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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

09 अक्तूबर 2026

‘जगह-जगह 2.0 : दोस्तोयेवस्की को बख़्श दीजिए’

‘जगह-जगह 2.0 : दोस्तोयेवस्की को बख़्श दीजिए’

“Isn’t it maddening? Just when you begin to recognize a man called Alexandre, he is called Sacha, and then Satchka, and later Sachenka, and suddenly something pretentious like Alexandre Alexandrovitch

08 अक्तूबर 2026

अनफ़्रेम्ड : नाना पाटेकर : आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने!

अनफ़्रेम्ड : नाना पाटेकर : आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने!

नाना पाटेकर (1 जनवरी 1951–8 अक्टूबर 2026) हिंदी पॉपुलर सिनेमा के पहले और शायद आख़िरी एब्सर्ड किरदार थे। हमने दुःख और त्रासदी में डूबे दिलीप कुमार के समानांतर राज कपूर को देखा—भोला और ग़रीब, लेकिन नैतिक

08 अक्तूबर 2026

कविता समारोह नहीं, कविता : ‘वीरेनियत’ का आठवाँ आयोजन कल

कविता समारोह नहीं, कविता : ‘वीरेनियत’ का आठवाँ आयोजन कल

हिंदी के महत्त्वपूर्ण कवि वीरेन डंगवाल की स्मृति में आयोजित वार्षिक कविता-पाठ ‘वीरेनियत’ का आठवाँ आयोजन 9 अक्टूबर को जवाहर भवन, नई दिल्ली में होने जा रहा है। जन संस्कृति मंच (जसम) की ओर से आयोजित इस

07 अक्तूबर 2026

घाम-पानी : घोस्ट ऑफ़ एवरेस्ट : मैलोरी और इरविन की अधूरी यात्रा!

घाम-पानी : घोस्ट ऑफ़ एवरेस्ट : मैलोरी और इरविन की अधूरी यात्रा!

सबसे पहला सवाल जो आप मुझसे पूछेंगे और जिसका जवाब देने की मैं कोशिश भी करूँगा, वह है—“आख़िर एवरेस्ट पर चढ़ने का फ़ायदा क्या है?” और मेरा जवाब होगा—“कोई फ़ायदा नहीं।” मुझे इससे किसी भी तरह के लाभ की

07 अक्तूबर 2026

अपना नोबेल चाँद से भी दूर क्यों लगता है?

अपना नोबेल चाँद से भी दूर क्यों लगता है?

हर साल अक्टूबर आते ही एक अलग बयार चलने लगती है। शिउली के फूल खिलते हैं। रावण जलते हैं। नोबेल मिलते हैं। नवंबर में दिसंबर आने की भड़भड़ भरी रहती है। अक्टूबर चौदहवीं का चाँद है। यानी तनिक गुंजाइश है—गत

06 अक्तूबर 2026

रामलीला : जब देवराज ने रोका लंकाधिपति का रास्ता

रामलीला : जब देवराज ने रोका लंकाधिपति का रास्ता

लॉकडाउन के बाद पूरे देश ने कोरोना वायरस की क़ैद से निकलकर खुली हवा में साँस लेना शुरू ही किया था। सड़कों पर फिर से गाड़ियाँ दौड़ने लगी थीं, लोगों में बिना डर और हिचक के एक-दूसरे से one-arm distance क

06 अक्तूबर 2026

C/O बंगाल : गुरुदेव और महात्मा

C/O बंगाल : गुरुदेव और महात्मा

“लोग तुमसे तरह-तरह के अजीब सवाल करते हैं। कोई तुम्हें चिढ़ाता भी है। तुम भी उन सबके जवाब देते हो। संन्यासी की तरह रहते हो तुम। आख़िर इन सबको कैसे सँभाल लेते हो? ये सब अँग्रेज़ी शिक्षा का परिणाम है। तु

05 अक्तूबर 2026

कठपुतली : डोरियों में बसी सदियों पुरानी लोक-स्मृति

कठपुतली : डोरियों में बसी सदियों पुरानी लोक-स्मृति

कठपुतली कला मानव सभ्यता की उन प्राचीन लोक-अभिव्यक्तियों में से एक है, जिनमें मनोरंजन, शिक्षा, धार्मिकता और सामाजिक चेतना का अद्भुत समन्वय दिखाई देता है। ‘कठपुतली’ शब्द ‘कठ’ (लकड़ी) और ‘पुतली’ (गुड़िय

04 अक्तूबर 2026

रील रसाचार्य : रील काटने और कटवाने वाले

रील रसाचार्य : रील काटने और कटवाने वाले

जब कोई वक्ता किसी सार्वजनिक मंच पर बोलता है और जानता है कि कैमरे लगातार उसे रिकॉर्ड कर रहे हैं, तो वह कुछ अतिरिक्त सतर्क हो जाता है। उसे डर रहता है कि उसकी बात मीम या रील में बदल जाएगी, संदर्भ से काट

03 अक्तूबर 2026

प्रस्तुत नहीं : अकेलापन कोई चुनता नहीं, वह दे दिया जाता है

03 अक्तूबर 2026

प्रस्तुत नहीं : अकेलापन कोई चुनता नहीं, वह दे दिया जाता है

कितना कुछ घट रहा है। दुनिया में, देश में, मुझ में। बहुत उलझन में हूँ। बहुत सारी बातें एक साथ सोच रहा हूँ। अपने मस्तिष्क में हर चीज़ का, हर स्थिति का हिसाब लगाने की कोशिश करता हुआ—घर के एक कोने से दूस