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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

21 मार्च 2026

‘रचना का प्रयोजन निर्माण है, नाश नहीं’

‘रचना का प्रयोजन निर्माण है, नाश नहीं’

मैंने साहित्य की किसी भी विधा में जब भी लिखा तब यह सोचकर नहीं लिखा कि मैं उक्त विधा की शर्तों को पूरा करने के लिए लिख रहा हूँ। …मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं कभी गद्य भी लिखना चाहूँगा और आज ऐसा

20 मार्च 2026

सही नाम से पुकारने की कला

सही नाम से पुकारने की कला

क्या लिखते हुए हम चीज़ों को उनके सही नाम से पुकारते हैं? चाहे गद्य हो या कविता—यह प्रश्न आत्ममंथन की माँग करता है। साहित्य में शब्द की ‘सत्ता’ और उसकी ‘संज्ञा’ की बराबर भूमिका होती है। जब टॉमस मान ने

19 मार्च 2026

पथेर पांचाली : हाशिए पर खड़े जीवन की कथा

पथेर पांचाली : हाशिए पर खड़े जीवन की कथा

मैंने हाल में ‘पथेर पांचाली’ उपन्यास पढ़ा। यह मेरा क़ुबूलनामा है कि इससे पहले बंगाली साहित्य के नाम पर मैंने केवल रवींद्रनाथ ठाकुर की ‘गीतांजलि’ का हिंदी अनुवाद पढ़ा था। यहाँ आपका अंदाज़ा सही है कि बं

18 मार्च 2026

भारतीय सड़कें जादूगर का मंच हैं!

भारतीय सड़कें जादूगर का मंच हैं!

आजकल मैं ड्राइविंग सीख रहा हूँ। मेरे घरवाले बड़े समय से मुझसे कहते घूम रहे थे कि उन्हें घर में एक ड्राइवर की कमी खलती है। “पैसा देकर ड्राइवर रखना हम अफ़्फोर्ड नहीं कर सकते। फिर ये स्साले ड्राइवर च

18 मार्च 2026

कविता का स्वप्न और स्वप्न में कविता

कविता का स्वप्न और स्वप्न में कविता

दो औंस लंदन ड्राई जिन, एक औंस फ़्रेंच वर्माउथ, आधा चम्मच बेनेडिक्टिन, दो डैश ऑरेंज बिटर्स और एक सुंदर गिलास हो। इस गिलास को पहले से बहुत ठंडा कर लिया जाए और सब सामग्रियों को डालते ही तुरंत इसमें बर्फ़

17 मार्च 2026

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

कहानी : मैं किसी के लिए कुछ नहीं हूँ

“अब भी क्या गले न मिलोगी? अभी तक वही हिचक... मिल लो यार, क्या पता अगली मुलाक़ात हो न हो।” उसकी पसीजी हुई हथेलियाँ छूट रही थीं मुझसे। वो गले लगने या लगाने को बेताब था। विदा की बेला में ये बातें मेर

13 मार्च 2026

जो घुला नहीं

जो घुला नहीं

बचपन में जब मेरी माँ दुपहर के वक़्त आराम करते हुए सो जाया करती थी, तब मेरी बड़ी बहन और मैं किचन में जाकर खाना बनाने का खेल खेला करते थे। मैं इतनी छोटी थी कि मुझे चूल्हा जलाना तक नहीं आता था और घर में आ

10 मार्च 2026

पिंजड़े में क़ैद ज़िंदगी

पिंजड़े में क़ैद ज़िंदगी

इस साल सारी आपदाएँ एक साथ आने को व्याकुल हों जैसे। अभी तो मानसून की आहट भी नहीं और बादल हैं कि रोज़ सावन-भादो हुए जाते हैं। सुबह से शुरू हुई बारिश बंद होने का नाम ही नहीं ले रही है। बाबू कहने को दस स

06 मार्च 2026

जगह-जगह 2.0  : द मैजिक माउंटेन : मनुष्य-चेतना पर महामारी के चिह्न

जगह-जगह 2.0 : द मैजिक माउंटेन : मनुष्य-चेतना पर महामारी के चिह्न

एक …अगर वह फ़िलॉसॅफ़िकल है तो एक ऐसे अर्थ में जिसके लिए अक्सर हम ‘फ़िलॉसॅफ़ी’ जैसे शब्द का इस्तेमाल नहीं करते, पर जो अपनी अंत:प्रक्रिया में ही एक तरह का सोच, एक तरह का निश्चय, एक तरह की रिफ़्लेक्टिवने

03 मार्च 2026

बनारस की मसान होली : जीवन और मृत्यु का अद्वैत संगम

बनारस की मसान होली : जीवन और मृत्यु का अद्वैत संगम

धार्मिक-ग्रंथों और पुराणों के अनुसार काशी जिसे स्वयं शिव के त्रिशूल पर टिकी नगरी माना जाता है, संसार के उन विरल स्थानों में से एक है जहाँ मृत्यु को शोक नहीं, बल्कि मोक्ष का द्वार माना जाता है। शास्त्