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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

31 जनवरी 2026

‘चेख़व का पत्र निकोलाय के लिए : देखो, जीवन की अपनी शर्तें होती हैं...’

‘चेख़व का पत्र निकोलाय के लिए : देखो, जीवन की अपनी शर्तें होती हैं...’

मॉस्को, 1886 …तुम मुझसे अक्सर शिकायत करते रहे हो कि लोग तुम्हें “समझते” नहीं हैं! गेटे और न्यूटन ने कभी ऐसी शिकायत नहीं की थी... मसीह ने इसकी शिकायत की थी, लेकिन वह अपने सिद्धांत की बात कर रहे थे,

30 जनवरी 2026

जगह-जगह 2.0 : मोबी-डिक : सनक, साहस और समुद्र की कथा

जगह-जगह 2.0 : मोबी-डिक : सनक, साहस और समुद्र की कथा

पानी ये पानी ख़ामुशी से बह रहा है इसे देखें कि इसमें डूब जाएँ —अहमद मुश्ताक़ समुद्र-साहित्य केवल साहसिक कथाओं से नहीं बना है। उसमें एक आदिम पुकार है कि पानी अपनी ओर खींचता है। उसमें मृत्यु औ

29 जनवरी 2026

हबीब तनवीर : साधारण में असाधारण की खोज

हबीब तनवीर : साधारण में असाधारण की खोज

नाट्य शास्त्र के पहले ही अध्याय में एक श्लोक है जो एक तरह से नाटक की परिभाषा है— योऽयम स्वभावां लोकस्य सुखदुखसमन्वितः सोंगभिनयोपेतो नाट्यमित्यभिधीयते।। यह जो लोक (फ़ोक का अनुवाद नहीं, बल्कि सम

28 जनवरी 2026

एक लाख अस्सी हज़ार चार सौ बावन मिनट का इंतज़ार

एक लाख अस्सी हज़ार चार सौ बावन मिनट का इंतज़ार

जानते हो तीन हज़ार घंटे कितनी देर में बीतते हैं? नहीं जानते। चार महीने, ग्यारह दिन में। दिन-रात, सुबह-शाम सब जोड़ दें तो। चार महीने, ग्यारह दिन। मैं कोई देवदास की पार्वती नहीं हूँ, जिसने पल में

27 जनवरी 2026

अंचित से दस सवाल : मुझे दिल्ली बिल्कुल पसंद नहीं है

अंचित से दस सवाल : मुझे दिल्ली बिल्कुल पसंद नहीं है

अंचित (जन्म: 1990) नई पीढ़ी के चर्चित कवि, अनुवादक और संपादक हैं। वर्ष 2021 में उन्हें ‘कवि केदारनाथ सिंह कविता सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वे इसक-2023 के कवि भी हैं। हाल ही में उनका नया कविता-संग्

27 जनवरी 2026

नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ

नए साल की रात, 'पहल' की विरासत और अजित पुष्कल की स्मृतियाँ

शाम के सात बज चुके थे और अब इस समय पर लखनऊ के लिए बस पकड़ने का आशय यह होता कि रात के लगभग बारह बजे के आस-पास या उससे थोड़ा ज़्यादा समय पर ही लखनऊ पहुँच पाता। ऐसे में सिविल लाइंस से वापस लौटना ही सबसे

24 जनवरी 2026

पहले मेरी कामुकता क्षैतिज थी, अब वह ऊर्ध्वाधर है

पहले मेरी कामुकता क्षैतिज थी, अब वह ऊर्ध्वाधर है

सूज़न सॉन्‍टैग की दिनांकित प्रविष्टियाँ जीवन का लेखा नहीं, एक सजग मन की अविराम पकड़ हैं—सूचियों, संकेतों, मनन के रूप में। बाहर जो व्यक्तित्व सुसंगत और स्थिर दीखता है, भीतर वह निरंतर स्वयं को गढ़ता है

23 जनवरी 2026

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

ज्ञानरंजन के मनोहर का ‘बहिर्गमन’ उर्फ़ ‘पिता’ को रुमाल की ज़रुरत है...

नौ दशक का एक सुदीर्घ और शानदार जीवन जीकर ज्ञानरंजन हमें छोड़ कर चले गए। वह मनोहर की तरह प्रस्थान करते हुए रुमाल हिला रहे हैं। अपना रुमाल उमस में सोये उस ‘पिता’ को देना चाहते हैं, जो खटिया के दाएँ पाटी

22 जनवरी 2026

नॉस्टेल्जिक दौर में माँ (स्त्री) की भूमिका

नॉस्टेल्जिक दौर में माँ (स्त्री) की भूमिका

प्रस्तुत लेख ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित ‘बेला’—‘सदी की आख़िरी माँएँ’, प्रणव मिश्र तेजस के लेख की प्रतिक्रिया में लिखा गया है। ‘सदी की आख़िरी माँएँ’ (मूल लेख) प्रथम—23 नवंबर को ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित हुआ। इसे

21 जनवरी 2026

कहानी : बावर की वनकन्या

कहानी : बावर की वनकन्या

प्रणाम दीदी कैसी हो आप? आज बहुत दिनों बाद फ़ोन आया आपका। सब ख़ैरियत से तो है! तू जानती ही है सुधा तेरे जीजाजी के गुज़र जाने के बाद ज़िंदगी काली चाय-सी हो गई है। अब जीवन में ना कोई स्वाद है और ना ह