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प्रतीक्षा पर कविताएँ

प्रतीक्षा या इंतिज़ार

किसी व्यक्ति अथवा घटित के आसरे में रहने की स्थिति है, जहाँ कई बार एक बेचैनी भी अंतर्निहित होती है। यहाँ प्रस्तुत है—प्रतीक्षा के भाव-प्रसंगों का उपयोग करती कविताओं से एक अलग चयन।

हो सके तो

दीपक सिंह

वेश्याएँ

राजकमल चौधरी

इंतज़ार

विधान गुंजन

मेरे इंतज़ार में

संज्ञा सिंह

वर्तमान

जगन्नाथ प्रसाद दास

इस मौसम में

सारुल बागला

प्रस्तुत

नेमिचंद्र जैन

आठ सितंबर

पाब्लो नेरूदा

दसबजिया के झुँड में

आकृति विज्ञा 'अर्पण’

फ्लेमिंगो

मुकेश कुमार सिन्हा

प्रतीक्षा

दीपक सिंह

गादुर

रेनू यादव

तुम भी लिखो ना

नितेश व्यास

समय

निकोलाई रेरिख

आओ!

जयंत शुक्ल

आओ

रहमान

चींटियाँ

नवल शुक्ल

रिक्तता

गुंजन उपाध्याय पाठक

तुम जानती हो

यूजीनियो मोंताले

नींद में चलना

सुदीप सोहनी

प्रतीक्षा

सुघोष मिश्र

आदि चिंगारी

अजमेर रोडे

इंतज़ार

अर्जुनदेव चारण

देरी

कुशाग्र अद्वैत

लंबी छुट्टियाँ

प्रदीप्त प्रीत

प्रतीक्षा

अपूर्वा श्रीवास्तव

तुम्हारा आना

रविशंकर उपाध्याय

कोई आए तो ऐसे आए

शालिनी सिंह

चींटी

हरि मृदुल

दरवाज़ा

पूर्वांशी

लाइट हाउस और तुम

धनंजय मल्लिक

रेलवे स्टेशन पर तुम

सिद्धांत 'रेखानंदन'

लोकल-डिश!

हिमांशु विश्वकर्मा

एक दिन

अरमान आनंद

इंतज़ार

सुधा अरोड़ा

प्रतीक्षा

उत्कर्ष

इंतज़ार

अनिल कुमार सिंह

मैंने सिखा लिया अपने को

अन्ना अख्मातोवा

प्रतीक्षा है

बोधिसत्व

आश्वासन

अमित तिवारी