अगर मैं वास्तव में उतनी ही प्रतिभाशाली होती; जितनी मैं ख़ुद को समझती थी, तो बहुत पहले जान जाती कि जीवन का अर्थ अंततः मनुष्यों से ही बनता है।
-
संबंधित विषय : आत्म-चिंतनऔर 1 अन्य
जो देश अपने नागरिकों के अधिकारों का सम्मान नहीं करता, वह अपने पड़ोसियों के अधिकारों का भी सम्मान नहीं करेगा।
व्याकरण सीखना, तानाशाही में रहने का अभ्यास करने जैसा है।
सबसे अँधेरी रात भी आख़िरकार ढलती है और सूरज निकलता है।
यदि कल वे तुमसे कहें कि तुम्हें तोप के गोले भरने हैं और स्नाइपर-राइफ़लों के लिए दूरबीनें तैयार करनी हैं, तो बस एक ही काम करना : इंकार कर देना।
ऐसा कोई दु:ख नहीं, जिससे पहले प्रेम न आता हो।
जब तुम हर उस बात को हटा देते हो जो असंभव है, तब जो कुछ बचता है, चाहे वह कितना ही अजीब क्यों न लगे—वही सच होता है।
मुझे लगता है कि स्त्रियों की आवाज़, एक बार सुन ली जाए, तो वह दूसरी उपेक्षित आवाज़ों को भी सक्रिय और सुनने योग्य बना देगी।
मन कोई सड़क नहीं है, बल्कि मंदिर है और इसके दरवाज़े लापरवाही से खुले नहीं छोड़ने चाहिए।
जैसे-जैसे हमारा ज्ञान बढ़ता है, हम अपने पिताओं को मूर्ख समझने लगते हैं। निस्संदेह हमारे अधिक बुद्धिमान पुत्र हमें भी ऐसा ही समझेंगे।
चाय वह चीज़ है; जो जीवन के हर दैनिक मोड़ को, सिविल सर्विस परीक्षा में असफल हुए हर क्लर्क को,आधी छुट्टी में हर अध्यापक को आशीर्वाद देती है। वह सुंदर है, शिव है, सत्य है।
कल्पना ही यथार्थ को जन्म : देती है।
हिंदी में लोकप्रिय होना अपराध है। मैं पुराना अपराधी हूँ।
जब भी किसी कछुए को मचान पर बैठे देखो, समझ जाओ किसी ने उसकी मदद की है।
कैमरा हमें यह सिखाता है कि बिना कैमरे के दुनिया को कैसे देखा जाए।
मेहनतकश लोगों की सेवा के लिए अपने लेखन का उपयोग कर पाना मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान और सबसे बड़ी स्वतंत्रता है।
साधारण भी चमत्कारी हो सकता है।
मनुष्य ही लाया है ग्रंथ को ग्रंथ नहीं लाया किसी मनुष्य को!
प्रेम का एक ही विकल्प है–याद।
किताबें एक ऐसा नशा हैं, जो मन के लिए वरदान है।
ग़ुस्सा करने में बिताए हर एक मिनट से तुम ख़ुशी के साठ सेकंड खो देते हो।
कोई भी पूरी तरह से आज़ाद नहीं है। पंछी आसमान से बँधे हैं।
कछुआ तभी आगे बढ़ता है, जब अपनी गर्दन बाहर निकालता है।
शतरंज सब कुछ है—कला, विज्ञान और खेल।
मैं गद्य के नाम पर आतिशबाज़ी नहीं करता, बिना किसी बनावट के सीधे-सीधे अपनी बात करता हूँ।
पहले से मिली एक इंच जानकारी, बाद में होने वाले दस मील पछतावे से कहीं ज़्यादा क़ीमती होती है।
उससे ज़्यादा अपरिचित कोई नहीं, जिसे अपने बचपन की जगह छोड़नी पड़ी हो।
मनुष्य ख़ुद प्रकृति का हिस्सा है। प्रकृति के विरुद्ध उसका युद्ध अंततः अपने विरुद्ध है।
संबंधित विषय
- अधिकार
- अनुभव
- अनुशासन
- आज़ादी
- आत्म-चिंतन
- आनंद
- आरंभ
- उम्मीद
- क्रोध
- कल्पना
- कहानी
- चमत्कार
- चाय
- ज्ञान
- जागरण
- जीवन
- तर्क
- तस्वीर
- तानाशाह
- दुख
- दर्शन
- दिनमान
- धर्म
- नया
- न्याय
- निर्धारित
- पक्षी
- प्रकृति
- प्रकाश
- प्रगति
- प्रतिरोध
- प्रेम
- पर्यावरण
- पुस्तक
- पीढ़ी
- बचपन
- मदद
- मनुष्य
- मनुष्यता
- युद्ध
- लोकतंत्र
- व्यंग्य
- विज्ञान
- वियोग
- विस्थापन
- शांति
- सुख
- सच
- स्त्री
- सफलता
- संबंध
- संभव
- समानता
- संवेदना
- सादगी
- सामाजिक
- साहस
- साहित्य
- सीखना