प्रतिरोध पर कविताएँ

आधुनिक कविता ने प्रतिरोध

को बुनियादी कर्तव्य की तरह बरता है। यह प्रतिरोध उस प्रत्येक प्रवृत्ति और स्थिति के विरुद्ध मुखर रहा है, जो मानव-जीवन और गरिमा की आदर्श स्थितियों और मूल्यों पर आघात करती हो। यहाँ प्रस्तुत है—प्रतिरोध विषयक कविताओं का एक व्यापक और विशिष्ट चयन।

हवा

विनोद भारद्वाज

कोई और

देवी प्रसाद मिश्र

शीघ्रपतन

प्रकृति करगेती

क्रूरता

दूधनाथ सिंह

एक दिन

सारुल बागला

निष्कर्ष

शुभांकर

मौत

अतुल

ख़तरा

कुमार अम्बुज

एक अन्य युग

अविनाश मिश्र

उत्सव

अरुण कमल

यथार्थ

सुधीर रंजन सिंह

परंतु

कुमार अम्बुज

कोरोना

अमिताभ

रोए क़ाबिल हाथ

संजय चतुर्वेदी

निवेदन

विष्णु खरे

पूरी रात

केशव तिवारी

आज भी

विष्णु खरे

अगर तुम युवा हो

शशिप्रकाश

आवारा के दाग़ चाहिए

देवी प्रसाद मिश्र

दूर कटा कवि मैं जनता का

केदारनाथ अग्रवाल

कविताएँ लिखनी चाहिए

देवी प्रसाद मिश्र

जाग मछंदर

दिनेश कुमार शुक्ल

क्रांति

अमित तिवारी

ग़ुलामी की अंतिम हदों तक लड़ेंगे

रमाशंकर यादव विद्रोही

जनता का आदमी

आलोकधन्वा