साहित्य और संस्कृति की घड़ी
बर्फ़ धीरे-धीरे गिर रही थी, जैसे नींद किसी उदास आदमी की पलकों से सरक जाती है; और बर्फ़ केवल बर्फ़ नहीं थी, यह रौशनी से ख़ाली स्मृतियों का एक साया था जो शहर पर मंडरा रहा था। शहर, जो वक़्त की क़ब्र का एक
मैं Clarice Lispector, Annie Ernaux और Han Kang के बीच राहुल सांकृत्यायन को पढ़ रही थी। क्या यह सही फ़ैसला था? पता नहीं। कुछ ही दिनों पहले; मैं 1950 के पेरिस की सैर कर रही थी, और उसके कुछ दिन बाद मैं
दसवीं, बारहवीं और प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम घोषित हो चुके हैं। नतीजों का मौसम ख़ुशियों के बजाय अब डर पैदा करने लगा है क्योंकि आए दिन परीक्षाओं में विफल होने पर बच्चों के आत्महत्या कर लेने की ख़बर
हिंदी-साहित्य के संवर्धन में सक्रिय ‘रेख़्ता फ़ाउंडेशन’ के उपक्रम ‘हिन्दवी’ ने बीते शनिवार की शाम एक विशेष साहित्यिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘हिंदियाँ’ का आयोजन किया। यह कार्यक्रम थिएटर, इंडिया हैबिटेट स
06 मई 2026
चैत्र में बसंत के उनींदे से जागा ग्रीष्म वैशाख में अपना वैभव खोजता है। दुपहरें अपनी दीर्घता से ऊबकर अलसाती हैं और निस्पंद हो जाती हैं। अगर उमस न हो तो ऐसी दुपहर पढ़ने-लिखने को अनुकूल है। इसी समय में
यदि तुम बरसों बाद घर लौटकर आओ—तो वे एकदम पहचान लेते हैं, पर वे यह नहीं जानते, तुम कहाँ से लौटकर आए हो। वे कभी सोच नहीं सकते कि इतनी यातना सहकर उन्होंने जिसे जन्म दिया है, वह बड़ा होकर इतनी यातना बर्द
04 मई 2026
वे अनपेक्षित बाढ़ की तरह आती रहीं। उनका पानी मैला नहीं था, न ही उतना साफ़। वे मेरे भीतर बने घर को—जो पहले से खंडहर था और खंडहर करती चली गईं। वे खुला मैदान चाहती थीं, जिसमें वे अपने मुताबिक़ खेलना और
03 मई 2026
• प्रवेश आसान होता है, अगर परिचय प्रगाढ़ हो। इस राह में परिचय की स्मृति और संदर्भ भी सहायक हो सकते हैं। यों भी न हो, तब भूमिकाएँ काम आती हैं। वे बताती हैं कि व्यक्ति जिसमें प्रवेश करने जा रहा है, वह व
छायालीन यह दृश्य है या एक ठहरा हुआ उच्चारण! जैसे समय ने अपनी जीभ बाहर निकाल शब्द को अधूरा छोड़ दिया हो। क्षितिज पर शहर कोई ठोस आकृति नहीं, धुंध का अभ्यास है। वह अपने होने को सिद्ध नहीं करता, संकेत
01 मई 2026
कितनी तीखी ठंड है, एंगेल्स! कैसी गहरी निस्तब्धता की ओर बढ़ती जा रही है यह पृथ्वी! फिर भी देखो, दिसंबर की मृत्यु को भुलाकर, जनवरी की जड़ता को पीछे छोड़कर, लंदन की सड़कों पर एक नई चेतना जन्म ले रही है।