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राजनीति पर उद्धरण

राजनीति मानवीय अंतर्क्रिया

में निहित संघर्षों और सहयोगों का मिश्रण है। लेनिन ने इसे अर्थशास्त्र की सघनतम अभिव्यक्ति के रूप में देखा था और कई अन्य विद्वानों और विचारकों ने इसे अलग-अलग अवधारणात्मक आधार प्रदान किया है। राजनीति मानव-जीवन से इसके अभिन्न संबंध और महत्त्वपूर्ण प्रभाव के कारण विचार और चिंतन का प्रमुख तत्त्व रही है। इस रूप में कविताओं ने भी इस पर पर्याप्त बात की है। प्रस्तुत चयन में राजनीति विषयक कविताओं का एक अनूठा संकलन किया गया है।

हमारी राजनीति की आत्मा, वर्चस्व को ख़त्म करने की प्रतिबद्धता है।

बेल हुक्स

प्यार गहराई से राजनीतिक है। हमारी सबसे गहरी क्रांति तब आएगी, जब हम इस सचाई को समझ लेंगे।

बेल हुक्स

मूल्य आज संपदा और सत्ता के संग्रह का बना हुआ है। धर्म अब वह है जो बताता है कि मूल्य संग्रह नहीं बल्कि अपरिग्रह है। संग्रह में आदमी हर किसी के पास से चीज़ों को अपनी ओर बटोरता है, लेकिन इसमें वह हर किसी के स्नेह को गँवाता भी जाता है। स्नेह को खोकर चीज़ को पा लेना, पाना नहीं गँवाना है। यह दृष्टि धर्म ही देता है और वह भोग की जगह त्याग की प्रतिष्ठा करता है। इसीलिए वह राजनीति और कर्म नीति परिणाम नहीं ला पाएगी जो धर्म नीति से हीन है।

जैनेंद्र कुमार

बस यही महत्त्वपूर्ण है कि न्याय हो, बाक़ी सब राजनीति है जिसमें मेरी कोई रुचि नहीं।

जे. एम. कोएट्ज़ी

राजनीतिक रूप से, तर्क की कमज़ोरी हमेशा से यह रही है कि जो लोग कम बुराई को चुनते हैं, वे बहुत जल्द भूल जाते हैं कि उन्होंने बुराई को चुना है।

हाना आरेन्ट

राजनीति से दूर रहना ख़ुद में एक राजनीतिक दृष्टिकोण है।

सिमोन द बोउवार

…धनी आदमी के पास भावावेग होते हैं, और किसान के पास सिर्फ़ ज़रूरतें होती हैं। इसलिए किसान दोहरी निर्धनता का मारा है; और भले ही राजनीतिक रूप से उसकी आक्रामकताओं का निष्ठुरता के साथ दमन आवश्यक हो, मानवता और धर्म की नज़रों में वह पवित्र है।

ओनोरे द बाल्ज़ाक

मैं यह नहीं मानता कि धर्म का राजनीति से कोई वास्ता नहीं है। धर्मरहित राजनीति शव के समान है, जिसे दफ़ना देना ही उचित है।

महात्मा गांधी

राजनीति और श्रेष्ठ कर्मों के आरंभ के मूल में धन ही होता है।

दण्डी
  • संबंधित विषय : धन

कविता को राजनीति में नहीं घुसना चाहिए। क्योंकि इससे कविता का तो कुछ नहीं बिगड़ेगा, राजनीति के अनिष्ट की संभावना है।

विजय देव नारायण साही

राजनीति जितनी ‘ठोस’ ऊपर से दिखाई देती है, अंदर से उतनी ही क्षतिग्रस्त और जर्जर हो सकती है।

कुँवर नारायण

अगर राजनीति के बाहर भी स्वतंत्रता के कोई मतलब हैं तो हमें उसको एक ऐसी भाषा में भी खोजना, और दृढ़ करना होगा जो राजनीति की भाषा नहीं है।

कुँवर नारायण

कविता के क्षेत्र में केवल एक आर्य-सत्य है : दुःख है। शेष तीन राजनीति के भीतर आते हैं।

विजय देव नारायण साही

मनुष्य मात्र को इतिहास और राजनीति नहीं एक कविता चाहिए।

श्रीनरेश मेहता

संगठित राजनीति और रचना में तनाव का रिश्ता होना चाहिए और सत्ता और रचना में भी तनाव का रिश्ता होना चाहिए।

रघुवीर सहाय

मेरा काम हमेशा राजनीतिक रहा है, क्योंकि चीन में आर्टिस्ट होने का फ़ैसला ही राजनीतिक है।

आई वेईवेई

समाज में स्थित विभिन्न नगरीय तथा राजनैतिक संस्थाओं की अस्तित्व में स्थित व्यवस्था को अमान्य करना—यह विद्रोही साहित्य का लक्ष्य होता है।

भालचंद्र नेमाडे

चीन के बुद्धिजीवियों और प्रोफ़ेसरों और उनका बचाव करने वाले राजनीतिक माफ़िया के बीच एक महीन-सी रेखा है जो उन्हें अलग करती है।

आई वेईवेई

नया तरीक़ा यह है कि राजनीति विकल्प नहीं खोजती है, बदल खोजती है।

रघुवीर सहाय

यह रोज़ का क़िस्सा है। मंत्री महोदय अपनी गणना में यह भूल गए हैं कि उनकी अपनी मीयाद बँधी है।

अज्ञेय

साहित्य में कोई पक्ष-विपक्ष नहीं होता। पक्षधरता राजनीति का स्वभाव है।

श्रीकांत वर्मा

देश-कालातीत इच्छाओं के वृत्तों की टकराहट ही है जो वस्तुतः पुरुषार्थों की स्फीति है।

श्रीनरेश मेहता

जब से भारतीय राजनीति में प्रतिद्वंद्विता का नया तरीक़ा शुरू हुआ है, राजनीति की शक्ल ही बदल गई है।

रघुवीर सहाय

राजनीति केवल कार्यकुशलता नहीं है।

रघुवीर सहाय

हर चीज़ कला है। हर चीज़ राजनीति है।

आई वेईवेई
  • संबंधित विषय : कला

राजा अपने राज्य की रक्षा करने में असमर्थ है, तब भी उस राज्य की रक्षा होनी ही चाहिए।

जयशंकर प्रसाद

राजनीति बुरी बात नहीं है। बुरी बात है राजनीति की कविता।

राजकमल चौधरी

साहित्य में जो मुद्दा राजनीति के रास्ते से आता है, वह बहुत दिनों तक या स्थायी रूप से नहीं टिक पाता।

ज्ञानरंजन

अव्यवस्था का यथार्थ ही नहीं, व्यवस्था की कल्पना भी अपने आपमें अव्यवस्था ही है।

राजकमल चौधरी

व्यवस्था नहीं है। व्यवस्था किसी दिन भी नहीं थी।

राजकमल चौधरी

राजनीति का कोलाहल केवल झूठ बोलता है।

शंख घोष

उसे कुछ नहीं पता, और वह सोचता है कि उसे सब पता है। यह स्पष्ट रूप से एक राजनीतिक करियर की ओर इशारा करता है।

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

राजनीति किसी भी ‘मूल्य’ और किसी भी ‘संस्कार’ पर विश्वास नहीं करती है।

राजकमल चौधरी