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प्रतिरोध पर उद्धरण

आधुनिक कविता ने प्रतिरोध

को बुनियादी कर्तव्य की तरह बरता है। यह प्रतिरोध उस प्रत्येक प्रवृत्ति और स्थिति के विरुद्ध मुखर रहा है, जो मानव-जीवन और गरिमा की आदर्श स्थितियों और मूल्यों पर आघात करती हो। यहाँ प्रस्तुत है—प्रतिरोध विषयक कविताओं का एक व्यापक और विशिष्ट चयन।

बिना आत्मशुद्धि के प्राणिमात्र के साथ एकता का अनुभव नहीं किया जा सकता है और आत्मशुद्धि के अभाव से अहिंसा धर्म का पालन करना भी हर तरह नामुमकिन है।

महात्मा गांधी

जनता मुझसे पूछ रही है, क्या बतलाऊँ?

जनकवि हूँ मैं, साफ़ कहूँगा, क्यों हकलाऊँ।

नागार्जुन
  • संबंधित विषय : कवि

इस संसार में बिना प्रतिरोध, बिना हिंसा और बिना इच्छा के कोई रह ही नहीं सकता। अभी संसार उस अवस्था में नहीं पहुँचा कि ये आदर्श, समाज में प्राप्त किए जा सकें।

स्वामी विवेकानन्द

एक लोकप्रिय मान्यता यह है कि हमारे पूरे इतिहास में, भोजन बहुत दुर्लभ और छिटपुट तरीक़े से उपलब्ध होता था और जिनके भीतर फैट जमा करने का किफ़ायती जीन होता था, वे अकाल के समय में बेहतर तरीक़े से जीवित रह सकते थे।

वेंकी रामकृष्णन

यदि कल वे तुमसे कहें कि तुम्हें तोप के गोले भरने हैं और स्नाइपर-राइफ़लों के लिए दूरबीनें तैयार करनी हैं, तो बस एक ही काम करना : इंकार कर देना।

वोल्फगांग बोर्चर्ट

सहनशील होना अच्छी बात है, पर अन्याय का विरोध करना उससे भी उत्तम है।

जयशंकर प्रसाद

आप जिस चीज़ का प्रतिरोध करते हैं, उसे अपनी ओर आकर्षित करते हैं क्योंकि आप प्रबल भावना से उस पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं।

रॉन्डा बर्न

सरकार को समाप्त करने का सबसे अच्छा तरीक़ा, उससे अलग हो जाना है। मैं यह इसलिए नहीं कह रहा हूँ; क्योंकि यह टॉलस्टॉय का सिद्धांत था या गांधी जी इसका प्रचार करते थे, बल्कि इसलिए कह रहा हूँ, क्योंकि मैं इसमें विश्वास करने लगा हूँ।

सुभाष चंद्र बोस

सामाजिक चेतना सामाजिक संघर्षों में से उपजती है।

गोरख पांडेय

किसी क़िस्म का प्रतिरोध खड़ा करने के लिए नेताओं की एक बड़ी संख्या को और उनके समर्थकों को, हर तरह के प्रलोभनों और व्यक्तिगत तरक़्क़ी के प्रस्तुत अवसरों का बहिष्कार करना पड़ता है।

जॉन स्टुअर्ट मिल

यदि आप दूसरों से सहमत न हों, तो वे आपको मार डालते हैं—यही हो रहा है संसार में।

जे. कृष्णमूर्ति

जन-समूह विचार से नहीं, आवेश से काम करता है। समूह में ही अच्छे कामों का नाश होता है और बुरे कामों का भी।

प्रेमचंद

हमारे अगणित असुविधारूपी तालों को खोलने के लिए सताग्रहरूपी एक मुख्य कुंजी है।

महात्मा गांधी

गति के किसी भी रूप के भीतर अपना विशिष्ट अंतर्विरोध निहित होता है।

माओ ज़ेडॉन्ग
  • संबंधित विषय : गति

कहानी के नेपथ्य में कुकर्मी भी धैर्यपूर्वक इस बात की प्रतीक्षा करता है कि उसके द्वारा सताया गया नायक अपने प्रतिकार का प्रबंधन कर सके।

कृष्ण कुमार

जनता क्रोध में अपने को भूल जाती है, मौत पर हँसती है।

प्रेमचंद

अगर कविता एक ‘सामाजिक कार्य’ है (जो कि वह है) तो फिर उसका राजनीतिक-सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से जुड़ना अनिवार्य ही है।

वेणु गोपाल

क्या यही सच है कॉमरेड कि विचार और क्रिया में दूरी हमेशा बनी रहती है?

गोरख पांडेय

संगठित राजनीति और रचना में तनाव का रिश्ता होना चाहिए और सत्ता और रचना में भी तनाव का रिश्ता होना चाहिए।

रघुवीर सहाय

आगे का कलाकार मेहनतकश की ओर देखता है।

शमशेर बहादुर सिंह

हिंदी का रचनाकार इतने-इतने बंधनों में जकड़ा हुआ है कि हम निर्बंध रचना की उम्मीद कर भी नहीं सकते।

त्रिलोचन

बेहया दूसरे की बाढ़ को रोकने वाली वनस्पति है।

कृष्ण बिहारी मिश्र

प्रतिरोध, साहित्य का स्थायी भाव है।

मृदुला गर्ग

किसी भी बड़ी वस्तु के विकास की प्रक्रिया में अनेक अंतर्विरोध होते हैं।

माओ ज़ेडॉन्ग

प्रत्येक रचना सत्ता के ख़िलाफ़ होती है।

रघुवीर सहाय

प्रवाह के विरुद्ध जाने की या अलग होने-बोलने-करने की निरंतर क़ीमत चुकानी पड़ती है।

अमोल पालेकर

कविता के लिए मनुष्य की पक्षधरता के अतिरिक्त मैं किसी अन्य पक्षधरता को आवश्यक नहीं मानता।

केदारनाथ सिंह

कोई यथार्थ से जूझकर सत्य की उपलब्धि करता है और कोई स्वप्नों से लड़कर। यथार्थ और स्वप्न दोनों ही मनुष्य की चेतना पर निर्मम आघात करते हैं, और दोनों ही जीवन की अनुभूति को गहन गंभीर बनाते हैं।

सुमित्रानंदन पंत

प्रतिरोध केवल अनेक तरह की विकृतियों को जन्म देता है।

जे. कृष्णमूर्ति

अंतर्विरोध सार्वभौमिक और निरपेक्ष होता है, वह सभी वस्तुओं के विकास की प्रक्रिया में मौजूद रहता है और सभी प्रक्रियाओं में शुरू से अंत तक बना रहता है।

माओ ज़ेडॉन्ग

अंतर्विरोध सभी वस्तुओं के विकास की प्रक्रिया में मौजूद है; यह प्रत्येक वस्तु के विकास की प्रक्रिया में शुरू से अंत तक बना रहता है।

माओ ज़ेडॉन्ग

व्यक्ति-मन होता है जन-मन के लिए।

शमशेर बहादुर सिंह

पूर्णकाम न हो सके लोगों का एक पूरा देश है जो हमारे संतुष्ट-सुरक्षित संसार को हिलाता रहता है।

मंगलेश डबराल