Font by Mehr Nastaliq Web

नेता पर उद्धरण

भारतीय राजनीति और लोकतंत्र

की दशा-दिशा से संवाद को हिंदी कविता ने किसी कर्तव्य की तरह अपने ऊपर हावी रखा है और इस क्रम में इसके प्रतिनिधि के रूप में नेता या राजनेता से प्रश्नरत बनी रही है। प्रस्तुत चयन में ऐसी ही कविताओं का है।

नेता हो जाना बड़ा अच्छा धंधा है।

हरिशंकर परसाई

मानव की वाणी की अपेक्षा उसका कर्म अधिक अच्छा नेतृत्व कर सकता है।

हरिकृष्ण प्रेमी

ज़माने की हवा का रुख पहिचानकर देश के नेता अपने कार्यक्रम में सुधार नहीं करते हैं तो ज़माना आगे निकल जाएगा और नेता पीछे रह जाएँगे। ज़माना नेताओं के लिए रुका नहीं रहेगा।

बाल गंगाधर तिलक
  • संबंधित विषय : देश

नेता? नेता कौन है? मनुष्य? एक मनुष्य सब विषयों की पूर्णता पा सकता है? 'न"। इसीलिए नेता मनुष्य नहीं। सभी विषयों की संकलित ज्ञान-राशि का नाम नेता है।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'

थोड़ा भाषण देना जाने से, और अख़बारों मे लिखना सीख जाने से ही नेता बन जाने की नौजवानों मे कल्पना हो तो वह ग़लत है। सीढ़ी-दर-सीढ़ी चढ़ना चाहिए

सरदार वल्लभ भाई पटेल

हमें अपने प्रिय नेताओं के प्रति स्नेह प्रकट करना चाहिए—सार्थक कार्यों और अथक शक्ति के द्वारा। जो प्यार अपने प्रिय के चरण छूने और उसके पास पहुँच कर शोर मचाने से संतुष्ट हो जाता है, भय है कि वह धीरे-धीरे उसके लिए जान लेवा भी हो सकता है।

महात्मा गांधी

संसार नेताओं के पीछे चलता है, चाहे कितनी भी स्वतंत्रता की टाँग तोड़ी जाए। नेता चाहे संसार को डुबा दे और चाहे तार दें, लोग चलेंगे नेताओं के पीछे हो।

स्वामी श्रद्धानंद

जब तक समस्याओं का ढेर नहीं लग जाता और वे बहुत सी गड़बड़ी पैदा नहीं करने लग जातीं, तब तक उन्हें हल करने का प्रयत्न करना और प्रतीक्षा करते रहना ठीक नहीं। नेताओं को आंदोलन के आगे रहना चाहिए, उसके पीछे नहीं।

माओ ज़ेडॉन्ग

हर नेता अन्ततः उबाऊ हो जाता है।

राल्फ़ वाल्डो इमर्सन

यह रोज़ का क़िस्सा है। मंत्री महोदय अपनी गणना में यह भूल गए हैं कि उनकी अपनी मीयाद बँधी है।

अज्ञेय

नेताओं की तारीफ़ से भरे हुए मानपत्र वास्तव में निरर्थक होते हैं। जो लोग इस तरह की तारीफ़ की आशा रखते हों उन्हें मानपत्र देना ही उचित है।

महात्मा गांधी

जो आदमी सीधा नेता बन जाता है, वह किसी-न-किसी दिन लुढ़क जाता है।

सरदार वल्लभ भाई पटेल

वही मनुष्य नेता बनने योग्य होता है, जो अपने सहायकों की मूर्खता, अपने अनुगामियों के विश्वासघात, मानव जाति की कृतघ्नता और जनता की गुण ग्रहण-हीनता की कभी शिकायत नहीं करता।

रामतीर्थ

राजा का कर्त्तव्य यह है कि कवि-समाज का आयोजन करे।

गंगानाथ झा

सभी नेताओं को पहले कार्यकर्ता होना चाहिए। जो कार्यकर्ता नहीं बन सकता, वह नेता भी नहीं हो सकता।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी