प्रतीक्षा पर बेला
प्रतीक्षा या इंतिज़ार
किसी व्यक्ति अथवा घटित के आसरे में रहने की स्थिति है, जहाँ कई बार एक बेचैनी भी अंतर्निहित होती है। यहाँ प्रस्तुत है—प्रतीक्षा के भाव-प्रसंगों का उपयोग करती कविताओं से एक अलग चयन।
कहानी : कुछ रह गया
सूरज की पहली किरण उसके कमरे में दाख़िल हुई। दीवार से टकराकर वह उसके चेहरे पर ठहर गई। ठंडी हवा का एक झोंका उसकी पलकों को हल्के से छू गया, मानो रात भर उसे दर्द में लिपटा देख यह सुबह अपना सारा स्नेह उस
एकांतवास, कमज़ोर मन और आकांक्षाओं का अभिशाप
सत्य कितना सत्य उसने बीती रात एक ग़ैर मर्द के साथ बिताई थी। एक चाहना थी कि उसे किसी ऐसी गोद में सिर रखकर सोना है जो बालों में उँगलियाँ फिराए, ना कि उसकी कसती हुई छाती को मुट्ठी में भींच ले। ऐसा ही
कविता की कहानी सुनता कवि
कविता आती है और कवि को आत्मा से शब्द की अपनी यात्रा की दिलचस्प दास्ताँ सुनाने लगती है। कवि के पूछने पर कविता यह भी बताती है कि आते हुए उसने अपने रास्ते में क्या-क्या देखा। कविता की कहानी सुनने का कवि