स्वामी विवेकानन्द की संपूर्ण रचनाएँ
उद्धरण 378
तुमने मांसभोजी क्षत्रियों की बात उठाई है। क्षत्रिय लोग चाहे मांस खाएँ या न खाएँ, वे ही हिंदू धर्म की उन सब वस्तुओं के जन्मदाता है, जिनको तुम महत् और सुंदर देखते हो।उपनिषद् किन्होंने लिखी थी? राम कौन थे? कृष्ण कौन थे? बुद्ध कौन थे? जैनों के तीर्थंकर कौन थे? जब कभी क्षत्रियों नें धर्म का उपदेश दिया, उन्होंने सभी को धर्म पर अधिकार दिया। और जब कभी ब्राह्मणों ने कुछ लिखा, उन्होंने औरों को सब प्रकार के अधिकारों से वंचित करने की चेष्टा की। गीता और व्याससूत्र पढ़ो, या किसी से सुन लो। गीता में भक्ति की राह पर सभी नर-नारियों, सभी जातियों और सभी वर्णों को अधिकार दिया गया है, परंतु व्यास ग़रीब शूद्रों को वंचित करने के लिए वेद की मनमानी व्याख्या करने की चेष्टा करते हैं। क्या ईश्वर तुम जैसा मूर्ख है कि एक टुकड़े मांस से उसकी दयारूपी नदी के प्रवाह में बाधा खड़ी हो जाएगी? अगर वह ऐसा ही है, तो उसका मोल एक फूटी कौड़ी भी नहीं।