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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

30 मई 2026

‘शनिवारेर चिट्ठी : अजाने देशों में’

‘शनिवारेर चिट्ठी : अजाने देशों में’

यात्रा-कल्पना-स्मृति तीन घंटे की एक बस-यात्रा किसी मनुष्य को क्या दे सकती है? वह कवि है तो अधैर्य। वह प्रेम में है तो प्रत्याशा। वह पुरानी होती स्त्री है तो पीठ की पीड़ा और वह ऊब रहा आदमी है तो... त

29 मई 2026

जगह-जगह 2.0 : न मैं हिंदी शहर नगौरी

जगह-जगह 2.0 : न मैं हिंदी शहर नगौरी

भाषा-विज्ञान में व्युत्पत्ति-भ्रांति का अर्थ है कि किसी शब्द के प्राचीनतम अर्थ को ही उसका ‘सही’ अर्थ मानने पर ज़ोर दिया जाए और उसके वर्तमान इस्तेमाल को रद्द करके उसे उसके मूल प्रयोग, प्राचीन अर्थ और स

28 मई 2026

रागदर्पण : उस जादुई शाम के नाम

रागदर्पण : उस जादुई शाम के नाम

अपने हालिया सफ़र के बाद, मैं पूरे यक़ीन के साथ कह सकती हूँ कि मैंने अपने अब तक के जीवन की सबसे करामाती शाम को देखा है। बुलंद बर्फ़-पोश पहाड़ियों के पीछे पश्चिम में दहककर बुझता हुआ लाल अलाव। वह दृश्य मेरे

27 मई 2026

शंखनाद : मूर्खताएँ प्रेम में होने की अनन्य कसौटी हैं

शंखनाद : मूर्खताएँ प्रेम में होने की अनन्य कसौटी हैं

कभी-कभी मैं विधाता की मनुष्य के रूप में कल्पना करता हूँ तो लगता है कि विधाता भी कोई परम मसख़रा ही होगा और यह भी कि विधाता ने यह दुनिया सिर्फ़ मसख़री और खेल-खेल में ही बना दी है। और प्रेम? प्रेम

26 मई 2026

ज़िज़ेक से एक बातचीत

ज़िज़ेक से एक बातचीत

स्लावोज ज़िज़ेक प्रसिद्ध दार्शनिक और सांस्कृतिक आलोचक हैं। वह मार्क्सवाद, मनोविश्लेषण और हीगेल के विचारों से लेकर सिनेमा, पॉप कल्चर, पॉपुलर घटनाओं का इस्तेमाल करके समकालीन समय का क्रिटिक पेश करते हैं

26 मई 2026

निर्मल वर्मा : चिंतन के स्वर

निर्मल वर्मा : चिंतन के स्वर

सुख्यात लेखक निर्मल वर्मा के लेखन को पढ़ना अक्सर किसी शांत, धुँधले पहाड़ी रास्ते पर चलने जैसा अनुभव देता है, जहाँ दृश्य जितना सामने होते हैं, उससे कहीं अधिक ओझल भी। उनके यहाँ कथ्य से अधिक महत्त्व

25 मई 2026

सुनील दत्त की मानवीय विरासत

सुनील दत्त की मानवीय विरासत

20 अक्तूबर 2001 को दत्त साहब (सुनील दत्त) से उनके ऑफ़िस में मिलने का मौक़ा मिला। शुरुआत में हमारी मुलाक़ात का वक़्त केवल 20 मिनट तय हुआ था, लेकिन जब उन्हें पता चला कि मैं पश्चिमी पंजाब से आया हूँ, तो

24 मई 2026

रविवासरीय 4.0 : दस सवालों के जवाब

रविवासरीय 4.0 : दस सवालों के जवाब

• इस तारीख़ पर अभी सवेरा नहीं उतरा है। पक्षियों के स्वर अभी दूर हैं। कुछ देर में दूर बीतेगा और वे चहचहाएँगे—अपने-अपने साथियों के साथ। इस प्रकार समूह में समूह के साथ न रहकर भी समूह के साथ होने की सचाई

23 मई 2026

शनिवारेर चिट्ठी : घर की जगह

शनिवारेर चिट्ठी : घर की जगह

डेरा मनुष्य अपने घर के बारे में सबसे कम तब सोचता है, जब वह अपने घर का निवासी होता है। तब घर की उपस्थिति इतनी स्वाभाविक होती है कि वह लगभग अदृश्य हो जाता है। बचपन में “हमारा अपना दो-मंज़िला घर है”

22 मई 2026

DJ वाले बाबू आजकल बिहार में जो बजा रहे हैं...

DJ वाले बाबू आजकल बिहार में जो बजा रहे हैं...

अगर किसी विदेशी शोधार्थी को बिहार का समकालीन समाज समझाना हो, तो मैं उसे एक क़स्बाई शादी में भेजना पसंद करूँगा। वहाँ उसे बिहार के बारे में लगभग सब कुछ मिल जाएगा। शहरों की शादियाँ मशीनी हो गई हैं। वहाँ