रघुवीर चौधरी के उद्धरण

मनुष्य के लालच और आत्मघात का ज़हर धरती के केंद्र में काफ़ी जमा हो चुका है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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प्रेम के भ्रम में भी प्रेम की आंशिक स्वीकृति होती है। शायद प्रेम की समग्रता को स्वीकार करना बहुत दुर्लभ है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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पुरुष को स्त्री को जानने में कोई दिलचस्पी नहीं थी, इसलिए उसने उसे परम रहस्य कहकर पुरस्कृत किया; लेकिन वास्तव में घमंड के बहाने उसके अधिकार की उपेक्षा की गई।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला

प्रेम नाम का कोई शाश्वत सूत्र नहीं है जो जीवन भर अपनी उपस्थिति का यक़ीन दिलाता रहे।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला

शांति और मौन का अर्थ है—शोर का अभाव, यानी वास्तव में एक बेचैन करने वाली शांति।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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जानवर इंसानों जितने बुद्धिमान नहीं होते, इसलिए उन्होंने छिपने की कला नहीं सीखी है। लेकिन मनुष्य में और उनमें बुद्धि को छोड़कर बाक़ी सभी चीज़ें समान स्तर की होती हैं। उन्होंने अपनी कुटिल बुद्धि से वितरण की व्यवस्था बनाकर अपने पशुवत कर्मों को छुपाने के लिए सुरक्षित अंधकार पैदा कर लिया है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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संतोष की भाषा धीमी होती है, क्योंकि वह शब्दों और मौन दोनों में व्यक्त होती है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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स्वतंत्र होने की कोशिश में साहस निहित है। साहसिक कार्य आत्म-सम्मान का पोषण करता है और आत्म-सम्मान किसी भी जोखिम को लेने की इच्छा पैदा करता है। तो क्या अकेले रहने का साहस करने में जोखिम है? शायद, साहस का मतलब ही जोखिम है?
जो वरदान देता है, वह शाप भी दे सकता है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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कुछ भी इतना मधुर नहीं होना चाहिए कि सुनते ही नींद आ जाए और इतना प्रेरक भी नहीं कि समझने पर वैराग्य आ जाए।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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प्रेम एक घटना में वैसा नहीं होता जैसा कि दूसरी घटना में होता है। समान प्रतीत होने वाली अन्य घटनाओं का अनुभव भी भिन्न होता है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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पृथ्वी अपनी गणना में अद्वितीय है। इसकी सुंदरता को केवल पैदल यात्री ही महसूस कर सकता
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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जितना आप प्रकट होते हैं और जहाँ आप प्रकट होते हैं, अपने आप पर उतना ही और केवल वहीं विश्वास करें। जो देखा नहीं जा सकता, फिर भी अस्तित्व में है, सर्वत्र है और शाश्वत है। आख़िरकार हम वही हैं।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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समुद्र विशाल एवं अखंड है। जो ऊपर नहीं दिखता, वह भीतर है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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शब्दों के ब्रह्मांड में सोलह-सोलह सूर्य प्रज्वलित रहे हैं। वहाँ कुछ भी बाधित नहीं है, सब कुछ पूर्ण है, प्रचुर है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला


मनुष्य अकेला नहीं है, वह समग्र से जुड़ा हुआ है, अनेकों पर उसकी निर्भरता अपरिहार्य है।
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यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि दूसरों में रुचि का कारण मनुष्य की स्वयं में रुचि है। यह संसार स्वार्थ से जुड़ा है। यह ठोस वास्तविकता है लेकिन मनुष्य केवल वास्तविकता के सहारे नहीं जी सकता। आकाश के बिना इसका काम नहीं चल सकता। भले ही कोई आकाश को शून्य स्थान कहे…
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला

किसी के शब्दों की लय में झूलना एक सुखद, लेकिन अचेतन निर्भरता हो सकती है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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मौन निकटता की भावना लाता है। जैसे ही बात खुलती है, तीसरी उपस्थिति की मानो चेतावनी आती है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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जो वास्तविक लगता है उसे सत् नहीं माना जा सकता, वास्तविकता और सत् के बीच बहुत अंतर है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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क्या जिसे हम क्षितिज कहते हैं, वह वास्तविकता है? या हम ऐसा कह रहे हैं? लेकिन हम अनंत को नहीं देख सकते, इसलिए हम ऐसी काल्पनिक सीमाओं को स्वीकार कर लेते हैं।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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त्यागने की संतुष्टि और अनुभव की संतुष्टि में बहुत बड़ा अंतर है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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सिर्फ़ विश्वास करने से काम नहीं चलता। आश्वस्त भी होना चाहिए—अनुभव से।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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स्त्री-हृदय के मर्मकोष को जाने बिना ही बहुत कुछ कहा गया है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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इस संसार में मनुष्य चैन की नींद नहीं सो सकता। कई बार पलकों तक आई नींद भी गायब हो जाती है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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चेहरे को चेहरा कहने की अपेक्षा उसे अनंत सौंदर्य का दर्शन कहना सत्य के अधिक निकट होगा।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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एक ज़िंदगी किनारे की भी होती है, जो बह जाने वाले को भीगी आँखों से देखती है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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अनिर्वचनीय है वह तो अखंड है। कहे जाने पर तो वह गल जाएगा।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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एक स्त्री पूज्य होने के बजाय स्वतंत्र रहना ज़्यादा पसंद करती है, लेकिन उसे यह कौन पूछेगा?
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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स्त्रियाँ कभी क्रूरता पर नहीं रोतीं। वे दूसरों के दिए दर्द पर नहीं रोतीं। रोने के लिए उनका अपना दर्द ही काफ़ी होता है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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पूर्वकल्पित धारणाओं से किसी को समझना सही नहीं है। सच्ची पहचान उसके आचरण से ही मिल सकती है। लेकिन व्यवहार प्रासंगिक है। क्या यह व्यक्तित्व के सुसंगत पहलुओं का परिचय दे सकता है? अन्यथा व्यवहार भी भ्रामक है। धारणा भी भ्रामक है। अनुभव भी भ्रामक है… तो सच क्या है? लेकिन सत्य भी धारणा ही है, है ना? बिना धारणा के मैं दौड़ नहीं सकता।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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यदि शंकाओं का उचित समाधान नहीं किया गया तो वे विनाश की ओर अग्रसर करती हैं।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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संबंधित विषय : विनाश
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पहली नज़र को प्रेम मानकर समर्पण कर देना भी पागलपन है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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एक शब्द लिखने के बाद अगले शब्द पर जाने के लिए जगह पार करनी होती है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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जो दिखाई दे वह यथार्थ हो यह ज़रूरी नहीं।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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संबंधित विषय : यथार्थ
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सतर्क रहने की क़ीमत चुकानी पड़ती है—यहाँ तक कि बेहूदगी और निराशा की स्थिति में भी।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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‘यह’ और ‘वह’ एक ही हैं। जो कुछ भी विविध है, वह उसी का रूपांतरण है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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संबंधित विषय : विविध
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भविष्य कभी भी किसी के लिए पारदर्शी नहीं होता। उसे हमारी ज़िद से कोई सहानुभूति नहीं है। कहने का मतलब यह नहीं है कि यह अनुचित है, लेकिन यह अकल्पनीय है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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मौन से समृद्ध कुछ नहीं है। मौन में समस्त कोलाहल मोक्ष पा जाते हैं।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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यहाँ सच बोलना सबसे बड़ा अनादर है—आक्रामक प्रवृत्ति है।
अनुवाद : भाग्यश्री वाघेला
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