वर्षा पर बेला
ऋतुओं का वर्णन और उनके
अवलंब से प्रसंग-निरूपण काव्य का एक प्रमुख तत्त्व रहा है। इनमें वर्षा अथवा पावस ऋतु की अपनी अद्वितीय उपस्थिति रही है, जब पूरी पृथ्वी सजल हो उठती है। इनका उपयोग बिंबों के रूप में विभिन्न युगीन संदर्भों के वर्णन के लिए भी किया गया है। प्रस्तुत चयन में वर्षा विषयक विशिष्ट कविताओं का संकलन किया गया है।
बिंदुघाटी 2.0 : जीटी रोड पर सावन आ गया है
• ‘बिंदुघाटी’ के पिछले अंकों में भारत की राजनीति के संदर्भ में अगले कुछ वर्षों के लिए दबाव-समूह की महत्ता को रेखांकित किया गया था और इसमें कॉकरोच जनता पार्टी [सीजेपी] की महती भूमिका की अपेक्षा भी की
08 अगस्त 2026
शनिवारेर चिट्ठी : इस बार सावन दहका हुआ है
20:32—बुधवार बे-तरतीब बारिश हो रही है। मतलब मैं कुछ बे-तरतीब वाक्य संभव करना चाहता हूँ। मसलन बारिश हो रही है। मतलब तुम्हारी याद आ रही है। मतलब बादल अपनी काली देह में बंद समुद्रों की अधूरी स्मृतिया
मालिनी अवस्थी संग 31 जुलाई को बरसेगा सावन झूम-झूम के...
इस सावन दिल्ली केवल बारिश में नहीं भीगेगी, बल्कि भारतीय लोक-परंपराओं की आत्मा को छू लेने वाली सुर-धारा में भी सराबोर हो उठेगी। 31 जुलाई 2025 को कमानी ऑडिटोरियम में भारत की लोक संगीत सम्राज्ञी, पद्मश्
हथेलियों में बारिश भरती माँ
इलाहाबाद उस दिन मेघों से आच्छादित रहा। कुछ देर तक मूसलाधार फिर रुक-रुक कर बारिश होती रही। मैं अपने कमरे में बैठा अमरूद के पेड़ पर गिर रही बूँदों को देख रहा था। देखते हुए स्मृतियों की बूँदें मेरे मन प
बारिश आँगनों का स्वप्न है
कई दिनों की लगातार बारिश के बाद मेरे घर के आँगन में यहाँ-वहाँ बारिश का साफ़ पानी तरह-तरह के आकारों में बैठ गया है। आँगन में बने पानी के इन आकारों में पानी का एकांत बैठ गया है। पानी का सौंदर्य, पानी का
भारत कृषिप्रधान देश हुआ करता था!
बरसात का मौसम हर साल प्रकृति को साफ़ करने में योगदान करे या न करे लेकिन भौतिक विकास का प्रपंच किस राज्य की नगरपालिका ने कितना ज़्यादा किया है—यह क्रमशः दिखाने में कसर नहीं छोड़ता; और छोड़े भी क्यों ज