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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

05 अप्रैल 2026

‘रचनात्मकता और द्वंद्व राही डूमरचीर’

‘रचनात्मकता और द्वंद्व राही डूमरचीर’

पेड़-पौधों की ही तरह हर रचनाकार अपनी मिट्टी, अपने परिवेश की उत्पत्ति होता है । मेरा यह कहना बेहद सामान्य कथन है । यह तो कहा जाता ही रहा है । फिर मैं नया क्या कह रहा हूँ? मैं नया बिल्कुल नहीं कह रहा।  म

04 अप्रैल 2026

आधुनिकतावाद से सामना : मेरी सृजनात्मकता और उसके समक्ष चुनौतियाँ

आधुनिकतावाद से सामना : मेरी सृजनात्मकता और उसके समक्ष चुनौतियाँ

एक ‘सृजनात्मकता’ शब्द से मेरे मन में प्राथमिक तौर पर दो चित्र उभरते हैं—एक, रोपाई के लिए बीज से पौध तैयार करने की अपनी क्यारी को सुबह की धुंध में निरखता हुआ एक अकेला किसान; और दूसरी, लालटेन की रोश

04 अप्रैल 2026

चुप्पी में सारे उत्तर छुपे होते हैं

चुप्पी में सारे उत्तर छुपे होते हैं

20 जुलाई 2022 अदीब अचानक नींद से उठ बैठा। किसी ऊबड़-खाबड़ सपने की वजह से शायद। कुछ क्षण बाद ठीक से उसकी चेतना लौटी तो उसको लगा कि वह अकेला नहीं सो रहा है, कमरे में चैतन्या की यादें भी सो रही हैं। इस

03 अप्रैल 2026

मेरी रचनात्मकता और मेरे द्वंद्व

मेरी रचनात्मकता और मेरे द्वंद्व

बरसों पहले मैंने एक लेख लिखा था, लगभग इसी मामले में कुछ सोचा था कि रचनाकार की अनुभूति और जो  जीवन वह जीता है और जो कुछ भी वह लिखता है या लिख पाता है उसमें कितना अंतर्विरोध होता है। किसी भी रचनाकार के

02 अप्रैल 2026

गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि

गद्य होती कविता, थकता हुआ कवि

जिस दौरान नवंबर बीत रहा था, उसी दौरान घर में एक नया जीवन उतर रहा था। मेरा मन हर घड़ी लगभग बैठा जाता था। लगभग घंटे दो घंटे बाद लगता—अब निकले प्राण कि तब निकले, लेकिन निकले अभी तक नहीं। अब यह कहने की को

02 अप्रैल 2026

शांतिनिकेतन डायरी : ‘संगमन’ के दौरान

शांतिनिकेतन डायरी : ‘संगमन’ के दौरान

22 नवंबर 2025, मुंबई एयरपोर्ट पर हूँ। सुबह का समय है। सूर्योदय देख रहा हूँ। सुबह का शीतल सूर्य। जीवन की आपाधापी में रोज़ एक दृश्य ऐसा दिखता है जो सुंदर है। हर किसी को अपने हिस्से का सौंदर्य मिल

30 मार्च 2026

हमारे राम कहाँ गए!

हमारे राम कहाँ गए!

ये वे दिन थे जब अँधेरा आकर हमारे आँगन के बीचोबीच बैठ जाता था और हम पाँचों भाई-बहन काँपते हुए संध्या-तारे से धूप की कहानियाँ माँगने लगते थे। लाल बिंदी लगाए हुए दादी एक-एक कर हर कमरे में रोशनी दिखातीं

25 मार्च 2026

तू साडे नाऴ वरत के देख

तू साडे नाऴ वरत के देख

मेरे बारे में मेरे साथियों की राय बहुत हास्यास्पद है। यात्राओं की योजना पर तो और भी ज़्यादा। मैं जब भी आगे बढ़कर योजना बनाता हूँ तो वे इसे गंभीरता से नहीं लेते, इसके बावजूद मैंने पंजाब यात्रा की योजन

24 मार्च 2026

विचारों का युग, सिनेमा, बौद्धिक संपदा और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस

विचारों का युग, सिनेमा, बौद्धिक संपदा और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस

गूगल के आने से दुनिया आसान हुई और तथ्यों की एक्सेसिबिलिटी बढ़ी। इस दौर में विजुअल नैरेटिव और पैडागॉजिकल टूल्स बहुत तेज़ी से बदल रहे हैं। दुनिया भर में कई सारी लाइब्रेरी और कॉलेजेस डिस्फ़ंक्शनल हो रहे

21 मार्च 2026

रचना का प्रयोजन निर्माण है, नाश नहीं

रचना का प्रयोजन निर्माण है, नाश नहीं

मैंने साहित्य की किसी भी विधा में जब भी लिखा तब यह सोचकर नहीं लिखा कि मैं उक्त विधा की शर्तों को पूरा करने के लिए लिख रहा हूँ। …मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मैं कभी गद्य भी लिखना चाहूँगा और आज ऐसा