स्मृति

स्मृति एक मानसिक क्रिया है, जो अर्जित अनुभव को आधार बनाती है और आवश्यकतानुसार इसका पुनरुत्पादन करती है। इसे एक आदर्श पुनरावृत्ति कहा गया है। स्मृतियाँ मानव अस्मिता का आधार कही जाती हैं और नैसर्गिक रूप से हमारी अभिव्यक्तियों का अंग बनती हैं। प्रस्तुत चयन में स्मृति को विषय बनाती कविताओं को शामिल किया गया है।

लोग भूल गए हैं एक तरह के डर को जिसका कुछ उपाय था। एक और तरह का डर अब वे जानते हैं जिसका कारण भी नहीं पता।

रघुवीर सहाय
  • संबंधित विषय : डर

मन में पानी के अनेक संस्मरण हैं।

रघुवीर सहाय

संस्मरणों से किसी जगह को जानना उसे स्वप्न में जानने की तरह है जिसे हम जागने के कुछ देर बाद भूल जाते हैं या सिर्फ़ उसका मिटता हुआ स्वाद बचा रहता है।

मंगलेश डबराल

जो चीज़ कम होती है, उसकी याद लंबे समय तक आती रहती है।

सिद्धेश्वर सिंह

अपने भूले रहने की याद में जीवन अच्छा लगता है।

नवीन सागर

स्मृतियों का प्रतिफल आँसू है

श्रीकांत वर्मा

भाषा स्मृतियों का पुंज है और विलक्षण यह है कि स्मृतियाँ पुरानी और एकदम ताज़ा भाषा में घुली-मिली होती हैं।

केदारनाथ सिंह

जो तुम्हें कहीं से बुला रहे हैं, उन्हें नहीं पता वे कहाँ हैं।

नवीन सागर

लोग भूल जाते हैं दहशत जो लिख गया कोई किताब में।

रघुवीर सहाय
  • संबंधित विषय : डर

हमारी पुरानी स्मृति में पड़े हुए शब्द हमारी कई स्मृतियों को एक साथ जगाते हैं।

केदारनाथ सिंह