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स्त्रीवाद पर बेला

16 जून 2026

केवल ताली ही तो है : प्रयागराज के NCZCC में ‘ओथेलो’ और रवींद्रालय में ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ देखते दर्शकों का स्त्री-द्वेष

केवल ताली ही तो है : प्रयागराज के NCZCC में ‘ओथेलो’ और रवींद्रालय में ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ देखते दर्शकों का स्त्री-द्वेष

बीते दिनों इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में दो महत्त्वपूर्ण नाटकों का मंचन हुआ—19 मार्च 2026 को एनसीज़ेडसीसी (NCZCC) में शेक्सपीयर के ‘ओथेलो’ का, जिसका निर्देशन आलोक नैयर ने किया और 26 मार्च 2026 को रवींद

15 मई 2026

एक मछली पकड़ने का काँटा, एक खुली आँख, स्त्रीवादी दृष्टि और लेखन

एक मछली पकड़ने का काँटा, एक खुली आँख, स्त्रीवादी दृष्टि और लेखन

तुम्हारा मेरा साथ  जैसे आँख में धँसा कोई काँटा  एक मछली पकड़ने का काँटा  एक खुली आँख कनाडियन कवि-लेखिका मारग्रेट एटवुड की ये कविता पढ़ते हुए एक लिखती हुई स्त्री और उसके परिवेश के बीच का संबंध बहु

02 अक्तूबर 2025

रामलीला तेरी याद में नैन हुए बेचैन

रामलीला तेरी याद में नैन हुए बेचैन

नब्बे के दशक के उतरते साल थे। न केबल टीवी गाँव पहुँचा था, न फ़ोन। बिजली पहुँच तो गई थी, पर अक्सर ग़ायब ही रहती थी। न उसके आने का कोई नियम था, न जाने का। लोग भी बिजली पर पूरी तरह आश्रित नहीं थे और न ह

14 जून 2025

बेवफ़ा सोनम बनी क़ातिल!

बेवफ़ा सोनम बनी क़ातिल!

‘बेवफ़ा सोनम बनी क़ातिल’—यह नब्बे के दशक में किसी पल्प साहित्य के बेस्टसेलर का शीर्षक हो सकता था। रेलवे स्टेशन के बुक स्टाल्स से लेकर ‘सरस सलिल’ के कॉलमों में इसकी धूम मची होती। इसका प्रीक्वल और सीक्वल

07 जून 2025

प्रेम मेरे पाठ्यक्रम का सबसे कठिन अध्याय है

प्रेम मेरे पाठ्यक्रम का सबसे कठिन अध्याय है

लड़कियों को अक्सर उनका आधा सच ही पता होता है। उम्र जब चौदह की सीढ़ी पर चढ़ती है, तब वह ख़ुद से पूछती है—करियर चुने या प्रेम? प्रेम... जो अभी तक बचपने से लिपटा हुआ है, जो देह की चाहत में उलझा एक भ्र

17 मई 2025

चंदर से गलबहियाँ नहीं, सुधा पर लानत नहीं

चंदर से गलबहियाँ नहीं, सुधा पर लानत नहीं

धर्मवीर भारती के कालजयी उपन्यास ‘गुनाहों का देवता’ पर इन दिनों फिर से चर्चा हो रही है। यह भी कम अचरज भरी बात नहीं है। आज़ादी के दो साल बाद आए इस उपन्यास पर अगली सदी में इस तरह का डिस्कोर्स शायद इसके

09 मई 2025

मोना गुलाटी की [अ]कविता

मोना गुलाटी की [अ]कविता

मोना गुलाटी अकविता की प्रतिनिधि कवि हैं। अकविता का मूल तत्त्व असहमति और विरोध से निर्मित हुआ है। असहमति और विरोध अक्सर समानार्थी शब्दों की तरह प्रयुक्त होते हैं, किंतु असहमति और विरोध में एक स्वाभावि