अकेलापन पर उद्धरण
‘अकेलापन’ अँग्रेज़ी भाषा
के शब्द ‘लोनलीनेस’ और ‘सॉलीट्यूड’ दोनों के अभिप्राय को प्रकट करता है। यह ‘लोनलीनेस’ के अभिप्राय में मन की एकांतिक नकारात्मक मनोदशा और ‘सॉलीट्यूड’ के अभिप्राय में मन की एकांतिक आध्यात्मिक मनोदशा को प्रकट करता है। दोनों मनोदशाएँ काव्य और कला-सृजन की उत्प्रेरक मानी जाती हैं।

मुझे अपनी कल्पना को साकार करने के लिए अकेलेपन के दर्द की ज़रूरत है।

मुझे जितना अकेला होना चाहिए था, मैं उससे कहीं ज़्यादा अकेली थी; प्यार करने वाली या आधा प्यार करने वाली स्त्री होने के नाते।

मनुष्य अकेला नहीं है, वह समग्र से जुड़ा हुआ है, अनेकों पर उसकी निर्भरता अपरिहार्य है।

वह अपनी प्रतिष्ठा में इतना अकेला पड़ गया था कि उसका कोई शत्रु तक नहीं बचा।

चरित्र की प्रशंसा कठोर, अमानवीय अकेलेपन में करो।

सपनों का एक समय में एक ही मालिक होता है। इसलिए सपने देखने वाले अकेले होते हैं।

जो गृहिणियाँ अपने पति को अख़बार के पीछे से घूर रही होती हैं, या बिस्तर पर उनकी साँसों को सुन रही होती हैं, वे किराए के कमरे में रहने वाली अविवाहिता से भी ज़्यादा अकेली हैं।



कौओं के बीच आस्था है कि एक अकेला कौआ स्वर्ग को नष्ट कर सकता है। इसमें कोई संदेह नहीं, लेकिन यह तथ्य स्वर्ग के विरुद्ध कुछ भी साबित नहीं करता, क्योंकि स्वर्ग का मतलब है—कौओं की असंभाव्यता।

मैंने गंदगी में और उपेक्षित होकर अकेले रहने के लिए तड़प विकसित की।

सबसे बुरा अकेलापन ख़ुद के साथ सहज नहीं होना है।

दिन के पूर्व भाग में जो जीवित सूर्य दिखाई देता है, उसके अंतिम भाग में वही अंगारों का पुंजमात्र रह जाता है, जिसे लाखों श्रेष्ठ व्यक्ति प्रणाम करते हैं, वही स्वामी असमय में अकेला ही मर जाता है।

‘‘पागल हो क्या?’’ मैं चिल्लाया। आधी रात बीते एक पहर गुज़र चुकी थी। मैं एक पार्टी से लौटा था। कुछ देर तक अकेले टहलने की इच्छा हुई थी और अब देखिए ये आदमी मेरे सामने गिर गया। मैं इस भारी-भरकम आदमी को नहीं उठा सकता और न ही मैं इसे यहीं इस अकेले प्रांत में गिरा छोड़ देना चाहता हूँ, जहाँ दूर-दूर तक कोई दिखाई नहीं देता।

कला सिर्फ़ और सिर्फ़ अभाव, चाहत और अकेलेपन से नहीं रची जाती है; रचना के लिए घनिष्ठता, जुनून और प्रेम भी ज़रूरी है।

मुक्ति अकेले में अकेले की नहीं हो सकती। मुक्ति अकेले में अकेले को नहीं मिलती।

अकेलापन ऐसा अम्ल बन जाता है जो आपको खा जाता है।

प्रेम अकेले होने का एक ढंग है।

एकांत में आपको वही मिलता है जो आप उस तक ले जाते हैं।

अपनी मुक्ति के रास्ते अकेले में नहीं मिलते।

हिंदी अगर एक छोटी-सी भाषा होती, लोग उसे प्रेम और मनुष्यता के साथ बरतते तो उसका लेखक इतना अकेला नहीं होता।

हर कोई अकेला स्वयं की ओर बढ़ रहा है।

अकेलेपन में भी कुछ है जो नितांत आकर्षक है, सर्वथा सुखकर है लेकिन अफ़सोस कि उसे पा सकना अकेले के बस का नहीं।

एक अकेली छवि वैभव नहीं है।

परिश्रम और प्रतिभा आप-ही-आप आदमी को अकेला बना देती है।

किसी एक व्यक्ति से उसके एकांत में कोई ईमानदार बात सुनने की आशा भी करो तो अकेला नहीं मिलता है।

सबसे बढ़कर आत्मा की खोज यह अहसास है, कि हम अकेले हैं।