भविष्य पर उद्धरण
भविष्य आशंकाओं-आकांक्षाओं
के वर्तमान के रूप में हमारे जीवन-दृश्यों में उतरता रहता है। इस चयन में ऐसी ही कुछ कविताओं का संकलन किया गया है।
आप कभी भी अतीत के द्वारा भविष्य की योजना नहीं बना सकते।
हमारे आधुनिक राष्ट्र भविष्य के दुश्मन को जाने बिना ही युद्ध की तैयारी कर रहे हैं।
आज के साथ कल का नाड़ी का संबंध है।
जिस प्रकार अतीत नष्ट होता है उसी प्रकार भविष्य निर्मित होता है।
दूसरे सभी क्षेत्रों में मनुष्य द्वारा किया जा रहा विकास; दुनिया को जिस तरफ़ ले जा रहा है, उसके लिए मनुष्य की नैतिक तैयारी अभी न के बराबर है।
आपके वर्तमान विचार आपके भावी जीवन का निर्माण कर रहे हैं। आप जिसके बारे में सबसे ज़्यादा सोचते हैं या जिस पर सबसे ज़्यादा ध्यान केंद्रित करते हैं, वह आपकी ज़िंदगी में प्रकट हो जाएगा।
अतीत की मुश्किलों, सांस्कृतिक परंपराओं और सामाजिक धारणाओं को छोड़ दें। आप ही इकलौते व्यक्ति हैं; जो उस जीवन का निर्माण कर सकते हैं, जिसके आप हक़दार हैं।
आपको भान होगा कि भविष्य के प्रति हमारा भय ही हमारी अतीत से मुक्ति पाने में बाधा है।
हम अबाध रूप से, कालक्रम से नहीं बढ़ते हैं। हम कभी-कभी असमान रूप से एक पहलू में आगे बढ़ते हैं, दूसरे में नहीं। हम थोड़ा-थोड़ा करके बढ़ते हैं। हम तुलनात्मक रूप से आगे बढ़ते हैं। हम एक क्षेत्र में परिपक्व हैं, दूसरे में बचकाने। अतीत, वर्तमान और भविष्य मिलकर हमें पीछे धकेलते हैं, आगे बढ़ाते हैं या हमें वर्तमान में स्थिर कर देते हैं। हम परतों, कोशिकाओं, ज्योति पुंजों से मिलकर बने हैं।
अतीत आता है—भविष्य, अतीत, भविष्य। यह हमेशा अभी है। यह कभी अभी नहीं है।
हमें कभी भी भविष्य को स्मृति के बोझ के नीचे दब नहीं जाने देना चाहिए।
भविष्य कभी भी किसी के लिए पारदर्शी नहीं होता। उसे हमारी ज़िद से कोई सहानुभूति नहीं है। कहने का मतलब यह नहीं है कि यह अनुचित है, लेकिन यह अकल्पनीय है।
आध्यात्मिक गृहस्थी में हमें कल के कारण आज के बारे में नहीं सोचना चाहिए।
अपने जीवन को आज ही बदल डालो। भविष्य का जुआ मत खेलो, बिना किसी देरी के अभी इस काम में लग जाओ।
कहा जाता है कि हमारे जीवन का सबसे बड़ा निर्धारक यह है कि हम दुनिया को रोमांचक मानते हैं या शत्रुतापूर्ण। दोनों ही दृष्टिकोण स्वयं को पूरा करने वाली भविष्यवाणी बन जाते हैं।
सकारात्मकता बेहतर भविष्य बनाने की एक नीति है; क्योंकि जब तक आप भविष्य की बेहतरी में यक़ीन नहीं करते, तब तक आप आगे बढ़कर उसे बेहतर करने की ज़िम्मेदारी नहीं लेंगे।
भविष्य स्वर्ग के समान है, सब इसकी सराहना करते हैं; लेकिन अब वहाँ कोई नहीं जाना चाहता है।
भविष्य में ऐसा कोई समय नहीं है, जिसमें हम अपना उद्धार कर लेंगे। चुनौती इस पल में है, सही समय हमेशा अब है।
आप जिस वर्तमान का निर्माण कर रहे हैं, उसे ध्यान से देखें : वह उस भविष्य की तरह दिखना चाहिए जिसका आप सपना देख रहे हैं।
बढ़िया काम करने के लिए अनिवार्य है कि हम नॉस्टेल्जिया को पराजित करें—समय में कहीं और रहने की अस्पष्ट इच्छा को परास्त करें और वर्तमान को पकड़ कर रखें, और वर्तमान का पकड़ में आना मुश्किल है। जब हम उसकी तरफ़ हाथ बढ़ाते हैं, हमारी समस्याएँ हमें कहीं और अतीत में या भविष्य में खींच ले जाती हैं। काम क्षणों को परिपक्व करने का एक तरीक़ा है—उन्हें गुरुता प्रदान करने का एक ढंग। काम के ज़रिए हम वर्तमान को टिकाऊपन की दावत देते हैं। अपने काम के ज़रिए वर्तमान को ग्रहण करो और फिर देखो, तुम्हारा काम हमेशा वर्तमान रहेगा।
सही कवि भविष्य में देख सकते हैं।
भविष्य परमेश्वर के हाथ में है, सरकार के हाथ में नहीं है।
जब अतीत मर जाता है तो शोक होता है, लेकिन जब भविष्य मर जाता है तो हमारी कल्पनाएँ उसे आगे बढ़ाने के लिए मजबूर हो जाती हैं।
लोगों का भविष्य उनके नामों की वजह से आसान हो जाता है।
बचपन में हमेशा एक पल होता है, जब दरवाज़ा खुलता है और भविष्य को प्रवेश करने देता है।
भविष्य चाहे जितना भी सुखद हो, उस पर विश्वास न करो, भूतकाल की भी चिंता न करो, हृदय में उत्साह भरकर और ईश्वर पर विश्वास कर वर्तमान में कर्मशील रहो।
अतीत को त्यागने से नहीं अपितु स्वीकारने से और अतीत को भविष्य में ढालने से, जिसमें अतीत का पुनर्जन्म होता है, जीवन आगे बढ़ता है।
अतीत सुखों के लिए सोच क्यों, अनागत भविष्य के लिए भय क्यों, और वर्तमान को मैं अपने अनुकूल बना ही लूँगा, फिर चिंता किस बात की?
जीवन का प्राथमिक प्रसन्न उल्लास मनुष्य के भविष्य में मंगल और सौभाग्य को आमंत्रित करता है। उससे उदासीन न होना चाहिए।
पाप कर्म बन जाने पर सच्चे हृदय से पश्चात्ताप करने वाला मनुष्य उस पाप से छूट जाता है तथा फिर कभी ऐसा कर्म नहीं करूँगा, ऐसा दृढ़ निश्चय कर लेने पर भविष्य में होने वाले दूसरे पाप से भी मुक्त हो जाता है।
हमारा भविष्य जैसे कल्पना के परे दूर तक फैला हुआ है, हमारा अतीत भी उसी प्रकार स्मृति के पार तक विस्तृत है।
उपस्थित काल के सुख को त्याग देना और भविष्य में मिलने वाले सुख की आशा करना, यह बुद्धिमानों की नीति नहीं है।
परंपराएँ अतीत को वर्तमान और वर्तमान को भविष्य से जोड़ती हैं। उनके माध्यम से सामाजिक जीवन को निरंतरता मिलती है, और उसका स्वरूप निर्धारित होता है।
स्मृति अतीत-विषयक होती है। मति भविष्य-विषयक होती है। बुद्धि वर्तमान विषयक होती है। प्रज्ञा त्रिकाल-विषयक होती है। नवनवोन्मेषशालिनी प्रज्ञा को प्रतिभा कहते हैं।
दुनिया समय में आगे नहीं बढ़ती, बल्कि ऐसा लगता है जैसे यह हमारे अतीत से भविष्य की ओर एक सीधी रेखा में जा रही है।
इतिहास हमेशा वर्तमान और उसके अतीत के बीच संबंध का निर्माण करता है।
हमारा अतीत एक व्याख्या है, और हमारा भविष्य एक भ्रम है।
अतीत और भविष्य को एक तरफ रख कर वर्तमान में जीना चाहिए।
मैं एक शब्द कहने के लिए आया था और वह शब्द मैं अब कहता हूँ। परंतु यदि मृत्यु ने उसके कहे जाने में बाधा डाल दी, तो आने वाला कल उसे कहेगा, क्योंकि आने वाला कल अनंत की पुस्तक में कोई रहस्य नहीं रहने देता।
एक पीढ़ी अपना लाभ देखकर आगामी सब पीढ़ियों का भविष्य बिगाड़ने की क्रिया में लगी है।
समाज की जड़ें अतीत में होती हैं, वह वर्तमान में जीता है और भविष्य उसके लिए चिंता और प्रावधान का विषय होता है।
गुणशीलता, तात्कालिक परिस्थिति तथा भविष्य का विचार करके शीघ्रता तथा दीर्घसूत्रता दोनों को छोड़कर, देश-काल के अनुकूल अपना कार्य करना चाहिए।
हमारे विचार या आदर्श अमर होंगे, हमारे भाव जाति की स्मृति से कभी नहीं मिटेंगे, भविष्य में हमारे वंशधर की हमारी कल्पनाओं के उत्तराधिकारी बनेंगे, इस विश्वास के साथ मैं दीर्घ काल तक समस्त विपदाओं और अत्याचारों को हँसते हुए सहन कर सकूँगा।
देश का भविष्य नेताओं और मंत्रियों की मुट्ठी में नहीं है, देश की जनता के ही हाथ में है।
विज्ञापन इस अर्थ में भी क्षणिक होता है कि वह हर क्षण बदलता रहता है, फिर भी वह हमारे वर्तमान की बात नहीं करता। वह प्रायः हमारे अतीत का संदर्भ देता है और हमेशा हमारे भविष्य के बारे में बात करता है।
माताएँ ही भविष्य के विषय में विचार कर सकती हैं क्योंकि वे अपनी संतानों में भविष्य को जन्म देती हैं।
वर्तमान क्षण से अलग भविष्य और अतीत की स्पष्ट धारणा—नई भाषाओं के साथ विकसित होती है।
आज आसान नहीं है, कल और भी मुश्किल है, लेकिन परसों लाजवाब है।