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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

08 सितम्बर 2026

‘धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : मैं हिंदी का परमानेंट खलिहर नहीं था’

‘धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : मैं हिंदी का परमानेंट खलिहर नहीं था’

गताध्याय से आगे... ग्यारह  “सोने का मुकुट नहीं चाहिए था, चाँदी का चँवर भी नहीं चाहिए था। साहित्य का सिंहासन लेकर क्या करता, मेरा चूतड़ उस पर बैठने से इंकार कर देता। राजाओं के दरबार में जगह-वजह चा

08 सितम्बर 2026

खोटी सीख देने वाले, गोली मारने वालों से भी अधिक बुरे होते हैं

खोटी सीख देने वाले, गोली मारने वालों से भी अधिक बुरे होते हैं

यह पत्र विजयदान देथा का चंद्रप्रकाश देवल (सी.पी. देवल) को लिखे एक सीख-रूपी पत्र का अनुवाद है। संयोग से सी.पी. देवल विजयदान देथा के जँवाई हैं। सो, इस पत्र में उनका ‘ससुर’ रूप भी सीख के बहाने बीच-बीच म

04 सितम्बर 2026

लगभग तीन दिन दो रातें

लगभग तीन दिन दो रातें

मुझे पता चल चुका था कि वहाँ वह मेरी प्रतीक्षा करने के लिए नहीं होगा… और जब यह पता चल चुका था तो यह कैसे न मालूम होता कि वहाँ मुझे उसका इंतिज़ार करना था। उसके स्कार्फ़ का... मेरे गले का फंदा बनने को आ

03 सितम्बर 2026

जौहर : कायरता नहीं, मध्यकालीन अस्मिता और स्वाधीनता-बोध का आख्यान

जौहर : कायरता नहीं, मध्यकालीन अस्मिता और स्वाधीनता-बोध का आख्यान

समकालीन नैतिक कसौटियों से मध्यकालीन जौहर को तौलकर उसे ‘कायरता’ की संज्ञा दे देना उस संपूर्ण सांस्कृतिक चेतना की उपेक्षा है, जिसमें अर्पण, तर्पण, समर्पण, पवित्रता, शुचिता, मर्यादा, आत्मसंयम, चरित्र, स

03 सितम्बर 2026

‘हिन्दवी उत्सव’ में प्रेम की संभावनाएँ

‘हिन्दवी उत्सव’ में प्रेम की संभावनाएँ

फ़्योदोर दोस्तोयेवस्की की ‘वाइट नाइट्स’ से एक पंक्ति पिछले दो दिन से ज़ेहन में घूम रही है, “यह एक अद्भुत रात थी—ऐसी रात, जो केवल तब संभव होती है, जब हम युवा होते हैं।” ऐसी ही एक अद्भुत रात से पहले का

02 सितम्बर 2026

‘हासिल’ से आगे का इलाहाबाद

‘हासिल’ से आगे का इलाहाबाद

बीते 23 अगस्त को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र [NCZCC], प्रयागराज, उत्तर प्रदेश में ‘हिन्दवी उत्सव’ 2026 का आयोजन किया गया। मैं इस बात का आग़ाज़ इस तरह नहीं करूँगा कि मैं झूँसी से निकला तो बारि

01 सितम्बर 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : बंधन प्रेम के रास्ते का रोड़ा है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : बंधन प्रेम के रास्ते का रोड़ा है

गताध्याय से आगे... दस  बड़ी से बड़ी मुश्किलों में भी झंकार मिसिर को कभी इतना चुप और इतना उदास होते नहीं देखा था। चाहे जीवन में उसे कोई जीत न मिली हो, लेकिन उसे कभी हारते नहीं देखा था। उसे जब भी द

28 अगस्त 2026

सावन-गात खँची कजरी की अल्पना

सावन-गात खँची कजरी की अल्पना

आषाढ़ की साँझें हमेशा किसी के लौटने की आहट लेकर आती हैं। दिन भर की धूप से तपे हुए आकाश के किसी कोने में जब पहली कारी रेखा दिखाई देती है, तो लगता है जैसे बहुत दूर गया हुआ कोई अपना, स्मृति की देहरी पर

25 अगस्त 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : यही सब आज का हिंदी साहित्य है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : यही सब आज का हिंदी साहित्य है

गताध्याय से आगे... नौ  उदय का दुख यह नहीं था कि वह ब्राह्मणों के बीच अछूत है, बल्कि यह है कि वह पिछड़े और एससी के बीच ब्राह्मण है। वह उनके लिए कुछ भी कर दे, जान की बाज़ी लगा दे, तो भी सवर्ण था, ऊ

18 अगस्त 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : अब पद नहीं, कुपद चलता है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : अब पद नहीं, कुपद चलता है

गताध्याय से आगे... आठ  उदय के बड़े-बुज़ुर्गों ने उदय से कभी पूछा ही नहीं कि तुम्हें हुआ क्या है, तुम क्यों दुखी रहते हो, आओ मेरे पास बैठो, मुझे बताओ, क्यों तुम ज़माने से ख़फ़ा हो? साहित्य की दुनिया