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अंतोनियो ग्राम्शी

1891 - 1937 | सार्डिनिया

समादृत मार्क्सवादी विचारक, सांस्कृतिक सिद्धांतकार, भाषाविद और लेखक। 'सांस्कृतिक वर्चस्व' के सिद्धांत के लिए उल्लेखनीय।

समादृत मार्क्सवादी विचारक, सांस्कृतिक सिद्धांतकार, भाषाविद और लेखक। 'सांस्कृतिक वर्चस्व' के सिद्धांत के लिए उल्लेखनीय।

अंतोनियो ग्राम्शी की संपूर्ण रचनाएँ

उद्धरण 32

वास्तव में संकट इस तथ्य में है कि पुराना निष्प्राण हो रहा है और नया जन्म नहीं ले सकता।

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समग्रता में भाषा, रूपक की सतत प्रक्रिया है। अर्थ-मीमांसा का इतिहास, संस्कृति के इतिहास का एक पहलू है। भाषा एक ही समय में एक जीवित वस्तु, जीवन और सभ्यताओं के जीवाश्मों का संग्रहालय है।

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मैंने कितनी ही बार सोचा है कि क्या व्यक्तियों से संबंध बनाना संभव है, जब किसी के मन में किसी के लिए भी कोई भावना रही हो; अपने माता पिता के लिए भी नहीं। अगर किसी को कभी भी गहराई से प्यार नहीं किया गया, तो क्या उसके लिए सामूहिकता में रहना संभव है? क्या इन सबका मेरे जैसे युद्धप्रिय के ऊपर कोई प्रभाव नहीं रहा? क्या इस सबसे मैं और बंध्य नहीं हुआ? क्या इन सबसे एक क्रांतिकारी के रूप में मेरी गुणवत्ता कम नहीं हुई? मैं जिसने हर चीज़ को बौद्धिकता और शुद्ध गणित के पैमाने पर रख दिया।

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लोकप्रिय तत्त्व—महसूस करता है, लेकिन वह हमेशा जानता या समझता नहीं। बौद्धिक तत्त्व—जानता और समझता है, लेकिन वह हमेशा महसूस नहीं करता।

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संघर्ष में हार की कल्पना हमेशा होनी चाहिए। इसलिए अपने हार के उत्तराधिकार की तैयारी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है, जितनी अपनी विजय।

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