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विछोह की ख़ूबसूरती अधूरेपन में है

विछोह की ख़ूबसूरती अधूरेपन में है

रज़िया सुल्तान में जाँ निसार अख़्तर  का लिखा और लता मंगेशकर का गाया एक यादगार गीत है : ‘‘ऐ दिल-ए-नादाँ...’’, उसके एक अंतरे में ये पंक्तियाँ आती हैं : ‘‘हम भटकते हैं, क्यूँ भटकते हैं, दश्त-ओ-सेहरा मे

सुदीप्ति