युवती नायिकाएँ चाहती हुई भी लज्जावश नायकों से नहीं मिल पातीं। अतः उन्हें संकेतों और चेष्टाओं के द्वारा अपने मनोभावों को प्रकट करें, और प्रेमी युवकों को चाहिए कि वह युवती नायिकाओं के संकेतों, इशारों, चेष्टाओं, मुखमुद्राओं से उनके मनोभावों को समझें।
कामकलाओं में कुशल, वाचाल और चापलूस व्यक्ति—अपरिचित होने पर भी स्त्रियों के चित्त को शीघ्र ही जीत लेता है या वश में कर लेता है।
कोई चीज़ आकर्षण के नियम से परे नहीं है। आपकी ज़िंदगी आपके प्रबल विचारों का आईना है।
साधारण सही दिमाग़ वाले व्यक्तियों में भी वैयक्तिक महक; यौन-आकर्षण तथा विकर्षण का बहुत बड़ा भाग अदा करती है, इसी को कभी-कभी गंध-प्रधानतावाद कहा जाता है।
मानसिक तस्वीर देखना, अपने मस्तिष्क में तस्वीरें बनाने की प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया में आप अपनी मनचाही चीज़ों का आनंद लेते हैं। जब आप कल्पना करते हैं, तो आप उस चीज़ के अपने पास होने के सशक्त विचार और भावनाएँ उत्पन्न करते हैं। फिर आकर्षण का नियम उसी चीज़ को सच करके आपके जीवन में भेज देता है, जिस रूप में आपने उसे अपने मस्तिष्क में देखा था।
पुरुष; सौंदर्य के अधिकतर विशुद्ध दृष्टिगत गुण के द्वारा ही यौन दृष्टि से प्रभावित होते हैं, पर स्त्रियाँ ऐसी दृष्टिगत छापों से ही अधिकतर प्रभावित होती हैं, जो मौलिक रूप से अधिकतर यौन अनुभूति यानी स्पर्शनुभूति के गुणों को अभिव्यक्त करती हैं।
आकर्षण का नियम नैसर्गिक नियम है। यह निष्पक्ष है और अच्छी या बुरी चीज़ों में भेद नहीं करता है। यह आपके विचारों को आपके जीवन में साकार कर देता है।
तुम आकर्षित करते हो वो जो एक प्रेमी के तौर पर तुम्हारी ज़रूरतें हैं।
लोगों को दोस्त बनने के लिए जो चीज़ आकर्षित करती है, वह यह है कि वे एक ही सच्चाई को देखते हैं। वे उसे साझा करते हैं।
असली खलनायक बेहद आकर्षक होते हैं।
दुनिया के महानतम शिक्षकों ने हमें बताया है कि आकर्षण का नियम, दुनिया का सबसे शक्तिशाली नियम है।
आकर्षण का नियम सृजन का नियम है।
आकर्षण का नियम कहता है कि समान चीज़ें समान चीज़ों को आकर्षित करती हैं। इसका मतलब यह है कि जब आप कोई विचार सोचते हैं, तो आप उसी जैसे अन्य विचारों को भी अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
अलादीन के जिन्न की तरह ही आकर्षण का नियम भी हमारे हर आदेश का पालन करता है।
आप जिस चीज़ का प्रतिरोध करते हैं, उसे अपनी ओर आकर्षित करते हैं क्योंकि आप प्रबल भावना से उस पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित करते हैं।
अगर आप सभी तर्कों के ख़िलाफ़ अपने आपको किसी घटना की ओर आकर्षित हुआ पाते हैं, तो आगे बढ़िए—ब्रह्मांड आपको कुछ बता रहा है।
सिर्फ़ भीड़ और अभिजात वर्ग ही सर्वसत्तावाद के आवेग से आकर्षित हो सकते हैं। जनसाधारण को प्रचार द्वारा जीतना पड़ता है।
आकर्षण का नियम जीवन का महान रहस्य है।
महापुरुषों के गुण क्षुद्र लोगों के नीरस और निष्ठुर मनों को भी इस प्रकार खींच लेते हैं जैसे चुंबक लोहे को, फिर जो स्वभाव से ही सरस और कोमल स्वभाव के लोग हैं, उनकी तो बात ही क्या?
सामजिक महत्त्व के लिए आवश्यक है कि या तो आकर्षित करो या आकर्षित हो। जैसे इस आकर्षण-विधान के बिना अणुओं द्वारा व्यक्त पिंडों का आविर्भाव नहीं हो सकता, वैसे ही मानव-जीवन की विशद् अभिव्यक्ति भी नहीं हो सकती।
चार्ल्स हानेल ने आकर्षण के नियम का वर्णन करते हुए कहा था, "यह सबसे महान और सबसे अचूक नियम है, जिस पर सृजन का समूचा तंत्र निर्भर है।''
कामसुख की सफलता के लिए रूप (सौंदर्य) प्रथम आकर्षण है, जिस पर आकर्षित होकर नायक अपना सब कुछ न्योछावर करने को तैयार रहता है। क्योंकि मनुष्य सौंदर्योपासक होता है, उसमें सौंदर्य के प्रति अनुराग होता है—आकर्षण होता है।
अनुरागी नायक लोभी होते हुए भी अवसर आने पर त्याग कर सकता है, किंतु स्वभाव से त्यागी नायक को अत्यंत प्रयास करने पर भी, रागी (आसक्त) नहीं बनाया जा सकता।
पूर्ण यौवन में ही स्त्री और पुरुष दोनों आकर्षण के केंद्र होते हैं। युवक पुरुष पर ही स्त्रियाँ रीझती हैं और पूर्ण युवती स्त्रियों पर पुरुष रीझते हैं। युवावस्था में ही सौंदर्य का निखार होता है, काम की वृद्धि होती है।
बाल्यकाल, नवयौवन और तारुण्य के विभिन्न उषःकालों में; जिज्ञासा हृदय का छोर खींचती हुई, आकर्षण के सुदूर ध्रुव-बिंदुओं में हमें जोड़ देती है।
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पुरुष-प्रेम को प्रमुख समझने वाली स्त्रियों पर ही विश्वास और आसक्ति होती है।
मोहक गीत में कल्पनाओं को जगाने की बड़ी शक्ति होती है।
काम करते जाओ, किंतु आबद्ध न होना। यदि समझते हो कि विषय के परिवर्तन से तुम्हारे हृदय में परिवर्तन आ रहा है; और वह परिवर्तन तुम्हारे लिए वांछनीय नहीं है, तो ठीक जानो तुम आबद्ध हुए हो।
हर कोई उसकी आँखों से आकर्षित हो जाया करता जिन्हें वह बहुत ज़्यादा खुली रखता था; कभी-कभी घूरती हुई वे आँखें फ़ोटोग्राफ़ों में मैग्नीशियम की आकस्मिक चमक के कारण किसी विक्षिप्त या स्वप्नदृष्टा की लगती थीं।
युवती नायिकाएँ अपने प्रेमी युवकों को सामने से नहीं देखतीं, और नायक के द्वारा देखे जाने पर अर्थात् आँखें मिल जाने पर लज्जा से आँखें नीचे कर लेती हैं। किंतु अपने प्रेमी नायक को अपने अंगों को (स्तनादि अंगों को) किसी-न-किसी बहाने दिखा देती हैं। यदि नायक असावधान, अकेला दूर हो तो वह उसे बार-बार देखती है।
मनुष्य जिस-जिस कामना को छोड़ देता है, उस-उस की ओर से सुखी हो जाता है। कामना के वशीभूत होकर तो वह सर्वदा दुःख ही पाता है।
प्रकृति तथा मानव-जीवन में समाहित निसर्ग के प्रति सहज आकर्षण की ललक पशुओं की तरह मनुष्य में भी एक स्वाभाविक प्रक्रिया है।
वेश्या पर पूर्ण विश्वास रखना, उसके समान शील स्वभाव वाला होना, नायिका की इच्छा पूरी करने में सदा तत्पर, उसके प्रति आशंका न करना और धन की कोई परवाह न करना—ये आसक्त पुरुष के लक्षण हैं।
वस्तुओं के बारे में सोचने से मनुष्य में उनके प्रति आसक्ति उत्पन्न होती है। आसक्ति से लालसा उत्पन्न होती है, और लालसा से क्रोध उत्पन्न होता है।
अतीत की स्मृति में मनुष्य के लिए स्वाभाविक आकर्षण है।
हे निषाद! तुझे कभी शांति न मिले, क्योंकि तूने काम से मोहित क्रौंच के इस जोड़े में से एक की हत्या कर दी।
असत्य अधिक आकर्षक होता है।
आकर्षण के नियम का लाभ लेने के लिए इसे सिर्फ़ एक बार की घटना न बनाएँ, बल्कि इसकी आदत डाल लें।
हेमंत का सबसे बड़ा आकर्षण है पत्तियों का पीला पड़ जाना और ज़रा-सी हवा डोलने पर भू-पतित हो जाना।
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