साहित्य और संस्कृति की घड़ी
इसे कोई सामान्य लेख नहीं, बल्कि एक माफ़ीनामा समझिए। यह माफ़ीनामा मेरी ही नहीं, मेरी पूरी पीढ़ी की ओर से उस पीढ़ी के नाम है, जिसे आज हम ‘जेन-ज़ी’ [Gen Z] कहते हैं। इधर कुछ दिनों में इस पीढ़ी ने अपने
उसका संग छूटते ही मेरे चौखूँट एक अजब निस्संगता आकर बैठ जाती थी कि फिर कई घंटों तक किसी की भी मौजूदगी मुझे उकताऊ और नागवार लगती। उसके साथ कोई आशनाई न थी; मगर हो सकने का भारी इमकान था, अगर मैं अपनी सन्
“यक़ीनन आप यही जानना चाहेंगे कि मैंने कितनी बार विवाह किया है? या फिर मैं दिन में कितनी बीड़ियाँ पीती हूँ? क्या मैं व्हिस्की के एक गिलास के बिना रह सकती हूँ?” जब जीवन के उत्तरार्ध में किसी बड़ी ले
28 जुलाई 2026
गताध्याय से आगे... पाँच दोस्ती के बारे में कई ज्योतिषियों ने दो बातें बताईं। पहली बात यह कि इस कलिकाल में सच्ची मित्रता के अकाल का योग है, हज़ार वाट का बल्ब लेकर ढूँढ़ते रह जाओगे; एक वाट का भी म
28 जुलाई 2026
हिंदी आलोचना के वृहत् परिदृश्य में नामवर सिंह की उपस्थिति एक ऐसे मील के पत्थर की तरह है, जिनका व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों ही गहन बौद्धिक ऊर्जा और उतने ही गहरे विवादों से निर्मित और विकसित हुए। वह के
पढ़ाई-लिखाई में डबल-बिलो औसत प्रदर्शन के बाद हमने यह स्वीकार कर लिया कि संप्रति यह हमारा क्षेत्र नहीं है और अपनी पहचान किसी दूसरे क्षेत्र में तलाशनी चाहिए। कुलदीप की राय थी कि हमें डॉक्टर बनने की
मुझे अपनी पीढ़ी से बहुत उम्मीद नहीं बची थी और जेन-ज़ी से तो शायद उससे भी कम। मुझे लगता था कि इंस्टाग्राम, रील्स और अपने छोटे-से डिजिटल संसार में मस्त इस पीढ़ी की ज़िंदगी में सार्वजनिक सवालों के लिए बह
26 जुलाई 2026
• धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफ़ा लिखने में काफ़ी समय लगाया। हालाँकि इस बीच जिस रचनात्मकता की सृष्टि हुई, उसे देखते हुए उनका इतना वक़्त लेना कम अखर रहा है। उनका दो पन्नों का इस्तीफ़ा क्या कॉकरोचों की स
आज शशिभूषण द्विवेदी [26 जुलाई 1975—7 मई 2020] की जन्मतिथि है। वह आज सदेह होते, तब आज उनका बावनवाँ वर्ष लग जाता। एक रचनाकार रचना के लिए एक कंदरा का निर्माण करता है। इस कंदरा में वह संसार से थक-भागकर छ
25 जुलाई 2026
मुझे मुआफ़ करना प्रिय! इतना भर कह देने से क्या होता है कि मन इस पूरे हफ़्ते खिन्न रहा। यह कहने से कि चीज़ें देखता-सुनता रहा और आँखें भीगती रहीं। कभी निराशा से तो कभी बिजली की तरह कौंध आती आशा से। यह