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शहर पर बेला

शहर आधुनिक जीवन की आस्थाओं

के केंद्र बन गए हैं, जिनसे आबादी की उम्मीदें बढ़ती ही जा रही हैं। इस चयन में शामिल कविताओं में शहर की आवाजाही कभी स्वप्न और स्मृति तो कभी मोहभंग के रूप में दर्ज हुई है।

15 अगस्त 2026

इश्क़, इंक़लाब और इलाहाबाद

इश्क़, इंक़लाब और इलाहाबाद

पुराने शहर के पुराने इलाहाबादियों के पास थोक के भाव में नेहरू-गांधी ख़ानदान के क़िस्से हैं—जैसे-जैसे गंगा खिसककर यमुना के पास जाती रही, ठीक वैसे ही इलाहाबादियों ने इन गुज़रे क़िस्सों में स्वादानुसार

31 जुलाई 2026

ईदगाह की सरज़मीं : प्रेमचंद और गोरखपुर

ईदगाह की सरज़मीं : प्रेमचंद और गोरखपुर

जब कभी ईद आती है या ईद का ज़िक्र छिड़ता है, एक कहानी और उसके किरदार अपने-आप ज़ेहन में उतर आते हैं—प्रेमचंद की ‘ईदगाह’, हामिद और दादी अमीना। हामिद का चिमटा, उसकी क़ुर्बानी और दादी के प्रति उसका बेपनाह

22 जुलाई 2026

प्रयागराज-यात्रा : सुकून की तलाश में

प्रयागराज-यात्रा : सुकून की तलाश में

लोग कुंभ या माघ मेले में पुण्य की कामना लेकर प्रयागराज आते हैं, किंतु मुझे मेले में जाने पर न जाने क्यों ख़ुद को खो देने का भय लगता है। फिर अपने पापों का हिसाब भी भला कौन रखता है! सच तो यह है कि जब-ज

09 जुलाई 2026

ई-रिक्शा : कहाँ जाओगे भाई सा’ब!

ई-रिक्शा : कहाँ जाओगे भाई सा’ब!

तीन का आँकड़ा क्या है?  तीन लोग हों, तो भी अर्थी ले जाई जा सकती है, बस एक तरफ़ थोड़ा झुकाव रहेगा। लोक-विश्वास देखें, तो तीन तिगाड़ा-काम बिगाड़ा। सुखी परिवार को भाषा को बिन परखे कहा जाए तो दो मिय

27 जून 2026

मैं शहरों को देखकर कभी मुस्कुरा नहीं सका!

मैं शहरों को देखकर कभी मुस्कुरा नहीं सका!

आज से क़रीब दस महीने पहले मैं दूसरी बार दिल्ली की ओर आया। दिल्ली के किनारे, नोएडा को ठिकाना बनाया। जब मैं आया तब मेरे पास शब्दों का एक बड़ा-सा गोदाम था। इस गोदाम से मैं शब्द निकालता, उसे वाक्य बनाता

22 मई 2026

फ़ीफ़ा, मैकडॉनल्ड्स और बीस साल पहले का इलाहाबाद

फ़ीफ़ा, मैकडॉनल्ड्स और बीस साल पहले का इलाहाबाद

इस दफ़ा फ़ुटबॉल विश्वकप की मेज़बानी अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको संयुक्त रूप से कर रहे हैं और दबी-दबी-सी चर्चा है कि भारत में कोई भी ब्रॉडकास्टर इसके प्रसारण अधिकार ख़रीदने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा ह

15 मई 2026

जगह-जगह 2.0 : चौरंगी, होटल कैलिफ़ोर्निया और गॉडफ़ादर

जगह-जगह 2.0 : चौरंगी, होटल कैलिफ़ोर्निया और गॉडफ़ादर

जगहें कैसे बनती हैं? तुम्हारे और मेरे बैठने से पहले, समंदर किनारे पड़े उन पत्थरों को क्या ‘जगह’ कहा जाए? फ़िल्म ‘रंगीला’ का समुद्र, ‘सदमा’ का समुद्र और ‘Life of Pi’ का समुद्र एक ही है? जगह एक दशा ह

26 अप्रैल 2026

रविवासरीय 4.0 : मेरी बहन की कविताएँ, एक प्लेलिस्ट की याद और थोड़ा-सा कानपुर

रविवासरीय 4.0 : मेरी बहन की कविताएँ, एक प्लेलिस्ट की याद और थोड़ा-सा कानपुर

• एक बंद घर में प्रतीक्षा भरी होती है। एक प्रतीक्षा जिसमें इच्छा नहीं होती। डोरबेल बजती और बजती और बजती ही रहती है। इस पर वस्तुएँ कैसे प्रतिक्रिया करती हैं, इस पर गंध कहाँ तक जा सकती है, इस पर मनुष्य

24 अप्रैल 2026

जगह-जगह 2.0 : पुणे के बहाने

जगह-जगह 2.0 : पुणे के बहाने

जाऊ नका कोणी तिथे जाऊ नका कोणी जे गेले, नाही आले परतोनी तुका पंढरीसी गेला पुन्हा जन्मा नाही आला पंढरीचे भूत मोठे — संत तुकाराम (1608-1650) संत तुकाराम इस अभंग में पंढरपुर के अलौकिक आकर्ष

06 अप्रैल 2026

शिवेन्द्र से 10 सवाल : मुंबई मुझे मज़दूरों का शहर लगता है

शिवेन्द्र से 10 सवाल : मुंबई मुझे मज़दूरों का शहर लगता है

शिवेन्द्र हिंदी की नई पीढ़ी के कथाकार हैं। वह मुंबई में रहते हैं। उनका एक उपन्यास (चंचला चोर) और दो कहानी-संग्रह (‘चॉकलेट फ़्रेंड्स और अन्य कहानियाँ’ और ‘सतरूपा’) प्रकाशित हो चुके हैं। आज प्रस्तुत है

31 मार्च 2026

मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’

मणिपाल यूनिवर्सिटी, जयपुर में ‘हिन्दवी कैंपस कविता’

हिन्दवी कैंपस कविता—‘हिन्दवी’ का एक विशेष आयोजन है। इस आयोजन के माध्यम से देश के विभिन्न शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर वहाँ के छात्रों को साहित्य-सृजन के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जाता है।

25 मार्च 2026

तू साडे नाऴ वरत के देख

तू साडे नाऴ वरत के देख

मेरे बारे में मेरे साथियों की राय बहुत हास्यास्पद है। यात्राओं की योजना पर तो और भी ज़्यादा। मैं जब भी आगे बढ़कर योजना बनाता हूँ तो वे इसे गंभीरता से नहीं लेते, इसके बावजूद मैंने पंजाब यात्रा की योजन

09 फरवरी 2026

शिरीष कुमार मौर्य के बहाने : बनारस से निकला हुआ आदमी

शिरीष कुमार मौर्य के बहाने : बनारस से निकला हुआ आदमी

मैं पहली बार शहर आए  किसी गँवई किसान-सा निहारता था  चीज़ों को  अलबत्ता देखे थे कई शहर जीवन के धूप-छाँव में यात्राएँ कहीं पीछे छूट जाती हैं। जीवन में आने वाली समानांतर समस्याएँ समझौते करने को वि

21 जनवरी 2026

अहमदाबाद : एक प्रवासी स्त्री की आँखों से

अहमदाबाद : एक प्रवासी स्त्री की आँखों से

तीन वर्ष पहले जब मैं अहमदाबाद आई, तो लगा जैसे किसी अपरिचित भूमि पर क़दम रख रही हूँ। पर धीरे-धीरे यह शहर मेरे भीतर उतरने लगा। या शायद यूँ कहूँ कि यह कभी पराया लगा ही नहीं। अहमदाबाद में एक अद्भुत सहजता

22 दिसम्बर 2025

शहर नक़्शे से नहीं, यात्राओं से पहचाने जाते हैं

शहर नक़्शे से नहीं, यात्राओं से पहचाने जाते हैं

जाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ा था। घर में ही एक कोना दे दिया गया, जैसे किसी मुट्ठीभर उम्मीद को दरकिनार कर दिया गया हो। सोफ़ा बिस्तर बन गया, जो कमरा कभी साझा हँसी और कहानियों से भरा होता था, वह अब

20 दिसम्बर 2025

बालमुकुंद गुप्त के भूले-बिसरे साहित्यिक घराने की ओर

बालमुकुंद गुप्त के भूले-बिसरे साहित्यिक घराने की ओर

कल रात बारिश और आँधी आई थी तो मौसम ने भी प्रतिदिन की आदत को छोड़ते हुए हम पर रहम किया और सूर्य देवता काफ़ी देर तक ग़ायब ही रहे तथा बादलों ने ख़ुद को ढाल बनाकर हमें शीतलता प्रदान की। महेंद्रगढ़, ऐसी ज

21 नवम्बर 2025

दक्षिण भारत : कुछ यात्राओं का अंत नहीं होता…

दक्षिण भारत : कुछ यात्राओं का अंत नहीं होता…

क़रीब तीस साल पहले जब मैं मुंबई में पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत थी, तब एक बार सिटी प्रोफ़ाइल करने के वास्ते बैंगलोर (वर्तमान में बेंगलुरु) और मैसूर जाना हुआ था। मुंबई से बैंगलोर की वह फ़्लाइट त

16 नवम्बर 2025

दिसंबर में होगा कोच्चि–मुज़िरिस बिएनाले का छठा संस्करण

दिसंबर में होगा कोच्चि–मुज़िरिस बिएनाले का छठा संस्करण

भारत की सर्वाधिक प्रतिष्ठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त समकालीन कला प्रदर्शनी कोच्चि–मुज़िरिस बिएनाले (Kochi-Muziris Biennale) का छठा संस्करण 12 दिसंबर, 2025 से केरल के ऐतिहासिक समुद्री

14 नवम्बर 2025

अँगूठा मेहनत कर रहा है, दिमाग़ आराम!

अँगूठा मेहनत कर रहा है, दिमाग़ आराम!

सड़क के किनारे फ़ुटपाथ पर लेटा बूढ़ा व्यक्ति लगातार खाँस रहा है। बग़ल में बैठा जवान बेटा हथेली पर खैनी ठोंकते हुए खाना बनने का इंतज़ार कर रहा है। चेस-नुमा शरीर के साथ अधनंगा एक छोटा बच्चा खेल रहा है।

13 नवम्बर 2025

इस बार शांतिनिकेतन में होगा ‘संगमन’

इस बार शांतिनिकेतन में होगा ‘संगमन’

वर्ष 1993 में कानपुर से शुरू हुआ रचनात्मक व बौद्धिक हस्तक्षेप के सहकारी उपक्रम ‘संगमन’ का 26वाँ आयोजन देश के विभिन्न राज्यों से गुज़रता हुआ इस बार शांतिनिकेतन (पश्चिम बंगाल) में हो रहा है। तारीख़ें हैं

10 नवम्बर 2025

छितवन : स्मृति में बसी गंध

छितवन : स्मृति में बसी गंध

चाहता हूँ कि छितवन को उसके नाम से भूल जाऊँ, कहीं से गुज़रूँ तो उसकी महक नथुनों में घुसे और मैं बेचैन होकर उस महक का पता खोजता फिरूँ। मैं उन दिनों को फिर से जीना चाहता हूँ, महसूस करना चाहता हूँ; और उस

01 नवम्बर 2025

बेगम अख़्तर और लखनऊ का पसंदबाग़

बेगम अख़्तर और लखनऊ का पसंदबाग़

सवेरा कमरे में पसर गया था इसलिए हमें उठना पड़ा। कमरे का दरवाज़ा खुलते ही बालकनी शुरू हो जाती, जहाँ से मंदिर का शिखर दिखता जो गली के उस तरफ़ पार्क के दक्षिणी छोर पर था, जिसमें संघ की शाखा लगती। हम बाल

22 अक्तूबर 2025

झाड़ियों का शाप

झाड़ियों का शाप

यह घटना नवंबर के आस-पास की है, जब सेमेस्टर का ख़ौफ़ हर विद्यार्थी पर तारी होता है। इन दिनों में हर अच्छा और गदहा विद्यार्थी आपको रट्टा मारते मिलेगा और बात अगर हॉस्टल में रहने वाले लड़कों की हो तो कहन

20 अक्तूबर 2025

मैं अब हर घर को उल्टा देखना चाहती हूँ

मैं अब हर घर को उल्टा देखना चाहती हूँ

थाइलैंड और कम्बोडिया : घासतेल की बूँदों के साथ तैरता हुआ जीवन सब कुछ तैर रहा था वहाँ, बैंकॉक की तैरती सब्ज़ी-मंडी में। केले के पत्ते, प्याज़ के छिलके, आस-पास के पेड़ों के साए, और नहर के दोनों तरफ़ ब

18 अक्तूबर 2025

झाँसी-प्रशस्ति : जब थक जाओ तो आ जाना

झाँसी-प्रशस्ति : जब थक जाओ तो आ जाना

मेरा जन्म झाँसी में हुआ। लोग जन्मभूमि को बहुत मानते हैं। संस्कृति हमें यही सिखाती है। जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से बढ़कर है, इस बात को बचपन से ही रटाया जाता है। पर क्या जन्म होने मात्र से कोई शहर अपना ह

11 अक्तूबर 2025

दिल्ली आना और दिल्ली से जाना एक जैसा नहीं होता है!

दिल्ली आना और दिल्ली से जाना एक जैसा नहीं होता है!

सखी दिल्ली, कैसी हो? मुझे पहचाना? मैं वही लड़की जो पहले रोज़गार के लिए तुमसे पहली बार मिली थी, उस मौसम में जिसके लिए तुम्हें सबसे ज़्यादा कोसा और प्यार किया जाता है। जिस मौसम तुम कोहरे में कुछ धुँ

10 अक्तूबर 2025

बेदिल की दिल्ली

10 अक्तूबर 2025

बेदिल की दिल्ली

विगत कई दिनों से हमारा मन दिल्ली से बाहर कहीं दूर जाने को छटपटा रहा था। लगभग दो महीने से राजधानी के एक बंद 20×20 के किराये के कमरे में कैद रहते-रहते दिमाग, दिल और शरीर—सब सुस्त और कुछ-कुछ रोबोट जैसे

30 सितम्बर 2025

शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी और ‘फ़ानी बाक़ी’

शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी और ‘फ़ानी बाक़ी’

आज का दिन मेरे महबूब शहर इलाहाबाद के महबूब साहित्यकार और आलोचक शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी की जन्मतिथि है। वह आसमां में चमकते हुए तारों में से एक हैं, जिसे मैं आज के दिन देखना चाहता हूँ। इलाहाबाद के साहित्

29 सितम्बर 2025

इलाहाबाद मेरे लिए यूटोपिया में तब्दील होता जा रहा है

इलाहाबाद मेरे लिए यूटोपिया में तब्दील होता जा रहा है

14 सितंबर 2022 कल किसी ने व्हाट्सएप पर एक स्टेटस लगा रखा था। किसी की मृत्यु का। बहुत सुंदर चेहरा था। जवान था। मैंने पूछा : कौन हैं भाई? जवाब आया : शाइर थे! मैंने पूछा : आत्महत्या? जवाब आया : हाँ!

26 सितम्बर 2025

अस्सी वाया भाँग रोड बनारस

अस्सी वाया भाँग रोड बनारस

कितना अजीब है किसी घटना को काग़ज़ पर उकेरना। वर्तमान में रहते हुए अतीत की गुफाओं में उतरकर किसी पल को क़ैद कर लेना। उसे अपने हिसाब से जीने पर मजबूर कर देना। मैं कितनी बार कोशिश करता हूँ कि जो घटना बार-ब

18 सितम्बर 2025

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-4

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-4

तीसरी कड़ी से आगे... आगे डायोसिस चर्च ऑफ़ लखनऊ के प्रभारी का आवास है। मैं जब छात्रावास में रहता था। तब एक बार ऐसा हुआ कि छात्रावास ने व्यवस्थाओं से दूर-दूर तक अपना नाता तोड़ लिया। न साफ़-सफ़ाई, न

11 सितम्बर 2025

भारत भवन और ‘अँधेरे में’ मुक्तिबोध की पांडुलिपियाँ

भारत भवन और ‘अँधेरे में’ मुक्तिबोध की पांडुलिपियाँ

जब हमने तय किया कि भारत भवन जाएँगे तो दिन शाम की कगार पर पहुँच चुका था। ऊँचे किनारे पर पहुँचकर सूरज को अब ताल में ढलना था। महीना मई का था, लिहाज़ा आबोहवा गर्म थी। शनिवार होने के बावजूद लोगों की उपस्थ

08 सितम्बर 2025

ऋषिकेश : नदी के नगर का नागरिक होना

ऋषिकेश : नदी के नगर का नागरिक होना

शहर हम में उतने ही होते हैं, जितने हम शहर में होते हैं। ऋषिकेश मेरे लिए वक़्त का एक हिस्सा है। इसकी सड़कों, गलियों, घाटों और मंदिरों को थोड़ा जिया है। जीते हुए जो महसूस होता है, वही तो जीवन का अनुभव

25 अगस्त 2025

कहानी : मसअला फूल का है

कहानी : मसअला फूल का है

भूख देखी है आपने? भूख वह भी किसी की आँखों में! भूख भरी आँखों को देख या तो सिहरन होती है या विस्मय... इस भूख को तृप्ति कैसे मिलेगी? यह जानने के प्रयास में, मैं उसके पीछे चली गई। पहले मुझे उस भूख की आख

10 जुलाई 2025

8 A.M. Metro : अर्थ भरी अदायगी

8 A.M. Metro : अर्थ भरी अदायगी

गुलशन देवैया और सैयामी खेर अभिनीत फ़िल्म ‘8 A.M. Metro’ हाल-फ़िलहाल की प्रचलित व्यावसायिक फ़िल्मों से अलग श्रेणी में आती है। अगर फ़िल्म की विषयवस्तु देखें तो आप इसे ‘लंच बॉक्स’ और ‘थ्री ऑफ़ अस’ की पर

20 जून 2025

8/4 बैंक रोड, इलाहाबाद : फ़िराक़-परस्तों का तीर्थ

8/4 बैंक रोड, इलाहाबाद : फ़िराक़-परस्तों का तीर्थ

इलाहाबाद विश्वविद्यालय के एम.ए. में पढ़ने वाले एक विद्यार्थी मेरे मित्र बन गए। मैं उनसे उम्र में छोटा था, लेकिन काव्य हमारे मध्य की सारी सीमाओं पर हावी था। हमारी अच्छी दोस्ती हो गई। उनका नाम वीरेंद्र

17 जून 2025

पूर्वांचल के बंकहों की कथा

पूर्वांचल के बंकहों की कथा

कहते हैं इवोल्यूशन के क्रम में, हमारे पूर्वज सेपियंस ने अफ़्रीका से पदयात्रा शुरू की थी और क्रमशः फैलते गए—अरब, तुर्की, बाल्कन, काकेशस, एशिया माइनर, भारत, चीन; और एक दिन हर उस ज़मीन पर उनकी चरण पादुक

06 जून 2025

ग्लोबल विलेज के शोर में पुरबिया गाँव

ग्लोबल विलेज के शोर में पुरबिया गाँव

यह संस्मरण भूमंडलीय पीढ़ी का देहाती क़िस्सा है। गाँव-देहात को इसलिए नहीं याद कर रहा हूँ कि मेरे पास कुछ कहने के लिए कुछ यादें हैं, बल्कि इसलिए याद कर रहा हूँ कि मेरी पीढ़ी ने बदलावों को इतने तीव्र गति

23 मई 2025

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-3

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-3

दूसरी कड़ी से आगे... हाँ तो मैं ऑटो में था। वह धड़धड़ाता हुआ बैरहना डाट पुल से सीएमपी कॉलेज से मेडिकल चौराहा होते हुए सिविल लाइंस, हनुमान मंदिर के पास पहुँचा। मैं वहाँ से सीधा पुस्तक मेला गया। मेल

19 मई 2025

ओ इरशाद, प्यारे इरशाद! अलविदा!

ओ इरशाद, प्यारे इरशाद! अलविदा!

ओ अज़ीज़ इरशाद खान सिकंदर! ओ बुजुर्गों की तमीज़ से भरे युवा इंसान और शाइर-कवि!  यह अचानक क्या!  तुम्हारी हमेशा-हमेशा की ख़ामोशी हमें बहुत सताएगी यार!  हमें फ़ख़्र है कि दिल्ली में दिल जीतने

14 मई 2025

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी महिला छात्रावास का फ़ोन, कविता और प्रेम

इलाहाबाद यूनिवर्सिटी महिला छात्रावास का फ़ोन, कविता और प्रेम

दूसरी कड़ी से आगे... टेलीफ़ोन का युग मध्यवर्गीय परिवार के लिए तब आया, जब मैं पंद्रह-सोलह साल का रहा होऊँगा। नब्बे का दशक अपने अंतिम सालों में था। मोहल्ले में बहुत कम लोगों के पास फ़ोन था। हम भी उनमें

08 मई 2025

यूनिवर्सिटी का प्रेम और पापा का स्कूटर

यूनिवर्सिटी का प्रेम और पापा का स्कूटर

पहली कड़ी से आगे... उन दिनों इलाहबाद में प्रेम की जगहें कम होती थीं। ऐसी सार्वजनिक जगहों की कमी थी, जहाँ पर प्रेमी युगल थोड़ा वक़्त बिता सकें या साथ बैठ सकें। ग्रेजुएशन में मुझे पहला प्रेम हुआ। वह ह

30 अप्रैल 2025

इमली, इलाहाबाद, इश्क़

इमली, इलाहाबाद, इश्क़

बचपन का इलाहाबाद बहुत खुला-खुला था। उसकी सड़कें खुली और ख़ाली थीं। सड़कों के अगल-बग़ल बाग़, जंगल और पेड़ बहुत थे। एक मुहल्ले से दूसरे मुहल्ले तक की दूरी तब बहुत लंबी और वीरान हुआ करती थी। हमारी तरफ़ से आ

22 अप्रैल 2025

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-2

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो-2

पहली कड़ी से आगे... इसी उधेड़बुन में लगा हुआ था। दोपहर हो गई थी। बिस्तर मेरे भार से दबा हुआ था। मुझे उसे दबाएँ रखने की आज की मियाद पूरी हो गई थी। वह‌ बिस्तर ओवरटाइम काम कर रहा था। जब उसे लगा कि मै

14 अप्रैल 2025

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो!

इलाहाबाद तुम बहुत याद आते हो!

“आप प्रयागराज में रहते हैं?” “नहीं, इलाहाबाद में।” प्रयागराज कहते ही मेरी ज़बान लड़खड़ा जाती है, अगर मैं बोलने की कोशिश भी करता हूँ तो दिल रोकने लगता है कि ऐसा क्यों कर रहा है तू भाई! ऐसा नहीं

06 मार्च 2025

महाकुंभ : जैसा मैंने देखा

महाकुंभ : जैसा मैंने देखा

अष्टभुजा शुक्ल कहते हैं— “और कोई आए-न-आए लेकिन कुंभ आएगा... ...कुंभ आ रहा है, बल्कि कुंभ आ चुका है।” जब महाकुंभ का आगमन हो रहा था तब मैंने यह पंक्तियाँ उद्धृत की थी। लेकिन अब महाकुंभ बीत गया त

13 फरवरी 2025

विहान की अलवर-यात्रा : जीवंत रंग प्रस्तुतियाँ

विहान की अलवर-यात्रा : जीवंत रंग प्रस्तुतियाँ

विहान ड्रामा वर्क्स की अलवर यात्रा पर लिखना सिर्फ़ एक यात्रा के बारे में लिखना नहीं, बल्कि विहान की एक महत्त्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि को रेखांकित करना है। जिसे लिखे बिना उसकी संपूर्णता दर्ज करना सं

07 फरवरी 2025

कभी न लौटने के लिए जाना

कभी न लौटने के लिए जाना

6 अगस्त 2017 की शाम थी। मैं एमए में एडमिशन लेने के बाद एक शाम आपसे मिलने आपके घर पहुँचा था। अस्ल में मैं और पापा, एक ममेरे भाई (सुधाकर उपाध्याय) से मिलने के लिए वहाँ गए थे जो उन दिनों आपके साथ रहा कर

26 जनवरी 2025

रविवासरीय : 3.0 : वसंत उर्फ़ दाँत की दवा कान में डाली जाती है

रविवासरीय : 3.0 : वसंत उर्फ़ दाँत की दवा कान में डाली जाती है

• आगामी रविवार को वसंत पंचमी है। हिंदी में तीस-पैंतीस वर्ष की आयु के बीच जी रहे लेखकों के लिए एक विशेष दिन है। वे इस बार न चूकें। ऐसा मुझे स्वयं वसंत ने बताया है।  • गए रविवार से लेकर इस रविवार के

30 अक्तूबर 2024

कनॉट प्लेस के एक रेस्तराँ में एक रोज़

कनॉट प्लेस के एक रेस्तराँ में एक रोज़

उस दिन दुपहर निरुद्देश्य भटकते हुए, मैंने पाया कि मैं कनॉट प्लेस में हूँ और मुझे भूख लगी है। सामने एक नया बना रेस्तराँ था। मैं भीतर चलता गया और एक ख़ाली मेज़ पर बैठ गया। मैंने एक प्यारी-सी ख़ुशी महसूस

हिन्दवी उत्सव 2026

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