Font by Mehr Nastaliq Web

बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

02 जुलाई 2026

‘तपते सूरज और थियो की तलाश’

‘तपते सूरज और थियो की तलाश’

विन्सेंट वॉन गॉग के प्रति सदा एक आकर्षक बना रहा। उनकी पेंटिंग के कारण नहीं विन्सेंट से जुड़ी कहानियों के कारण। शेष संसार की तरह उनकी पेंटिंग को तो मैंने भी बहुत बाद में जाना। सबसे पहले मिलना हुआ स्टार

01 जुलाई 2026

एक रात जो अब भी मेरे भीतर उजाला करती है

एक रात जो अब भी मेरे भीतर उजाला करती है

स्मृतियाँ सचमुच कभी नहीं मरतीं। वे हमारे भीतर किसी गहरे, अदृश्य तह में चुपचाप बैठी रहती हैं—कभी धुँध की तरह, कभी उजाले की तरह और कभी किसी ऐसे सपने की तरह जो जागने के बाद भी पूरी तरह टूटता नहीं। कु

01 जुलाई 2026

कहानी : काजल की कोठरी

कहानी : काजल की कोठरी

दिन के सवा ग्यारह बज रहे हैं और कमरे में गहरा अँधेरा छाया हुआ है। पर्दे गिराए हुए, दो-दो खिड़कियाँ लेकिन दोनों बंद। फ़र्श एकदम चिकट, कमरे के बाहर एक सड़े हुए कपड़े को डोरमैट के रूप में बिछाया हुआ है। अल

30 जून 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : आषाढ़ का पहला दिन और...

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : आषाढ़ का पहला दिन और...

आज आषाढ़ का पहला दिन है। इस अवसर पर हम ‘हिन्दवी बेला’ पर वह कर रहे हैं, जो इससे पूर्व हमने कभी नहीं किया—एक उपन्यास का धारावाहिक प्रकाशन। यह हमारे लिए बहुत हर्ष और उल्लास का प्रसंग है कि इस काम की शु

30 जून 2026

शंखनाद : सोच-समझवाले को थोड़ी नादानी दे मौला...

शंखनाद : सोच-समझवाले को थोड़ी नादानी दे मौला...

मेरे पास एक ही धन है—निकम्मापन। मैं बाय चॉइस निकम्मा नहीं हूँ। यह आलस्य और काहिली के संयुक्त उद्यम से उपजा है। ऐसा नहीं है कि मैं डेड वुड हूँ जो किसी काम के लिए प्रेरित नहीं होता; प्रेरित होता हूँ—जब

29 जून 2026

कहानी : लौट आएँगे

कहानी : लौट आएँगे

विवाह के इन दस वर्षों के दरमियान घर के ख़र्चों के साथ अब शब्दों में भी कटौती होने लगी है। राहुल के आने की आहट होती है, पत्नी रसोई से केवल पलकें उठाती है और फिर तुरत ही अपने काम में व्यस्त हो जाती है।

28 जून 2026

सब एक-दूसरे को कॉकरोच समझ रहे थे!

सब एक-दूसरे को कॉकरोच समझ रहे थे!

इंट्री  मुझे किसी ने कहा था कि शाम पाँच बजे के बाद पुलिस अंदर नहीं जाने देगी। मैं हड़बड़ाया हुआ जब जंतर-मंतर पहुँचा तो पाँच बजने में कुछ मिनट बचे थे। एक गेट एक बैरिकेडिंग, एक मेटल डिटेक्टर, तीन तर

28 जून 2026

कोहबर : मिथिला की लोक-आस्था की सांस्कृतिक विरासत

कोहबर : मिथिला की लोक-आस्था की सांस्कृतिक विरासत

कलाएँ मानवीय अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम होती हैं। प्राचीन काल से ही मनुष्य अपनी अभिव्यक्ति कलाओं के विविध रूपों में करता आया है। उसकी कल्पनाओं के आदिम अवशेष आज भी लोक कलाओं में चिह्नित किए जा सकते है

27 जून 2026

शनिवारेर चिट्ठी : पुलिसवाली है या लेस्बियन, उधर जो औरत है? कहाँ?

शनिवारेर चिट्ठी : पुलिसवाली है या लेस्बियन, उधर जो औरत है? कहाँ?

पूर्वग्रह मुहल्ले में ‘मौग’ होना उपहास की बात थी। बसों-ट्रामों में हाथ बजाकर अपनी पहचान जताना किसी हीनता की निशानी। और मैदान के अँधेरे कोनों में खींच लिया जाता अथवा स्वेच्छा से ‘व्यभिचार’ में

27 जून 2026

मैं शहरों को देखकर कभी मुस्कुरा नहीं सका!

मैं शहरों को देखकर कभी मुस्कुरा नहीं सका!

आज से क़रीब दस महीने पहले मैं दूसरी बार दिल्ली की ओर आया। दिल्ली के किनारे, नोएडा को ठिकाना बनाया। जब मैं आया तब मेरे पास शब्दों का एक बड़ा-सा गोदाम था। इस गोदाम से मैं शब्द निकालता, उसे वाक्य बनाता