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पत्नी पर उद्धरण

प्रस्तुत है कवि-पत्नी,

पत्नियों को समर्पित और कविता में पत्नियाँ विषयक कविताओं का एक अनूठा चयन।

गृहिणी का सद्गुण ही गृहस्थ की मांगलिक शोभा है और सुपुत्र उसका आभूषण।

तिरुवल्लुवर

गृहिणी सद्गुण संपन्न है तो गृहस्थ को किस वस्तु का अभाव? और यदि वैसी नहीं है तो उसके पास है ही क्या?

तिरुवल्लुवर

स्त्रियों को तर्कसंगत प्राणी और स्वतंत्र नागरिक बनाएँ, और अगर पुरुष पतियों और पिता के कर्त्तव्यों की उपेक्षा नहीं करते हैं तो वे जल्द ही अच्छी पत्नियाँ बन जाएँगी।

मैरी वोलस्टोनक्राफ़्ट

सहस्रों माता-पिता और सैकड़ों पुत्र पत्नियाँ युग-युग में हुए। सदैव के लिए वे किसके हुए और आप किसके हैं?

बाणभट्ट

तीन रात तक संयम धारण करने के बाद; पति को एकांत स्थान केलिगृह में पत्नी के पास जाकर, मीठी-मीठी मनोरञ्जक बातें और स्पर्श आदि मृदु उपचारों से नवविवाहिता वधू में विश्वास पैदा करने और उसकी लज्जा दूर करने का प्रयत्न करना चाहिए। उस समय संयत भाव से कोमलता एवं मधुरता का व्यवहार करने की आवश्यकता होती है, ज़ोर-ज़बर्दस्ती नहीं करनी चाहिए। ज़ोर-ज़बर्दस्ती करने से कटुता बढ़ती है और दाम्पत्य जीवन दुःखमय बन जाता है। इसलिए पत्नी की इच्छा के विरुद्ध कोई काम नहीं करना चाहिए।

वात्स्यायन

जिसकी पत्नी पतिव्रता है, पति को प्राणों से भी अधिक प्यार करने वाली है तथा पति के ही हित में संलग्न है, वह पुरुष इस पृथ्वी पर धन्य है।

विष्णु शर्मा

समस्या हमेशा बच्चों की माँ या मंत्री की पत्नी होने में और—कभी भी—जो हो वह नहीं होने में होती है।

बेट्टी फ्रीडन

सीता जैसी पत्नीत्व का आदर्श है, वैसे ही वह कौमार्य का भी आदर्श है। पर मेरा आदर्श तो है कि स्त्रियाँ विवाहित होते हुए भी कुमारिका का जीवन बिताएँ। सीता और पार्वती आदि इन दोनों आदर्शों तक पहुँच चुकी थीं।

महात्मा गांधी

जिस संबंध से पति-पत्नी दोनों को समान सुख की अनुभूति हो; परस्पर खेल, हँसी-विनोद करे, एक-दूसरे को बराबर समझें—वह संबंध विवाह करने योग्य होता है।

वात्स्यायन

पति के प्रेम को प्राप्त करने वाली कन्या, उद्वेग के कारण उससे घृणा करती है अथवा समस्त पुरुषों से द्वेष करने लगती है, अथवा विद्रोहिणी बनकर परपुरुषगामिनी हो जाती है।

वात्स्यायन

तुम अपनी पत्नी की आबरू की रक्षा करना, और उसके मालिक मत बन बैठना, उसके सच्चे मित्र बनना। तुम उसका शरीर और आत्मा वैसे ही पवित्र मानना, जैसे कि वह तुम्हारा मानेगी।

महात्मा गांधी

जो पुरुष नवविवाहिता कन्या के मनोभावों को समझता है, बिना सहसा (बलात) उपसर्पण (संभोग करने की चेष्टा) करता है—उससे कन्या भयभीत, त्रसित और उद्विग्न रूप से द्वेष करने लगती है।

वात्स्यायन

जिसके घर माता अथवा प्रियवादिनी पत्नी नहीं है, उसे वन में चला जाना चाहिए क्योंकि उसके लिए जैसा वन, वैसा ही घर।

विष्णु शर्मा

पत्नी का रिश्ता फूल को तोड़कर अपने पास रख लेने का था। पेड़ में खिले फूल-जैसा रिश्ता कहीं नहीं दिखता था।

विनोद कुमार शुक्ल

पत्नी के लिए लोक में सबसे बढ़कर यही सनातन कर्त्तव्य है कि वह अपने प्राणों को भी न्योछावर करके पति की भलाई करे।

वेदव्यास

प्रायः गृहस्थ जन कन्या संबंधी बातों में अपनी पत्नियों को नेत्र मानकर कार्य करते हैं।

कालिदास

पति के परदेश चले जाने पर पत्नी केवल सौभाग्य (सुहाग) के आभूषणों को धारण करे।

वात्स्यायन

मेरे विचार है कि पति-पत्नी में से एक को रोमांटिक होना चाहिए और दूसरे को व्यावहारिक। दोनों रोमांटिक होंगे तो दो जून की रोटी भी जुटा पाएँगे और दोनों व्यावहारिक होंगे, तो उनका जीवन बड़ा नीरस और उबाऊ हो जाएगा।

अमृतलाल वेगड़

अनेक पत्नियों वाले पति को, सबके साथ समान व्यवहार करना चाहिए।

वात्स्यायन

पत्नी का प्रेम अधिक होता परंतु वह स्वार्थ के मैल से युक्त होता है। माता की ममता निर्मल होती है क्योंकि रूप, द्रव्य, गुण आदि के होने पर भी माँ की ममता बनी रहती है।

दयाराम

यदि ज्येष्ठा सौत दुर्भगा और निःसंतान हो, तो कनिष्ठा उसके प्रति सहानुभूति रखे और पति से भी उस पर अनुकंपा करने के लिए सिफ़ारिश करे।

वात्स्यायन

परस्त्री के विषय में बात करना अशिष्टता है।

कालिदास

परस्त्री की ओर ध्यान से देखना उचित नहीं है।

कालिदास

निश्चय ही धार्मिक क्रियाओं में श्रेष्ठ पत्नी मुख्य साधन होती है।

कालिदास

पत्नी पर पति की सब प्रकार की प्रभुता उचित है।

कालिदास
  • संबंधित विषय : पति

जिस कुल में पति पत्नी से और पत्नी पति से संतुष्ट रहती है, वहाँ ध्रुव कल्याण वास करता हैं।

मनु

पत्नी को पत्नी के अलावा देखने के अभ्यास के लिए, उससे और प्रेम कर लेना था।

विनोद कुमार शुक्ल

जब मैं वापस चीन लौटा (अमेरिका से), मेरे पास तो अमेरिकी पासपोर्ट था, ही पत्नी थी और ही यूनिवर्सिटी की कोई डिग्री। चीनी समाज के हिसाब से मैं बिल्कुल असफल था।

आई वेईवेई

गृही के प्रिय और हित के लिए पत्नी के गुण होते हैं।

दण्डी

बहुपत्नीक पुरुष को चाहिए कि वह एक पत्नी के साथ की गई रतिक्रीड़ा, अथवा शरीर के किसी विकार को अथवा उसके उलाहने (शिकायत) को विश्वास में आकर किसी दूसरी स्त्री से कहे।

वात्स्यायन