बेरोज़गारी पर कविताएँ

बेकारी या बेरोज़गारी

आधुनिक राज-समाज की एक प्रमुख समस्या है। अपने निजी अनुभवों के आधार पर इस संकट की अभिव्यक्ति विभिन्न कवियों द्वारा की गई है। प्रस्तुत चयन में ऐसी ही कविताओं का संकलन किया गया है।

नौकरी

प्रयाग शुक्ल

हमने यह देखा

रघुवीर सहाय

जीवन का दृश्य

अमर दलपुरा

नौकरी

मिथिलेश श्रीवास्तव

बेरोज़गारी

कुमार अनुपम

कटे हाथ

अशोक चक्रधर

फ़िलहाल मेरे पास

विमलेश त्रिपाठी

बेकारी के दिनों में

प्रदीप जिलवाने

अनवांटेड

निशांत

बेरोज़गारी में

प्रांजल धर