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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

31 अक्तूबर 2026

‘पॉपुलर फ़िक्शन की बिसात क्या!’

‘पॉपुलर फ़िक्शन की बिसात क्या!’

उन्वान एक छलावा है। छलावा इसलिए कि मुसन्निफ़ यदि शीर्षक की मुराद पूरी करके खिसक ले, तो लेखन मोनोटोनस जान पड़ता है। उस शेर की तरह, जो कहते-सुनते बखत तो सुंदर प्रतीत होता है, किंतु म'आनी-आफ़रीनी से अछूत

31 अक्तूबर 2026

पत्र : वियोगिनी ठाकुर के लिए : ‘अश्लीलता’ के नए आयाम

पत्र : वियोगिनी ठाकुर के लिए : ‘अश्लीलता’ के नए आयाम

प्रिय वियोगिनी ठाकुर जी, आपके लिखे ‘अश्लील स्थितियों में फँसना’ पढ़ते हुए कुछ बातें मन में आईं। लगा कि आपसे उन पर बात की जानी चाहिए। आपके लिखे प्रसंगों में अश्लीलता, स्त्री-देह, सामाजिक पूर्वाग्रह

31 अक्तूबर 2026

आबै का इंतज़ार

आबै का इंतज़ार

गाँव-घर में कहा जाता है कि सपने में अपने किसी प्रियजन को मरा हुआ देखो, तो उसे यह बात मत बताओ। ऐसा करने से उसकी उम्र बढ़ती है और अगर बता दिया, तो उसकी उम्र घट जाती है। मैंने अपना वह सपना कभी आबै को नह

30 अक्तूबर 2026

दास्तान-ए-बीएचयू : चाँद तोहरे बाऊ क हव

दास्तान-ए-बीएचयू : चाँद तोहरे बाऊ क हव

रात गहरी है, देर तक जगने वाली लड़कियाँ भी सो चुकी हैं। छात्रावास के गलियारों में निस्तब्धता है और ऊपर दिखते आकाश से निरभ्र शांति झर रही है, पर यह शांति मेरी सीनियर के अशांत मन को सहला नहीं पा रही है।

30 अक्तूबर 2026

पत्र : कल्पना शास्त्री के लिए : मुझसे नहीं होगा समीक्षा का काम

पत्र : कल्पना शास्त्री के लिए : मुझसे नहीं होगा समीक्षा का काम

स्वस्ति श्री सर्वोपमायोग्य कल्पना शास्त्री जी, यहाँ से मनीष का राम-राम। चकित होऊ नका; मैं भी जानता हूँ कि चिट्ठी-पत्री की परंपरा तो अब बहुत पुरानी हो चुकी है। सो भी, मैं आपको चिट्ठी लिखने बैठ गया।

30 अक्तूबर 2026

मेरी पहली जेल-यात्रा-2

मेरी पहली जेल-यात्रा-2

यहाँ से आगे... रात भर यही सोच कर नींद लगी कि कल नहीं जाऊँगी, जाना ठीक नहीं, क्या पता कल और ख़राब न बीते। सिर का दर्द अगर कल भी बना रहा तो अगले कई रोज़ तक यही डेरा लगा रहेगा इसका, ऑफ़िस अपना पढ़ना-

29 अक्तूबर 2026

पत्र : सरस के लिए : आज तुम्हारा जन्मदिन है...

पत्र : सरस के लिए : आज तुम्हारा जन्मदिन है...

सरस, कैसी हो? आशा करता हूँ कि ठीक होगी। ये ख़त तुम्हारे जन्मदिन के लिए है। कुछ इच्छाएँ, यादें और हल्की-सी हिदायतें। हाँ, तुम्हें वो बिल्कुल भी पसंद नहीं, पर क्या करूँ? आदत से जो मजबूर ठहरा। हम भी

29 अक्तूबर 2026

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति को एक शोधार्थी का पत्र

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति को एक शोधार्थी का पत्र

आदरणीय कुलपति महोदय, सादर प्रणाम! आज जब आपकी झलक रील्स के माध्यम से देखने को मिली, तो बड़ा अचंभा हुआ। मुझे तो लग रहा था कि आप कहीं विदेश दौरे पर गए हैं! आज जब आप अपने हुजरे से निकले, तो लगा कि

29 अक्तूबर 2026

अनफ़्रेम्ड : भारतीय सिनेमा में कॉमरेड, आंदोलन और लाल सलाम

अनफ़्रेम्ड : भारतीय सिनेमा में कॉमरेड, आंदोलन और लाल सलाम

जब कोई अपने अधिकारों के लिए लड़ता है, उसे बड़ी हिम्मत से काम लेना होता है; हो सकता है उसे बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़े, उस वक़्त जो हौसला बढ़ाता है और मंज़िल पाने में मदद करे, उस इंसान को कह

28 अक्तूबर 2026

पत्र : तुकाराम मुंढे के लिए : कार्रवाई के तमाशे का आकर्षण

पत्र : तुकाराम मुंढे के लिए : कार्रवाई के तमाशे का आकर्षण

आदरणीय तुकाराम मुंढे जी, अभिनेता अनिल कपूर की एक फ़िल्म है ‘नायक’। आपने भी देखी ही होगी। इसमें एक पत्रकार एक दिन के लिए मुख्यमंत्री बनने की चुनौती स्वीकार करता है और चौबीस घंटे में इतने काम करता ह