साहित्य और संस्कृति की घड़ी
07 जुलाई 2026
गताध्याय से आगे... दो गंज गोबरहवा के दो पैर, दो आँखें, दो हाथ, दो दिल हैं, एक इस तरफ़ धड़कता है, दूसरा उस तरफ़। असल में जमुआर पुल के एक तरफ़ पुराना गंज गोबरहवा है, बहुत से भी बहुत पहले से गोबरहवा मे
मणि कौल की फ़िल्म ‘बादल द्वार’ उन क्लासिक अप्रतिम फ़िल्मों में से है, जिसे हिंदी सिनेमा के दायरे से बाहर भी अतीव प्रशंसा मिली। पश्चिम जगत में सराहा जाना कोई उत्कृष्ट कृति का पैमाना नहीं है। मगर ‘बादल
अवसर था दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कालेज के वार्षिकोत्सव पल्लव की सांस्कृतिक संध्या का। वहाँ उपस्थित थीं कलाकार पद्मभूषण—तीजनबाई। दर्शकों की संख्या लगभग इतनी ही थी कि उँगली पर गिनी जा सके। मंच
• व्लादिमीर : शुरुआत मुश्किल शय है। एस्त्रागान : तुम किसी भी चीज़ से शुरू कर सकते हो। व्लादिमीर : हाँ, लेकिन इसका निर्णय लेना होता है। एस्त्रागान : सही बात। — सैमुअल बेकेट | वेटिंग फ़ॉर गोदो
04 जुलाई 2026
पहली सीटिंग अह, यह कैसी आपद-कथा रही! वहाँ जाना आसान था तो मैं गया। पड़ोस में ज़रूरी चीज़ों की उपस्थिति को हम एक क़िस्म का सामाजिक सौभाग्य ही कहें। पड़ोस था मन में तो मिलते ही उससे कह भी दिया, “पड़ोसी ह
वह हमारी उम्र का था, मगर हट्टा-कट्टा बालक था। मुझे आज भी याद है—उसका बोलना, उसकी चमक से भरी आँखें! जो अनायास अपनी तरफ़ खींच लेती थीं। बिना कहे सुने उसे देखा जा सकता था। न जाने क्या था उसमें! आज सोचती
03 जुलाई 2026
‘पिकोलो फ़ाइल्स : पॉ एंड ऑर्डर’ (प्रभात प्रकाशन, प्रथम संस्करण : 2026) में लेखिका इरा टाक ने अपनी ओर से नहीं, बल्कि अपने पालतू कुत्ते ‘पिकोलो’ की ओर से उसकी दुनिया और उसका नज़रिया सामने रखा है। यही इ
विन्सेंट वॉन गॉग के प्रति सदा एक आकर्षक बना रहा। उनकी पेंटिंग के कारण नहीं विन्सेंट से जुड़ी कहानियों के कारण। शेष संसार की तरह उनकी पेंटिंग को तो मैंने भी बहुत बाद में जाना। सबसे पहले मिलना हुआ स्टा
स्मृतियाँ सचमुच कभी नहीं मरतीं। वे हमारे भीतर किसी गहरे, अदृश्य तह में चुपचाप बैठी रहती हैं—कभी धुँध की तरह, कभी उजाले की तरह और कभी किसी ऐसे सपने की तरह जो जागने के बाद भी पूरी तरह टूटता नहीं। कु
दिन के सवा ग्यारह बज रहे हैं और कमरे में गहरा अँधेरा छाया हुआ है। पर्दे गिराए हुए, दो-दो खिड़कियाँ लेकिन दोनों बंद। फ़र्श एकदम चिकट, कमरे के बाहर एक सड़े हुए कपड़े को डोरमैट के रूप में बिछाया हुआ है। अल