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जगह पर बेला

01 जुलाई 2026

एक रात जो अब भी मेरे भीतर उजाला करती है

एक रात जो अब भी मेरे भीतर उजाला करती है

स्मृतियाँ सचमुच कभी नहीं मरतीं। वे हमारे भीतर किसी गहरे, अदृश्य तह में चुपचाप बैठी रहती हैं—कभी धुँध की तरह, कभी उजाले की तरह और कभी किसी ऐसे सपने की तरह जो जागने के बाद भी पूरी तरह टूटता नहीं। कु

12 जून 2026

जगह-जगह 2.0 : क्या कर रही होगी जबलपुर में तुम

जगह-जगह 2.0 : क्या कर रही होगी जबलपुर में तुम

शहरज़ादे का शहरआशोब जबलपुर को खोजता हूँ तो पहले उन सूचियों से उलझता हूँ जिनमें 12 सड़कों और 13 जनों की, 5 मोहल्लों और 3 उद्यानों की, 2 पुलों और 52 तालाबों की, एक कल्चुरी काल के तेवर की, एक विलियम स्

29 मई 2026

जगह-जगह 2.0 : न मैं हिंदी शहर नगौरी

जगह-जगह 2.0 : न मैं हिंदी शहर नगौरी

भाषा-विज्ञान में व्युत्पत्ति-भ्रांति का अर्थ है कि किसी शब्द के प्राचीनतम अर्थ को ही उसका ‘सही’ अर्थ मानने पर ज़ोर दिया जाए और उसके वर्तमान इस्तेमाल को रद्द करके उसे उसके मूल प्रयोग, प्राचीन अर्थ और स

15 मई 2026

जगह-जगह 2.0 : चौरंगी, होटल कैलिफ़ोर्निया और गॉडफ़ादर

जगह-जगह 2.0 : चौरंगी, होटल कैलिफ़ोर्निया और गॉडफ़ादर

जगहें कैसे बनती हैं? तुम्हारे और मेरे बैठने से पहले, समंदर किनारे पड़े उन पत्थरों को क्या ‘जगह’ कहा जाए? फ़िल्म ‘रंगीला’ का समुद्र, ‘सदमा’ का समुद्र और ‘Life of Pi’ का समुद्र एक ही है? जगह एक दशा ह

10 अक्तूबर 2025

बेदिल की दिल्ली

10 अक्तूबर 2025

बेदिल की दिल्ली

विगत कई दिनों से हमारा मन दिल्ली से बाहर कहीं दूर जाने को छटपटा रहा था। लगभग दो महीने से राजधानी के एक बंद 20×20 के किराये के कमरे में कैद रहते-रहते दिमाग, दिल और शरीर—सब सुस्त और कुछ-कुछ रोबोट जैसे