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वात्स्यायन

भारतीय दार्शनिक और आचार्य। संसारप्रसिद्ध ग्रंथ 'कामसूत्रम्' के रचयिता।

भारतीय दार्शनिक और आचार्य। संसारप्रसिद्ध ग्रंथ 'कामसूत्रम्' के रचयिता।

वात्स्यायन की संपूर्ण रचनाएँ

उद्धरण 371

रूप, गुण, आयु और त्याग—ये चार साधन मनुष्य को सौभाग्यशाली बनाते हैं।

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अन्य शास्त्रों के ज्ञान से रहित; किंतु चतुष्षष्टि कला से अलंकृत कामकला का ज्ञाता पुरुष, नर-नारियों की कला-विषयक गोष्ठी में अग्रगण्य होकर सम्मानित होता है।

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युवती नायिकाएँ चाहती हुई भी लज्जावश नायकों से नहीं मिल पातीं। अतः उन्हें संकेतों और चेष्टाओं के द्वारा अपने मनोभावों को प्रकट करें, और प्रेमी युवकों को चाहिए कि वह युवती नायिकाओं के संकेतों, इशारों, चेष्टाओं, मुखमुद्राओं से उनके मनोभावों को समझें।

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तीन रात तक संयम धारण करने के बाद; पति को एकांत स्थान केलिगृह में पत्नी के पास जाकर, मीठी-मीठी मनोरञ्जक बातें और स्पर्श आदि मृदु उपचारों से नवविवाहिता वधू में विश्वास पैदा करने और उसकी लज्जा दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए। उस समय संयत भाव से कोमलता एवं मधुरता का व्यवहार करने की आवश्यकता होती है, ज़ोर-ज़बर्दस्ती नहीं करनी चाहिए। ज़ोर-ज़बर्दस्ती करने से कटुता बढ़ती है और दाम्पत्य जीवन दुःखमय बन जाता है। इसलिए पत्नी की इच्छा के विरुद्ध कोई काम नहीं करना चाहिए।

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परस्पर प्रीति को उत्पन्न करने वाले अपने अनुकूल आलिंगनादि भावों के अनुसरण से, क्षणभर में नाराज़ होकर मुख फेर लेने से और क्षणभर में ही, परस्पर प्रेम भरी निगाहों से देखने से रति की इच्छा बढ़ती है।

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