Font by Mehr Nastaliq Web

चयन पर उद्धरण

संग्रहणीय वस्तु हाथ आते ही उसका उपयोग जानना, उसका प्रकृत परिचय प्राप्त करना, और जीवन के साथ-ही-साथ जीवन का आश्रयस्थल बनाते जाना—यही है रीतिमय शिक्षा।

रवींद्रनाथ टैगोर

केवल किसी स्त्री के पास ही यह चुनने की शक्ति है कि अर्पण करना है या नहीं।

अमोस ओज़

अपव्यय और कष्ट जितना ही अधिक प्रयोजनहीन होता है; संचय और परिणामहीन, जय-लाभ का गौरव उतना ही अधिक जान पड़ता है।

रवींद्रनाथ टैगोर

परिचय का अर्थ यही है कि जो चीज़ छोड़ने की है उसे छोड़कर, जो चीज़ लेने की है उसे ले लिया जाए।

रवींद्रनाथ टैगोर

…चुनाव इस जीवन को जागते हुए या एक प्रकार की जड़ता में बिताने के बीच है।

अमोस ओज़

रचनात्मक प्रक्रिया आपकी मनचाही चीज़ को पाने में आपकी मदद करती है। इसके तीन आसान क़दम है : माँगें, यक़ीन करें और पाएँ।

रॉन्डा बर्न

जो तुमको दुर्बल बनाता है, वह समूल त्याज्य है।

स्वामी विवेकानन्द

…क्या वह चयन करती है?

केट शोपैं

वह काम करें, जिससे आपको ख़ुशी मिलती हो। अगर आप नहीं जानते हैं कि आपको किस चीज़ से ख़ुशी मिलती है, तो पूछें, "मेरी ख़ुशी क्या है?" जब आप अपनी ख़ुशी के प्रति समर्पित हो जाते हैं, तो आप ख़ुशनुमा चीज़ों की बाढ़ को अपनी ओर आकर्षित करेंगे, क्योंकि आप ख़ुशी का संचार कर रहे हैं।

रॉन्डा बर्न

जो युवक नायक दरिद्र होते हुए भी वश में रहने वाला हो, गुणहीन होने पर भी अपनी जीविका चला लेता हो—वह वरण के योग्य है, किंतु गुणों से युक्त होने पर भी अनेक पत्नियों वाला पति विवाह के योग्य नहीं होता।

वात्स्यायन

जो विद्वान् होता है वह सत्य-असत्य की परीक्षा करके, सत्य का ग्रहण और असत्य को छोड़ देता है।

दयानंद सरस्वती

धन के लोभ से युक्त युवती नायिका, नायक के गुणों, रूप (सौंदर्य) तथा औचित्य की परवाह करके—अनेक सौतों के होते हुए भी धनी पति को वरण कर ले।

वात्स्यायन

जहाँ जिसका ग्रहण करना उचित हो, वहाँ उसी अर्थ का ग्रहण करना चाहिए।

दयानंद सरस्वती

अस्तेय और अपरिग्रह में बहुत थोड़ा भेद है। जिसकी हमें आज आवश्यकता नहीं है, उसे भविष्य की चिंता से संग्रहकर रखना परिग्रह है।

महात्मा गांधी

दूती को चाहिए कि वह स्वयं वर चुन लेने की नायिका को सलाह दे। अपनी बुद्धि और इच्छा से विवाह करके प्रसन्न रहने वाली सजातीय अन्य कन्याएँ तथा शकुंतला आदि की कहानियाँ सुनाकर, नायिका को गांधर्व विवाह के लिए प्रेरित करे और यह बताए कि धनी परिवार में अनेक पत्नियों वाले वर से शादी करके कन्याएँ बहुत दुःखी रहती हैं। अतः उसे अपनी इच्छा से अपने मनोऽनुकूल वर चुनना चाहिए और उसके साथ विवाह कर लेना चाहिए।

वात्स्यायन

चयन और सुसज्जित—प्रत्येक काव्य की प्राथमिक विशेषताएँ हैं।

श्यामसुंदर दास

अर्थ और प्रीति में; प्रीति को छोड़कर अर्थ को महत्त्व देना चाहिए, क्योंकि धन प्रधान है।

वात्स्यायन

अगर आपने ग़लत इंसान को छोड़ा नहीं तो सही इंसान कभी नहीं मिलेगा।

साइमन गिलहम

सत्य और स्वयं में जो चुनता है, वह सत्य को भी पा लेता है और स्वयं को भी। और जो स्वयं को चुनता है, वह दोनों को खो देता है।

ओशो

मैं जिस वस्तु को छोड़ता और उसके बदल में जिसे लेता, उसमें से बिलकुल ही नए और अधिक रसों का निर्माण हो जाता।

महात्मा गांधी

प्रतिष्ठित और प्रचलित, दोनों के विरुद्ध अपना रास्ता निकालना—हर बार चुनौतियों भरा होता है।

लीलाधर जगूड़ी

अकेला महसूस कराने वाले लोगों के साथ होने से अच्छा है अकेला होना और ख़ुश रहना।

साइमन गिलहम

तुम जो चुनते हो, तुम वही बन जाते हो।

एंथनी हॉपकिंस

आप जो कुछ भी अपनाते हैं, उसी के आधार पर आपके जीवन का अर्थ तय होता है। अगर आपको लगता है कि ज़िंदगी बेकार है तो इसके लिए ज़िम्मेदार भी, आप और केवल आप ही हैं।

साइमन गिलहम

वस्तु को अपनाना और वस्तु को छोड़ देना, दोनों में ही सत्य है। ये दोनों सत्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं, और दोनों को यथार्थ रूप से मिलाकर ही पूर्णता-लाभ संभव है।

रवींद्रनाथ टैगोर

जो नायक गुणयुक्त होने पर भी नीच कुल का हो, पतित हो, वृद्ध हो तथा परदेश में रहने वाला हो—वह पुरुष विवाह के योग्य नहीं होता।

वात्स्यायन

जो आपके काम का नहीं है, उसे हटाएँगे तभी नए और बेहतर अनुभवों के लिए जगह बनेगी।

साइमन गिलहम

मैंने वही अवसर चुने जहाँ मेरी कलात्मक स्वतंत्रता सुरक्षित रहे। इस तथ्य को जानते हुए भी कि फ़िल्म उद्योग लाभोन्मुख है और सिद्धाँतों के ऊपर कलेक्शन को महत्व देता है और निश्चित सिद्धाँतों के प्रति सहनशक्ति भी कम रखता है।

अमोल पालेकर

यदि कोई आपके साथ बुरा व्यवहार कर रहा है या आपके लिए समस्याएँ पैदा कर रहा है, तो आप इसका विरोध करने का चयन कर सकते हैं, या आप कुछ भी करने का चयन कर सकते हैं।कट्टर स्वामित्व के साथ, हमेशा चयन का अधिकार आपको ही होता है।

अशदीन डॉक्टर

जो चीज़ें अनुपयोगी 'व्यस्तता' में योगदान देती हैं, उन्हें हटा दें।

अशदीन डॉक्टर

एक मनुष्य से सब कुछ छीना जा सकता है, मानवीय स्वतंत्रता से जुड़ी हर चीज़ छीनी जा सकती है। मगर उससे यह चुनाव करने की क्षमता नहीं छीनी जा सकती कि वह किन्हीं परिस्थितियों का सामना किस रवैये के साथ करेगा और अपने लिए कौन सा मार्ग चुनेगा।

विक्टर ई. फ्रैंकल

एक दिन के प्रयोजन से अधिक जो संचय नहीं करता; हमारी प्राचीन संहिताओं में उस द्विज-गृहस्थ की प्रशंसा की गई है, क्योंकि एक बार हमने संचय करना प्रारंभ किया नहीं कि फिर हम धीरे-धीरे संचय करने की मशीन हो जाते हैं, तब हमारा संचय प्रयोजन को ही बहुत दूर छोड़कर आगे चला जाता है। फिर प्रयोजन को ही वंचित और पीड़ित करता रहता है।

रवींद्रनाथ टैगोर