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समझना पर उद्धरण

शरीर एक बदलता हुआ प्रवाह है और मन भी। उन्हें जो किनारे समझ लेते है, वे डूब जाते है।

ओशो

मेरे विचार से जिस आदमी में थोड़ा-सा भी विवेक होता है, वह हमेशा अपनी परिस्थितियों को तर्कसंगत ढंग से समझना चाहता है।

भगत सिंह

हर अच्छी कविता की तरह सूर की कविता भी, श्रद्धा से अधिक समझ की माँग करती है।

मैनेजर पांडेय

जो नायक नवविवाहिता कन्या को अत्यंत लज्जावती समझकर उसकी उपेक्षा करता है, स्त्रियों के अभिप्राय को समझने वाला वह पुरुष—पशुओं के समान तिरस्कृत होता है।

वात्स्यायन

तीन रात तक संयम धारण करने के बाद; पति को एकांत स्थान केलिगृह में पत्नी के पास जाकर, मीठी-मीठी मनोरञ्जक बातें और स्पर्श आदि मृदु उपचारों से नवविवाहिता वधू में विश्वास पैदा करने और उसकी लज्जा दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए। उस समय संयत भाव से कोमलता एवं मधुरता का व्यवहार करने की आवश्यकता होती है, ज़ोर-ज़बर्दस्ती नहीं करनी चाहिए। ज़ोर-ज़बर्दस्ती करने से कटुता बढ़ती है और दाम्पत्य जीवन दुःखमय बन जाता है। इसलिए पत्नी की इच्छा के विरुद्ध कोई काम नहीं करना चाहिए।

वात्स्यायन

मनुष्य जितना समझता है, उससे कहीं अधिक जानता है।

अल्फ़्रेड एडलर

इसमें क्या ग़लत है कि अगर दुनिया में कोई आदमी ऐसा हो जिसे आपको समझने की कोशिश करना अच्छा लगता है?

हारुकी मुराकामी

हर नवीन अनुसंधान करनेवाला विद्रोही होता है, वह प्रकृति से विद्रोह करता है। प्रकृति हर चीज़ को ज़मीन की ओर खींचती है।

हरिशंकर परसाई

चरित्र को जल्दी भाँप लेने की क्षमता—जिस क्षेत्र में स्त्रियाँ प्रामाणिक तौर पर पुरुषों से आगे हैं—उन्हें स्वाभाविक रूप से सत्ता की योग्य अधिकारिणी बना देता है।

जॉन स्टुअर्ट मिल

समझ और प्रेम अलग-अलग चीजों से बने होते हैं। समझदारी लोगों को गांठों में बांध देती है और इसमें कोई ख़तरा नहीं लेता है, लेकिन प्यार में कई उलझनें हैं और इसमें हर तरह के ख़तरे हैं।

शम्स तबरेज़ी

सहमति या असहमति की बात केवल तब उठती है, जब आप चीज़ों को समझते हैं। अन्यथा यह एक अंधी असहमति होती है, जो किसी भी सवाल को लेकर एक सुसंस्कृत तरीक़ा नहीं हो सकता।

जवाहरलाल नेहरू

स्त्री को कौन समझ सकता है।

विलियम शेक्सपियर

मेरी डाक में आने वाले खतों में कुछ खत तो गालियों से ही भरे होते हैं। उन गालियों का तो मेरे ऊपर कोई असर नहीं होता, क्योंकि मैं इन गालियों को ही स्तुति समझता हूँ, परंतु वे लोग गालियाँ इसलिए नहीं देते कि मैं उनको स्तुति समझता हूँ बल्कि इसलिए कि मैं जैसा उनकी निगाह में होना चाहिए वैसा नहीं हूँ। एक वक़्त वह था जब वे मेरी स्तुति भी करते था। इसलिए गालियाँ देना या स्तुति करना तो दुनिया का एक खेल हूँ।

महात्मा गांधी

कोई-कोई पुरुष समझता है कि वह स्त्रियों को बहुत अच्छी तरह से जानता है, क्योंकि वह उनमें से बहुतों के साथ प्रेम-संबंध बना चुका है।

जॉन स्टुअर्ट मिल

नायक द्वारा नायिका की प्रकृति के अनुकूल, देशाचार के अनुकूल तथा नायिका की अभिरुचि से पशु-पक्षियों के भावों के अनुसार, रतिक्रीड़ा का प्रयोग किए जाने पर—नायक के प्रति नायिका का स्नेह, अनुराग और सम्मान बढ़ता है।

वात्स्यायन

एक व्यक्ति जो दूसरों के विचार या राय को नहीं समझ सकता है, तो इसका मतलब यह हुआ कि उसका दिमाग़ और संस्कृति सीमित है।

जवाहरलाल नेहरू

प्राचीन ग्रंथों को समझने के लिए यह आवश्यक है कि शब्द और यथार्थ के तात्कालिक संबंध को ऐतिहासिक दृष्टि से समझा जाए।

विजयदान देथा

सच, कर्म और चरित्र को क्रांति के बाद की चीज़ नहीं समझना चाहिए। इन्हें तो क्रांति के साथ-साथ चलना चाहिए।

राममनोहर लोहिया

शिक्षक सब कुछ जानता है और छात्र कुछ भी नहीं जानते।

पॉलो फ़्रेरा

अशिक्षा या अज्ञान में ऐसी कोई शक्ति नहीं है कि वह किसी मनुष्य को, मानवीयता की सौतेली संतान के नाम से संबोधित करे।

गणेश शंकर विद्यार्थी

क्रूर और नीच मनुष्य यदि कभी आकर नम्रता प्रकट करे तो उसे बहुत डर की बात समझना चाहिए।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

यह बात पूरे विश्वास के साथ कही जा सकती है कि सिर्फ़ वही दो व्यक्ति एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह से जान सकते हैं, जो अंतरंग तो हों ही, साथ ही बराबर भी हों।

जॉन स्टुअर्ट मिल

तत्त्वज्ञ पुरुष को चाहिए कि वह अपमान को अमृत के समान समझकर उससे संतुष्ट हो और विद्वान मनुष्य सम्मान को विष के तुल्य समझकर उससे सदा डरता रहे।

वेदव्यास

लेखक को समझना, अपने पालतू कुत्ते को समझने के मुक़ाबले ज़्यादा महत्त्वपूर्ण सामाजिक कार्य है।

श्रीलाल शुक्ल

जिस प्रकार पुरुष अपने उपायों, योग्यताओं की सफलता पर विचार करता है, उसी प्रकार सरलता से वश में होने वाली स्त्रियों की प्रकृति को भी समझना चाहिए।

वात्स्यायन

सत्य के थोड़े से हिस्से को ही समझना और ज़िंदगी में उसे अमल में लाना, कुछ समझने और अस्तित्व के रहस्य को खोज पाने की बेकार कोशिश में, इधर-उधर भटकने के मुक़ाबले में बेहतर है।

जवाहरलाल नेहरू

स्वभावतः सूक्ष्म होने के कारण, अत्यंत लोभ के कारण, स्वभाव से अज्ञानी होने के कारण—स्त्रियों की काम-भावना को समझना बड़ा कठिन है।

वात्स्यायन

आतंक के आलावा सामूहिक निर्णय का बल और उसके आगे झुकने की विवशता भी बच्चों के समझ के बाहर की चीज़ है।

कृष्ण कुमार

बिना विचारे अतिशीघ्रता से काम करने का फल, मरणपर्यंत हृदय को जलाता है और कंटक के समान खटकता है।

भर्तृहरि

जीवन एक ऐसी अनूठी पुस्तक है, जो अंत तक मनुष्य का साथ देती है, परंतु इसके कठिन पृष्ठों को समझने के लिए बुद्धि की आवश्यकता है।

सैमुअल स्माइल्स

भास, कालिदास आदि के पालन करने वाले भास्कर कोश-गृहों को समझने में कठिन वेद रूपी पर्वत से निकलकर बहनेवाली निर्मल नदियों, उन्नत उपनिषद देवताओं के मंदिरों, धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष वाले पौधों के खेतों, यशस्वी आर्यों के जयस्तम्भ श्रेष्ठ पुराणो! तुम्हें मेरा प्रणाम!

वल्लथोल नारायण मेनन

पति को जो वास्तव में धर्म समझकर, परलोक की वस्तु समझकर ग्रहण कर सकी है, उसके पैरों की बेड़ी चाहे तोड़ दी और चाहे बंधी रहने दी, उसके सतीत्व की परीक्षा अपने-आप हो ही गई, समझ लो।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

जिस गाँव में गुण-अवगुण को सुनने समझने वाला कोई नहीं है और जहाँ अराजकता फैली हुई है, हे राजिया! वहाँ रहना कठिन है।

कृपाराम खिड़िया

स्वभाव, रुचि, अभ्यास, संगति, संप्रदाय और विवेक बुद्धि के न्यूनाधिक विकास के अनुसार सबको सब चीज़ें एक सी हृदयंगम नहीं होतीं।

महावीर प्रसाद द्विवेदी

संगति और सामंजस्य ऐसी चीज़ नहीं हैं जो सतत कायम रह सके।

जे. कृष्णमूर्ति

कई बार समय समझदारी पैदा करता है।

महमूद दरवेश
  • संबंधित विषय : समय

समझदारी वह हुनर है, जिससे किसी को शत्रु बनाए बग़ैर अपनी बात रखी जा सकती है।

आइज़क न्यूटन

जब कोई व्यक्ति जानता है और दूसरों को समझा नहीं सकता, तो वह क्या करता है?

कार्सन मैक्कुलर्स

संबंधों में टकराव नहीं हो तो इससे वह सबसे मज़बूत और गहरा रिश्ता नहीं बन जाता, बल्कि सबसे गहरा रिश्ता वो है, जिसमें टकराव होने के बाद आपसी समझ और मज़बूत होती है।

साइमन गिलहम

जब किसी के बारे में लिखो तो यह समझकर लिखो कि वह तुम्हारे सामने ही बैठा है और तुमसे जवाब तलब कर सकता है।

गणेश शंकर विद्यार्थी

तृणतुल्य भी उपकार क्यों हो, उसके फल को समझने वाले उसे ताड़ के समान मानेंगे।

तिरुवल्लुवर

जिसे हम नहीं समझ सकते वह ग़लत ही है, यह मानने की जल्दबाज़ी करना भूल है। कितनी ही बातें पहले समझ में नहीं आती थीं, वे आज दीपक की तरह दिखाई देती हैं।

महात्मा गांधी

नेत्र बोल सकते हैं और नेत्र समझ सकते हैं।

जॉर्ज चैपमैन
  • संबंधित विषय : आँख

स्वामी पसंद-नापसंद की चीज़ नहीं है। उसे बिना कुछ विचारे मान लेना होता है।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय
  • संबंधित विषय : पति

किसी कवि की कृति को अच्छी तरह समझने के लिए यदि उस कवि के प्रति श्रद्धा नहीं, तो कम-से-कम सहानुभूति तो अवश्य ही होनी चाहिए। बिना श्रद्धा के कवि के अंतस्तल या आत्मा तक पहुँचकर, उससे अवगत होने और उसके गुण-दोष जानने में मनुष्य समर्थ नहीं हो सकता।

श्यामसुंदर दास