शब्द पर उद्धरण

वर्णों के मेल से बने

सार्थक वर्णसमुदाय को शब्द कहा जाता है। इनकी रचना ध्वनि और अर्थ के मेल से होती है। शब्द को ब्रहम भी कहा गया है। इस चयन में ‘शब्द’ शब्द पर बल रखती कविताओं का संकलन किया गया है।

मेरी कविता की इच्छा और मेरी कविता की शब्दावली, मेरी अपनी इच्छा और मेरी अपनी शब्दावली है।

राजकमल चौधरी

बहुत सारी क़लमों की स्याही सही शब्द लिखे जाने की प्रतीक्षा में रुलाई बनकर लीक हो जाती है।

सिद्धेश्वर सिंह

विचार, अनुभूति और संवेदना—सबका संबंध शब्द से होता है और कविता शब्द है। शब्द—जो कवि के लिए सबसे रहस्यमय वस्तु है।

केदारनाथ सिंह

शब्दों में अभिव्यक्ति अभ्यास के द्वारा होती है। यह सब एक निमिष में हो सकता है, इसको एक युग भी लग सकता है; कवि-कवि पर निर्भर है।

विजय देव नारायण साही
  • संबंधित विषय : कवि

जो शब्द जितने लंबे समय से लोक-व्यवहार में रहता है, उस पर उतनी ही ज़्यादा मानवीय जीवन की ऐतिहासिक छाप पड़ती चली जाती है।

केदारनाथ सिंह
  • संबंधित विषय : लोक

हँसो पर चुटकुलों से बचो, उनमें शब्द हैं।

रघुवीर सहाय

मुझे मानवीय शब्द की गरिमा में विश्वास है।

केदारनाथ सिंह

शब्द स्वयं एक बाधा है—अभिव्यक्ति के रास्ते में।

मलयज

अभिव्यक्ति के सारे माध्यम जहाँ निरस्त या समाप्त हो जाते हैं, शब्द वहाँ भी जीवित रहता है।

केदारनाथ सिंह

मैं शब्द के अस्तित्व को लेकर चिंतित नहीं हूँ क्योंकि उसकी उच्चरित शक्ति में मुझे विश्वास है, पर यह ख़तरा ज़रूर देखता हूँ कि लिखित शब्द की पहुँच का दायरा कम हुआ है, यानी साहित्य का पाठक वर्ग सिकुड़ा है।

केदारनाथ सिंह