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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

16 जुलाई 2026

‘लोकदूत देवेंद्र सत्यार्थी : बेला फूले आधी रात’

‘लोकदूत देवेंद्र सत्यार्थी : बेला फूले आधी रात’

न थका न रुका न हटा न झुका किसी फक्कड़ बाबा का मैं चेला हुआ हजारीप्रसाद द्विवेदी की उपर्युक्त काव्य-पंक्ति के प्रेरणा पुंजों में कबीर, बनारसीदास चतुर्वेदी आदि का नाम आता है, पर ‘एक युग : एक प्रतीक’

16 जुलाई 2026

पार्टनर, तुम्हारी प्राथमिकता क्या है?

पार्टनर, तुम्हारी प्राथमिकता क्या है?

प्राथमिकताएँ न तय कर पाने का संकट जीवन में निरंतर बना रहा है। इससे जूझना मानव की नियति ही रही है। यूँ कहें कि मनुष्य की विवशता ही उसकी नियति है। इधर बीच का जीवन, जो आधा पक चुका है—उसे किस शीतगृह में

15 जुलाई 2026

ये कोई अच्छी बातें हैं भला... ज़बान के हवाले से

ये कोई अच्छी बातें हैं भला... ज़बान के हवाले से

कुछ-एक रोज़ पहले एक लौंडे को फ़ेसबुक पर ज़बान के हवाले से एक तहरीर लिखकर लोगों को लताड़ते हुए देखा। जी बेचैन हो गया देखकर। सोचने लगा कि ऐसी फ़िक्र तो ज़बान की शायद उन्हें भी न हुई होगी जो संस्कृत के

15 जुलाई 2026

फ़ीफ़ा, रोनाल्डो, अश्वेत और हज़ारों साल पुराने सांस्कृतिक टकराव की पुनरावृत्ति

फ़ीफ़ा, रोनाल्डो, अश्वेत और हज़ारों साल पुराने सांस्कृतिक टकराव की पुनरावृत्ति

पता नहीं, यह बात कहना कितनी तर्कसंगत होगा और इसमें कितनी ही बौद्धिक या साहित्यिक संभावना होगी कि यूरोप का वर्चस्ववाद बार-बार इस्लामिक एवं अफ़्रीकी संप्रभुता को सीमित करने की कोशिश करता है और हर दफ़ा ख

14 जुलाई 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : विश्वविद्यालयों में जुलाई-अगस्त का महीना प्रेम के फूलों के खिलने का महीना होता है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : विश्वविद्यालयों में जुलाई-अगस्त का महीना प्रेम के फूलों के खिलने का महीना होता है

गताध्याय से आगे... तीन यह रात बहुत काली रात थी। फिर एक बहुत से बहुत काली रात। ऐसी रातें क्यों आती हैं, जीवन में, समाज में, साहित्य में और साहित्य और समाज में उजाले के लिए ख़ून-पसीना बहाते रहने

14 जुलाई 2026

मेरे अब्बा

मेरे अब्बा

उर्दू के मशहूर कहानीकार राजेंद्र सिंह बेदी ने अपनी एक कहानी ‘सिर्फ़ एक सिगरेट’ में लिखा है कि दुनिया के हर बेटे के दिल में कहीं न कहीं यह ख़्वाहिश छुपी होती है कि उसका बाप मर जाए। बेदी ने जिस बाप का ज़

13 जुलाई 2026

भारतीय बाबूतंत्र का सुख

भारतीय बाबूतंत्र का सुख

कुछ साल पहले सर्दियों में मैंने विंध्यदेश के खंडरों में भटकने का सिलसिला शुरू किया था—किया क्या था, बस हो गया था। यह भटकने का सिलसिला किसी अवसाद से मुक्त होने की कामना के अधीन या किसी शौक़ को संतुष्ट

13 जुलाई 2026

‘धूप कोठरी के आइने में खड़ी’ : शमशेर की कविता पढ़ते हुए एक स्मृति-चित्र

‘धूप कोठरी के आइने में खड़ी’ : शमशेर की कविता पढ़ते हुए एक स्मृति-चित्र

बचपन से बड़े होने के स्कूली क्रम में कुछ नौ-दस साल की उम्र में बाजी (दादी) के घर में ऐसे अनुभवों से भरी गर्मियों की न जाने कितनी दुपहरें आती थीं। पुराना घर था। आगे के हिस्से में चार कमरे और एक बरामदे

12 जुलाई 2026

बिंदुघाटी 2.0 : मुझे पता है कि इस पोस्ट में आपकी दिलचस्पी है

बिंदुघाटी 2.0 : मुझे पता है कि इस पोस्ट में आपकी दिलचस्पी है

• कोई भी आंदोलन हर क़ीमत पर एक सामजिक-सांस्कृतिक अभिव्यक्ति भी है। इसमें बहुत से प्रशिक्षित या अनुभवी जन भी होते हैं और बहुत से नए-नए उत्साही जन भी। आंदोलन ब्रिटिश राज़ की ग़ुलामी से निकले एक देश के लिए

11 जुलाई 2026

शनिवारेर चिट्ठी  : एक दुनिया, दूसरी दुनिया

शनिवारेर चिट्ठी : एक दुनिया, दूसरी दुनिया

हेडर इतिहास यह आदत रखता है कि वह अपने आरंभों को पीछे मुड़कर पहचानता है। जब कोई युग वास्तव में जन्म ले रहा होता है, तब वह किसी उद्घोषणा के साथ नहीं आता। वह एक साधारण दिन की तरह आता है, इतना साधारण