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समस्या पर उद्धरण

समस्या-उठाऊ शिक्षा क्रांतिकारी भविष्यता है।

पॉलो फ़्रेरा

ख़ुद को किताब की समस्याओं में डुबाना प्यार के बारे में सोचने से बचने का अच्छा तरीक़ा है।

ओरहान पामुक

वास्तव में संकट इस तथ्य में है कि पुराना निष्प्राण हो रहा है और नया जन्म नहीं ले सकता।

अंतोनियो ग्राम्शी

जब दिल बोलता है, तब मन को उस पर आपत्ति करना अभद्र लगता है।

मिलान कुंदेरा

अतीत की मुश्किलों, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक धारणाओं को छोड़ दें। आप ही इकलौते व्यक्ति हैं; जो उस जीवन का निर्माण कर सकते हैं, जिसके आप हक़दार हैं।

रॉन्डा बर्न

दुनिया की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय विश्वास, प्रेम, प्रचुरता, शिक्षा और शांति पर ध्यान ऊर्जा लगाएँ।

रॉन्डा बर्न

अगर हम अपने समय की सबसे बड़ी चुनौतियों—जलवायु के संकट से लेकर एक-दूसरे के प्रति हमारे उत्तरोत्तर बढ़ते जा रहे आविश्वास तक—से निपटना चाहते हैं, तो मुझे लगता है कि इसकी शुरुआत हमें मनुष्य के स्वभाव के बारे में, अपने दृष्टिकोण को बदलने के साथ करने की ज़रूरत है।

रुत्ख़ेर ब्रेख़्मान

हिंदी के लेखक अँधेरे में भले ही भटकते हों, किंतु यह नहीं कह जा सकता कि युग-धर्म की जो पहेलियाँ अपने विश्लेषण के लिए सामने उपस्थित हैं, उनकीओर हिंदी का साहित्य क्षेत्र उदासीन है।

गणेश शंकर विद्यार्थी

जब संकट आता है, जब बम गिरते हैं या बाढ़ आती है—तभी हम मनुष्य अपने श्रेष्ठतम रूप में प्रकट होते हैं।

रुत्ख़ेर ब्रेख़्मान

तुम्हारी समस्याएँ केवल मंदिर में प्रवेश से हल होने वाली नहीं हैं। राजनीति, अर्थशास्त्र, शिक्षा, धर्म—ये सभी इस समस्या के हिस्से हैं।

भीमराव आंबेडकर

मैंने जितनी भी मुश्किलें झेली हैं, वे मुझे एक भयानक दर्द के लिए तैयार करने की दिशा में केवल पूर्वाभ्यास थीं।

ऐनी एरनॉ

हम सभी—पुरुषों और स्त्रियों—के लिए मुख्य समस्या सीखना नहीं है, बल्कि सीखे हुए को भूल जाना है।

ग्लोरिया स्टाइनम

मेरी मुश्किलें मेरी अपनी हैं।

अल्फ़्रेड एडलर

कठिनाइयों पर क़ाबू पाने से हममें साहस और स्वाभिमान आता है और हम ख़ुद को जान लेते हैं।

अल्फ़्रेड एडलर
  • संबंधित विषय : वीर

भ्रष्टाचार अगर अपने हाथ से हो, तो वह प्रजा के लिए हितकारी है। दूसरे के हाथ से भ्रष्टाचार हो, तो वह प्रजा के लिए दु:खदाई है। इसीलिए रैलियाँ निकालनेवाले, प्रदर्शन करने वाले ये दल चाहते हैं कि शासकीय भ्रष्टा-चार करने का अधिकार इन्हें मिल जाए। इनका भ्रष्टाचार इतना पवित्र होगा कि जनता अपने आप सुखी हो जाएगी।

हरिशंकर परसाई

मैं बूढ़ा हूँ और मैंने बहुत सारी मुसीबतों को जाना है, लेकिन उनमें से ज़्यादातर कभी घटित नहीं हुई हैं।

मार्क ट्वेन

डिप्रेस्ड क्लासेज़ की समस्या तब तक हल नहीं हो सकती, जब तक कि राजनीतिक सत्ता इस तबक़े के लोगों के हाथों में नहीं आएगी। डिप्रेस्ड क्लासेज़ की समस्या; मेरे ख़याल में सबसे पहले एक राजनीतिक समस्या है, और उसे राजनीतिक समस्या के रूप में ही देखा जाना चाहिए।'

भीमराव आंबेडकर

अस्पृश्यता के उन्मूलन और अंतर्जातीय भोज से ही हमारी सारी समस्याएँ ख़त्म नहीं होगी। न्यायालय, सेना, पुलिस और वाणिज्य जैसे तमाम सरकारी महकमों को हमारे लिए खोला जाना चाहिए। हमें हिंदू समाज को जातिवाद के उन्मूलन और समानता को, दो सिद्धांतों पर फिर से खड़ा करना होगा।'

भीमराव आंबेडकर

उधार या भाड़े पर लिया गया कोई भी ऐसा व्यक्ति; जो तुम्हारे वर्ग का नहीं है, वह लेशमात्र भी तुम्हारे हितों को नहीं साध सकता।

भीमराव आंबेडकर

राष्ट्रीय विपदा पर कुछ रस्में निभाना ज़रूरी होता है, जैसे विवाह में सात फेरे फिरना होता है। अकाल की, बाढ़ की, भूकंप की रस्में तय हैं। पहली रस्म है—दृश्य-दर्शन!

हरिशंकर परसाई

चतुर सरकार मुँह पर कपड़ा डालकर, लचकती-फचकती फ़ूर्ती से कमीशन की गली से निकल जाती है, और उधर समस्याएँ हुड़दंग करती रहती हैं।

हरिशंकर परसाई

सड़क पर दंगा होता हो, तो चतुर आदमी गली में से निकल जाता है। कमीशन वह गली है, जिसमें से सरकार छिपकर निकल जाती क्योंकि आम सड़क पर समस्याएँ जमघट किए हैं।

हरिशंकर परसाई

लौंडो की दोस्ती, जी का जंजाल।

श्रीलाल शुक्ल

समस्या-उठाऊ शिक्षा मनुष्यों को ऐसे प्राणी मानती है, जो संभवन की प्रक्रिया में है। अर्थात् वे अभी अधूरे हैं, अपूर्ण हैं, और ऐसे यथार्थ के अंदर तथा उसके साथ रहते हैं, जो उन्हीं की तरह अधूरा और संभव होता हुआ यथार्थ है।

पॉलो फ़्रेरा

किसी भी युग का काव्य तब ही जनमानस में उतरता है, जब वह जीवन का सांगोपांग चित्रण करता है। सृष्टि की मूल समस्या, समाज की व्यवस्था, प्रकृति, व्यक्ति, और समस्त वस्तुओं का चित्रण साहित्य का अधिकार है। इन सब का चित्रण जब भावपक्ष से सानिध्य स्थापित करता है, तब ही वह काव्य है।

रांगेय राघव

जिनसे कोई भयभीत नहीं होता और जो स्वयं भी किसी से भयभीत नहीं होते तथा जिनकी दृष्टि में ये सारा जगत अपनी आत्मा के ही तुल्य है, वे दुस्तर संकटों से तर जाते हैं।

वेदव्यास

समस्या-उठाऊ शिक्षा, उत्पीड़कों का हित साधन नहीं करती।

पॉलो फ़्रेरा

जीवन का असली अर्थ यही है कि हम इसकी समस्याओं का उचित हल ढूँढ़ने का दायित्व उठाएँ और उन सभी कामों को पूरा करें, जो जीवन ने प्रत्येक व्यक्ति के लिए तय कर रखे हैं।

विक्टर ई. फ्रैंकल

शहर में हर दिक़्क़त के आगे एक राह है और देहात में हर राह के आगे एक दिक़्क़त है।

श्रीलाल शुक्ल

किसान के बराबर सर्दी, गर्मी, मेह, और मच्छर-पिस्सू वगैरा का उपद्रव कौन सहन करता है?

सरदार वल्लभ भाई पटेल

भाषण अनेक बार हमारे आचरण की ख़ामियों का दर्पण होता है। बहुत बोलने वाला कदाचित् ही अपने कहे का पालन करता है।

महात्मा गांधी

लेखन के बारे में अच्छी बात यह है कि जब आप उपन्यास या कथा लिखते हैं; तो लोग देख सकते हैं कि एक क्षेत्र की समस्याएँ, दूसरे क्षेत्र की समस्याओं के समान हैं।

न्गुगी वा थ्योंगो

भारत में हमारी असली समस्या राजनीतिक नहीं, सामाजिक है।

रवींद्रनाथ टैगोर

हमारे सामने आने वाली हर समस्या, हर कठिनाई और हर दर्द, हमें स्वार्थी होने से बचाते हैं और हमें प्यार और करुणा बांटना सिखाते हैं।

शम्स तबरेज़ी

हर परिस्थिति अपने अनूठेपन के कारण ही सबसे अलग होती है और उस परिस्थिति द्वारा सामने रखी गई समस्या का केवल एक ही उचित हल होता है।

विक्टर ई. फ्रैंकल

बहुत सारी समस्याएँ थीं, जहाँ भी देखो दुष्टता अपना सिर उठा रही थी।

मारियो वार्गास ल्योसा

भय से संतप्त मन कठिनाइयों में मोहित हो ही जाता है।

भारवि
  • संबंधित विषय : डर

ऊधम मचाना एक तरह का नशा है। मचा सकने से तकलीफ़ होती है, हुड़क-सी आने लगती है।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

जब तक समस्याओं का ढेर नहीं लग जाता और वे बहुत सी गड़बड़ी पैदा नहीं करने लग जातीं, तब तक उन्हें हल करने का प्रयत्न करना और प्रतीक्षा करते रहना ठीक नहीं। नेताओं को आंदोलन के आगे रहना चाहिए, उसके पीछे नहीं।

माओ ज़ेडॉन्ग

अपनी उपलब्धियों से संतुष्टि का अनुभव हमें हमारे चारों ओर मौजूद खतरों का अवलोकन करने से रोकता है।

अशदीन डॉक्टर

दो तरह के लोग पैदा होते हैं; जो मुश्किलों का सामना करने के बाद नरम दिल बन जाते हैं और प्यार बांटते हैं, और एक जो पहले से भी ज्यादा क्रूर हो जाते हैं।

शम्स तबरेज़ी

मनोवैज्ञानिक ढंग से देखें, तो भाषा की समस्या लगभग सबसे बड़ी समस्या है।

जवाहरलाल नेहरू

कला की बहुत-सी समस्याएँ केवल अज्ञान के कारण पैदा की जाती हैं, जबकि असल में वे होती नहीं, हो नहीं सकतीं।

गजानन माधव मुक्तिबोध

जो ब्रह्मर्षि होते हैं; वे संसार को जीवन के तत्त्वज्ञान का चिंतनात्मक सार देते हैं, जिसमें जीवन की समस्याओं का हल रहता है।

विनोबा भावे

शासन अक्सर एक समस्या ही है। यह या तो आवश्यकता से अधिक होता है अथवा शक्तिहीन होकर अराजकता का कारण बन जाता है। विडंबना यह है कि शासन का आवश्यकता से अधिक होना भी विरोध का कारण बन जाता है और अराजकता पैदा होती है।

यू. आर. अनंतमूर्ति

कसौटी पर कसे गए बिना जीवन की परख नहीं होती।

शरत चंद्र चट्टोपाध्याय

दर्शनशास्त्र : असाध्य समस्याओं के अबोधगम्य उत्तर।

हेनरी ब्रूक्स एडम्स

आस्तिकता मुश्किलों को आसान कर देती है, यहाँ तक कि उन्हें ख़ुशगवार भी बना सकती है।

भगत सिंह

किसी भी समस्या पर विचार करते समय, हमें वास्तविक स्थिति को आधार बनाकर शुरुआत करनी चाहिए—न कि परिभाषाओं को आधार बनाकर।

किसी भी समस्या पर विचार करते समय, हमें वास्तविक स्थिति को आधार बनाकर शुरुआत करनी चाहिए—न कि परिभाषाओं को आधार बनाकर।

माओ ज़ेडॉन्ग