जो नायक अपने प्रति प्रीति उत्पन्न करना, स्त्रियों का आदर-सम्मान करना और नवोढ़ा कन्या में विश्वास उत्पन्न करना जानता है—वह स्त्रियों का अत्यंत प्रिय होता है।
यदि कोई अज्ञात रहकर; किसी की ठीक समय पर आपत्ति से रक्षा करता चला जाए, तो उसके प्रति जो कृतज्ञता या पूज्य बुद्धि होगी, उसकी अनुभूति कुतूहलमिश्रित होकर बड़ी ही अनूठी होगी।
कृतज्ञता आपकी ऊर्जा बदलने और ज़िंदगी में ज़्यादा मनचाही चीज़ों को लाने की एक शक्तिशाली प्रक्रिया है। आपके पास जो चीज़ें हैं, उनके लिए कृतज्ञ होने पर आप ज़्यादा अच्छी चीज़ों को आकर्षित करेंगे।
कृतज्ञता कुछ उद्दात्त वृत्ति है, पर उसमें भी ध्यान मुख्यतः 'कृत' या किए हुए उपकार पर ही रहता है—उपकार करनेवाले पर नहीं। कृतज्ञ 'कृत' के स्वरूप में अनुरक्त रहता है, कर्ता के स्वरूप में नहीं।
उपकारों को भूलना मनुष्य का स्वभाव है। अतः यदि हम दूसरों से कृतज्ञता की आशा करेंगे तो हमें व्यर्थ ही सर दर्द मोल लेना पड़ेगा।
करुणा अपना बीज अपने आलंबन या पात्र में नहीं फेंकती है अर्थात् जिस पर करुणा की जाती है, वह बदले में करुणा करने वाले पर भी करुणा नहीं करता— जैसा कि क्रोध और प्रेम में होता है—बल्कि कृतज्ञ होता अथवा श्रद्धा या प्रीति करता है।
कृतज्ञता शब्दों में आकर शिष्टता का रूप धारण कर लेती है। उसका मौलिक रूप वही है जो आँखों से बाहर निकलते हुए काँपता और लजाता है।
अहंता और ममता के नाश से सर्वथा अहम्-विहीन होने पर जब जीव स्वरूपस्थ हो जाता है तो उसे कृतार्थ कहा जाता है।
कृतज्ञता का बंधन अमोघ है।
जिन बातों के लिए आप कृतज्ञ हैं उन्हीं के विषय में सोचिए और उपलब्ध ऐश्वर्य तथा वैभव के लिए भगवान को धन्यवाद दीजिए।
आभार शब्द एक अहसास को प्रेरित करता है। यह अहसास मस्तिष्क को रसायनों के एक कॉकटेल से सुपरचार्ज करता है।
धन्यता आँसुओं की पुत्री है और सत्य पीड़ा का पुत्र।
कृतज्ञता हमसे वह सब कुछ करा लेती है, जो नियम की दृष्टि से त्याज्य है। यह वह चक्की है, जो हमारे सिद्धांतों और नियमों को पीस डालती है।
जेल जाना गौरव की बात है। कोई भी जेल जाकर हमपर एहसान नहीं करता वह स्वयं कृतार्थ होता है।
मेरे बारे में पूछताछ करने वाला संसार में एक प्रकार से कोई नहीं है। इसलिए अगर कोई मेरे बारे में भला-बुरा जानना चाहता है, तो सुनकर हृदय कृतज्ञता से भर जाता है, मेरे जैसे हतभाग्य संसार में बहुत ही कम है।
आभार हमें उन कई चीज़ों के प्रति सजग रहने में सक्षम बनाता है, जो लोग हमारे लिए बिना कुछ माँगे करते हैं।
अधिकार कृतज्ञता के विपरीत होता है।