साहित्य और संस्कृति की घड़ी
हाल ही में मेरी मुलाक़ात एम डैश से हुई। बेहद परेशान, दुखी, चिंतित और बेचैन अवस्था में बैठा था। चेहरा भावप्रवण, अश्रु-भरे नयन, जगत के उलाहनों से क्षुब्ध। ख़ुद को भाषा और लेखन के प्रिय साथी से सिर्फ़ सा
ख़ून कम कर अब कि कुश्तों के तो पुश्ते लग गए क़त्ल करते करते तेरे तीं जुनूँ हो जाएगा [अब ख़ून करना रोक, लाशों की लकीरें लग चुकी है। (वरना) क़त्ल करते-करते तू पागल हो जाएगा।] — मीर
11 अप्रैल को दिल्ली के सुरजीत भवन में आयोजित साहित्यिक संगोष्ठी ‘तीन कवि तीन किताबें’ केवल एक सामान्य पुस्तक-परिचर्चा नहीं थी, बल्कि समकालीन हिंदी कविता की नई आवाज़ों, उनके सरोकारों और समय की बेचैनिय
रतन राजपुरोहित मेरा सहकर्मी है—युवा, उत्साही, पढ़ाकू और ज़बरदस्त लिक्खाड़। अगर लिखने से कैलोरी बर्न होती, तो वह देश का सबसे फिट आदमी होता। पिछले बुधवार की शाम को, शिफ़्ट ख़त्म होने के बाद उसने मुझसे स
• मैं कैसा था? अलमुस्तफ़ा से अलमित्रा ने पूछा कि अविनाश मिश्र कैसा था, जब दिल्ली आया था? अलमुस्तफ़ा ने कहा कि दिल्ली में अपना क्षरण पता नहीं चलता। दिल्ली में बहुत काम करने के लिए एक स्कॉलर ब
सोमवार मैं लौटने की आख़री सड़क पर हूँ। यह सोमवार की तेज़ भागती सड़क है। इसकी रफ़्तार को दो दिनों के घर-आराम के बाद ‘काम पर लौटने’ के पंख लगे हैं। घर से पश्चिम की ओर निकलती है पहली सड़क। वह रास्ता बदलती
कहते हैं कला आत्मा का फूल होती है। हाँ होती है, पर यह फूल किसी सरोवर में नहीं, किसी दलदल में, किसी कीचड़ में ही खिलता है। उसकी ख़ूबसूरती देखकर आप क़तई अंदाज़ा नहीं लगा सकते कि वह किन परिस्थितियों में
आशा भोसले में एक चार्म है। वह छवि जो उनको सोचने से बनती है। वह जीवन के उस स्वरूप के अधिक निकट है जो इंसानी सुख-दुख, प्रेम-सौहार्द, ईर्ष्या-द्वेष जैसे मानवीय गुणों से मिलकर बनता है। यह उनकी बड़ी बहन [
आशा भोसले भारतीय संगीत जगत और भारतीय फ़िल्म जगत में पार्श्व गायन का एक विराट नाम हैं। उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था, “मैं भारतीय फ़िल्म गायन की अंतिम मुग़ल हूँ।” यह बात उनके लंबे संगीत जीवन, भार
13 अप्रैल 2026
अप्रैल की 13 तारीख़ को नवोदय स्थापना दिवस होता है। इस साल मेरे नवोदय को 25 साल हो गए। कितने शान से खड़ा है नवोदय और पिछले 25 सालों में इसने कितने सारे बच्चों के जीवन को संवारा है। नवोदय को याद करती ह