ज्ञान

ज्ञान का महत्त्व सभी युगों और संस्कृतियों में एकसमान रहा है। यहाँ प्रस्तुत है—ज्ञान, बोध, समझ और जानने के विभिन्न पर्यायों को प्रसंग में लातीं कविताओं का एक चयन।

नानक गुरु संतोखु रुखु धरमु फुलु फल गिआनु।

रसि रसिआ हरिआ सदा पकै करमि सदा पकै कमि धिआनि॥

गुरु नानक

जब मन बहकै उड़ि चलै, तब आनै ब्रह्म ग्यान॥

ग्यान खड़ग के देखते, डरपै मन के प्रान॥

संत शिवनारायण

सुनत सबद नीसान कूँ, मन में उठत उमंग।

ज्ञान गुरज हथियार गहि, करत जुद्ध अरि संग॥

दयाबाई

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