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समाज पर बेला

25 अगस्त 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : यही सब आज का हिंदी साहित्य है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : यही सब आज का हिंदी साहित्य है

गताध्याय से आगे... नौ  उदय का दुख यह नहीं था कि वह ब्राह्मणों के बीच अछूत है, बल्कि यह है कि वह पिछड़े और एससी के बीच ब्राह्मण है। वह उनके लिए कुछ भी कर दे, जान की बाज़ी लगा दे, तो भी सवर्ण था, ऊ

15 अगस्त 2026

इश्क़, इंक़लाब और इलाहाबाद

इश्क़, इंक़लाब और इलाहाबाद

पुराने शहर के पुराने इलाहाबादियों के पास थोक के भाव में नेहरू-गांधी ख़ानदान के क़िस्से हैं—जैसे-जैसे गंगा खिसककर यमुना के पास जाती रही, ठीक वैसे ही इलाहाबादियों ने इन गुज़रे क़िस्सों में स्वादानुसार

13 अगस्त 2026

शराबी क़ौम पर कुछ नोट्स : ‘अनदर राउंड’ के बहाने

शराबी क़ौम पर कुछ नोट्स : ‘अनदर राउंड’ के बहाने

शराबियों को एक ‘अस्मितामूलक’ इकाई/क़ौम (आइडेंटिटी) के रूप में देखना चाहिए कि नहीं? सुनने में यह अतिरंजित लग सकता है, लेकिन क्रूर सच्चाइयाँ अक्सर ही अतिरंजित लगती हैं। शराबियों को आइडेंटिटी नहीं मा

04 अगस्त 2026

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : बहादुरी सीखने की चीज़ नहीं है

धारावाहिक उपन्यास : जंकामंका गैंग : बहादुरी सीखने की चीज़ नहीं है

गताध्याय से आगे... छह  गंज गोबरहवा में मोनालिसा की मुस्कान को कोई नहीं जानता था। लेखक भी इस शहर में इन्हीं कोई का हिस्सा थे, उनका कोई स्वतंत्र व्यक्तित्व नहीं था। वे गंज गोबरहवा विश्वविद्यालय क

29 जुलाई 2026

भागो भई!

भागो भई!

शीर्षक वाला ‘भागना’ बहुत ही होलिस्टिक है। इसमें हर क़िस्म का भागना शामिल है—प्रॉफ़िट खदेड़ते पूँजीपतियों का भागना हो या पूँजीपतियों को खदेड़ते साम्यवादियों का। दूषित समाज को धर दबोचने के लिए साहित्य-

23 जुलाई 2026

अश्लील स्थितियों में फँसना

अश्लील स्थितियों में फँसना

उन दिनों मैं मौसी के घर रहकर बारहवीं की परीक्षा दे रही थी। मेरे साथ उसी गाँव की एक लड़की परीक्षा देने जाती थी। उस सुबह भी हम दोनों पेपर देने साथ जा रहे थे, जब रास्ते में उसकी नज़र सड़क के एक किनारे झ

20 जुलाई 2026

इंडियन रेलवे : एक चलता-फिरता समाज

इंडियन रेलवे : एक चलता-फिरता समाज

दुनिया और ज़िंदगी को ठहरकर नहीं, घर से निकलकर ही देखा जा सकता है। ज़िंदगी को जानने और समझने के लिए ठहराव ज़रूरी है, लेकिन उम्मीद और नाउम्मीदी से भरी तमाम यात्राओं के बाद। हमारी ज़िंदगी ट्रेन जैसी रफ़

13 जुलाई 2026

भारतीय बाबूतंत्र का सुख

भारतीय बाबूतंत्र का सुख

कुछ साल पहले सर्दियों में मैंने विंध्यदेश के खंडरों में भटकने का सिलसिला शुरू किया था—किया क्या था, बस हो गया था। यह भटकने का सिलसिला किसी अवसाद से मुक्त होने की कामना के अधीन या किसी शौक़ को संतुष्ट

10 जुलाई 2026

सतलुज : बहता हुआ इतिहास

सतलुज : बहता हुआ इतिहास

कुछ फ़िल्में शहीद होने के लिए ही बनती हैं। इस तरह देखें तो ‘सतलुज’ भी एक शहीद फ़िल्म है। यह फ़िल्म जब वर्ष 2023 में रिलीज़ के लिए तैयार हुई, तभी से विवादों में घिर गई। इस फ़िल्म का पहला शीर्षक ‘ग़ल्लू

10 जुलाई 2026

अलंकार मिश्रा का क्या है!?

अलंकार मिश्रा का क्या है!?

एक दुबला-पतला आदमी अलंकार मिश्रा! बीड़ी (या...) पीते हुए रील्स में दिखता है। गाँव-क़स्बे जैसा बैकग्राउंड, बिना माइक की आवाज़, मुँह से धुँआ निकल रहा है। वीडियो इंटरेस्टिंग लगता है। हम उस पर रुकते हैं।

08 जुलाई 2026

सतलुज : एक धारा को रोकने की कोशिश

सतलुज : एक धारा को रोकने की कोशिश

तीन साल की लंबी क़ानूनी और सेंसर संबंधी लड़ाई के बाद रिलीज़ हुई फिल्म ‘सतलुज’ मात्र दो दिन के भीतर ही भारत में ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ZEE 5 से हटा दी गई। अब यह फ़िल्म भारत में उपलब्ध नहीं है। सरकार ने इसे स

07 जुलाई 2026

सतलुज : ‘मैं हनेरे नूं चैलेंज करदां’

सतलुज : ‘मैं हनेरे नूं चैलेंज करदां’

“हिंसा को केवल झूठ के द्वारा छिपाया जा सकता है और झूठ को केवल हिंसा के द्वारा ही क़ायम रखा जा सकता है।”  — लेव तोल्स्तोय  हनी त्रेहन निर्देशित फ़िल्म ‘सतलुज’ [पहले ‘पंजाब 95’] लंबे संघर्ष के बाद

01 जुलाई 2026

कहानी : काजल की कोठरी

कहानी : काजल की कोठरी

दिन के सवा ग्यारह बज रहे हैं और कमरे में गहरा अँधेरा छाया हुआ है। पर्दे गिराए हुए, दो-दो खिड़कियाँ लेकिन दोनों बंद। फ़र्श एकदम चिकट, कमरे के बाहर एक सड़े हुए कपड़े को डोरमैट के रूप में बिछाया हुआ है। अल

29 जून 2026

कहानी : लौट आएँगे

कहानी : लौट आएँगे

विवाह के इन दस वर्षों के दरमियान घर के ख़र्चों के साथ अब शब्दों में भी कटौती होने लगी है। राहुल के आने की आहट होती है, पत्नी रसोई से केवल पलकें उठाती है और फिर तुरत ही अपने काम में व्यस्त हो जाती है।

28 जून 2026

कोहबर : मिथिला की लोक-आस्था की सांस्कृतिक विरासत

कोहबर : मिथिला की लोक-आस्था की सांस्कृतिक विरासत

कलाएँ मानवीय अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम होती हैं। प्राचीन काल से ही मनुष्य अपनी अभिव्यक्ति कलाओं के विविध रूपों में करता आया है। उसकी कल्पनाओं के आदिम अवशेष आज भी लोक कलाओं में चिह्नित किए जा सकते है

26 जून 2026

जगह-जगह 2.0 : हमारा फ़्यूचर शॉक कहाँ है?

जगह-जगह 2.0 : हमारा फ़्यूचर शॉक कहाँ है?

When did the future switch from being a promise to being a threat? — Chuck Palahniuk इतिहास की पूँछ और भविष्य गुरंदी बाज़ार की एक दुकान में मुझे एल्विन टॉफ़्लर की ‘फ़्यूचर शॉक’ की एक प्रति म

20 जून 2026

तुम्हारा बॉडी काउंट कितना है!

तुम्हारा बॉडी काउंट कितना है!

बॉडी काउंट शब्द मैंने कहाँ जाना या सुना इस बात पर सोचता हूँ तो दोस्तों की याद आती है। व्यक्ति में गाली, शराब जैसे सामाजिक विकारों की मृत जड़ों को अक्सर दोस्तों द्वारा ही पानी दिया जाता है, शायद इसीलि

19 जून 2026

केवल इम्तियाज़ हँस रहा है और सब रो रहे हैं

केवल इम्तियाज़ हँस रहा है और सब रो रहे हैं

किसे चाहिए  मन का सोना  आँख का मोती  किसे पड़ी है  अंदर क्या है  होती रेत है  लगता पानी  [वर्ष 2015 में आई इम्तियाज़ अली निर्देशित फ़िल्म ‘तमाशा’ से।] मैं गए बुधवार इम्तियाज़ अली का इं

08 जून 2026

विज्ञान कथा : दंभ

विज्ञान कथा : दंभ

अप्रैल, सन् 2101 यूँ धरती के सीने पर उगी आधुनिकतम संरचनाओं ने उसे एक विशिष्ट सौंदर्य प्रदान किया है, लेकिन कुछ ज़ख़्म ऐसे हैं जो छिप नहीं पाते। ये ज़ख़्म जलवायु परिवर्तन ने दिए हैं। अप्रैल-मई माह

05 जून 2026

‘बाघ का भाग्यफल और अन्य कहानियाँ’ : धर्म-सत्ता-प्रेम का त्रिकोण

‘बाघ का भाग्यफल और अन्य कहानियाँ’ : धर्म-सत्ता-प्रेम का त्रिकोण

लिखने की मोहलत के लिए मृत्यु को ही अपनी किताब सादर समर्पित करता लेखक मृत्यु से तो भिड़ ही रहा है, साथ ही उसकी वैचारिक मुठभेड़ अपने समय के अजीब, अप्रिय, भ्रामक, भ्रष्ट, कुव्यवस्था के सामाजिक, राजनीतिक,

13 मई 2026

क्या आप दिखा रहे हैं, भाषा का तमाशा

क्या आप दिखा रहे हैं, भाषा का तमाशा

वाक्य किसी भी समाज के साहित्य का अभिन्न अंग रहे हैं। इन वाक्यों के बिना कोई हुकूमत नहीं चल सकती थी और आज भी इन वाक्यों के बिना सरकार नहीं चल सकती। कैसे-कैसे कालजयी वाक्य इस देश में संभव हुए हैं :

06 मई 2026

जीवन से हारते बच्चे : दबाव, डर और टूटती उम्मीदें

जीवन से हारते बच्चे : दबाव, डर और टूटती उम्मीदें

दसवीं, बारहवीं और प्रतियोगी परीक्षाओं के परिणाम घोषित हो चुके हैं। नतीजों का मौसम ख़ुशियों के बजाय अब डर पैदा करने लगा है क्योंकि आए दिन परीक्षाओं में विफल होने पर बच्चों के आत्महत्या कर लेने की ख़बर

10 अप्रैल 2026

वसंत का प्रताप

वसंत का प्रताप

वसंत। अहा! शब्द कान के पर्दों पर पड़ते ही हृदय को आह्लादित कर देता है। शरद की तीक्ष्ण शीतलहर प्रस्थान कर चुकी है। ग्रीष्म के आगमन की आहट भी अभी निकट नहीं है। न ठिठुरन है, न पसीने से भीगता बदन ही। अलाव

18 मार्च 2026

भारतीय सड़कें जादूगर का मंच हैं!

भारतीय सड़कें जादूगर का मंच हैं!

आजकल मैं ड्राइविंग सीख रहा हूँ। मेरे घरवाले बड़े समय से मुझसे कहते घूम रहे थे कि उन्हें घर में एक ड्राइवर की कमी खलती है। “पैसा देकर ड्राइवर रखना हम अफ़्फोर्ड नहीं कर सकते। फिर ये स्साले ड्राइवर च

13 मार्च 2026

अस्सी : ‘तय करो, इसके नीचे हम नहीं फिसलेंगे’

अस्सी : ‘तय करो, इसके नीचे हम नहीं फिसलेंगे’

‘अस्सी’ आपको झकझोरती है, असहज करती है। वह ऐसे प्रश्न सामने रखती है, जिन्हें हम वर्षों से टालते आए हैं। वह हमें हमारे ही समय के कठोर सच से रूबरू कराती है। क्यों आज भी इस देश में प्रतिदिन लगभग अस्सी बल

11 मार्च 2026

रागदर्पण : क़िस्सागो अम्मा

रागदर्पण : क़िस्सागो अम्मा

एक उबाऊ शाम मोबाइल फ़ोन में उलझे हुए मैंने देखा कि फ़ोन इधर-उधर की तस्वीरों, बधाइयों और अनर्गल संदेशों से अटा पड़ा है। उन्हें डिलीट करते हुए मैंने ख़ुद को एक ज़ब्त न होने वाली झल्लाहट की गिरह में पाया।

23 फरवरी 2026

साहित्योत्सव : साहित्य कम, टाइमपास ज़्यादा

साहित्योत्सव : साहित्य कम, टाइमपास ज़्यादा

आजकल साहित्य-उत्सवों, सम्मेलनों और पुस्तक मेलों की धूम है। वैसे उत्सव और सम्मेलन हमेशा से समाज के बहुमूल्य अंग रहे हैं। हर जाति, धर्म और समुदाय अपने-अपने स्तर पर युवक-युवती परिचय सम्मेलन करवाते हैं,

04 फरवरी 2026

कहानी : बूढ़ा बच्चा

कहानी : बूढ़ा बच्चा

जाड़े में हैंडिल जितना चलाओ, नलके से उतना गरम पानी आता है। सितली फुआ दुकान जाने से पहले लोटा भरकर ताज़ा पानी सूर्य देवता को चढ़ाकर, सुखशंकर की बहु लीला के पास आती है। रिश्ते में दोनों पड़ोसी और ननद-भावज

02 फरवरी 2026

खुजली देसी बीमारी है

खुजली देसी बीमारी है

एक साहित्यिक आदमी खुजली को डॉक्टर के नज़रिये से नहीं देख सकता है। उसे केवल संक्रामक बीमारी कहकर संतुष्ट नहीं हो सकता। इसके पूर्व कि मैं खुजली पर बात करूँ, मुझे मौजूदा समय के हिंदी के लब्धप्रतिष्ठ कथा

31 जनवरी 2026

जब इतिहास ने साहित्य के दरवाज़े से अपनी आत्मा खोजी

जब इतिहास ने साहित्य के दरवाज़े से अपनी आत्मा खोजी

हम बात नहीं करते 1947 की, क्योंकि उस साल की बातें करना आसान नहीं। उन रातों की बात करना, जब ट्रेनें लाश-गाड़ियाँ बन गई थीं। उन औरतों की, जिनके शरीर युद्ध के मैदान बने। उन बच्चों की जिन्होंने घर जलते द

26 जनवरी 2026

असहमति की परंपरा और भारत का विचार

असहमति की परंपरा और भारत का विचार

सर-ज़मीन-ए-हिंद पर अक़्वाम-ए-आलम के ‘फ़िराक़’ क़ाफ़िले बसते गए हिन्दोस्ताँ बनता गया रघुपति सहाय ‘फ़िराक़’ का यह शेर वर्षों से पढ़ा जा रहा है। शायद इससे बेहतर भारत होने की यात्रा इतने कम शब्दों मे

22 जनवरी 2026

नॉस्टेल्जिक दौर में माँ (स्त्री) की भूमिका

नॉस्टेल्जिक दौर में माँ (स्त्री) की भूमिका

प्रस्तुत लेख ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित ‘बेला’—‘सदी की आख़िरी माँएँ’, प्रणव मिश्र तेजस के लेख की प्रतिक्रिया में लिखा गया है। ‘सदी की आख़िरी माँएँ’ (मूल लेख) प्रथम—23 नवंबर को ‘हिन्दवी’ पर प्रकाशित हुआ। इसे

21 जनवरी 2026

कहानी : बावर की वनकन्या

कहानी : बावर की वनकन्या

प्रणाम दीदी कैसी हो आप? आज बहुत दिनों बाद फ़ोन आया आपका। सब ख़ैरियत से तो है! तू जानती ही है सुधा तेरे जीजाजी के गुज़र जाने के बाद ज़िंदगी काली चाय-सी हो गई है। अब जीवन में ना कोई स्वाद है और ना ह

14 जनवरी 2026

ये बोझ कोई मज़हब नहीं उठा सकता

ये बोझ कोई मज़हब नहीं उठा सकता

अगर कोहाट में तब दंगे न हुए होते तो कमले की ससुराल वहीं होती, रावलपिंडी नहीं। रहीम ख़ान उन दिनों वहीं था। सब उसका आँखों देखा था। रहीम ने लालाजी की तरफ़ से जगप्रकाश अरोड़ा के ख़ानदान के तीसरे लड़के के लिए

11 जनवरी 2026

किरीस का गाना सुनेगा! ले बेटा...

किरीस का गाना सुनेगा! ले बेटा...

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा समाप्त हो चुका है। सरकारी आँकड़ों की मानें तो हम आधुनिकता के आगे निकल चुके हैं। यानी उत्तराधुनिकता में प्रवेश कर चुके हैं, जिसके कई उदाहरण हमें दिखाई देते हैं। इनमें से ए

06 जनवरी 2026

कहानी : पिस्तौल

कहानी : पिस्तौल

और इस तरह पिस्तौल का मेरे जीवन में पदार्पण हुआ... लगा कि आँगन के उस सिरे से धड़ाम से कोई कूदा। देखा तो अपना नरेन था। यानी अपना नरेंद्र यानी नरेनिया। मेरा ‘जिगरी दोस्त’! उन दिनों जब भी कोई उसे मेरा

17 दिसम्बर 2025

भाभी कॉम्प्लेक्स और कार्ल मार्क्स

भाभी कॉम्प्लेक्स और कार्ल मार्क्स

हिंदी साहित्य में भाभी जिस रूप में उतरी है, उसमें सत्य से अधिक सुहावनापन है। आज भी पुरुष की बहुपत्नीक और स्त्री की बहुपति प्रवृत्तियाँ, जो तहज़ीब के नीचे से अब भी रिसती रहती हैं और साहित्यदानों में द

01 दिसम्बर 2025

ऐसे वीडियोज हमारी सामूहिक विफलता का दस्तावेज़ हैं

ऐसे वीडियोज हमारी सामूहिक विफलता का दस्तावेज़ हैं

इधर दो-तीन दिनों से इंस्टाग्राम, X और रेडिट जैसे तमाम सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर एक पोर्न वीडियो की चर्चा है। सामान्य तौर पर ऐसे एमएमएस हर रोज़ सैकड़ों की संख्या में प्रसारित होते रहते हैं और लोग उन्

22 नवम्बर 2025

लाख काम छोड़कर बिहार जाना चाहिए

लाख काम छोड़कर बिहार जाना चाहिए

(डिसक्लेमर : मैं जन्मना बिहारी, कर्म से झारखंडी, मन से भारतीय और असंभव विश्व नागरिकता प्राप्त करने का आकांक्षी हूँ। इतने पर भी कोई शंका करे तो तुलसीदास के शब्दों में वह मुझसे भी अधिक जड़मति रंका है।)

06 नवम्बर 2025

कमल जीत चौधरी की दस कथाएँ

कमल जीत चौधरी की दस कथाएँ

कहानी उसने प्यार किया था। उसे अपने पुराने प्रेमी की याद सताती थी। पति की ग़ैरमौजूदगी में एक रात उसने अपने प्रेमी को घर बुलाया। घर के सभी बल्ब बंद करके, वह उसे पिछले दरवाज़े से अंदर ले आई। अंदर पहु

01 नवम्बर 2025

खरमिटाव : टी-ब्रेक और नक़द व्यवहार

खरमिटाव : टी-ब्रेक और नक़द व्यवहार

‘खरमिटाव’ अवधी प्रदेश के एक बड़ी पट्टी में प्रचलित शब्द है। इसका चलन धूमिल तो हुआ है, लेकिन बंद नहीं हुआ। इसका साफ़ कारण यह है कि इस शब्द में ऐसे साभ्यतिक इशारे मौजूद हैं, जिनसे जीवन-कर्म का स्वाभाविक

24 अक्तूबर 2025

लोक : भोजपुरी लोकगीत : विस्मृत धरोहर

लोक : भोजपुरी लोकगीत : विस्मृत धरोहर

भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि यह सामाजिक पहचान, वर्ग, जाति और सत्ता संरचनाओं से निर्मित राजनीति की भी वाहक होती है। इसे ‘प्रतीकात्मक पूँजी’ के तौर पर भी देखा जा सकता है, जो किसी समाज की सा

14 अक्तूबर 2025

पत्रकारिता के दुर्दिनों में, यह फ़िल्म देखी जानी चाहिए

पत्रकारिता के दुर्दिनों में, यह फ़िल्म देखी जानी चाहिए

हॉस्टल में शाम की चाय और रात के खाने के वक़्त पर यूट्यूब पर कुछ देखना भी दिनचर्या का लगभग अनिवार्य हिस्सा बन गया है। आज शाम को जब इस अनिवार्यता की पूर्ति के लिए यूट्यूब खोला तो सबसे ऊपरी पंक्ति में ह

13 अक्तूबर 2025

कथाएँ : चोर की माँ और आलू जी से मुलाक़ात

कथाएँ : चोर की माँ और आलू जी से मुलाक़ात

चोर की माँ पटना में ग़रीबों के एक मसीहा चिकित्सक थे। उनके पास प्रदेश के सुदूर इलाक़े के बहुत सारे ग़रीब रोग-व्याधि, दुख-संताप लेकर आते थे। ग़रीबी को सबसे बड़ी बीमारी मानने वाले मसीहा डॉक्टर के पास

07 अक्तूबर 2025

भाषा में पसरती जा रही मुर्दनी

भाषा में पसरती जा रही मुर्दनी

लेखक-पत्रकार प्रियदर्शन द्वारा अरुंधती राय की नई पुस्तक ‘मदर मेरी कम्स टु मी’ की भूमिका को संदर्भ में रखते हुए लिखा गया एक संक्षिप्त लेख पढ़ा, जिसमें यह बात कही गई कि हमारी भाषा अब स्थिर हो रही है। व

07 अक्तूबर 2025

क्या आप भी रील-रोग से ग्रस्त हैं?

क्या आप भी रील-रोग से ग्रस्त हैं?

रील-रोग से ग्रस्त और कुछ-कुछ कुपित एक रीलर-इन्फ़्लुएंसरों मित्र ने बेहद ऊबकर मुझसे पिछले दिनों कोई किताब पढ़ने की जिज्ञासा व्यक्त की। उन्हें शुरुआत करने में मुश्किल आ रही थी। मित्र पूरब के निवासी हैं,

11 सितम्बर 2025

मुक्तिबोध का दुर्भाग्य

मुक्तिबोध का दुर्भाग्य

आज 11 सितंबर है—मुक्तिबोध के निधन की तारीख़। इस अर्थ में यह एक त्रासद दिवस है। यह दिन याद दिलाता है कि आधुनिक हिंदी कविता की सबसे प्रखर मेधा की मृत्यु कितनी आसामयिक और दुखद परिस्थिति में हुई। जैसा कि

10 सितम्बर 2025

ज़ेन ज़ी का पॉलिटिकल एडवेंचर : नागरिक होने का स्वाद

ज़ेन ज़ी का पॉलिटिकल एडवेंचर : नागरिक होने का स्वाद

जय हो! जग में चले जहाँ भी, नमन पुनीत अनल को। जिस नर में भी बसे हमारा नाम, तेज को, बल को। —दिनकर, रश्मिरथी | प्रथम सर्ग ज़ेन ज़ी, यानी 13-28 साल की वह पीढ़ी, जो अब तक मीम, चुटकुलों और रीलों में

09 सितम्बर 2025

कहानी : लील

कहानी : लील

‘लील’—एक प्रादेशिक हिंदू रिवाज है, जो अधिकतर गुजरात राज्य के सौराष्ट्र प्रदेश में देखने को मिलता है। इस रिवाज के अनुसार अगर किसी पुरुष का विवाह ना हुआ हो और उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसकी वासनापूर्ति और

05 सितम्बर 2025

अपने माट्साब को पीटने का सपना!

अपने माट्साब को पीटने का सपना!

इस महादेश में हर दिन एक दिवस आता रहता है। मेरी मातृभाषा में ‘दिन’ का अर्थ ख़र्च से भी लिया जाता रहा है। मसलन आज फ़लाँ का दिन है। मतलब उसका बारहवाँ। एक दफ़े हमारे एक साथी ने प्रभात-वेला में पिता को जाकर