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कृतज्ञता पर उद्धरण

समय पर किया हुआ सब कुछ उपकारक होता है।

माघ

अहंता और ममता के नाश से सर्वथा अहम्-विहीन होने पर जब जीव स्वरूपस्थ हो जाता है तो उसे कृतार्थ कहा जाता है।

वल्लभाचार्य