समस्या-उठाऊ शिक्षा क्रांतिकारी भविष्यता है।
-
संबंधित विषय : क्रांतिकारीऔर 1 अन्य
समस्या-उठाऊ शिक्षा मनुष्यों को ऐसे प्राणी मानती है, जो संभवन की प्रक्रिया में है। अर्थात् वे अभी अधूरे हैं, अपूर्ण हैं, और ऐसे यथार्थ के अंदर तथा उसके साथ रहते हैं, जो उन्हीं की तरह अधूरा और संभव होता हुआ यथार्थ है।
समस्या-उठाऊ शिक्षा, उत्पीड़कों का हित साधन नहीं करती।
उचित उपाय से न किया हुआ प्रयास अन्य अनेक व्यक्तियों का आश्रय प्राप्त होने पर भी व्यर्थ हो जाएगा।
कार्य-सिद्धि के उपायों में लगे रहने वाले भी असावधानी से अपने कार्यों को नष्ट कर देते हैं।
एक ही सुवर्ण कणिका आदि भेद से जिस प्रकार भिन्न-भासित होता है तथा एक ही जल, समुद्र, नदी, तालाब आदि के नाम से जिस प्रकार भिन्न प्रतीत होता है उसी प्रकार जो एक ही शिव तत्त्व पशु-पक्षी देव-दानव और मानव के भेद से भिन्न प्रतीत होता है, उस परम तेजोमय को नमस्कार है।
नितांत बेबस अथवा निरुपाय के लिए ही प्रकृति का सहायक हाथ पहुँचता है।