हत्या पर उद्धरण

हत्या किसी का प्राण

हर लेने का हिंसक कृत्य है। नीति और विधान में इसे दंडनीय अपराध माना गया है। इस चयन में हत्या और हत्यारे को विषय बनाती अभिव्यक्तियों को शामिल किया गया है।

हत्या की संस्कृति में प्रेम नहीं होता है।

रघुवीर सहाय

हत्या का विचार होती हुई हत्या देखने की लालसा में छिपा है।

नवीन सागर

एकमात्र साक्षी जो होगा वह जल्दी ही मार दिया जाएगा।

रघुवीर सहाय

सावधान, अपनी हत्या का उसे एकमात्र साक्षी मत बनने दो।

रघुवीर सहाय

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