होने के लिए ये तीन फ़िल्में ही काफ़ी थीं। झूठ क्या कहूँ, लेकिन ‘दीवाना’ मैंने सिर्फ़ दिव्या भारती

28 जून 2026

सब एक-दूसरे को कॉकरोच समझ रहे थे!

सब एक-दूसरे को कॉकरोच समझ रहे थे!

इंट्री  मुझे किसी ने कहा था कि शाम पाँच बजे के बाद पुलिस अंदर नहीं जाने देगी। मैं हड़बड़ाया हुआ जब जंतर-मंतर पहुँचा तो पाँच बजने में कुछ मिनट बचे थे। एक गेट एक बैरिकेडिंग, एक मेटल डिटेक्टर, तीन तर

23 जून 2026

एक नीट अभ्यर्थी और उम्मीद का न्यूनतम बैलेंस

एक नीट अभ्यर्थी और उम्मीद का न्यूनतम बैलेंस

नीट की परीक्षा देने गए मेरे एक भाई के बाल बड़े थे। बाहर खड़े ज़िम्मेदारों ने उसके बालों में हाथ डालकर यह जाँच की कि कहीं उसमें कोई पुर्ज़ी तो नहीं है। मुझे इस सख़्ती पर ऐतबार भी आया और ग़ुस्सा भी। भरो

23 जून 2026

प्रतिउत्तर : ‘रोएँगे हम हज़ार बार...’

प्रतिउत्तर : ‘रोएँगे हम हज़ार बार...’

प्रिय रचित, मैंने आपकी इम्तियाज़ अली की फ़िल्म ‘मैं वापस आऊँगा’ पर लिखी दर्शक-समीक्षा पढ़ी। वह वीडियो भी देखा जिसमें एक लड़की रोते हुए अपना वीडियो रिकॉर्ड कर रही थी, जिसे बाद में उसने फ़ेसबुक पर सा

19 जून 2026

केवल इम्तियाज़ हँस रहा है और सब रो रहे हैं

केवल इम्तियाज़ हँस रहा है और सब रो रहे हैं

किसे चाहिए  मन का सोना  आँख का मोती  किसे पड़ी है  अंदर क्या है  होती रेत है  लगता पानी  [वर्ष 2015 में आई इम्तियाज़ अली निर्देशित फ़िल्म ‘तमाशा’ से।] मैं गए बुधवार इम्तियाज़ अली का इं