Font by Mehr Nastaliq Web

बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

24 अप्रैल 2026

‘शपथ पर ग्रहण’

‘शपथ पर ग्रहण’

वह श्वेतवस्त्रधारिणी अचानक मेरे सामने उपस्थित हो गई। उस म्लानमुख, नतशीश नायिका ने आते ही आग्रह किया—“मुझे ग्रहण करें कवि!” मैंने अपरिचय की दीवार को ढाहने के उद्देश्य से प्रश्न किया—“पहले अपना नाम त

23 अप्रैल 2026

विराम-चिह्नों की क्रांति और एम डैश की सत्ता का अंत

विराम-चिह्नों की क्रांति और एम डैश की सत्ता का अंत

हाल ही में मेरी मुलाक़ात एम डैश से हुई। बेहद परेशान, दुखी, चिंतित और बेचैन अवस्था में बैठा था। चेहरा भावप्रवण, अश्रु-भरे नयन, जगत के उलाहनों से क्षुब्ध। ख़ुद को भाषा और लेखन के प्रिय साथी से सिर्फ़ स

23 अप्रैल 2026

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र

नशे से ‘नशा मुक्ति केंद्र’ तक का सफ़र सिर्फ़ दूरी का नहीं होता; यह एक ऐसे अँधेरे से गुज़रने जैसा होता है, जहाँ हर क़दम पर आदमी ख़ुद से थोड़ा-थोड़ा टूटता है... और मैं अब इस झूठ के साथ नहीं जीना चाहता कि

22 अप्रैल 2026

‘मालिक’ का मलबा

‘मालिक’ का मलबा

ख़ून कम कर अब कि कुश्तों के तो पुश्ते लग गए क़त्ल  करते  करते   तेरे  तीं   जुनूँ   हो   जाएगा [अब ख़ून करना रोक, लाशों की लकीरें लग चुकी है। (वरना) क़त्ल करते-करते तू पागल हो जाएगा।] — मीर

20 अप्रैल 2026

सौरभ द्विवेदी की रिकमेंडेशन को श्रद्धा से नहीं, संदेह से पढ़ा जाना चाहिए

सौरभ द्विवेदी की रिकमेंडेशन को श्रद्धा से नहीं, संदेह से पढ़ा जाना चाहिए

रतन राजपुरोहित मेरा सहकर्मी है—युवा, उत्साही, पढ़ाकू और ज़बरदस्त लिक्खाड़। अगर लिखने से कैलोरी बर्न होती, तो वह देश का सबसे फिट आदमी होता। पिछले बुधवार की शाम को, शिफ़्ट ख़त्म होने के बाद उसने मुझसे स

17 अप्रैल 2026

मेरी रचनात्मकता, मेरे द्वंद्व

मेरी रचनात्मकता, मेरे द्वंद्व

कहते हैं कला आत्मा का फूल होती है। हाँ होती है, पर यह फूल किसी सरोवर में नहीं, किसी दलदल में, किसी कीचड़ में ही खिलता है। उसकी ख़ूबसूरती देखकर आप क़तई अंदाज़ा नहीं लगा सकते कि वह किन परिस्थितियों में

15 अप्रैल 2026

आशा भोसले : स्वर, छवि और स्वर्णिम दौर की आख़िरी चमक

आशा भोसले : स्वर, छवि और स्वर्णिम दौर की आख़िरी चमक

आशा भोसले में एक चार्म है। वह छवि जो उनको सोचने से बनती है। वह जीवन के उस स्वरूप के अधिक निकट है जो इंसानी सुख-दुख, प्रेम-सौहार्द, ईर्ष्या-द्वेष जैसे मानवीय गुणों से मिलकर बनता है। यह उनकी बड़ी बहन [

10 अप्रैल 2026

वसंत का प्रताप

वसंत का प्रताप

वसंत। अहा! शब्द कान के पर्दों पर पड़ते ही हृदय को आह्लादित कर देता है। शरद की तीक्ष्ण शीतलहर प्रस्थान कर चुकी है। ग्रीष्म के आगमन की आहट भी अभी निकट नहीं है। न ठिठुरन है, न पसीने से भीगता बदन ही। अलाव

06 अप्रैल 2026

मेरे रचनात्मक द्वंद्व

मेरे रचनात्मक द्वंद्व

मैं एक लेखक हूँ, यह कहने के लिए कितने उतार-चढ़ावों का सामना करना पड़ा है। बतौर लेखक यहाँ या कहीं भी, खड़े होने के लिए मैंने लंबी यात्रा तय की है। प्रथमतः आत्म-स्वीकृति। इस आत्म-स्वीकृति तक पहुँचना जट

05 अप्रैल 2026

रचनात्मकता और द्वंद्व

रचनात्मकता और द्वंद्व

पेड़-पौधों की ही तरह हर रचनाकार अपनी मिट्टी, अपने परिवेश की उत्पत्ति होता है । मेरा यह कहना बेहद सामान्य कथन है । यह तो कहा जाता ही रहा है । फिर मैं नया क्या कह रहा हूँ? मैं नया बिल्कुल नहीं कह रहा।