साहित्य और संस्कृति की घड़ी
29 जनवरी 2026
वरिष्ठ कवि हरिशचंद्र पांडे की अध्यक्षता में मंगलवार, 27 जनवरी को चौधरी महादेव प्रसाद महाविद्यालय (सीएमपी डिग्री कॉलेज), प्रयागराज के सभागार में कथाकार रणविजय सिंह ‘सत्यकेतु’ द्वारा संपादित काव्य-संकलन
नाट्य शास्त्र के पहले ही अध्याय में एक श्लोक है जो एक तरह से नाटक की परिभाषा है— योऽयम स्वभावां लोकस्य सुखदुखसमन्वितः सोंगभिनयोपेतो नाट्यमित्यभिधीयते।। यह जो लोक (फ़ोक का अनुवाद नहीं, बल्कि सम
जानते हो तीन हज़ार घंटे कितनी देर में बीतते हैं? नहीं जानते। चार महीने, ग्यारह दिन में। दिन-रात, सुबह-शाम सब जोड़ दें तो। चार महीने, ग्यारह दिन। मैं कोई देवदास की पार्वती नहीं हूँ, जिसने पल में
विशाल हिमालय की गोद में बसे दो देश—भारत और नेपाल एक-दूसरे के पड़ोसी हैं और दोनों साथ में 1850 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा भी साझा करते हैं। भारत और नेपाल बॉर्डर भारतीय उपमहाद्वीप के बाक़ी देशों
अंचित (जन्म: 1990) नई पीढ़ी के चर्चित कवि, अनुवादक और संपादक हैं। वर्ष 2021 में उन्हें ‘कवि केदारनाथ सिंह कविता सम्मान’ से सम्मानित किया गया। वे इसक-2023 के कवि भी हैं। हाल ही में उनका नया कविता-संग्
27 जनवरी 2026
शाम के सात बज चुके थे और अब इस समय पर लखनऊ के लिए बस पकड़ने का आशय यह होता कि रात के लगभग बारह बजे के आस-पास या उससे थोड़ा ज़्यादा समय पर ही लखनऊ पहुँच पाता। ऐसे में सिविल लाइंस से वापस लौटना ही सबसे
सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के ‘फ़िराक़’ क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ का यह शेर वर्षों से पढ़ा जा रहा है। शायद इससे बेहतर भारत होने की यात्रा इतने कम शब्दों मे
दुनियाभर में आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस का हल्ला है। जहाँ एआई (AI) शब्द जुड़ जाता है, वह चीज़ एलीट लगने लगती है। यूट्यूब वीडियोज़ के समंदर में अगर पत्थर उछालो तो वो कोई न कोई एआई टूल सिखाने वाले पर ही ग
अगर हम गा पाते तो गाकर आपका बखान करते महाराज! लेकिन हमारी ज़िंदगी में लय नहीं है उतनी, इसमें खरज ज़्यादा है, ज़िंदगी का रियाज़ नहीं है, यह बेसुरी हो जाती है—बार-बार। इसलिए हम सिर्फ़ लिख पाएँगे। हम कोशिश क
जापान से आधिपत्य ख़त्म होने के बाद 50 के दशक में उत्तर और दक्षिण कोरिया के गठन और अलग-अलग सिनेमा उद्योग बनने के बाद आज दक्षिण कोरियाई सिनेमा उद्योग को सिनेमा के जानकार ‘हैल्युवुड’ के नाम से पुकारते है