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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

27 फरवरी 2026

‘भाड़े के श्रोता और दाद का कारोबार’

‘भाड़े के श्रोता और दाद का कारोबार’

मैं उन दिनों बरेली में पढ़ रहा था। एक मुशायरा होने वाला था, जिसकी बड़ी धूम थी। हिंदी-उर्दू की मंचीय कविता के सारे बड़े नाम आमंत्रित थे। आयोजक पैसेवाले लोग थे, मुशायरे को शहर के इतिहास का सबसे बड़ा और

27 फरवरी 2026

हत्यावादी जूनून के चक्रव्यूह में फँसा ‘कैनेडी’

हत्यावादी जूनून के चक्रव्यूह में फँसा ‘कैनेडी’

वर्ष 2021 में देश के सबसे अमीर लोगों में से एक के घर के सामने एक गाड़ी पाई गई थी, जिसमें विस्फोटक सामग्री पाए जाने की ख़बर थी। उस घटना के बाद संबंधित राज्य के सत्ता समीकरणों में बहुतेरे बदलाव देखे गए

26 फरवरी 2026

नई पीढ़ी नए बदलाव : इमोजी से रील्स तक

नई पीढ़ी नए बदलाव : इमोजी से रील्स तक

विश्वविद्यालयों में हिंदी साहित्य की कक्षाओं की अपनी टिपिकल संस्कृति होती है—चरणस्पर्शी और बहुत छुईमुई। इन कक्षाओं में प्रेमचंद, प्रेमचंद नहीं रहते, “प्रेमचंद जी” हो जाते हैं, “निराला जी”, “मुक्ति

25 फरवरी 2026

आख़िर कितना चक दे इंडिया!

आख़िर कितना चक दे इंडिया!

पिछले कुछ वर्षों से क्रिकेट नित्यकर्म की तरह हो चला है। हर रोज़ क्रिकेट खेला जा रहा है। हर रोज़ फेंकी जा रही है बॉल, हर रोज़ घुमाया जा रहा है बल्ला और हर रोज़ ही छूट रही हैं कैचें! इस रोज़मर्रा की क्

25 फरवरी 2026

क्रेज़ी किया रे : AI के अतिक्रमण में मौलिकता का अस्तित्व

क्रेज़ी किया रे : AI के अतिक्रमण में मौलिकता का अस्तित्व

वह फ़रवरी का नौवाँ दिन था और विभाग में वैसी ही चहल-पहल थी, जैसी अन्य कार्यक्रमों के दिनों में होती है। विभाग में कथाकार रणेन्द्र आए हुए थे। ख़ैर, ऐसा तो अक्सर होता है; विभाग में कोई-न-कोई आता ही रहता

24 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-10

नवीं कड़ी से आगे... दस अरुण कमल सत्तर साल से अधिक का जीवन देख चुके हैं और वरिष्ठ कवियों की सूची में भी आ चुके हैं। अरुण कमल हिंदी में प्रसिद्ध और लोकप्रिय कवि भी हैं। कभी रामचंद्र शुक्ल ने लिखा

24 फरवरी 2026

तुम्हें विदा करने में असमर्थ हूँ!

तुम्हें विदा करने में असमर्थ हूँ!

यह दिन पिछले दिनों से कितने भिन्न हैं, इन दिनों तुम्हें खोने के भय के सिवा मेरे पास और कुछ भी नहीं। प्रेम-प्रसंग के ये अंतिम दिन इतने अरुचिकर और अवसादमय भी हो सकते हैं, यह मैंने कभी नहीं सोचा था। सोच

24 फरवरी 2026

‘अर्थात्’ की तीसरी गोष्ठी में खुले छायावाद के बंध

‘अर्थात्’ की तीसरी गोष्ठी में खुले छायावाद के बंध

प्रसाद-निराला-महादेवी-पंत के चतुष्टय पर आधारित छायावाद की कविताओं, उसकी भाषा, प्रवृत्तियों, संवेदना और सहमतियों-असहमतियों पर संवाद के उद्देश्य से 22 फ़रवरी की बीती दुपहर ‘छायावाद : खुल गए छंद के बंध’

23 फरवरी 2026

साहित्योत्सव : साहित्य कम, टाइमपास ज़्यादा

साहित्योत्सव : साहित्य कम, टाइमपास ज़्यादा

आजकल साहित्य-उत्सवों, सम्मेलनों और पुस्तक मेलों की धूम है। वैसे उत्सव और सम्मेलन हमेशा से समाज के बहुमूल्य अंग रहे हैं। हर जाति, धर्म और समुदाय अपने-अपने स्तर पर युवक-युवती परिचय सम्मेलन करवाते हैं,

23 फरवरी 2026

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

अरुण कमल : ‘चुप रहो मुझे सब कहने दो’-9

आठवीं कड़ी से आगे... नौ ‘अपनी केवल धार’ जो देखने में छोटी पर अरुण कमल की कीर्ति का आधार-स्तंभ है कि तरह मेरी एक और प्रिय छोटी-सी कविता है जिसका शीर्षक है—‘थूक’ : “जब वह ग़ुंडा प्राचार्य मान बहाद