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ग़रीबी पर उद्धरण

ग़रीबी बुनियादी आवश्यकताओं

के अभाव की स्थिति है। कविता जब भी मानव मात्र के पक्ष में खड़ी होगी, उसकी बुनियादी आवश्यकताएँ और आकांक्षाएँ हमेशा कविता के केंद्र में होंगी। प्रस्तुत है ग़रीब और ग़रीबी पर संवाद रचती कविताओं का यह चयन।

साहित्यकार के हक़ में ग़रीबी को एक साहित्यिक मूल्य मान लिया गया है।

श्रीलाल शुक्ल

निस्संदेह मैं तो हिंदू युवकों को वीरों और हुतात्माओं के उस गौरवमय पागलखाने में प्रविष्ट कराना चाहता हूँ जहाँ त्याग को लाभ, ग़रीबी को अमीरी और मृत्यु को जीवन समझा जाता है। मैं तो ऐसे पक्के और पवित्र पागलपन का प्रचार करता हूँ। पागल! हाँ, मैं पागल हूँ। मैं ख़ुश हूँ कि मैं पागल हूँ।

लाला हरदयाल

इतिहासकार को हरेक के साथ न्याय करने का अपना मिशन कभी भूलना नहीं चाहिए। निर्धन और संपत्तिवान सब उसकी क़लम के आगे बराबर हैं; उसके सामने किसान अपनी दरिद्रता की भव्यता के साथ उपस्थित होता है, और धनवान अपनी मूर्खता की क्षुद्रता के साथ।

ओनोरे द बाल्ज़ाक

संसार में शरीरधारियों की दरिद्रता ही मृत्यु है और ही आयु है।

क्षेमेंद्र

दरिद्रनारायण का अर्थ है ग़रीबों का ईश्वर, ग़रीबों के हृदय में निवास करने वाला ईश्वर। इस नाम का प्रयोग दिवंगत देशबंधु दास ने एक बार सत्य-दर्शन के पावन क्षणों में किया। इस नाम को मैंने अपने अनुभव से नहीं गढ़ा है बल्कि यह मुझे देशबंधु से विरासत के रूप में प्राप्त हुआ है।

महात्मा गांधी

मरने में अल्प दुख है किंतु दरिद्रता से अनन्त दुख होता है।

शूद्रक

दरिद्रनारायण के दर्शन करने हों, तो किसानों के झोंपड़ों में जाओ।

सरदार वल्लभ भाई पटेल

जगत् में प्रायः धनवानों में खाने और पचाने की शक्ति नहीं रहती है और दरिद्रों के पेट में काठ भी पच जाता है।

वेदव्यास

आधुनिक काल का ग़रीब, दया का पात्र नहीं समझा जाता; बल्कि उसे कचरे की तरह हटा दिया जाता है। बीसवीं सदी की उपभोक्ता अर्थव्यवस्था में पहली ऐसी संस्कृति की निर्मिति हुई, जिसके लिए भिखारी होना—कुछ नहीं होने का तक़ाज़ा है।

जॉन बर्जर

निर्धनता क्रांति और अपराध की जननी है।

अरस्तु

ईश्वर का सबसे अच्छा नाम दरिद्रनारायण है।

महात्मा गांधी

जो केवल ऐश्वर्य के पालने में पले हैं, वे ग़रीबों के दुःखों को नहीं जान सकते।

हरिकृष्ण प्रेमी
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निर्धन अनुभव करने में ही निर्धनता है।

राल्फ़ वाल्डो इमर्सन

दरिद्रता मनुष्यों के लिए उच्छ्वासयुक्त मरण है।

भास

भारतवर्ष के सभी अनर्थों की जड़ है—ग़रीबों की दुर्दशा।

स्वामी विवेकानन्द

ग़रीबी में मनुष्य जितना बनता है, उतना अमीरी में नहीं बनता।

सरदार वल्लभ भाई पटेल

दरिद्रता सब पापों की जननी है तथा लोभ उसकी सबसे बड़ी संतान है।

जयशंकर प्रसाद

भारत जैसे देश में ग़रीब या बेरोज़गार होना बड़ी बात नहीं। तभी जब कोई लेखनीधारी नागरिक अपनी विपन्नता के आत्मदयापूर्ण विवरण पेश करता है तो मुझे लगता है कि वह अप्रत्यक्ष रूप से उन सबका अपमान कर रहा है जो उससे भी कड़े अभावों को झेल रहे हैं पर उसकी तरह आत्म-प्रकाशन नहीं कर पा रहे हैं।

श्रीलाल शुक्ल

सबसे बड़ी बुराई तथा निकृष्टतम अपराध निर्धनता है।

जॉर्ज बर्नार्ड शॉ

शास्त्रोक्त शब्दों से जिनकी वाणी सुंदर है; और शिष्यों के पढ़ाने योग्य जिनकी विद्या है और वे स्वयं भी प्रसिद्ध हैं, ऐसे कवि-विद्वान् जिस राजा के देश में निर्धन रहते हैं, तो यह उस राजा की मुर्खता ही है।

भर्तृहरि

यदि तुम्हारे पास धन हैं, तो निर्धनों को बाँट दो। यदि धन पर्याप्त नही है तो मन की भेंट दो। यदि मन ठोक नहीं है तो तन अर्पित करो। यदि तन भी स्वस्थ नहीं है तो मीठे वचन ही बोलो। परंतु तुम्हें कुछ कुछ देना ही है और परोपकार के लिए अवश्य ही स्वयं को न्यौछावर करना है।

किशनचंद 'बेवस'
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ग़रीबी की ज़िल्लत नहीं रहती, अगर अजनबियों में ज़िंदगी बसर की जाए। यह जानने-पहचानने वालों की कर्नाखयाँ और कनबतियाँ हैं जो ग़रीबी को यंत्रणा बना देती हैं।

प्रेमचंद

जिनका धन समान है, जिनकी विद्या एक सी है, उन्हीं में विवाह और मंत्री का संबंध हो सकता है। धनवान और निर्धन में कभी मित्रता नहीं हो सकती।

वेदव्यास

क़ानून निर्धन को पीसते हैं और धनवान क़ानून पर शासन करते हैं।

ओलिवर गोल्डस्मिथ

आलसी सोने वाले मनुष्य को दरिद्रता प्राप्त होती है तथा कार्य-कुशल मनुष्य निश्चय ही अभीष्ट फल पाकर ऐश्वर्य का उपभोग करता है।

वेदव्यास

दरिद्र देशों के सामूहिक जीवन में साहित्य बिल्कुल ही अप्रासंगिक है। ऐसे देश में अगर किसी साहित्यकार को यह दंभ हो कि वह साहित्य रचकर जनसाधारण के जीवन की कोई अनिवार्य आवश्यकता पूरी कर रहा है तो उसे अपनी क़लम चूल्हे में झोंक देनी चाहिए।

श्रीलाल शुक्ल

मैं किसानों को भिखारी बनते नहीं देखना चाहता। दूसरों की मेहरबानी से जो कुछ मिल जाए, उसे लेकर जीने की इच्छा की अपेक्षा अपने हक़ के लिए मर-मिटना मैं ज़्यादा पसंद करता हूँ।

सरदार वल्लभ भाई पटेल

दरिद्र देशों में मनुष्य सिर्फ़ रोटी के सहारे जीता है। कलाकारों और साहित्यकारों को उसका कृतज्ञ होना चाहिए कि वह दूसरे संकटों के साथ कला और साहित्य को भी झेल लेता है।

श्रीलाल शुक्ल

प्रतिभा तो ग़रीबी ही में चमकती है, दीपक की भाँति जो अँधेरे में अपना प्रकाश दिखाता है।

प्रेमचंद

निर्धनता मनुष्य में चिंता उत्पन्न करती है, दूसरों से अपमान कराती है, शत्रुता उत्पन्न करती है, मित्रों में घृणा का पात्र बनाती है और आत्मीय जनों से विरोध कराती है। निर्धन व्यक्ति की घर छोड़कर वन चले जाने की इच्छा होती है, उसे स्त्री से भी अपमान सहना पड़ता है। ह्रदयस्थित शोकाग्नि एक बार ही जला नहीं डालती अपितु संतप्त करती रहती है।

शूद्रक

अभाव में, ग़रीबी में, दुःख में, परेशानी में आदमी जो कुछ करता है, उससे उसका मूल्यांकन नहीं किया जाता, यह उसके प्रति अन्याय है।

बिमल मित्र
  • संबंधित विषय : दुख

कवि के घर निर्धनता से अकाल नहीं पड़ता। वह तो पड़ता है, नीरसता का मौसम जाने पर।

माखनलाल चतुर्वेदी

निर्धनों की आवश्यकताओं और कठिनाइयों को अमीर कभी नहीं समझ सकते।

सैमुअल स्माइल्स

जनता ग़रीबी से उबरने का रास्ता पूछती है, सरकार उसके हाथ में 'निरोध' का पैकेट थमा देती है।

कृष्ण बिहारी मिश्र

कोई भी लोकतंत्र अभाव, ग़रीबी और असमानता के साथ लंबे अरसे तक नहीं चल सकता।

जवाहरलाल नेहरू

ग़रीबों के लिए रोटी ही अध्यात्म है।

महात्मा गांधी

दैववश मनुष्य के भाग्य की जब होनावस्था (दरिद्रता) जाती है तब उसके मित्र भी शत्रु हो जाते हैं, यहाँ तक कि चिरकाल से अनुरक्त जन भी विरक्त हो जाता है।

शूद्रक

आक्रोश ग़रीबी का सबसे क़ीमती फूल है।

कार्सन मैक्कुलर्स
  • संबंधित विषय : फूल

सुख की अवस्था से जो दरिद्रता की दशा को प्राप्त होता है, वह तो शरीर से जीवित रहते हुए भी मृतक के समान ही जीता रहता है।

भास

कोई भी देश ग़रीब देश नहीं होता; बस संसाधनों के प्रबंधन की नाकाम व्यवस्थाएँ होती हैं, जिनकी वजहें उन्हें ग़रीब रखती हैं।

नोम चोम्स्की
  • संबंधित विषय : देश

हमारे समय के सबसे हानिकारक मिथकों में से एक यह है कि ग़रीब देश अमीर देशों की साज़िश के कारण ग़रीबी में रहते हैं; जो उन्हें अविकसित रखने के लिए कार्यों की व्यवस्था करते हैं, ताकि उनका शोषण किया जा सके।

मारियो वार्गास ल्योसा
  • संबंधित विषय : देश

'दरिद्रता के विरुद्ध युद्ध' वायदों में, राजनीति में, प्रेस-वक्तव्यों में प्रथम परंतु क्रियान्वयन में सबसे अंतिम रहा है।

रिचर्ड निक्सन

कोई धर्म-संप्रदाय नवीनतम है इसीलिए उसे ग्रहण करो। नवीन वस्तुएँ सदा सर्वोत्तम नहीं होतीं, क्योंकि वे समय की कसौटी पर नहीं कसी गई हैं।

रामतीर्थ

राजन्! श्रुति है कि दर्प अधर्म के अंश से उत्पन्न संपत्ति का पुत्र है। उस दर्प ने बहुत से देवताओं और असुरों को नष्ट कर दिया है।

वेदव्यास

दीनता से प्राप्त हुई जीविका की अपेक्षा तो मर जाना ही उत्तम है।

वेदव्यास

अगर आज ग़रीबी को तीन सेंट में बेचा जाए, तो मैं इसे ख़रीद नहीं सकता।

न्गुगी वा थ्योंगो

दरिद्रता क्या है? असंतोष ही। लघुता क्या है? याचना।

अमोघवर्ष

ब्राह्मण के लिए दारिद्र्य अपरिचित नहीं।

दुर्गा भागवत

दरिद्रता अभिशाप है और वरदान भी। वह व्यक्ति रूप में एक विशिष्ट समय तक तुम्हारा परिसंस्कार करती है—पर यह अवधि दीर्घ नहीं होनी चाहिए।

सुरेंद्र वर्मा

ग़ुरबत और ग़लाज़त दो बहनें : दुनिया भर में।

कृष्ण बलदेव वैद